प्रॉपर्टी डीलर के हत्यारे प्रोफेशनल शूटर्स को लगाया
प्रॉपर्टी कारोबारी महेंद्र गौतम बुद्धा सिटी के रहने वाले थे। उनके पिता श्यामनाथ आरटीओ अफसर थे। महेंद्र ने अपने घर से 2 किमी दूर अरिहंत नगर इलाके में ऑफिस बना रखा है। गुरुवार वह सुबह साढ़े 8 बजे वह ऑफिस जाने के लिए घर से निकले। वह गलियों से होते हुए जा रहे थे। ऑफिस से 150 मीटर पहले ही एक बाइक पर सवार 3 शूटर आए। तीनों के चेहरे कवर थे। बाइक चला रहा शूटर हेलमेट पहने था, बाकी 2 बदमाशों ने गमछे से चेहरा बांध रखा था। सीसीटीवी में दिख रहा है कि महेंद्र फोन पर बात करते हुए बाइक चला रहे थे। इसी बीच महेंद्र की बाइक को शूटरों ने ओवरटेक किया। फिर बमुश्किल 10 फीट की दूरी से चलती बाइक से फायरिंग की। गोली की आवाज सुनकर आसपास के लोग दौड़े, लेकिन शूटर पिस्टल लहराते हुए मौके से भाग गए। वो कॉलोनी से रिंग रोड की तरफ निकल गए। मौके पर पहुंची सारनाथ पुलिस महेंद्र गौतम को मलदहिया स्थित प्राइवेट अस्पताल ले गई। वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया- सुबह 9 बजे महेंद्र बाइक से मोबाइल पर बात करते हुए जा रहे थे। स्पीड ब्रेकर के चलते बाइक की स्पीड धीमी की। इसी बीच, वारदात हुई। सभी शूटर्स के चेहरे कवर थे। कई गैंग और माफियाओं के साथ जुड़ा था गाजीपुर का बनारसी गाजीपुर के करंडा इलाके का निवासी बनारसी यादव पूर्वांचल के बड़े और शातिर शूटरों में गिना जाता था। सामान्य कद काठी का बनारसी आपराधिक इतिहास में लंबे समय तक रहस्य बना रहा। सुपारी लेकर हत्याएं करने वाले इस शूटर को पुलिस नाम से तो जानती थी, लेकिन उसका चेहरा और तस्वीर किसी के पास नहीं थी। यही वजह रही कि कई घटनाओं को अंजाम देने के बाद भी बनारसी वर्षों तक कानून की पकड़ से दूर रहा। सारनाथ में कॉलोनाइजर महेंद्र की हत्या के बाद जब बनारसी यादव का नाम सामने आया, तब पुलिस को उसकी मौजूदगी का ठोस सुराग मिला। बनारसी यादव कभी मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करता था और न ही एक जगह टिककर रहता था। ठिकाने बदलते रहना और संपर्क के पारंपरिक तरीकों से दूरी बनाए रखना उसकी पहचान थी। बनारसी पूर्वांचल के कई माफियाओं के इशारे पर सुपारी किलिंग को अंजाम दे चुका था। बदमाशों ने कैसे हत्या की, 2 तस्वीरें में देखिए…
महेंद्र इकलौते बेटे थे, पिता जेल गए थे
महेंद्र के पिता श्यामनाथ गौतम आय से अधिक संपत्ति के मामले में जेल गए थे। इसके बाद विभाग ने उन्हें सस्पेंड कर दिया था। बाद में कोर्ट के आदेश पर उनकी बहाली हुई थी। सोनभद्र RTO से रिटायर हुए थे। महेंद्र उनके इकलौते बेटे थे। घर में पत्नी और एक 10 साल का बेटा अरिहंत है। महेंद्र अपने बेटे के नाम पर रिंग रोड के करीब कॉलोनी बसा रहे थे। पहले फेज में 127 मकानों की रजिस्ट्री भी हो चुकी है। सेकेंड फेज की प्लॉटिंग चल रही थी। महेंद्र की बहन की कुछ साल पहले हादसे में मौत हो चुकी है।