बस्ती में तैनात एसएसआई अजय गोंड की मौत का राज गहराता जा रहा है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में पूरे चेहरे पर चोट के निशान मिले हैं। नाक और दोनों कानों पर भी चोट के निशान हैं। इसके अलावा पेट में थोड़ा पानी मिला है। लेकिन, मौत का सही कारण सामने नहीं आ पाया है। इसके लिए विसरा जांच के लिए भेजा गया है। साथ ही, सीने की हड्डी और मस्तिष्क (ब्रेन) का एक हिस्सा भी जांच के लिए भेजा गया है। पुलिस ने दरोगा की सीडीआर निकलवाई है। इसके मुताबिक, उनकी आखिरी बार पत्नी रंजीता और थाने के ही एक पैरोकार नीरज से बात हुई थी। वहीं, सीसीटीवी फुटेज में दरोगा अजय अकेले ही अयोध्या की तरफ जाते दिखे। लेकिन, उनकी बाइक और लाश मिलने के बीच की करीब 60 किमी दूरी ने गुत्थी को उलझा दिया है। बाइक बस्ती कैसे आई, पुलिस इस सवाल का जवाब तलाश रही है। दरअसल, दरोगा अजय गोंड 5 फरवरी से लापता थे। पत्नी और परिवार के लोगों ने इसे प्लांड मर्डर बताया है, लेकिन हत्या का आरोप किसी पर नहीं लगाया है। वहीं, पुलिस पर भी लापरवाही के आरोप हैं। परिवार का कहना है कि गुमशुदगी दर्ज कराने के तत्काल बाद पुलिस एक्शन लेती, तो शायद अजय जिंदा होते। दरोगा की मौत मामले में पुलिस की इंवेस्टिगेशन कहां तक पहुंची, परिवार वालों के क्या आरोप हैं…पढ़िए पहले जानिए पूरा मामला बस्ती जिले के परशुरामपुर थाने में तैनात दरोगा अजय कुमार गोंड का शव 8 फरवरी को अयोध्या की सरयू नदी में मिला था। अजय पत्नी और 2 बच्चों के साथ बस्ती में रहते थे। ड्यूटी के दौरान 5 फरवरी की शाम थाने से निकले थे। इसके बाद से उनका कुछ पता नहीं चला। लापता होने के अगले दिन 6 फरवरी को दरोगा की बाइक बस्ती के कुआनो नदी के पास मिली थी। दरोगा अजय आखिरी बार एक सीसीटीवी फुटेज में सफाईकर्मी के साथ बाइक पर जाते हुए दिखे थे। दरोगा की पत्नी रंजीता गोंड ने बताया- अजय 5 फरवरी को सुबह चाय-नाश्ता करके थाने के लिए निकले थे। परशुरामपुर थानाध्यक्ष विश्व मोहन राय के अवकाश पर जाने के बाद पति के पास ही थाने का प्रभार था। उन्होंने दोपहर साढ़े 3 बजे मुझसे बात की थी। थाने के सिपाहियों के मुताबिक, शाम करीब 5 बजे दरोगा अजय थाने में तैनात सफाईकर्मी के साथ बाइक से कहीं निकले थे। थाने से बाहर जाते हुए उनका एक वीडियो भी सामने आया है। रंजीता ने बताया कि रात 8 से 9 बजे के बीच उन्होंने कॉल किया, लेकिन फोन बंद मिला था। सर्च अभियान बंद होने के करीब 3 घंटे बाद शाम 7 बजे सूचना मिली कि अयोध्या के दर्शननगर चौकी क्षेत्र अंतर्गत तिघुरा माझा गांव में सरयू नदी में एक शव देखा गया है। ग्रामीणों की सूचना पर अयोध्या पुलिस मौके पर पहुंची। शव की पहचान दरोगा अजय गोंड के रूप में हुई। पढ़िए अब तक की इंवेस्टिगेशन दरोगा जिस रास्ते से गए, उसके सीसीटीवी निकलवाने में जुटी पुलिस
पुलिस ने दरोगा अजय की सीडीआर निकलवाई। इससे पुष्टि हुई कि अजय गोंड ने अपनी पत्नी और उसके बाद थाना परशुरामपुर के पैरोकार नीरज से अंतिम बार फोन पर बात की थी। जिस स्थान पर उनका शव मिला, उससे 5 किलोमीटर पहले तक के सीसीटीवी फुटेज पुलिस को मिले हैं। पुलिस उसके आगे के सभी फुटेज जोड़कर दरोगा के आने-जाने की कड़ी जोड़ रही है। इसके अलावा पोर्स्टमॉर्टम रिपोर्ट में मिले चोट के निशान से पुलिस अब इसे हत्या के एंगल से भी देख रही है। बेटे ने कहा था- पढ़ाई में मन नहीं लग रहा
दरोगा के जीजा विजय कुमार ने बताया- कानपुर में पढ़ रहे बड़े बेटे अमित की 90 हजार फीस पत्नी रंजीता के खाते से कटती थी। कुछ दिनों में ये पैसे जमा होने थे। लेकिन, इसी बीच बेटे ने मां से कहा था कि यहां पढ़ाई में मन नहीं लग रहा। फीस न जमा करें। लेकिन, रंजीता पति से एक लाख रुपए ले चुकी थीं। बेटे के कहने पर खाते से पैसे कटने से पहले ही उन्होंने पैसे वापस पति के खाते में भेज दिए थे। सिर्फ 10 हजार रुपए अपने पास रोक लिए थे। बहन की शादी में खर्च को लेकर परिवार में झगड़ा हुआ था
बताया जाता है कि दरोगा की टीचर बहन की शादी भी तय थी। बहन की शादी में पैसा सभी भाई मिलकर लगा रहे थे। लेकिन, दरोगा अजय अपने खर्च को देखते हुए पैसे कम पैसे देने की बात कह रहे थे। इस बात पर भी परिवार में झगड़ा हो रहा था। पत्नी बोलीं- कुआनो नदी किनारे बाइक कैसे आई
रंजीता गोंड की पुलिस को दी शिकायत के मुताबिक, 6 फरवरी को जब थाने में फोन किया, तो उनकी बात एक सिपाही से हुई। उसने बताया कि अजय साहब कल शाम से लापता हैं। इसके बाद रंजीता ने यह बात अपने घरवालों को बताई। हर जगह पता किया, लेकिन उनका कहीं कोई पता नहीं चला। इसके बाद 6 फरवरी को दरोगा अजय की बाइक थाने से 60 किमी दूर कुआनो नदी के अमहट घाट पर मिली। उनके पर्सनल मोबाइल और सीयूजी नंबर की आखिरी लोकेशन भी यहीं की थी। रंजीता ने यह भी बताया कि अजय को पहले दुबौलिया थाने में तैनाती के दौरान एक नाबालिग बच्चे की मौत के मामले में धमकियां मिली थीं। पत्नी ने इस पहलू से भी मामले की जांच की मांग की है। अब पढ़िए पत्नी रंजीता गोंड ने क्या कहा… मेरे पति एसएसआई अजय कुमार गोंड परशुरामपुर थाने में तैनात थे। 5 फरवरी की शाम करीब 4 से 5 बजे के बीच लापता हो गए। अमहट घाट पर जो उनकी बाइक मिली, वह पुलिस को गुमराह करने के लिए वहां रखी गई। मुझे आशंका है कि मेरे पति को बंधक बनाया गया था। वह थाना क्षेत्र या उसके आसपास ही थे, क्योंकि वह कहीं और नहीं गए थे। इसी इलाके में उनके साथ किसी भरोसेमंद व्यक्ति ने धोखा किया है। सबसे दुखद बात यह है कि उनके लापता होने की जानकारी मुझे थाने की ओर से नहीं दी गई। अगले दिन सुबह 9 से 10 बजे जब मैंने उन्हें रोज की तरह फोन किया, तब मुझे पता चला कि वह तो पिछली शाम से ही गायब हैं। जब मैंने थाने के कर्मचारियों से पूछा कि उनकी लोकेशन या कॉल डिटेल क्यों नहीं निकाली गई, तो कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। तीन दिन चला सर्च, कुआनो में नहीं मिला सुराग
6 फरवरी को दरोगा अजय की बाइक मिलने के बाद पुलिस को उनके डूबने की आशंका थी। इसको देखते हुए पुलिस ने SDRF गोरखपुर की टीम के साथ कुआनो नदी में लगातार 3 दिन तक सर्च अभियान चलाया। अमहट घाट से भद्रेश्वरनाथ तक करीब 2 किमी क्षेत्र में मोटर बोट से 8 राउंड सर्च किया गया, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद 8 फरवरी की शाम करीब 4 बजे अभियान रोक दिया गया था। 3 घंटे बाद आई अयोध्या से खबर
सर्च अभियान बंद होने के करीब 3 घंटे बाद शाम 7 बजे सूचना मिली कि अयोध्या के दर्शननगर चौकी क्षेत्र अंतर्गत तिघुरा माझा गांव में सरयू नदी में एक शव देखा गया है। ग्रामीणों की सूचना पर अयोध्या पुलिस मौके पर पहुंची। शव की पहचान दरोगा अजय गोंड के रूप में हुई। अब पढ़िए दरोगा के छोटे भाई ADM अरुण कुमार ने जो बताया
मैं एसडीएम रह चुका हूं और वर्तमान में एडीएम हूं। इसके बावजूद मुझे कोई सहयोग नहीं मिला। मेरी मांग है कि पूरे थाने को सस्पेंड किया जाए। 4 लोगों के खिलाफ हत्या (धारा- 302) का मुकदमा दर्ज हो और हर्रैया के सीओ के खिलाफ कार्रवाई की जाए। सीओ ने मुझसे जिस तरह से बात की और मेरे भाई को जिस तरह से फंसाने की कोशिश की, उसे मैं बर्दाश्त नहीं करूंगा। यह आत्महत्या नहीं, प्लांड मर्डर है। जरूरत पड़ी तो मुख्यमंत्री तक जाऊंगा, यह बात नोट कर लीजिए। मुझे कप्तान से बात नहीं करनी। जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, मैं यहां से नहीं जाऊंगा। मेरा भाई मरा है, आपका नहीं। मुझे दर्द है, बहुत दर्द है। दरोगा के पिता बोले- किडनैपिंग के बाद हत्या हुई
दरोगा अजय गोंड के पिता रामचंद्र प्रसाद ने बताया कि यह घटना 5 तारीख को शाम 6 बजे हुई थी। हमें इसकी जानकारी बहू रंजीता ने 6 तारीख को सुबह 10 बजे दी। अब तक यह साफ नहीं है कि पुलिस क्या कार्रवाई कर रही? हमे आशंका है कि वह परशुरामपुर थाने से अकेले बाइक पर अपने घर आ रहे थे। इसके कुछ दूर पहले उनकी किडनैपिंग हो गई और फिर हत्या की गई। पुलिस विभाग, सीओ और एसपी सभी इस मामले में लगातार संपर्क में थे। परिवार में छोटे भाई एडीएम, बड़े सुपरवाइजर
देवरिया के मूड़ाडीह गांव के रहने वाले अजय गोंड 2016 बैच के दरोगा थे। उनकी शादी 2006 में रंजीता के साथ हुई थी। उनके 2 बेटे अमित राज और उत्कर्ष राज हैं। बड़ा बेटा कानपुर में पढ़ाई कर रहा, जबकि पत्नी और छोटा बेटा उनके साथ बस्ती के मिश्रौलिया मोहल्ले में किराए के मकान में रहते हैं। अजय के पिता भी रिटायर्ड दरोगा हैं। अजय 4 भाई-बहनों में तीसरे नंबर पर थे। बड़े भाई दिलीप कुमार गोंड स्वास्थ्य विभाग में सुपरवाइजर पद पर कार्यरत हैं। छोटे भाई अरुण कुमार गोंड ADM हैं। उनकी बहन शशि प्रभा सरकारी टीचर हैं। शशिप्रभा की शादी फिक्स हो चुकी थी। परिवार के लोग शादी की तैयारियों में लगे थे। ——————– ये खबर भी पढ़ें कुलदीप सेंगर को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट भेजा, जमानत पर सुनवाई से इनकार किया भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। शीर्ष अदालत ने पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत से जुड़े मामले में जमानत पर सुनवाई से सोमवार को इनकार कर दिया। पूरी खबर पढ़ें
पुलिस ने दरोगा अजय की सीडीआर निकलवाई। इससे पुष्टि हुई कि अजय गोंड ने अपनी पत्नी और उसके बाद थाना परशुरामपुर के पैरोकार नीरज से अंतिम बार फोन पर बात की थी। जिस स्थान पर उनका शव मिला, उससे 5 किलोमीटर पहले तक के सीसीटीवी फुटेज पुलिस को मिले हैं। पुलिस उसके आगे के सभी फुटेज जोड़कर दरोगा के आने-जाने की कड़ी जोड़ रही है। इसके अलावा पोर्स्टमॉर्टम रिपोर्ट में मिले चोट के निशान से पुलिस अब इसे हत्या के एंगल से भी देख रही है। बेटे ने कहा था- पढ़ाई में मन नहीं लग रहा
दरोगा के जीजा विजय कुमार ने बताया- कानपुर में पढ़ रहे बड़े बेटे अमित की 90 हजार फीस पत्नी रंजीता के खाते से कटती थी। कुछ दिनों में ये पैसे जमा होने थे। लेकिन, इसी बीच बेटे ने मां से कहा था कि यहां पढ़ाई में मन नहीं लग रहा। फीस न जमा करें। लेकिन, रंजीता पति से एक लाख रुपए ले चुकी थीं। बेटे के कहने पर खाते से पैसे कटने से पहले ही उन्होंने पैसे वापस पति के खाते में भेज दिए थे। सिर्फ 10 हजार रुपए अपने पास रोक लिए थे। बहन की शादी में खर्च को लेकर परिवार में झगड़ा हुआ था
बताया जाता है कि दरोगा की टीचर बहन की शादी भी तय थी। बहन की शादी में पैसा सभी भाई मिलकर लगा रहे थे। लेकिन, दरोगा अजय अपने खर्च को देखते हुए पैसे कम पैसे देने की बात कह रहे थे। इस बात पर भी परिवार में झगड़ा हो रहा था। पत्नी बोलीं- कुआनो नदी किनारे बाइक कैसे आई
रंजीता गोंड की पुलिस को दी शिकायत के मुताबिक, 6 फरवरी को जब थाने में फोन किया, तो उनकी बात एक सिपाही से हुई। उसने बताया कि अजय साहब कल शाम से लापता हैं। इसके बाद रंजीता ने यह बात अपने घरवालों को बताई। हर जगह पता किया, लेकिन उनका कहीं कोई पता नहीं चला। इसके बाद 6 फरवरी को दरोगा अजय की बाइक थाने से 60 किमी दूर कुआनो नदी के अमहट घाट पर मिली। उनके पर्सनल मोबाइल और सीयूजी नंबर की आखिरी लोकेशन भी यहीं की थी। रंजीता ने यह भी बताया कि अजय को पहले दुबौलिया थाने में तैनाती के दौरान एक नाबालिग बच्चे की मौत के मामले में धमकियां मिली थीं। पत्नी ने इस पहलू से भी मामले की जांच की मांग की है। अब पढ़िए पत्नी रंजीता गोंड ने क्या कहा… मेरे पति एसएसआई अजय कुमार गोंड परशुरामपुर थाने में तैनात थे। 5 फरवरी की शाम करीब 4 से 5 बजे के बीच लापता हो गए। अमहट घाट पर जो उनकी बाइक मिली, वह पुलिस को गुमराह करने के लिए वहां रखी गई। मुझे आशंका है कि मेरे पति को बंधक बनाया गया था। वह थाना क्षेत्र या उसके आसपास ही थे, क्योंकि वह कहीं और नहीं गए थे। इसी इलाके में उनके साथ किसी भरोसेमंद व्यक्ति ने धोखा किया है। सबसे दुखद बात यह है कि उनके लापता होने की जानकारी मुझे थाने की ओर से नहीं दी गई। अगले दिन सुबह 9 से 10 बजे जब मैंने उन्हें रोज की तरह फोन किया, तब मुझे पता चला कि वह तो पिछली शाम से ही गायब हैं। जब मैंने थाने के कर्मचारियों से पूछा कि उनकी लोकेशन या कॉल डिटेल क्यों नहीं निकाली गई, तो कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। तीन दिन चला सर्च, कुआनो में नहीं मिला सुराग
6 फरवरी को दरोगा अजय की बाइक मिलने के बाद पुलिस को उनके डूबने की आशंका थी। इसको देखते हुए पुलिस ने SDRF गोरखपुर की टीम के साथ कुआनो नदी में लगातार 3 दिन तक सर्च अभियान चलाया। अमहट घाट से भद्रेश्वरनाथ तक करीब 2 किमी क्षेत्र में मोटर बोट से 8 राउंड सर्च किया गया, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद 8 फरवरी की शाम करीब 4 बजे अभियान रोक दिया गया था। 3 घंटे बाद आई अयोध्या से खबर
सर्च अभियान बंद होने के करीब 3 घंटे बाद शाम 7 बजे सूचना मिली कि अयोध्या के दर्शननगर चौकी क्षेत्र अंतर्गत तिघुरा माझा गांव में सरयू नदी में एक शव देखा गया है। ग्रामीणों की सूचना पर अयोध्या पुलिस मौके पर पहुंची। शव की पहचान दरोगा अजय गोंड के रूप में हुई। अब पढ़िए दरोगा के छोटे भाई ADM अरुण कुमार ने जो बताया
मैं एसडीएम रह चुका हूं और वर्तमान में एडीएम हूं। इसके बावजूद मुझे कोई सहयोग नहीं मिला। मेरी मांग है कि पूरे थाने को सस्पेंड किया जाए। 4 लोगों के खिलाफ हत्या (धारा- 302) का मुकदमा दर्ज हो और हर्रैया के सीओ के खिलाफ कार्रवाई की जाए। सीओ ने मुझसे जिस तरह से बात की और मेरे भाई को जिस तरह से फंसाने की कोशिश की, उसे मैं बर्दाश्त नहीं करूंगा। यह आत्महत्या नहीं, प्लांड मर्डर है। जरूरत पड़ी तो मुख्यमंत्री तक जाऊंगा, यह बात नोट कर लीजिए। मुझे कप्तान से बात नहीं करनी। जब तक मांगें पूरी नहीं होंगी, मैं यहां से नहीं जाऊंगा। मेरा भाई मरा है, आपका नहीं। मुझे दर्द है, बहुत दर्द है। दरोगा के पिता बोले- किडनैपिंग के बाद हत्या हुई
दरोगा अजय गोंड के पिता रामचंद्र प्रसाद ने बताया कि यह घटना 5 तारीख को शाम 6 बजे हुई थी। हमें इसकी जानकारी बहू रंजीता ने 6 तारीख को सुबह 10 बजे दी। अब तक यह साफ नहीं है कि पुलिस क्या कार्रवाई कर रही? हमे आशंका है कि वह परशुरामपुर थाने से अकेले बाइक पर अपने घर आ रहे थे। इसके कुछ दूर पहले उनकी किडनैपिंग हो गई और फिर हत्या की गई। पुलिस विभाग, सीओ और एसपी सभी इस मामले में लगातार संपर्क में थे। परिवार में छोटे भाई एडीएम, बड़े सुपरवाइजर
देवरिया के मूड़ाडीह गांव के रहने वाले अजय गोंड 2016 बैच के दरोगा थे। उनकी शादी 2006 में रंजीता के साथ हुई थी। उनके 2 बेटे अमित राज और उत्कर्ष राज हैं। बड़ा बेटा कानपुर में पढ़ाई कर रहा, जबकि पत्नी और छोटा बेटा उनके साथ बस्ती के मिश्रौलिया मोहल्ले में किराए के मकान में रहते हैं। अजय के पिता भी रिटायर्ड दरोगा हैं। अजय 4 भाई-बहनों में तीसरे नंबर पर थे। बड़े भाई दिलीप कुमार गोंड स्वास्थ्य विभाग में सुपरवाइजर पद पर कार्यरत हैं। छोटे भाई अरुण कुमार गोंड ADM हैं। उनकी बहन शशि प्रभा सरकारी टीचर हैं। शशिप्रभा की शादी फिक्स हो चुकी थी। परिवार के लोग शादी की तैयारियों में लगे थे। ——————– ये खबर भी पढ़ें कुलदीप सेंगर को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट भेजा, जमानत पर सुनवाई से इनकार किया भाजपा के पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली है। शीर्ष अदालत ने पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत से जुड़े मामले में जमानत पर सुनवाई से सोमवार को इनकार कर दिया। पूरी खबर पढ़ें