उत्तर प्रदेश में तापमान में हल्की मगर लगातार बढ़ोतरी का सिलसिला जारी है। दिन चढ़ने के साथ तेज धूप अब सर्दी की विदाई का संकेत देने लगी है। दोपहर में तपिश साफ महसूस हो रही है, हालांकि सुबह और देर शाम हल्की ठंड अभी कायम है। मौसम विभाग के मुताबिक 17 फरवरी के आसपास पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक हल्का पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है, जिसके प्रभाव से कुछ स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी की संभावना है। सबसे गर्म रहा बांदा
गुरुवार को लगातार तीसरे दिन बांदा प्रदेश का सबसे गर्म शहर दर्ज किया गया। यहां अधिकतम तापमान 31.2°C रहा। प्रयागराज में 30.4°C और वाराणसी में 29.9°C तापमान दर्ज किया गया। 2 तस्वीरें देखिए.. अब जानिए कैसा रहेगा मौसम
मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो दिनों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान में लगभग दो डिग्री सेल्सियस तक की क्रमिक वृद्धि की संभावना है। इससे दिन की गर्मी और बढ़ेगी, जबकि रात के तापमान में भी हल्की बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि फिलहाल प्रदेश पर किसी बड़े मौसमी तंत्र या सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव नहीं है, जिसके कारण मौसम साफ और शुष्क बना हुआ है। उन्होंने कहा कि अगले तीन से चार दिनों तक यही स्थिति बनी रहेगी। सरसों, आलू, मटर की फसलों को नुकसान का खतरा
कड़ाके की ठंड के बीच ओले और बरसात का असर रबी की फसलों पर दिखाई दे रहा है। गेहूं की फसल के लिए यह मौसम अच्छा है। सरसों, आलू, मटर की फसलों पर बीमारियों का खतरा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि कीट और रोग का प्रकोप होने पर तुरंत इलाज करें। दवा का छिड़काव तभी करें, जब मौसम साफ हो। फरवरी के अंत तक ठंड का असर खत्म होगा
फरवरी महीने में तापमान धीरे-धीरे बढ़ने लगा है। वसंत आने के साथ ठंड का असर भी कम होने लगता है। मौसम वैज्ञानिक महेश पलावत के मुताबिक, फरवरी में तापमान 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। लेकिन, यह राहत ज्यादा समय तक टिकने वाली नहीं। बीच-बीच में पश्चिमी विक्षोभ की वजह से तापमान में कुछ समय के लिए गिरावट भी देखने को मिल सकती है। इसके बावजूद फरवरी के अंत तक यूपी से ठंड पूरी तरह विदा हो जाएगी। खेती-किसानी के लिए कैसा रहेगा फरवरी
बीएचयू के कृषि विभाग के वैज्ञानिक प्रो. पीके सिंह के मुताबिक, गेहूं की फसल के लिए फरवरी का मौसम सामान्य रूप से अनुकूल माना जा रहा। हालांकि, दलहनी फसलों के लिए मौसम अनुकूल नहीं है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से बारिश और ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है। पीके सिंह कहते हैं- बारिश और ओलावृष्टि होने पर गेहूं की बढ़वार प्रभावित हो सकती है। जबकि, दलहनी और अन्य फसलों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहेगा। वहीं, बारिश के बाद अगर पाला पड़ता है, तो इसका असर खासतौर पर आलू और मटर की फसलों पर पड़ सकता है। इससे किसानों को नुकसान झेलना पड़ सकता है।
गुरुवार को लगातार तीसरे दिन बांदा प्रदेश का सबसे गर्म शहर दर्ज किया गया। यहां अधिकतम तापमान 31.2°C रहा। प्रयागराज में 30.4°C और वाराणसी में 29.9°C तापमान दर्ज किया गया। 2 तस्वीरें देखिए.. अब जानिए कैसा रहेगा मौसम
मौसम विभाग का कहना है कि अगले दो दिनों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान में लगभग दो डिग्री सेल्सियस तक की क्रमिक वृद्धि की संभावना है। इससे दिन की गर्मी और बढ़ेगी, जबकि रात के तापमान में भी हल्की बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी। आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र, लखनऊ के वरिष्ठ वैज्ञानिक अतुल कुमार सिंह ने बताया कि फिलहाल प्रदेश पर किसी बड़े मौसमी तंत्र या सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव नहीं है, जिसके कारण मौसम साफ और शुष्क बना हुआ है। उन्होंने कहा कि अगले तीन से चार दिनों तक यही स्थिति बनी रहेगी। सरसों, आलू, मटर की फसलों को नुकसान का खतरा
कड़ाके की ठंड के बीच ओले और बरसात का असर रबी की फसलों पर दिखाई दे रहा है। गेहूं की फसल के लिए यह मौसम अच्छा है। सरसों, आलू, मटर की फसलों पर बीमारियों का खतरा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि कीट और रोग का प्रकोप होने पर तुरंत इलाज करें। दवा का छिड़काव तभी करें, जब मौसम साफ हो। फरवरी के अंत तक ठंड का असर खत्म होगा
फरवरी महीने में तापमान धीरे-धीरे बढ़ने लगा है। वसंत आने के साथ ठंड का असर भी कम होने लगता है। मौसम वैज्ञानिक महेश पलावत के मुताबिक, फरवरी में तापमान 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। लेकिन, यह राहत ज्यादा समय तक टिकने वाली नहीं। बीच-बीच में पश्चिमी विक्षोभ की वजह से तापमान में कुछ समय के लिए गिरावट भी देखने को मिल सकती है। इसके बावजूद फरवरी के अंत तक यूपी से ठंड पूरी तरह विदा हो जाएगी। खेती-किसानी के लिए कैसा रहेगा फरवरी
बीएचयू के कृषि विभाग के वैज्ञानिक प्रो. पीके सिंह के मुताबिक, गेहूं की फसल के लिए फरवरी का मौसम सामान्य रूप से अनुकूल माना जा रहा। हालांकि, दलहनी फसलों के लिए मौसम अनुकूल नहीं है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से बारिश और ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है। पीके सिंह कहते हैं- बारिश और ओलावृष्टि होने पर गेहूं की बढ़वार प्रभावित हो सकती है। जबकि, दलहनी और अन्य फसलों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहेगा। वहीं, बारिश के बाद अगर पाला पड़ता है, तो इसका असर खासतौर पर आलू और मटर की फसलों पर पड़ सकता है। इससे किसानों को नुकसान झेलना पड़ सकता है।