कानपुर लेम्बोर्गिनी कांड-अरबपति का बेटा 7 घंटे में छूटा:रिमांड की वजह नहीं बता पाई पुलिस, घटना के 4 दिन बाद गिरफ्तार किया था

कानपुर में तेज रफ्तार लेम्बोर्गिनी से 6 लोगों को टक्कर मारने वाले अरबपति कारोबारी का बेटा 7 घंटे में ही रिहा हो गया। आरोपी के वकील अनंत शर्मा ने बताया- पुलिस ने कोर्ट में 14 दिन की रिमांड मांगी थी। जज ने पूछा कि रिमांड क्यों चाहिए, जबकि सारी धाराएं जमानती हैं? इस पर इन्वेस्टिगेशन अफसर कोई ठोस जवाब नहीं दे पाए। इसके चलते कोर्ट ने रिमांड की अर्जी खारिज कर दी। फिर 20 हजार रुपए का बेल बॉन्ड भरने के बाद पुलिस ने उसे छोड़ दिया। पुलिस ने शिवम मिश्रा को गुरुवार सुबह 8 बजे घर के सामने से गिरफ्तार किया था। पुलिस ने दावा किया था कि शिवम जांच में सहयोग नहीं कर रहा। गुरुवार को सूचना मिली कि आरोपी एंबुलेंस से भाग रहा है। खुद को छिपाए रखने के आधार पर उसे गिरफ्तार किया। मेडिकल कराने के बाद पुलिस शिवम को ACJM कोर्ट लेकर पहुंची। कोर्ट के बाहर वीडियो बनाने पर शिवम मीडियाकर्मियों पर भड़क गया। इशारों में कहा- वीडियो क्यों बना रहे हो? पेशी के दौरान शिवम बीमार नजर आया। उसके हाथ में वीगो लगी थी। पुलिसवाले और रिश्तेदार उसे सहारा देते नजर आए। जेल से छूटने और गिरफ्तारी की तस्वीरें तंबाकू कारोबारी ने बेटे को बचाने की कई कोशिशें कीं
तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा ने अपने इकलौते बेटे शिवम को बचाने की तमाम कोशिशें कीं, लेकिन नाकाम रहे। केके मिश्रा ने 8 फरवरी को हादसे के तुरंत बाद पहले बेटे को घटनास्थल से हटवाया। फिर मीडिया से बातचीत में दावा किया कि मेरा बेटा गाड़ी नहीं चला रहा था। यही नहीं, मामले ने जब तूल पकड़ा तो सीएम योगी ने अफसरों को कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद कानपुर पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल सामने आए। कहा कि गाड़ी कारोबारी का बेटा शिवम ही चला रहा था। जांच में इसकी पुष्टि हुई। कमिश्नर के इस बयान पर केके मिश्रा भड़क गए थे। कहा था कि कानपुर कमिश्नर झूठ बोल रहे। फिर बुधवार (11 फरवरी) को कानपुर कोर्ट में मोहन नाम का शख्स सरेंडर करने पहुंचा। उसने दावा किया कि हादसे के वक्त लेम्बोर्गिनी कार वह खुद चला रहा था। हालांकि, कोर्ट ने ड्राइवर मोहन की अर्जी खारिज कर दी। उसे लेम्बोर्गिनी केस में आरोपी नहीं माना। 5 पॉइंट में अब तक का पूरा मामला पढ़िए… 1- हादसे के बाद पुलिस ने अज्ञात के नाम दर्ज की FIR
कानपुर में वीआईपी रोड इलाके पर 8 फरवरी को करीब 14 करोड़ की लेम्बोर्गिनी ने 6 लोगों को टक्कर मार दी थी। कार आर्यनगर में रहने वाले कारोबारी केके मिश्रा का बेटा शिवम चला रहा था। हादसे के बाद पुलिस कार को थाने ले आई। कवर से ढक दिया था। पहले तो पुलिस ने FIR दर्ज नहीं की। मामला सुर्खियों में आया तो 6 घंटे बाद रात 8:30 बजे कार नंबर के आधार पर अज्ञात ड्राइवर के खिलाफ FIR दर्ज की। बाद में अखिलेश यादव ने ट्वीट कर इस मामले को तूल दिया। फिर सीएम योगी ने कार्रवाई के आदेश दिए। तब पुलिस ने 24 घंटे बाद शिवम का नाम FIR में जोड़ा। 2- कारोबारी ने कहा था- कार बेटा नहीं, ड्राइवर चला रहा था
10 फरवरी को कारोबारी केके मिश्रा ग्वालटोली थाने पहुंचे थे। दावा किया था कि हादसे के वक्त बेटा शिवम नहीं, ड्राइवर मोहन कार चला रहा था। शिवम उस वक्त सो रहा था। हादसे के बाद कार लॉक हो गई थी, जिससे बेटे की तबीयत बिगड़ गई थी। 3- FIR कराने वाले से समझौते की खबर आई, पुलिस ने नकारा
11 फरवरी को इस केस में बड़ा यू-टर्न हुआ था। हादसे में घायल और FIR कराने वाले मो. तौसीफ ने ड्राइवर के साथ समझौता कर लिया था। कारोबारी के वकील धर्मेंद्र सिंह ने कोर्ट में जो समझौतानामा पेश किया था, उसमें तौसीफ की ओर से कहा गया कि इलाज का खर्च दे दिया गया है। वह पूरी तरह संतुष्ट है और कोई कार्रवाई नहीं चाहता। पीड़ित ने यह भी दावा किया था कि हादसे के वक्त गाड़ी मोहन ही चला रहा था। हालांकि, DCP अतुल कुमार ने इस बात से इनकार किया था। उन्होंने कहा था कि पुलिस को किसी तरह का कोई समझौतानामा नहीं मिला। 4- ड्राइवर बनकर युवक कोर्ट पहुंचा, बोला- कार मैं चला रहा था
11 फरवरी की ही दोपहर तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा की ओर से ड्राइवर मोहन अचानक कानपुर कोर्ट पहुंचा और सरेंडर कर दिया। मोहन ने कहा कि शिवम मिश्रा की गाड़ी वही चला रहा था। शिवम को दौरा पड़ गया था। तभी हादसा हो गया। जब शीशा तोड़ा गया और दरवाजा खोला गया, तो कार से निकल गया था। 5- कोर्ट ने ड्राइवर की याचिका खारिज की, आरोपी नहीं माना
हालांकि, कोर्ट ने ड्राइवर की अर्जी खारिज कर दी। उसे आरोपी नहीं माना। कोर्ट ने कहा- पुलिस रिपोर्ट में आरोपी शिवम है, मोहन का कहीं नाम नहीं है। कोर्ट में जब मोहन से मीडिया ने पूछा कि इस कार में कितने गियर होते हैं, तो उसने बताया कि 9 गियर होते हैं। जबकि एक्सपर्ट से बात करने पर सामने आया कि कार में 7 गियर और एक बैक गियर, यानी कुल 8 गियर होते हैं। कारोबारी की कंपनी पर 2 साल पहले पड़ा था छापा तंबाकू कारोबारी केके मिश्रा की बंशीधर एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम से कंपनी है। यह कंपनी कानपुर की टॉप गुटखा कंपनियों को तंबाकू सप्लाई करती है। करीब 2 साल पहले 28 फरवरी को कंपनी के हेड ऑफिस पर आयकर विभाग का छापा पड़ा था। तब केके मिश्रा की दिल्ली स्थित कोठी से 100 करोड़ से ज्यादा की कारें मिली थीं। इनमें 60 करोड़ से ज्यादा कीमत की लग्जरी कारें शामिल थीं। 16 करोड़ की रोल्स-रॉयस फैंटम कार, लेम्बोर्गिनी, फरारी, मॅकलारेन कारें थीं। तब छापेमारी में 100 करोड़ से ज्यादा की टैक्स चोरी सामने आई थी। दरअसल, शिवम मिश्रा भी लग्जरी कारों का शौकीन है। उसके पास कई कारें हैं। शिवम ने अपने बेटे के बर्थडे सेलिब्रेशन में बॉलीवुड के कई अभिनेताओं को बुलाया था। पार्टी में करोड़ों रुपए खर्च किए थे। इसके बाद ही वह इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के रडार पर आ गया था। लेम्बोर्गिनी केस से जुड़े पल-पल के अपडेट्स के लिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए-