सोना महंगा-वजन हल्का, बढ़ते दामों ने बदली खरीदारी की आदतें:पुराना जेवर बदलाकर चला रहे काम; व्यापारी बोले- अप्रैल से बढ़ेगा कारोबार

सोने-चांदी के दामों में जारी उतार-चढ़ाव का असर अब सीधे सर्राफा बाजार पर दिखाई देने लगा है। रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचते दामों ने न सिर्फ कस्टमर का बजट बदला, पसंद भी बदल गई। जहां पहले भारी और पारंपरिक गहनों की मांग रहती थी, वहीं अब ग्राहक हल्के डिजाइन और कम वजन की ज्वेलरी को तरजीह दे रहे। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सोना अभी भी निवेश के लिहाज से सुरक्षित माना जाता है। लेकिन, मौजूदा ऊंचे स्तर पर एकमुश्त निवेश जोखिम भरा साबित हो सकता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या बढ़ती महंगाई और महंगे सोने के बीच सर्राफा बाजार की रौनक पहले जैसी बनी है? पिछले साल की तुलना में बिक्री में कितना बदलाव आया है? क्या दाम बढ़ने के बाद ग्राहक कम मात्रा में सोना खरीदने को मजबूर हैं? पढ़िए इस खबर में… क्या त्योहारी सीजन में सर्राफा बाजार की रौनक पहले जैसी है? इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के उत्तर भारत के प्रमुख और यूपी प्रदेश अध्यक्ष अनुराग रस्तोगी कहते हैं- इस बार सोने की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं। इसी वजह से ग्राहक भारी और बड़े आभूषण खरीदने से बच रहे। उनके मुताबिक, सोने की मांग में 25 से 28 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। अभी बाजार में 5 से 10 प्रतिशत तक ही खरीदारी देखने को मिल रही। अधिकतर ग्राहक पुराने सोने को रि-साइकल कराकर काम चला रहे हैं। उन्होंने बताया कि भले ही सीजन चल रहा हो, लेकिन बाजार में वही लोग आ रहे जिनकी वास्तविक मजबूरी है। पिछले 15-20 दिनों तक बाजार लगभग पूरी तरह ठप रहा। वहीं, चांदी को लेकर भी कीमतों के उतार-चढ़ाव के कारण लोगों में डर और अनिश्चितता बनी है। बाजार में बुलियन कारोबारी ही ज्यादा नजर आए। सोने-चांदी के खरीदार बहुत कम रहे और वही लोग सक्रिय दिखे, जो सिर्फ खरीद-बिक्री के लिए आ रहे थे। अनुराग रस्तोगी बताते हैं कि आने वाले समय में सोना-चांदी को लेकर किसी बड़ी मंदी के संकेत नहीं दिख रहे। बाजार में आगे भी यही ट्रेंड बने रहने की संभावना है। कौन होते हैं बुलियन? बुलियन वे लोग या कारोबारी होते हैं, जो सोने-चांदी को गहनों के रूप में नहीं, कच्चे धातु के तौर पर खरीद-बिक्री और निवेश के लिए कारोबार करते हैं। क्या सोने के दाम बढ़ने वाले हैं? ऑल इंडिया ज्वेलरी एंड गोल्ड स्मिथ फेडरेशन के प्रदेश संयोजक विनोद महेश्वरी का कहना है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के पीछे कई कारण हैं। इनमें राजनीतिक हालात, खासकर रूस से जुड़े वैश्विक घटनाक्रम भी एक बड़ा कारण है। इनका असर सर्राफा बाजार पर साफ दिखाई देता है। चांदी को लेकर उनका अनुमान है कि इसके दाम तीन लाख रुपए के दायरे में ही बने रहेंगे। फिलहाल बाजार में स्थिति यह है कि ग्राहक खरीदारी से ज्यादा बुकिंग कर रहे हैं। वहीं, सोने के भाव को लेकर उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इसमें हल्की-फुल्की तेजी देखने को मिल सकती है। करीब 15 प्रतिशत तक उछाल की संभावना जताई जा रही है। लोग खरीदारी कर रहे या पुराने गहने बेचने आ रहे? अनुराग रस्तोगी के मुताबिक, जब से सोने के दाम 40-50 हजार रुपए प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंचे, तब से बाजार में कारोबार का तरीका बदल गया है। अब करीब 80 प्रतिशत ट्रेड ऐसा है, जिसमें लोग नई खरीदारी करने की जगह पुरानी ज्वेलरी बदलकर नई बनवा रहे। आम शब्दों में कहें, तो महंगाई की वजह से लोग सीधे नया सोना खरीदने से बच रहे। पुराने सोने को ही रि-डिजाइन करवा रहे हैं। इससे आम ग्राहकों पर काफी असर पड़ा है। इसके अलावा, ज्यादातर लोग अब कम कैरेट का सोना खरीद रहे। खासकर शहरी ग्राहक, जो पहले भारी गहने लेते थे, अब हल्के-फुल्के (लाइटवेट) और 9 से 14 कैरेट के गहनों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। जिससे बजट में रहकर जरूरत पूरी हो सके। पहले जो ग्राहक 92% शुद्धता (22 कैरेट) वाला सोना लेते थे, वे अब 18 कैरेट में खरीदारी कर रहे। अभी ग्राहक किस तरह के गहने ज्यादा खरीद रहे? गोरखपुर स्थित परंपरा जेम्स एंड ज्वेलर्स के डायरेक्टर संजय अग्रवाल के मुताबिक, बाजार में लाइट वेट ज्वेलरी की मांग तेजी से बढ़ी है। ग्राहकों को अब लाइटवेट, लेकिन हैवी लुक वाली ज्वेलरी ज्यादा पसंद आ रही। कस्टमर अब आते हैं, तो कम वजन में भड़कीला और आकर्षक डिजाइन की मांग करते हैं। गोरखपुर स्थित बरनवाल ज्वेलर्स के डायरेक्टर धीरज बरनवाल के मुताबिक, सर्राफा बाजार में सेल काफी गिर गई है। फिलहाल यह सिर्फ 25 प्रतिशत के आसपास रह गई है। उन्होंने बताया कि ज्यादातर ग्राहक अभी हल्की ज्वेलरी ही पसंद कर रहे। नई खरीदारी कम है, जबकि पुरानी ज्वेलरी को रि-साइकल कराने वालों की संख्या बढ़ी है। बाजार में वही लोग ज्यादा आ रहे, जिनके यहां शादी है। कई ग्राहक पुरानी ज्वेलरी पहनकर ही काम चला रहे हैं। क्या चांदी की तरफ शिफ्ट हो रहे लोग? अनुराग रस्तोगी कहते हैं- जब अचानक चांदी के दाम बढ़े तो लोगों ने शेयर मार्केट यहां तक कि अपनी जमीन-खेत बेचकर पैसे चांदी में लगा दिए। लेकिन, मार्केट एकदम से नीचे आया तो डर गए। आम निवेशक, जो पहले अपना सोना या दूसरी बचत बेचकर चांदी में निवेश कर रहे थे, अब डर के माहौल में आ गए हैं। चांदी के दामों में तेज उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता की वजह से निवेशकों को नुकसान का डर सताने लगा है। इसलिए लोग अभी चांदी की तरफ रुख करने में डर रहे हैं। लखनऊ महानगर सर्राफा एसोसिएशन के अध्यक्ष मनीष कुमार वर्मा के मुताबिक, शादी का सीजन होने की वजह से लोग इस समय खरीदारी कर रहे हैं। बीच में चांदी के दाम तेजी से बढ़ने से ग्राहक खरीद नहीं कर पा रहे थे। लेकिन, अब शादियों के चलते चांदी की मांग बढ़ी है। खासतौर पर लोग अब 95 शुद्धता वाली चांदी ज्यादा पसंद कर रहे हैं। उनके मुताबिक, जब सोने-चांदी के दाम बढ़े थे, तब बेचने वाले भी कम आए। लोगों को उम्मीद थी कि भाव आगे और बढ़ेंगे। फिलहाल बाजार में 18 कैरेट सोने की मांग ज्यादा है। वहीं लखनऊ में 9 कैरेट ज्वेलरी की डिमांड भी देखने को मिल रही। उनका कहना है कि 9 कैरेट ज्वेलरी को लोग यूज-एंड-थ्रो की तरह देखते हैं। यह विदेशों में तो ठीक मानी जाती है, लेकिन भारत में ज्वेलरी को निवेश समझा जाता है। इसी वजह से यहां ग्राहक आमतौर पर 18 से 22 कैरेट सोना ही पसंद करते हैं। युवाओं का रुझान फिजिकल से डिजिटल गोल्ड की तरफ अनुराग रस्तोगी बताते हैं- मार्केट में तो यंगस्टर सिर्फ सोने के भाव पता करने आते हैं। फिजिकल गोल्ड से ज्यादा अब डिजिटल को लोग तवज्जो दे रहे। फिजिकल गोल्ड खरीदने में लगने वाले भारी मेकिंग चार्ज, सुरक्षित स्टोरेज की परेशानी और झंझट से बचने के लिए अब नई पीढ़ी तेजी से डिजिटल गोल्ड और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की तरफ रुख कर रही। दूसरा इसका फायदा ये भी है कि जैसे ही कीमतों में गिरावट आती है, डिजिटल प्लेटफार्म्स पर दिख जाता है। वहां ट्रैफिक बढ़ जाता है। लोग अब 1 रुपए से लेकर 1 लाख तक का सोना डिजिटल रूप में खरीद रहे हैं। क्योंकि, इसमें न तो रखने की चिंता है और न ही ज्यादा खर्च। लखनऊ महानगर सर्राफा एसोसिएशन के अध्यक्ष मनीष कुमार वर्मा भी कहते हैं कि इन्वेस्टर आज भी फिजिकल गोल्ड-सिल्वर पर ज्यादा भरोसा करते हैं। डिजिटल एक समय के लिए ठीक है। लेकिन, फिजिकल सोना-चांदी को लोग लाइफटाइम इन्वेस्टमेंट मानते हैं। ज्वेलरी मार्केट को लेकर व्यापारियों की उम्मीदें बरकरार गोरखपुर स्थित परंपरा जेम्स एंड ज्वेलर्स के डायरेक्टर संजय अग्रवाल का कहना है- अप्रैल से जून तक चलने वाले वेडिंग सीजन में ज्वेलरी की मांग बढ़ने की संभावना है। इससे बाजार में रौनक लौट सकती है। ग्राहक अब भारी गहनों की जगह लाइटवेट और कम कैरेट (14-18 कैरेट) ज्वैलरी को प्राथमिकता दे रहे हैं। साथ ही, पुरानी ज्वैलरी को रीसाइकल और एक्सचेंज कराने का ट्रेंड भी जारी रहने की उम्मीद है। चांदी को लेकर लखनऊ सर्राफा व्यापारियों का मानना है कि ऊंचे दामों के बावजूद शादियों और धार्मिक जरूरतों के चलते मांग बनी रहेगी। हालांकि खरीदारी सोच-समझकर होगी। व्यापारियों को भरोसा है कि वजन कम, लेकिन खरीद बनी रहेगी। शादी के सीजन में ज्वेलरी मार्केट को अच्छा सहारा मिलेगा। 2030 तक 1.68 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम हो सकता है सोना विघ्नहर्ता गोल्ड के चेयरमैन महेंद्र लुनिया के अनुसार, 2030 तक सोने के दाम 1.68 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकते हैं। सोने की कीमतों में उछाल के कारणों में भू-राजनीतिक तनाव से लेकर वैश्विक आर्थिक मंदी जैसे फैक्टर्स हैं। सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान 1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। नए नियम के तहत एक अप्रैल से छह डिजिट वाले अल्फान्यूमेरिक हॉलमार्किंग के बिना सोना नहीं बिकेगा। जैसे आधार कार्ड पर 12 अंकों का कोड होता है, उसी तरह से सोने पर 6 अंकों का हॉलमार्क कोड होगा। इसे हॉलमार्क यूनीक आइडेंटिफिकेशन नंबर यानी HUID कहते हैं। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग के जरिए ये पता करना संभव हो गया है कि कोई सोना कितने कैरेट का है। 2. कीमत क्रॉस चेक करें : सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है। 24 कैरेट सोने को सबसे शुद्ध माना गया है, लेकिन इसकी ज्वैलरी नहीं बनती, क्‍योंकि वो बेहद मुलायम होता है। आमतौर पर ज्वैलरी के लिए 22 कैरेट या इससे कम कैरेट सोने का इस्तेमाल किया जाता है। ————————– यह खबर भी पढ़ें… बच्चों की दुनिया कब बन जाती है जानलेवा:गाजियाबाद केस से लें सबक, क्या भारत में बैन है कोरियन लव गेम यूपी के गाजियाबाद में 3 नाबालिग बहनों की मौत ने ऑनलाइन कल्चर और डिजिटल लत को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यह मामला केवल एक दुखद घटना नहीं, बड़ी सामाजिक चेतावनी बन गया है। आखिर कोरियन डिजिटल कंटेंट में ऐसा क्या है, जो जेन-जी को इतनी तेजी से अपनी ओर खींच रहा? पढ़िए पूरी खबर…