आशुतोष पांडेय- हिस्ट्रीशीटर से ‘महाराज’ तक:जज के फर्जी साइन का केस; गो-तस्करी में SP को 1 लाख दिए; विधवा से रेप का आरोप

आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज। इस वक्त इनकी ही चर्चा है। इसकी दो वजहें हैं। पहली- दो बटुकों के जरिए शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर कुकर्म का मुकदमा दर्ज करवाना। दूसरी- पुलिस रिकॉर्ड में हिस्ट्रीशीटर हैं। रेप, गो-तस्करी, फर्जीवाड़ा जैसे गंभीर धाराओं में 27 केस दर्ज हैं। लेकिन, आज हम चर्चा की दूसरी वजह के बारे में जानेंगे। आशुतोष पर पहला मुकदमा तो 16 साल की उम्र में हो गया था। इसके बाद जमीन कब्जा करने के लिए रजिस्ट्रार के फर्जी साइन किए, उसमें मुकदमा हुआ। जज के रूम में रखी पत्रावली में फर्जी साइन करके गैर जमानती वारंट (NBW) जारी करवा दिया। जमीन कब्जाने के लिए ट्रस्ट बनाए। गो-तस्करी के मामले में एसपी को रिश्वत देने पहुंच गए। स्कूल के लिए घर कब्जाया और फिर विधवा से रेप का आरोप। ऐसे ही तमाम मामले दर्ज हैं। दैनिक भास्कर की टीम ने इन मुकदमों से जुड़े लोगों से बात की। उनका पक्ष जाना। FIR और पुलिस की कार्रवाई को देखा। आज की संडे बिग स्टोरी में हम आशुतोष महाराज पर दर्ज मुकदमों की बात करेंगे… 16 साल की उम्र में पहला केस हुआ यूपी के शामली जिले में कांधला कस्बा है। जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर है रायजादगान इलाका। यहीं आशुतोष पांडेय का घर है। उनके पिता राजेंद्र शर्मा रोडवेज में कंडक्टर थे। आशुतोष का शुरुआती नाम अश्विनी शर्मा था। कुछ वक्त के बाद नाम बदलकर आशुतोष पांडेय कर लिया। बाद में नाम के आगे भृगवंशी लिखने लगे। 5 साल पहले आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज नाम कर लिया। अब इसी नाम से खुद की पहचान बताते हैं। 2002 में पहली बार आशुतोष पर मुकदमा दर्ज हुआ। धाराएं 324, 504, 506 लगीं। इन धाराओं का मतलब है- जानबूझकर चोट पहुंचाना, अपमानित करना और धमकी देना। पुलिस प्रशासन बीच-बीच में आशुतोष पांडेय पर दर्ज मुकदमों की लिस्ट जारी करता है। 2019 तक की जो लिस्ट है, उसमें कुल 21 मुकदमे दर्ज हैं। इस वक्त तक कुल 27 मुकदमे दर्ज हैं। आशुतोष के बारे में जानकारी हासिल करने पर पता चला कि जितने मुकदमे दर्ज हैं, उससे कहीं अधिक आशुतोष ने दूसरे लोगों पर दर्ज करवाए हैं। आशुतोष के खिलाफ दर्ज प्रमुख मुकदमों से जुड़े लोगों से हमने बात की। स्कूल के लिए जमीन कब्जाई, विधवा से रेप का आरोप
बात 2010 की है। उस वक्त आशुतोष पांडेय ने कांधला में ही एक स्कूल खोला। इसके लिए वहीं की एक विधवा महिला का घर किराए पर लिया। कुछ दिन तो किराया दिया, लेकिन फिर कब्जा कर लिया। किराया भी नहीं दिया। दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ। आरोप है कि 2012 में आशुतोष उस विधवा महिला के घर में घुसे और उसके साथ रेप किया। महिला ने कांधला में केस दर्ज करवाया। पीड़िता के बेटे दिल्ली में रहते हैं। वो बताते हैं- मां के साथ रेप करने का मुकदमा कैराना में शुरू हुआ। ये उसे खारिज करवाने इलाहाबाद हाईकोर्ट चला गया। स्टे भी मिल गया। हम भी इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचे, अपना पक्ष रखा। कोर्ट ने स्टे हटाया। आशुतोष को जेल भेजा। ये करीब 25 दिन तक जेल में रहा। हम आर्थिक रूप से कमजोर हैं, जैसे-तैसे हमने केस लड़ा। इस मामले की सुनवाई पूरी हो गई है। जल्द ही आशुतोष को सजा मिलेगी। इलाके में एक भी व्यक्ति ऐसा नहीं, जो इसे अच्छा बता दे। यह सिर्फ फ्रॉड करता है। 20 बीघा जमीन कब्जाने के लिए ट्रस्ट बनाने का आरोप
हमारी टीम ने कांधला में तमाम लोगों से बात की। इसी में एक थे तरुण अग्रवाल। तरुण का घर आशुतोष के पास ही है। वह बताते हैं- कांधला में रामलीला कमेटी के पास करीब 20 बीघा जमीन है। यह जमीन वैश्य समाज के लोगों ने ही दान की थी। 150 साल से रखरखाव भी हम लोग ही कर रहे हैं। 2008 में हम सभी ने रामलीला कमेटी का रजिस्ट्रेशन करवाया। फिर उसी के हिसाब से आगे बढ़ने लगे। आशुतोष को यह पसंद नहीं आया। उसने जमीन पर कब्जे की साजिश रचनी शुरू कर दी। तरुण कहते हैं- साल, 2008 में आशुतोष ने दूसरे नाम से रजिस्ट्रेशन के लिए अप्लाई कर दिया। उस वक्त हमारे यहां सहारनपुर में रजिस्ट्रेशन का काम होता था। आशुतोष ने हमारे वाले रजिस्ट्रेशन की पत्रावली में रजिस्ट्रार के फर्जी साइन किए। हमारी कमेटी की जो पत्रावली थी उसे निलंबित कर दिया। उसकी सर्टिफाइड कॉपी भी ले ली। उसे ही लेकर ये इलाहाबाद हाईकोर्ट चला गया। कहा कि रजिस्ट्रार ने कमेटी को सस्पेंड किया है। जब इस पत्रावली की जांच हुई, तो रजिस्ट्रार ने बताया कि ये मेरे सिग्नेचर ही नहीं हैं। फिर आशुतोष का झूठ पकड़ा गया। 2012 में रजिस्ट्रार ने धोखेबाजी का मुकदमा दर्ज करवाया था। तरुण बताते हैं- फर्जीवाड़ा करने में यह व्यक्ति बहुत आगे रहा है। 2017 में इसने कैराना में एक जज साहब के रिकॉर्ड रूम में घुसकर उन्हीं के फर्जी साइन करके ऑर्डर शीट बदलवा दी। 3 लोगों के खिलाफ NBW जारी हो गया। वे तीनों लोग भागकर इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचे। जांच हुई, तो पता चला कि ऐसा कोई ऑर्डर ही नहीं दिया गया। ये ऑर्डर शीट ही नकली है। जज साहब ने 2017 में केस दर्ज करवाया। इस मामले की जांच शामली क्राइम ब्रांच कर रही थी। झूठ बोलकर 25 बीघा जमीन लिखवा ली
कांधला के ही स्थानीय लोगों से पता चला कि आशुतोष पांडेय ने 2006 में पड़ोस के ही कृष्णपाल गुर्जर से नजदीकी बढ़ाई। ऐसा इसलिए, क्योंकि कृष्णपाल के पास 25 बीघा जमीन थी। आशुतोष ने उन्हें कहा कि आपकी इस जमीन पर लोन मिल जाएगा। आपको बहुत पैसा भी नहीं देना होगा। कृष्णपाल तैयार हो गए। दूसरी तरफ, आशुतोष ने रजिस्ट्रार ऑफिस में सेटिंग कर ली। कृष्णपाल को कह दिया कि जो भी पूछा जाए, बस हां-हां करना है। कृष्णपाल ने ऐसा ही किया। उनकी पूरी 25 बीघे जमीन अपने नाम करवा ली। जब यह मामला खुला तो हंगामा हो गया। कृष्णपाल ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। 5 साल तक मुकदमा चला और फिर बैनामा वापस हुआ था। आरोप है कि उस वक्त आशुतोष ने 8 लाख रुपए लिए थे। कहा था कि इतना पैसा कोर्ट कचहरी में खर्च हो गया। एसपी ने स्टिंग के जरिए गो-तस्करी में पकड़ा
आशुतोष की क्राइम हिस्ट्री खंगालने पर एक मामला गोंडा का मिलता है। ये मामला 2012 का है, गो-तस्करी से जुड़ा है। आशुतोष ने उस वक्त गोंडा के एसपी नवनीत कुमार राणा से मुलाकात की। कहा कि गोंडा की सीमा से पशुओं से लदा ट्रक जाने दिया जाए। अभी पुलिस रोकती है, इसके लिए हम पैसा दे देंगे। एसपी को पहले तो यह सिरफिरा लगा, लेकिन बाद में उन्होंने गंभीरता से लेते हुए उसे अगले दिन बुलाया। एसपी नवनीत राणा ने इसकी सूचना डीआईजी समेत कई अधिकारियों को दी। ऑफिस में सीसीटीवी कैमरा लगवाया। आशुतोष 24 जनवरी को दिन में 11 बजे ऑफिस पहुंचा। 500-500 की दो गड्डियां यानी 1 लाख रुपए एसपी के सामने रख दिए। यह सब कुछ कैमरे में रिकॉर्ड हो गया। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने तुरंत आशुतोष को गिरफ्तार कर लिया। आशुतोष के साथ पशु तस्कर इब्राहिम और फिरोज को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। केस का ट्रायल चल रहा है। फर्जी लेटर पैड से जेलर का ट्रांसफर रुकवाया था
आशुतोष पांडेय 2008 में लखनऊ जेल में बंद थे। वहां इनकी उस वक्त के जेलर हेमंत गुप्ता से अच्छी बनने लगी थी। बाद में जमानत पर छूट गए, लेकिन व्यवहार बना रहा। जेलर का ट्रांसफर हो गया। आशुतोष ने ट्रांसफर रुकवाने के लिए फर्जीवाड़ा किया। उस वक्त बसपा की सरकार थी और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव सतीश मिश्रा का प्रभाव था। आशुतोष ने सतीश मिश्रा का फर्जी लेटर पैड बनाया। फिर एक नोट बनाकर खुद ही विभाग में जाकर दे आए। जेलर का ट्रांसफर रुक गया। जब इस मामले की जांच शुरू हुई तो सब दंग रह गए, क्योंकि सतीश मिश्रा ने कोई लेटर ही नहीं जारी किया था। पुलिस ने लखनऊ के हजरतगंज थाने में आशुतोष के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। उस वक्त सीओ हजरतगंज बीएस गरबयाल ने शामली के एसपी देहात राजूबाबू सिंह से बात की। पुलिस ने कांधला में छापेमारी की, लेकिन उस वक्त आरोपी आशुतोष घर से फरार थे। कई बार पुलिस की गिरफ्त से भागे, 25 हजार के इनामी आशुतोष के खिलाफ जब भी मुकदमा दर्ज होता, वह फरार हो जाते थे। अक्सर पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी करती थी। अलग-अलग मामलों में 5 से ज्यादा बार जेल जा चुके हैं। 2019 में आशुतोष गो-तस्करी के एक मामले में लंबे वक्त तक फरार रहे थे। प्रशासन ने आशुतोष पर 25 हजार का इनाम घोषित कर दिया था। शामली में प्रशासन ने ऑपरेशन चक्रव्यूह चलाया। इसके तहत जिन लोगों पर इनाम था, उन्हें खोजा जाने लगे। 2 अक्टूबर, 2019 को आशुतोष पांडेय को गिरफ्तार कर लिया गया। आशुतोष के लंबे आपराधिक इतिहास को देखते हुए शामली पुलिस ने इन्हें हिस्ट्रीशीटर बना दिया। इनकी हिस्ट्रीशीट संख्या 76A थी। आशुतोष ब्राह्मण युवजन सभा में शामिल हो गए। राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए। अलग-अलग जिलों में अपना कैडर बढ़ाया। शंकराचार्य का मामला सामने आया, तो कानपुर के वकील पंकज दीक्षित सामने आए। ये भी कभी ब्राह्मण युवजन सभा से जुड़े रहे थे। पंकज दीक्षित कहते हैं- आशुतोष महाठग है। वो लोगों को प्रलोभन देकर सपा की सरकार में नौकरी दिलवाने के नाम पर वसूली करता था। 2018 में हमने कानपुर में स्वरूप नगर थाने में मुकदमा लिखवाया था। इसकी आदतों की वजह से संगठन की छवि खराब हो रही थी। इसलिए इसे बाहर किया गया। पंकज दीक्षित कहते हैं- न सिर्फ यूपी, बल्कि अलग-अलग राज्यों में भी इसके खिलाफ मुकदमे दर्ज हैं। सीएम योगी और पूर्व सीएम अखिलेश यादव से मांग है कि इस मामले की गंभीरता से जांच करवाएं। आशुतोष शातिर अपराधी है। संत समाज में एकता और सम्मान बनाए रखने के लिए ऐसे लोगों की पृष्ठभूमि को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ‘सपा सरकार में लगे केस में दम नहीं’
पिछले दिनों आशुतोष पांडेय ने दावा किया था कि उनके ऊपर जो मुकदमे दर्ज हैं, सभी सपा की सरकार में दर्ज किए गए। सभी मुकदमे राजनीतिक हैं। हमने हिस्ट्रीशीट देखी तो पता चला कि 2012 से 2017 के बीच 5 मुकदमे ही दर्ज हुए। बाकी के मुकदमे या तो उसके पहले की बसपा सरकार में दर्ज हुए या फिर 2017 के बाद दर्ज हुए। भाजपा की सरकार में आशुतोष को इनामी बनाया गया। इन्हीं कारणों से 2022 के विधानसभा चुनाव में आशुतोष भाजपा के खिलाफ हो गए थे। वह सपा का खुलकर प्रचार करने लगे थे। अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाने के लिए एक विजय यात्रा शुरू की थी। यूपी के अलग-अलग जिलों में गए। मीडिया से बात करते हुए कहते थे- 10 मार्च को हम योगी आदित्यनाथ का पिंडदान करेंगे। ब्राह्मण एकजुट हैं और वह अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाने जा रहे। इसकी वजह यह है कि योगी सरकार में 700 से ज्यादा ब्राह्मणों की हत्या हुई है। ढाई हजार से ज्यादा ब्राह्मणों पर फर्जी मुकदमा लगाकर जेल भेजा। शंकराचार्य की गिरफ्तारी पर कोर्ट ने लगा रखी है रोक आशुतोष पांडेय ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ बच्चों से यौन शोषण का आरोप लगाया है। कोर्ट के आदेश के बाद शंकराचार्य पर FIR दर्ज हुई। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। अविमुक्तेश्वरानंद की तरफ से पेश हुए वकील पीएन मिश्रा ने कुछ बातें रखीं। जैसे- जब घटना होना बताया उसके काफी वक्त बाद FIR कराई गई, इससे संदेह पैदा होता है। जिन बटुकों का रेप होना बताया जा रहा, वह कभी शंकराचार्य के आश्रम में नहीं रहे। कहा गया कि पीड़ित बटुक हरदोई के स्कूल में रेगुलर स्टूडेंट हैं, इस वक्त परीक्षा दे रहे हैं। फिर वो कैसे शंकराचार्य के आश्रम के छात्र हो सकते हैं? अगर दो बटुकों ने आरोप लगाया, तो मजिस्ट्रेट के सामने एक ही बटुक को क्यों पेश किया गया? वकील के इन्हीं पॉइंट पर जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा ने गिरफ्तारी पर रोक लगा दी। सुनवाई अब मार्च के तीसरे हफ्ते में होगी। राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने अरेस्ट स्टे का विरोध किया। लेकिन, जज ने इसे अनसुना कर दिया। आशुतोष अलग-अलग समय पर अलग-अलग पार्टियों का समर्थन करते रहे हैं। इस वक्त वह खुद को श्रीकृष्ण जन्मभूमि बनाम शाही मस्जिद ईदगाह वाद संख्या 4 में मुख्यवादी बताते हैं। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट मथुरा के अध्यक्ष बताते हैं। मुझे जान का खतरा, मैं अब केस नहीं लड़ूंगा हमने इन सारे मामलों को लेकर आशुतोष पांडेय से बात की। वह कहते हैं- पॉक्सो का जो मामला शंकराचार्य पर दर्ज हुआ है, उस मामले में मैंने सिर्फ सूचना दी है। नियम भी यही है कि जब भी आपको जानकारी मिले, आप सूचना दे सकते हैं। इस मामले में अब मैं कोई पैरवी नहीं करूंगा। मुझे धमकी मिल रही है। मेरे खिलाफ फर्जी मुकदमा दर्ज करवाया जा रहा। मुझे पुलिस सुरक्षा चाहिए, लेकिन मिल नहीं रही। खुद ऊपर दर्ज मामलों और हिस्ट्रीशीटर के बारे में पूछने पर आशुतोष पांडेय कहते हैं- हां मैं हिस्ट्रीशीटर रहा हूं। अगर मैं गलत हूं तो मुझे पुलिस आकर गिरफ्तार करे। अब तक बाहर क्यों छोड़ रखा है?
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