समाजवादी पार्टी पश्चिमी यूपी से अपने 2027 के अभियान को धार देगी। अखिलेश यादव 2026 की पहली बड़ी रैली नोएडा के दादरी में करने जा रहे हैं। यह रैली गुर्जर समाज के लोगों की ओर से हो रही है। सपा प्रवक्ता राज कुमार भाटी इसकी अगुवाई करेंगे। रैली का मकसद क्या है? दादरी से ही अखिलेश यादव साल की बड़ी रैली की शुरुआत क्यों करने जा रहे? पश्चिमी यूपी में सपा का प्रदर्शन 2022 के विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव में कैसा रहा? क्या इस रैली के जरिए घोषित तौर पर सपा चुनावी आगाज करेगी? पढ़िए इस खबर में… पहले जानिए रैली को लेकर सपा की क्या है तैयारी इस रैली को समाजवादी समानता भाईचारा रैली नाम दिया गयाहै। रैली का मकसद पश्चिमी यूपी में विभिन्न वर्गों के बीच पैदा हुई खाई को खत्म करना है। वैसे तो ये कार्यक्रम गुर्जर समाज की ओर से हो रहा है। लेकिन, कोशिश सभी वर्गों के लोगों को इस रैली में शामिल करने की है। रैली में नोएडा के अलावा आसपास के जिलों के सभी वर्गों के लोगों के शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है। कोई बड़ा विकेट गिराने की फिराक में सपा सूत्रों का कहना है कि सपा नोएडा में रैली के दौरान भाजपा और आरएलडी के कुछ ऐसे नेताओं को शामिल कराना चाहती है, जिसका बड़ा संदेश जाए। इसके लिए पार्टी के कई नेता लगे हैं। स्थानीय विधायकों के साथ आसपास के जिलों के विधायकों, पूर्व विधायकों, सांसदों, पूर्व सांसदों के मन टटोले जा रहे हैं। दादरी से ही इसकी शुरुआत क्यों करने जा रहे अखिलेश? राजनीति के जानकारों का कहना है कि सियासी नजरिए से पश्चिमी यूपी काफी अहम है। नोएडा और गाजियाबाद भाजपा का गढ़ है। ऐसे में भाजपा के गढ़ से शुरुआत करने का मकसद भाजपा के वोटबैंक में सेंध लगाना है। खासकर, पीडीए फॉर्मूले के तहत अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने की तैयारी पार्टी स्तर पर की जा रही है। पश्चिमी यूपी में राजनीति की समझ रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार डॉ. रवींद्र प्रताप राणा कहते हैं- इस क्षेत्र में रालोद का वर्चस्व रहा है। 2022 में यह दिखा भी था। यही वजह है कि अखिलेश यादव ने पश्चिमी यूपी में रणनीति बनाई है। कई जाट और गुर्जर नेताओं को प्रमोट किया है। दादरी और सहारनपुर गुर्जर बाहुल है। नोएडा में राजकुमार भाटी को भी मजबूत किया है। मुजफ्फरनगर में हरेंद्र मलिक और अमरोहा में समरपाल सिंह को फ्री-हैंड दिया है। इस क्षेत्र में मुस्लिम डिसाइडिंग रहे हैं। यही वजह है कि सपा मुस्लिम कैंडिडेट उतारती है और भाजपा आसानी से ध्रुवीकरण कराने में कामयाब हो जाती है। जाट और गुर्जर मुखर जातियां हैं, जिन्हें एक प्लेटफार्म देने के लिए अखिलेश यादव मैसेज दे रहे हैं। इस इलाके में भाजपा को जो सफलता मिलती है, उसमें जाट-गुर्जर और पिछड़ों की भूमिका होती है। इसी रणनीति के तहत उन्होंने जयंत को साथ लिया है। पश्चिमी यूपी में कैसा था 2022 और 2024 में सपा का प्रदर्शन? सपा ने 2022 में राष्ट्रीय लोकदल के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। पश्चिमी यूपी में कई सीटों पर इसका सीधा असर भी पड़ा था। शामली, मुजफ्फरनगर, बिजनौर, मेरठ, सहारनपुर, अमरोहा, मुरादाबाद, रामपुर जैसे जिलों में सपा-रालोद गठबंधन का प्रदर्शन अच्छा रहा था। वहीं, बुलंदशहर, नोएडा, गाजियाबाद, अलीगढ़ जैसे जिलों में सपा गठबंधन को न के बराबर सीट मिली थी। उसे काफी संघर्ष करना पड़ा था। चुनाव के नतीजे आने के बाद रालोद सपा से अलग हो गई थी। वह भाजपा के साथ चली गई। 2024 में लोकसभा चुनाव हुए, तो सपा-कांग्रेस गठबंधन ने 80 में से 43 सीट जीत कर सबको चौंका दिया था। सपा-कांग्रेस गठबंधन ने पश्चिमी यूपी में शामली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, मुरादाबाद, संभल, रामपुर जैसी सीटों पर जीत हासिल की थी। अलीगढ़, मेरठ, फर्रुखाबाद, अमरोहा जैसी सीट पर हार और जीत का मार्जिन बेहद कम था। सपा यहां हारी जरूर थी, लेकिन मार्जिन बहुत कम था। सपा के नोएडा जिलाध्यक्ष सुधीर भाटी बताते हैं कि इस कार्यक्रम को दादरी में रखने का मकसद गुर्जर समाज की बहुलता है। उनका दावा है कि दादरी में करीब 2 लाख गुर्जर समाज के लोग रहते हैं। आमतौर पर ये भाजपा की सीट रही है। लेकिन, इस बार सपा इस सीट को हासिल करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा देगी। सुधीर भाटी कहते हैं कि इस रैली में 50 से 60 हजार लोगों के शामिल होने का अनुमान है। इसके लिए पार्टी के कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर लोगों को जागरूक कर रहे हैं। भाजपा के भ्रष्टाचार के बारे में लोगों को बता रहे हैं। उन्होंने कहा कि सपा ने 2022 के चुनाव में पश्चिमी यूपी के कई जिलों में बेहतर प्रदर्शन किया था। हालांकि उस समय सपा और रालोद का गठबंधन था। अब रालोद भाजपा के साथ जा चुकी है। ऐसे में अखिलेश यादव इन सीटों पर अपनी मजबूत पकड़ बनाने के लिए अभी से तैयारी कर रहे हैं। क्या घोषित तौर पर सपा चुनावी आगाज करेगी? सपा ने अभी आधिकारिक तौर पर चुनावी अभियान 2027 की शुरुआत करने की घोषणा नहीं की है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता अमीक जामेई कहते हैं- पश्चिमी यूपी राजनीति के लिहाज से इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि वहां बड़ी संख्या में जाट-गुर्जर समाज के लोग रहते हैं। सपा भाईचारा सम्मेलन करने जा रही है, जिसमें दोनों वर्ग के लोग बड़ी संख्या में शामिल होंगे। जहां तक चुनावी अभियान की बात है, तो सपा ने अपना अभियान 2024 के लोकसभा के चुनाव के बाद से ही शुरू कर दिया था। अखिलेश यादव लगातार जिलों में जा रहे हैं। कुछ जगहों पर सभाएं भी हुई हैं। ये बात जरूर है कि जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएगा, यह सिलसिला और बढ़ेगा। ———————— ये खबर भी पढ़ें… सपा का नारा PDA, 70% मुस्लिम-यादव जिलाध्यक्ष, अखिलेश को संगठन में क्यों किसी और पर भरोसा नहीं सपा 2022 में यूपी की सत्ता की दौड़ में पिछड़ने के बाद से PDA (पिछड़ा-दलित-मुस्लिम) का नारा दे रही है। 2024 में उसे इस नारे के बलबूते यूपी की 80 लोकसभा सीटों में 37 पर सफलता मिली। उसके साथ गठबंधन में लड़ी कांग्रेस के भी 6 सदस्य जीतने में सफल रहे थे। तब माना गया था कि सपा PDA को संगठन में आत्मसात कर राजनीति में नई लकीर खींचेगी। लेकिन, आज भी सपा के 97 जिलाध्यक्षों/महानगर अध्यक्षों में 70% यादव-मुस्लिम (M-Y) हैं। पढ़ें पूरी खबर