‘ऐसे निर्मम हत्याकांड के बाद तो आरोपी अजय प्रताप सिंह का फुल एनकाउंटर होना चाहिए। हम ही कर देते, हमारी कौन-सी रिश्तेदारी है।’ यह कहना है उस पुलिस अफसर का, जो बदायूं में HPCL (हिंदुस्तान पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड) प्लांट के 2 अफसरों के हत्याकांड की जांच से जुड़े हैं। आरोपी अजय प्रताप सिंह 12 मार्च, 2026 को सैजनी गांव स्थित HPCL प्लांट में घुसा। उसने DGM सुधीर कुमार गुप्ता और AGM हर्षित मिश्रा की गोली मारकर हत्या कर दी। बाद में पुलिस ने अजय को दोनों पैरों पर गोली मारकर पकड़ा। इस पूरे मामले में पुलिस की लापरवाही उजागर हुई। यह भी आरोप लगे कि आरोपी अजय को विधायक का संरक्षण मिला है। इसे जानने दैनिक भास्कर की टीम बदायूं पहुंची। पढ़िए, पूरा इन्वेस्टिगेशन… हमारी टीम सस्पेंड किए गए इंस्पेक्टर अजय कुमार और SI धर्मेंद्र कुमार सिंह से मिली। SI धर्मेंद्र ने बताया- 2 महीने पहले अजय के खिलाफ FIR दर्ज की, लेकिन गिरफ्तार नहीं किया। अगर गिरफ्तार कर लेते, तो वह 2 हत्या नहीं कर पाता। धर्मेंद्र बोले- मुझ पर आरोप है कि अजय को पकड़ा नहीं… रिपोर्टर : जो मुकदमा हुआ था, उसकी विवेचना आप ही कर रहे थे?
SI धर्मेंद्र : हां। रिपोर्टर : जांच पूरी हो गई?
SI धर्मेंद्र : नहीं, अभी पेंडिंग है। मुकदमा 4 फरवरी, 2026 को दर्ज हुआ था। रिपोर्टर : आप पर आरोप लगा कि चार्जशीट पेंडिंग है?
SI धर्मेंद्र : मेरे ऊपर आरोप है कि उसे पकड़ा नहीं गया, उसका 151 नहीं हुआ और न ही आरोप पत्र समय से दिया। जबकि एक महीने का समय है और गिरफ्तारी के लिए 60 दिन का समय होता है। अभी पूरी जांच भी नहीं हुई थी। रिपोर्टर : यानी आप लोगों ने लापरवाही की?
SI धर्मेंद्र : लापरवाही इसलिए नहीं है, क्योंकि उसमें गिरफ्तारी की कोई धारा नहीं थी। इसका परिवार इतना सामाजिक नहीं है कि चौराहे पर मिल जाए। घर पर मिल जाए। कंपनी से डिसमिस होने के बाद ये बहुत कम दिखता था। इसके दो भाई उसी कंपनी में काम करते हैं। एक तो एक्स आर्मी मैन भी नहीं है। पता नहीं कैसे और किस हिसाब से कंपनी ने उसको भर्ती कर रखा था? धर्मेंद्र की बातों से साफ हुआ कि आरोपी अजय दबंग है। अब हम जानना चाहते थे कि उसने अपने रसूख का उपयोग कहां और कैसे किया? इसके लिए हमने धर्मेंद्र से बातचीत आगे बढ़ाई- बोले- आदेश होता तो आरोपी अजय को मार देंगे, हमारी कौन-सी रिश्तेदारी है? SI धर्मेंद्र : देखिए, संवेदना हम लोगों की भी बहुत है। अगर पकड़ में आ जाता तो धारा 151 तो कर ही देते। जिसकी मानसिकता ही आपराधिक हो, उसको तो किसी स्तर पर रोका नहीं जा सकता। रिपोर्टर : अपराधी को तो पुलिस ही ठीक करेगी ना?
SI धर्मेंद्र : एक-दो बार दबिश पर गए, वो मिलता ही नहीं था। गांव में उसका बहुत कम आना-जाना होता था। उसकी फैमिली तो सामाजिक है ही नहीं। न तो उसके बाप से किसी को मतलब है, न मां से न भाई से। अब कोई वीक पॉइंट मिलता है, तो आदमी बहुत कुछ कह देता है। आंतरिक बात मैं नहीं कह सकता, लेकिन पुलिस स्तर पर किसी का कोई प्रेशर नहीं आया। रिपोर्टर : कुछ लोग कह रहे हैं कि हाफ नहीं, फुल एनकाउंटर होना चाहिए था?
SI धर्मेंद्र : पूरा हो जाता तो और अच्छा होता। सही मायने में देखा जाए तो इतना निर्मम कांड करने के बाद तो उसका पूरा एनकाउंटर ही होना चाहिए। जांच हाफ की हो रही है। फुल की हो जाती या स्वतंत्र कर देते कि तुम्हारे सस्पेंशन का वही रिजन है तो हम ही मार देते। असली मायने में हम ही लोग कर देते, कौन-सी रिश्तेदारी… कौन-सा याराना है? इसके बाद हम दातागंज ब्लाॅक पहुंचे। यहां खंड विकास अधिकारी (BDO) वीरेंद्र राम से मुलाकात हुई। BDO बोले- अपात्र को पता नहीं कैसे आवास मिल गया- वीरेंद्र राम रिपोर्टर : ये बताइए… हत्यारोपी अजय प्रताप की पत्नी के नाम से आवास मिला है क्या?
वीरेंद्र राम : हां, आवास तो मिला है। रिपोर्टर : जब पात्र नहीं है, तब कैसे मिल गया?
वीरेंद्र राम : पता नहीं कैसे मिल गया? मैं तो उस समय था भी नहीं, साल 2024-25 का मामला है। रिपोर्टर : लोग कैसे दबाव में काम करा लेते हैं?
वीरेंद्र राम : हां, अब तो झेलना ही है, अरे, कुछ नहीं…। इनका एनकाउंटर हो जाता तो बवाल ही खत्म हो जाता, सारा मामला ठंडा हो जाता। भाजपा के पूर्व सांसद बोले- खादी और खाकी ने दिया हत्यारोपी को संरक्षण
हमने बरेली में आंवला के पूर्व भाजपा सांसद धर्मेंद्र कश्यप से मुलाकात की। हत्यारोपी अजय का गांव सैजनी इसी आंवला संसदीय क्षेत्र में आता है। पूर्व सांसद का कहना है- हत्यारोपी अजय को लोकल विधायक और उनके ब्लॉक प्रमुख बेटे का संरक्षण मिला। जो दरोगा इस मामले में सस्पेंड किया गया, वह आरोपी के साथ खुलेआम गाड़ी में घूमता था। जब एक तरफ अधिकारी अपनी जान बचाने की गुहार लगा रहे थे, तो दूसरी तरफ दरोगा ही आरोपी के साथ दिख रहा था। ऐसे में न्याय की उम्मीद कैसे की जा सकती है? HPCL प्लांट के आस-पास काम करने वाले ज्यादातर लोग एक ही जाति से हैं। इससे पूरे मामले में पक्षपात की आशंका और गहरी हो जाती है। आरोपी को स्थानीय स्तर पर राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ था। इसी वजह से कार्रवाई कमजोर रही। आखिर कैसे एक व्यक्ति कंपनी परिसर में जाकर दो हत्याएं कर देता है? फिर सीधे थाने में सरेंडर कर देता है? जिस गाड़ी से वह गया, वह किसकी थी? उसमें और कौन-कौन लोग सवार थे? इन सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। SSP का रवैया संतोषजनक नहीं था। लोकल नेताओं के दबाव में हाॅफ एनकाउंटर किया। हमारी इन्वेस्टिगेशन में 3 बातें सामने आईं विधायक बोले- आरोपी अजय से हमारा कोई संबंध नहीं
इस मामले में हमने दातागंज के भाजपा विधायक राजीव प्रताप सिंह उर्फ बब्बू भैया से बात की। उन्होंने कहा- पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। हमारा आरोपी अजय से कोई संबंध नहीं है। जब उनसे पूछा कि आपके ब्लॉक प्रमुख बेटे के साथ हत्या के आरोपी अजय के कई फोटो है, तो उन्होंने जवाब दिए बिना ही फोन काट दिया। —————————— यह खबर भी पढ़ें पाकिस्तान से ऑफर था- जितनी दहशत, उतने रुपए, लखनऊ में ATS का दावा- पिकअप फूंकने के बदले मिले थे ₹12000 यूपी के लखनऊ में 4 संदिग्ध आतंकी अरेस्ट हुए। ATS पूछताछ में सामने आया- पाकिस्तान से उन्हें ऑफर था कि तुम लोग दहशत फैलाओ, जितनी दहशत, उतना पैसा मिलेगा…। बड़े धमाके की फिराक में चारों संदिग्ध आतंकियों ने पिकअप और बाइक में आग लगाकर रिहर्सल की। इसके वीडियो पाकिस्तानी हैंडलर अबू बकर को भेजे थे। बदले में उन्हें हर आगजनी पर 12 हजार रुपए मिलते थे। पढ़िए पूरी खबर…
SI धर्मेंद्र : हां। रिपोर्टर : जांच पूरी हो गई?
SI धर्मेंद्र : नहीं, अभी पेंडिंग है। मुकदमा 4 फरवरी, 2026 को दर्ज हुआ था। रिपोर्टर : आप पर आरोप लगा कि चार्जशीट पेंडिंग है?
SI धर्मेंद्र : मेरे ऊपर आरोप है कि उसे पकड़ा नहीं गया, उसका 151 नहीं हुआ और न ही आरोप पत्र समय से दिया। जबकि एक महीने का समय है और गिरफ्तारी के लिए 60 दिन का समय होता है। अभी पूरी जांच भी नहीं हुई थी। रिपोर्टर : यानी आप लोगों ने लापरवाही की?
SI धर्मेंद्र : लापरवाही इसलिए नहीं है, क्योंकि उसमें गिरफ्तारी की कोई धारा नहीं थी। इसका परिवार इतना सामाजिक नहीं है कि चौराहे पर मिल जाए। घर पर मिल जाए। कंपनी से डिसमिस होने के बाद ये बहुत कम दिखता था। इसके दो भाई उसी कंपनी में काम करते हैं। एक तो एक्स आर्मी मैन भी नहीं है। पता नहीं कैसे और किस हिसाब से कंपनी ने उसको भर्ती कर रखा था? धर्मेंद्र की बातों से साफ हुआ कि आरोपी अजय दबंग है। अब हम जानना चाहते थे कि उसने अपने रसूख का उपयोग कहां और कैसे किया? इसके लिए हमने धर्मेंद्र से बातचीत आगे बढ़ाई- बोले- आदेश होता तो आरोपी अजय को मार देंगे, हमारी कौन-सी रिश्तेदारी है? SI धर्मेंद्र : देखिए, संवेदना हम लोगों की भी बहुत है। अगर पकड़ में आ जाता तो धारा 151 तो कर ही देते। जिसकी मानसिकता ही आपराधिक हो, उसको तो किसी स्तर पर रोका नहीं जा सकता। रिपोर्टर : अपराधी को तो पुलिस ही ठीक करेगी ना?
SI धर्मेंद्र : एक-दो बार दबिश पर गए, वो मिलता ही नहीं था। गांव में उसका बहुत कम आना-जाना होता था। उसकी फैमिली तो सामाजिक है ही नहीं। न तो उसके बाप से किसी को मतलब है, न मां से न भाई से। अब कोई वीक पॉइंट मिलता है, तो आदमी बहुत कुछ कह देता है। आंतरिक बात मैं नहीं कह सकता, लेकिन पुलिस स्तर पर किसी का कोई प्रेशर नहीं आया। रिपोर्टर : कुछ लोग कह रहे हैं कि हाफ नहीं, फुल एनकाउंटर होना चाहिए था?
SI धर्मेंद्र : पूरा हो जाता तो और अच्छा होता। सही मायने में देखा जाए तो इतना निर्मम कांड करने के बाद तो उसका पूरा एनकाउंटर ही होना चाहिए। जांच हाफ की हो रही है। फुल की हो जाती या स्वतंत्र कर देते कि तुम्हारे सस्पेंशन का वही रिजन है तो हम ही मार देते। असली मायने में हम ही लोग कर देते, कौन-सी रिश्तेदारी… कौन-सा याराना है? इसके बाद हम दातागंज ब्लाॅक पहुंचे। यहां खंड विकास अधिकारी (BDO) वीरेंद्र राम से मुलाकात हुई। BDO बोले- अपात्र को पता नहीं कैसे आवास मिल गया- वीरेंद्र राम रिपोर्टर : ये बताइए… हत्यारोपी अजय प्रताप की पत्नी के नाम से आवास मिला है क्या?
वीरेंद्र राम : हां, आवास तो मिला है। रिपोर्टर : जब पात्र नहीं है, तब कैसे मिल गया?
वीरेंद्र राम : पता नहीं कैसे मिल गया? मैं तो उस समय था भी नहीं, साल 2024-25 का मामला है। रिपोर्टर : लोग कैसे दबाव में काम करा लेते हैं?
वीरेंद्र राम : हां, अब तो झेलना ही है, अरे, कुछ नहीं…। इनका एनकाउंटर हो जाता तो बवाल ही खत्म हो जाता, सारा मामला ठंडा हो जाता। भाजपा के पूर्व सांसद बोले- खादी और खाकी ने दिया हत्यारोपी को संरक्षण
हमने बरेली में आंवला के पूर्व भाजपा सांसद धर्मेंद्र कश्यप से मुलाकात की। हत्यारोपी अजय का गांव सैजनी इसी आंवला संसदीय क्षेत्र में आता है। पूर्व सांसद का कहना है- हत्यारोपी अजय को लोकल विधायक और उनके ब्लॉक प्रमुख बेटे का संरक्षण मिला। जो दरोगा इस मामले में सस्पेंड किया गया, वह आरोपी के साथ खुलेआम गाड़ी में घूमता था। जब एक तरफ अधिकारी अपनी जान बचाने की गुहार लगा रहे थे, तो दूसरी तरफ दरोगा ही आरोपी के साथ दिख रहा था। ऐसे में न्याय की उम्मीद कैसे की जा सकती है? HPCL प्लांट के आस-पास काम करने वाले ज्यादातर लोग एक ही जाति से हैं। इससे पूरे मामले में पक्षपात की आशंका और गहरी हो जाती है। आरोपी को स्थानीय स्तर पर राजनीतिक संरक्षण मिला हुआ था। इसी वजह से कार्रवाई कमजोर रही। आखिर कैसे एक व्यक्ति कंपनी परिसर में जाकर दो हत्याएं कर देता है? फिर सीधे थाने में सरेंडर कर देता है? जिस गाड़ी से वह गया, वह किसकी थी? उसमें और कौन-कौन लोग सवार थे? इन सभी बिंदुओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। SSP का रवैया संतोषजनक नहीं था। लोकल नेताओं के दबाव में हाॅफ एनकाउंटर किया। हमारी इन्वेस्टिगेशन में 3 बातें सामने आईं विधायक बोले- आरोपी अजय से हमारा कोई संबंध नहीं
इस मामले में हमने दातागंज के भाजपा विधायक राजीव प्रताप सिंह उर्फ बब्बू भैया से बात की। उन्होंने कहा- पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। हमारा आरोपी अजय से कोई संबंध नहीं है। जब उनसे पूछा कि आपके ब्लॉक प्रमुख बेटे के साथ हत्या के आरोपी अजय के कई फोटो है, तो उन्होंने जवाब दिए बिना ही फोन काट दिया। —————————— यह खबर भी पढ़ें पाकिस्तान से ऑफर था- जितनी दहशत, उतने रुपए, लखनऊ में ATS का दावा- पिकअप फूंकने के बदले मिले थे ₹12000 यूपी के लखनऊ में 4 संदिग्ध आतंकी अरेस्ट हुए। ATS पूछताछ में सामने आया- पाकिस्तान से उन्हें ऑफर था कि तुम लोग दहशत फैलाओ, जितनी दहशत, उतना पैसा मिलेगा…। बड़े धमाके की फिराक में चारों संदिग्ध आतंकियों ने पिकअप और बाइक में आग लगाकर रिहर्सल की। इसके वीडियो पाकिस्तानी हैंडलर अबू बकर को भेजे थे। बदले में उन्हें हर आगजनी पर 12 हजार रुपए मिलते थे। पढ़िए पूरी खबर…