यूपी में चुनाव आयोग ने शुक्रवार को स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की जो फाइनल लिस्ट जारी की है, वह प्रदेश सरकार और भाजपा के लिए चौंकाने वाली है। आंकड़े बताते हैं कि यूपी के 40 मंत्री 2022 विधानसभा चुनाव में जितने वोट मार्जिन से जीते थे, उसके 2 से 10 गुना वोटर उनकी सीट पर कम हो गए हैं। इनमें शहरी और ग्रामीण दोनों विधानसभा सीटें शामिल हैं। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक की सीट लखनऊ कैंट से करीब 1.25 लाख नाम कटें है, जबकि पिछले चुनाव में वे करीब 39 हजार वोट से ही जीते थे। यानी जीत के मार्जिन से 3 गुना नाम कटे हैं। इसी तरह वित्त मंत्री सुरेश खन्ना की सीट शाहजहांपुर से करीब 1 लाख नाम कटें हैं, जबकि वे सिर्फ 9,313 वोट से जीते थे। ये आंकड़े योगी सरकार के मंत्रियों के लिए खतरे की घंटी नजर आ रहे हैं। हालांकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए राहत भरे हैं। गोरखपुर शहरी सीट पर करीब 33 हजार नाम कटे हैं, जबकि उन्होंने 1 लाख से ज्यादा के मार्जिन से चुनाव जीता था। पढ़िए ये खास रिपोर्ट… यूपी सरकार में 20 कैबिनेट मंत्री, 14 स्वतंत्र प्रभार राज्यमंत्री और 19 राज्यमंत्रियों के साथ कुल 53 मंत्री हैं। इनमें से 40 मंत्री विधानसभा, जबकि 13 मंत्री विधान परिषद के सदस्य हैं। 2022 के चुनाव में करीब 2.15 लाख वोट से जीतने वाले सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री सुनील शर्मा की साहिबाबाद सीट पर सबसे ज्यादा 3.16 लाख वोट कटे हैं। कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार ने 6,532 के मार्जिन से चुनाव जीता था। उनकी सीट पुरकाजी पर 31,808 वोट कटे हैं। इसी तरह एमएसएमई मंत्री राकेश सचान ने भोगनीपुर सीट 11,893 वोट से जीती थी, वहां 40,086 वोट कम हुए हैं। हालांकि, इसके कुछ अपवाद भी हैं। जैसे सुभासपा के मुखिया और पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने जहुराबाद सीट 45,632 वोट से जीती थी, जबकि 39,447 नाम SIR में कम हुए। इसी तरह श्रम मंत्री अनिल राजभर शिवपुर सीट पर 27,687 के अंतर से जीते थे। उनकी सीट पर 25,161 नाम कटे हैं। इसके अलावा पता चलता है कि जिन 100 विधानसभा सीटों पर 80 हजार से लेकर 3 लाख से ज्यादा नाम कटे हैं, उनमें भी 90 सीटों पर भाजपा के विधायक हैं। सीएम योगी ने बार-बार जताई थी चिंता
SIR को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने बार-बार चिंता जताई थी। उन्होंने पिछले साल 14 दिसंबर को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चुनाव के मंच से SIR में करीब तीन करोड़ वोटर कम होने की आशंका जताई थी। उन्होंने साफ किया था कि जिन सीटों पर वोट कम हो रहे हैं, उनमें से ज्यादातर सीटें भाजपा की हैं। सीएम योगी ने भाजपा के तब के अध्यक्ष जेपी नड्डा के लखनऊ दौरे पर उन्हें भी ये जानकारी दी थी। संघ, भाजपा और सरकार की समन्वय बैठक में भी सीएम ने बताया था कि 70 भाजपा विधायकों के सीटो पर 80 हजार से 3 लाख तक वोट कम हो सकते हैं। शहरी-ग्रामीण का मिथक टूटा
जब SIR की प्रक्रिया चल रही थी, उस समय कहा जा रहा था कि शहरी इलाकों में ज्यादा नाम कटेंगे। इसके पीछे ये तर्क दिया जा रहा था कि शहरी इलाकों में रह रहे ग्रामीण वोटर शहर से नाम कटवा कर अपने गांव की वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाना पंसद कर रहे हैं। जबकि, फाइनल लिस्ट के आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण इलाकों की विधानसभा सीटो से भी बड़ी संख्या में वोटर कम हुए हैं। SIR के जिलावार आंकड़ों में बुंदेलखंड ने बाजी मारी है। बुंदेलखंड के बांदा में सिर्फ 8.86%, महोबा में 8.55%, हमीरपुर में 6.88% और ललितपुर में मात्र 6.66% नाम ही कम हुए हैं। अब जानिए पॉलिटकिल एक्सपर्ट क्या कहते हैं… भाजपा विधायकों को चुनावी रणनीति बदलनी होगी
सीनियर जर्नलिस्ट रतन मणि लाल मानते हैं कि SIR के आंकड़े भाजपा के लिए चिंता का सबब हैं। जिन विधानसभा सीटों पर सबसे ज्यादा वोटर कम हुए हैं, वहां भाजपा के विधायक हैं। इतना ही नहीं जिन जिलों में सबसे ज्यादा वोट कटे हैं, उनकी लोकसभा सीटों पर भी भाजपा के ही सांसद हैं। वहीं, सपा के प्रभाव वाली और मुस्लिम बहुल सीटों पर उतनी संख्या में वोट कम नहीं हुए हैं, जितनी आशंका जताई जा रही थी। यही वजह है कि SIR की फाइनल लिस्ट आने के बाद यूपी में विपक्ष ने आंकड़ों को लेकर रोष या आक्रोश नहीं दिखाया। हिंदू वोटर्स की संख्या में काफी कमी हुई
सीनियर जर्नलिस्ट वीरेंद्रनाथ भट्ट मानते हैं कि SIR में हिंदू वोटर्स की संख्या में कमी हुई है। मंत्रियों और भाजपा विधायकों की विधानसभा सीटों पर भी बड़ी संख्या में मतदाता कम हुए हैं। लेकिन अभी एक मौका और मिलेगा। जिन वोटर्स के नाम कट गए हैं, वे फॉर्म 6 भरकर अपना नाम वोटर लिस्ट में जुड़वा सकते हैं। जेंडर रेशियो में लखनऊ अव्वल
जेंडर रेशियो के मामले में लखनऊ शहर की पांचों विधानसभा सीटें यूपी में सबसे आगे हैं। प्रदेश में एक हजार पुरुष वोटर पर 834 महिला वोटर हैं। जबकि लखनऊ ईस्ट सीट पर 975, लखनऊ कैंट में 952, लखनऊ सेंट्रल में 950, लखनऊ नॉर्थ में 934 और लखनऊ वेस्ट का जेंडर रेशियो 923 रहा है। ————————————————- ये खबर भी पढ़ें… यूपी में महापुरुषों की मूर्तियां लगाकर क्या जीत मिलेगी?:सरकार छत्र-लाइटिंग लगाएगी, अखिलेश ने 12वीं प्रतिमा की घोषणा की; जानिए मूर्तियों की सियासत भाजपा सरकार महापुरुषों की प्रतिमाओं पर छत्र, लाइट और बाउंड्रीवाल लगाने जा रही है। अखिलेश यादव एक के बाद 12 से ज्यादा महापुरुषों की मूर्तियां गोमती रिवर फ्रंट पर लगाने का वादा कर चुके हैं। सवाल उठना वाजिब है कि क्या महापुरुषों की मूर्तियां लगाने से पार्टियों को फायदा होता है? पढ़िए रिपोर्ट…
SIR को लेकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने बार-बार चिंता जताई थी। उन्होंने पिछले साल 14 दिसंबर को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चुनाव के मंच से SIR में करीब तीन करोड़ वोटर कम होने की आशंका जताई थी। उन्होंने साफ किया था कि जिन सीटों पर वोट कम हो रहे हैं, उनमें से ज्यादातर सीटें भाजपा की हैं। सीएम योगी ने भाजपा के तब के अध्यक्ष जेपी नड्डा के लखनऊ दौरे पर उन्हें भी ये जानकारी दी थी। संघ, भाजपा और सरकार की समन्वय बैठक में भी सीएम ने बताया था कि 70 भाजपा विधायकों के सीटो पर 80 हजार से 3 लाख तक वोट कम हो सकते हैं। शहरी-ग्रामीण का मिथक टूटा
जब SIR की प्रक्रिया चल रही थी, उस समय कहा जा रहा था कि शहरी इलाकों में ज्यादा नाम कटेंगे। इसके पीछे ये तर्क दिया जा रहा था कि शहरी इलाकों में रह रहे ग्रामीण वोटर शहर से नाम कटवा कर अपने गांव की वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाना पंसद कर रहे हैं। जबकि, फाइनल लिस्ट के आंकड़े बताते हैं कि ग्रामीण इलाकों की विधानसभा सीटो से भी बड़ी संख्या में वोटर कम हुए हैं। SIR के जिलावार आंकड़ों में बुंदेलखंड ने बाजी मारी है। बुंदेलखंड के बांदा में सिर्फ 8.86%, महोबा में 8.55%, हमीरपुर में 6.88% और ललितपुर में मात्र 6.66% नाम ही कम हुए हैं। अब जानिए पॉलिटकिल एक्सपर्ट क्या कहते हैं… भाजपा विधायकों को चुनावी रणनीति बदलनी होगी
सीनियर जर्नलिस्ट रतन मणि लाल मानते हैं कि SIR के आंकड़े भाजपा के लिए चिंता का सबब हैं। जिन विधानसभा सीटों पर सबसे ज्यादा वोटर कम हुए हैं, वहां भाजपा के विधायक हैं। इतना ही नहीं जिन जिलों में सबसे ज्यादा वोट कटे हैं, उनकी लोकसभा सीटों पर भी भाजपा के ही सांसद हैं। वहीं, सपा के प्रभाव वाली और मुस्लिम बहुल सीटों पर उतनी संख्या में वोट कम नहीं हुए हैं, जितनी आशंका जताई जा रही थी। यही वजह है कि SIR की फाइनल लिस्ट आने के बाद यूपी में विपक्ष ने आंकड़ों को लेकर रोष या आक्रोश नहीं दिखाया। हिंदू वोटर्स की संख्या में काफी कमी हुई
सीनियर जर्नलिस्ट वीरेंद्रनाथ भट्ट मानते हैं कि SIR में हिंदू वोटर्स की संख्या में कमी हुई है। मंत्रियों और भाजपा विधायकों की विधानसभा सीटों पर भी बड़ी संख्या में मतदाता कम हुए हैं। लेकिन अभी एक मौका और मिलेगा। जिन वोटर्स के नाम कट गए हैं, वे फॉर्म 6 भरकर अपना नाम वोटर लिस्ट में जुड़वा सकते हैं। जेंडर रेशियो में लखनऊ अव्वल
जेंडर रेशियो के मामले में लखनऊ शहर की पांचों विधानसभा सीटें यूपी में सबसे आगे हैं। प्रदेश में एक हजार पुरुष वोटर पर 834 महिला वोटर हैं। जबकि लखनऊ ईस्ट सीट पर 975, लखनऊ कैंट में 952, लखनऊ सेंट्रल में 950, लखनऊ नॉर्थ में 934 और लखनऊ वेस्ट का जेंडर रेशियो 923 रहा है। ————————————————- ये खबर भी पढ़ें… यूपी में महापुरुषों की मूर्तियां लगाकर क्या जीत मिलेगी?:सरकार छत्र-लाइटिंग लगाएगी, अखिलेश ने 12वीं प्रतिमा की घोषणा की; जानिए मूर्तियों की सियासत भाजपा सरकार महापुरुषों की प्रतिमाओं पर छत्र, लाइट और बाउंड्रीवाल लगाने जा रही है। अखिलेश यादव एक के बाद 12 से ज्यादा महापुरुषों की मूर्तियां गोमती रिवर फ्रंट पर लगाने का वादा कर चुके हैं। सवाल उठना वाजिब है कि क्या महापुरुषों की मूर्तियां लगाने से पार्टियों को फायदा होता है? पढ़िए रिपोर्ट…