मथुरा के वृंदावन में नाव हादसे से जुड़े 2 वीडियो सामने आए हैं। पहला- नाव डूबने से 15 मिनट पहले का है, जिसमें श्रद्धालु हंसी-खुशी राधे-राधे नाम जप कर रहे हैं। ये वीडियो श्रद्धालुओं ने ही बनाया था और अपने ‘बांके बिहारी सदस्य’ वॉट्सऐप ग्रुप में पोस्ट किया था। सभी काफी खुश दिख रहे हैं। नाव में महिलाओं की संख्या अधिक थी। किसी ने भी लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी। दूसरा- श्रद्धालुओं के नदी में डूबने का है। नाव पलट चुकी थी। कुछ श्रद्धालु यमुना में डूब रहे थे, वहीं कुछ लोग बचने के लिए हाथ-पैर चला रहे थे। मदद की गुहार सुनकर आसपास के नाविक मौके पर पहुंचे। तमाम लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। हादसे में 10 पर्यटकों की डूबने से मौत हुई है। इनमें 7 महिलाएं और 3 पुरुष हैं। 11 घायल हैं, जिनका इलाज चल रहा है। अभी 5 लोग लापता हैं, जिनकी तलाश की जा रही है। सभी पर्यटक पंजाब से वृंदावन घूमने आए थे। हादसे से जुड़े 3 फुटेज देखिए… जिंदा बचे युवक ने बताया- नाविक को स्पीड करने के लिए टोका था, मगर वह नहीं माना
हादसे में जीवित बचे युवक ने बताया- हम लोग नाव में सवार होकर यमुना नदी में सैर कर रहे थे। सभी लोग कीर्तन कर रहे थे। नाविक तेज स्पीड में नाव चला रहा था। 2 से 3 बार नाविक को हम लोगों ने टोका। कहा कि नाव धीमे चलाओ। उस वक्त हवा तेज चल रही थी और नदी के बीच में हमारी नाव पांटून पुल से टकरा गई। टक्कर इतनी तेज थी कि नाव का संतुलन बिगड़ गया और वह देखते-ही-देखते पलट गई। हम सब पानी में गिर गए। चीख-पुकार मच गई। हम गोताखोरों को बुलाने के लिए कह रहे थे। लेकिन मदद नहीं मिली। एंबुलेंस भी नहीं आ रही थी। इसके बाद मौजूद दूसरी नाव और स्थानीय लोगों ने आकर हमें बचाना शुरू किया। हम पूरा परिवार और रिश्तेदार साथ थे। अभी तक काफी लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है, लेकिन कुछ लोग अभी भी लापता हैं या अस्पताल में हैं। हादसे के लिए प्रशासन जिम्मेदार है। हमारी मांग है कि नाविकों को पकड़ा जाए। स्थिति बहुत डरावनी थी, समझ ही नहीं आया कि पलक झपकते क्या हो गया। अन्य श्रद्धालुओं ने क्या कहा… 120 लोगों का ग्रुप पंजाब से आया था: एक महिला ने बताया- 120 से ज्यादा लोगों का ग्रुप पंजाब से आया था। नाव पलट गई। कई लोग डूब गए हैं। कुछ लोगों को निकाला गया है। नाविक को नाव रोकने के लिए कहा था: जिस नाव के साथ हादसा हुआ, उसमें लुधियाना जिले के जगराओं के तनिष जैन भी सवार थे। उन्होंने बताया दो बसों से करीब 130 लोग वृंदावन घूमने आए थे। सभी वृंदावन में फोगला आश्रम के पास रुके हैं। तीसरी बार में टक्कर, गोताखोर ने बचाया: उन्होंने कहा कि हमारी नाव जब पीपा पुल के पास पहुंची तो हम लोगों ने नाविक से कहा कि पुल आने वाला है, रोक लीजिए। लेकिन उसने नहीं रोका। 2 बार नाव टकराने से बची। तीसरी बार में टक्कर हो गई। पास में कुछ गोताखोर थे, जिन्होंने हमें बचाया है। अब जानिए हादसा कैसे हुआ
शुक्रवार दोपहर 2:30 बजे श्रद्धालु नाव पर सवार होकर यमुना में भ्रमण करने निकले थे। केसी घाट से मात्र 400 मीटर दूर पीपा पुल है। उस समय हवा भी काफी तेज चल रही थी। 2:45 बजे नाव हवा की वजह से हिलोरे मारने लगी। अचानक पीपा पुल से टकरा गई। फिर नाव पूरी तरीके से यमुना में समा गई। नाव में सवार सभी लोग डूब गए। मौके पर मौजूद गोताखारों ने रेस्क्यू चलाया। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची। 10 लोगों की मौत हो गई है। 5 लोग अभी भी लापता है। नाव का भी पता नहीं चला है। मौके पर सेना एनडीआरफ, डीएम-एसपी, डीआईजी मौजूद हैं। स्थानीय ने कहा- नाविक मनमाने तरीके से लोगों को बैठाते हैं स्थानीय लाला पहलवान ने बताया- नाव में 25-30 लोगों को बैठा लिया जाता है, जबकि कोई तय नियम नहीं है। न ही यात्रियों के लिए लाइफ जैकेट की व्यवस्था होती है। खैर, यह हादसा बहुत बड़ा है। उन्होंने कहा- प्रशासन अपने स्तर पर काम कर रहा है, लेकिन स्थानीय लोगों, तीर्थ पुरोहितों और ब्रजवासी पंडा सभा को साथ मिलकर एक ठोस योजना बनानी होगी। यहां बाहरी नाविक भी आ गए हैं। मौसी, भांजी, मामा, बुआ जैसे रिश्तेदारों को बुलाकर नाव चलवाई जा रही है, जो पूरी तरह गलत है। हादसे का कारण है ओवरलोडिंग हादसे का मुख्य कारण ओवरलोडिंग है। यह भी बताया जा रहा है कि पुल के पास कोई रस्सी फंस गई थी। नाव चलाना केवल सैर-सपाटा या गाने बजाने तक सीमित नहीं है, यह यमुना विहार जैसी आस्था से भी जुड़ा हुआ है, जहां हमारे ठाकुर जी ने यमुना विहार किया था। हम प्रशासन से निवेदन करते हैं कि स्पष्ट नियम बनाए जाएं। एक नाव में 8 से अधिक लोग न बैठें, सभी के लिए लाइफ जैकेट अनिवार्य हो और किराया भी तय किया जाए। अभी स्थिति यह है कि 100-200 रुपए लेकर जल्दी-जल्दी यात्रियों को घुमाकर उतार दिया जाता है। फिर नए सवार बैठा लिए जाते हैं। छोटे-छोटे बच्चे और नौसिखिये लोग चला रहे नावें- पार्षद
वृंदावन में कांग्रेस से पार्षद घनश्याम चौधरी ने बताया- यमुना जी में जो नाव पलटी है, उसमें ओवरलोडिंग एक बड़ा कारण रहा है। हमने कई बार प्रशासन को और नाविकों को चेताया था कि नावों में क्षमता से अधिक लोगों को न बिठाया जाए, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। न तो किसी के पास लाइफ जैकेट थी और न ही बचाव के कोई अन्य साधन। नाव चलाने वाले भी नियमों का पालन नहीं करते। यहां तक कि छोटे-छोटे बच्चे और नौसिखिये लोग नावें चला रहे हैं, जिन्हें पानी की गहराई और बहाव का अंदाजा नहीं है। हमारी प्रशासन से यही मांग है कि नावों के संचालन के लिए सख्त नियम बनाए जाएं। लाइफ जैकेट अनिवार्य की जाए, ओवरलोडिंग पर भारी जुर्माना लगाया जाए और केवल अनुभवी नाविकों को ही लाइसेंस दिया जाए ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके। ————————- ये खबर भी पढ़ें… वृंदावन में यमुना में नाव डूबी, 10 पर्यटकों की मौत:लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी, मदद के लिए सेना पहुंची; सभी पंजाब के रहने वाले
मथुरा के वृंदावन में 30 पर्यटकों से भरी प्राइवेट नाव यमुना नदी में पलट गई। हादसे में 10 पर्यटकों की डूबने से मौत हो गई। इनमें 7 महिलाएं और 3 पुरुष हैं। मृतकों में पति-पत्नी और पिता-बेटी शामिल हैं। नाव में सवार सभी पर्यटक बांके बिहारी क्लब के सदस्य थे और पंजाब से घूमने आए थे। पढ़ें पूरी खबर…
हादसे में जीवित बचे युवक ने बताया- हम लोग नाव में सवार होकर यमुना नदी में सैर कर रहे थे। सभी लोग कीर्तन कर रहे थे। नाविक तेज स्पीड में नाव चला रहा था। 2 से 3 बार नाविक को हम लोगों ने टोका। कहा कि नाव धीमे चलाओ। उस वक्त हवा तेज चल रही थी और नदी के बीच में हमारी नाव पांटून पुल से टकरा गई। टक्कर इतनी तेज थी कि नाव का संतुलन बिगड़ गया और वह देखते-ही-देखते पलट गई। हम सब पानी में गिर गए। चीख-पुकार मच गई। हम गोताखोरों को बुलाने के लिए कह रहे थे। लेकिन मदद नहीं मिली। एंबुलेंस भी नहीं आ रही थी। इसके बाद मौजूद दूसरी नाव और स्थानीय लोगों ने आकर हमें बचाना शुरू किया। हम पूरा परिवार और रिश्तेदार साथ थे। अभी तक काफी लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है, लेकिन कुछ लोग अभी भी लापता हैं या अस्पताल में हैं। हादसे के लिए प्रशासन जिम्मेदार है। हमारी मांग है कि नाविकों को पकड़ा जाए। स्थिति बहुत डरावनी थी, समझ ही नहीं आया कि पलक झपकते क्या हो गया। अन्य श्रद्धालुओं ने क्या कहा… 120 लोगों का ग्रुप पंजाब से आया था: एक महिला ने बताया- 120 से ज्यादा लोगों का ग्रुप पंजाब से आया था। नाव पलट गई। कई लोग डूब गए हैं। कुछ लोगों को निकाला गया है। नाविक को नाव रोकने के लिए कहा था: जिस नाव के साथ हादसा हुआ, उसमें लुधियाना जिले के जगराओं के तनिष जैन भी सवार थे। उन्होंने बताया दो बसों से करीब 130 लोग वृंदावन घूमने आए थे। सभी वृंदावन में फोगला आश्रम के पास रुके हैं। तीसरी बार में टक्कर, गोताखोर ने बचाया: उन्होंने कहा कि हमारी नाव जब पीपा पुल के पास पहुंची तो हम लोगों ने नाविक से कहा कि पुल आने वाला है, रोक लीजिए। लेकिन उसने नहीं रोका। 2 बार नाव टकराने से बची। तीसरी बार में टक्कर हो गई। पास में कुछ गोताखोर थे, जिन्होंने हमें बचाया है। अब जानिए हादसा कैसे हुआ
शुक्रवार दोपहर 2:30 बजे श्रद्धालु नाव पर सवार होकर यमुना में भ्रमण करने निकले थे। केसी घाट से मात्र 400 मीटर दूर पीपा पुल है। उस समय हवा भी काफी तेज चल रही थी। 2:45 बजे नाव हवा की वजह से हिलोरे मारने लगी। अचानक पीपा पुल से टकरा गई। फिर नाव पूरी तरीके से यमुना में समा गई। नाव में सवार सभी लोग डूब गए। मौके पर मौजूद गोताखारों ने रेस्क्यू चलाया। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची। 10 लोगों की मौत हो गई है। 5 लोग अभी भी लापता है। नाव का भी पता नहीं चला है। मौके पर सेना एनडीआरफ, डीएम-एसपी, डीआईजी मौजूद हैं। स्थानीय ने कहा- नाविक मनमाने तरीके से लोगों को बैठाते हैं स्थानीय लाला पहलवान ने बताया- नाव में 25-30 लोगों को बैठा लिया जाता है, जबकि कोई तय नियम नहीं है। न ही यात्रियों के लिए लाइफ जैकेट की व्यवस्था होती है। खैर, यह हादसा बहुत बड़ा है। उन्होंने कहा- प्रशासन अपने स्तर पर काम कर रहा है, लेकिन स्थानीय लोगों, तीर्थ पुरोहितों और ब्रजवासी पंडा सभा को साथ मिलकर एक ठोस योजना बनानी होगी। यहां बाहरी नाविक भी आ गए हैं। मौसी, भांजी, मामा, बुआ जैसे रिश्तेदारों को बुलाकर नाव चलवाई जा रही है, जो पूरी तरह गलत है। हादसे का कारण है ओवरलोडिंग हादसे का मुख्य कारण ओवरलोडिंग है। यह भी बताया जा रहा है कि पुल के पास कोई रस्सी फंस गई थी। नाव चलाना केवल सैर-सपाटा या गाने बजाने तक सीमित नहीं है, यह यमुना विहार जैसी आस्था से भी जुड़ा हुआ है, जहां हमारे ठाकुर जी ने यमुना विहार किया था। हम प्रशासन से निवेदन करते हैं कि स्पष्ट नियम बनाए जाएं। एक नाव में 8 से अधिक लोग न बैठें, सभी के लिए लाइफ जैकेट अनिवार्य हो और किराया भी तय किया जाए। अभी स्थिति यह है कि 100-200 रुपए लेकर जल्दी-जल्दी यात्रियों को घुमाकर उतार दिया जाता है। फिर नए सवार बैठा लिए जाते हैं। छोटे-छोटे बच्चे और नौसिखिये लोग चला रहे नावें- पार्षद
वृंदावन में कांग्रेस से पार्षद घनश्याम चौधरी ने बताया- यमुना जी में जो नाव पलटी है, उसमें ओवरलोडिंग एक बड़ा कारण रहा है। हमने कई बार प्रशासन को और नाविकों को चेताया था कि नावों में क्षमता से अधिक लोगों को न बिठाया जाए, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। न तो किसी के पास लाइफ जैकेट थी और न ही बचाव के कोई अन्य साधन। नाव चलाने वाले भी नियमों का पालन नहीं करते। यहां तक कि छोटे-छोटे बच्चे और नौसिखिये लोग नावें चला रहे हैं, जिन्हें पानी की गहराई और बहाव का अंदाजा नहीं है। हमारी प्रशासन से यही मांग है कि नावों के संचालन के लिए सख्त नियम बनाए जाएं। लाइफ जैकेट अनिवार्य की जाए, ओवरलोडिंग पर भारी जुर्माना लगाया जाए और केवल अनुभवी नाविकों को ही लाइसेंस दिया जाए ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके। ————————- ये खबर भी पढ़ें… वृंदावन में यमुना में नाव डूबी, 10 पर्यटकों की मौत:लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी, मदद के लिए सेना पहुंची; सभी पंजाब के रहने वाले
मथुरा के वृंदावन में 30 पर्यटकों से भरी प्राइवेट नाव यमुना नदी में पलट गई। हादसे में 10 पर्यटकों की डूबने से मौत हो गई। इनमें 7 महिलाएं और 3 पुरुष हैं। मृतकों में पति-पत्नी और पिता-बेटी शामिल हैं। नाव में सवार सभी पर्यटक बांके बिहारी क्लब के सदस्य थे और पंजाब से घूमने आए थे। पढ़ें पूरी खबर…