यूपी में बिजली के स्मार्ट मीटर पर बवाल बढ़ा:योगी ने जांच कमेटी से रिपोर्ट मांगी, अखिलेश ने 300 यूनिट फ्री देने का चुनावी दांव चला

यूपी में बिजली के स्मार्ट प्रीपेड मीटर पर सियासत शुरू हो चुकी है। लोग नाराज हैं, चुनावी साल में BJP के विधायक और पार्षद भी उनके साथ सड़क पर उतर आए हैं। अखिलेश यादव ने भी महंगी बिजली को चुनावी मुद्दा बना लिया है। उन्होंने दावा किया कि अगर 2027 में हमारी (सपा) सरकार बनती है, तो हम 300 यूनिट बिजली फ्री देंगे। सपा के इस दांव से भाजपा को कितना नुकसान होगा? भाजपा डैमेज कंट्रोल के लिए क्या कर रही है? आखिर यूपी पावर कारपोरेशन केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) का अध्यादेश लागू क्यों नहीं कर रहा? स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर लोगों की शिकायतें क्या हैं? पढ़िए ये खबर… बिजली कितना बड़ा राजनीतिक मुद्दा अखिलेश का ऑफर, चुनाव पर असर
किसी भी राज्य में बिजली बड़ा राजनीतिक मुद्दा रहा है। देश की राजधानी दिल्ली इसका उदाहरण है। फ्री बिजली के वादे से आप प्रचंड बहुमत से दिल्ली की सत्ता में काबिज हुई थी। मध्यप्रदेश में आज भी 100 यूनिट पर लोगों को 100 रुपए ही बिजली का बिल देना पड़ता है। राजस्थान, छत्तीसगढ़ सहित कई राज्यों में बिजली को लेकर कई तरह की स्कीमें चल रही हैं। खुद यूपी में किसानों और बुनकरों को सस्ती और फ्री बिजली दी जाती है। यूपी में 8 महीने बाद विधानसभा चुनाव होने हैं। पूरे प्रदेश में अभी स्मार्ट प्रीपेड मीटर का मुद्दा तूल पकड़ता जा रहा है। लोगों की परेशानी और प्रदर्शन की खबरों के बाद राजनीतिक दल भी सक्रिय हो चुके हैं। कांग्रेस के बाद रविवार को सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी प्रेस वार्ता के दौरान यूपी में चल रहे स्मार्ट प्रीपेड मीटर का मुद्दा उठाया और कहा कि अगर हमारी सरकार बनती है तो लोगों को 300 यूनिट बिजली फ्री देंगे। BJP के विधायक भी ऊर्जा मंत्री को लेटर लिख रहे
बिजली उपभोक्ता बिजली आफिस के साथ राजनीतिक दलों के कार्यालयों का भी घेराव कर रहे हैं। लखनऊ में मनकामेश्वर वार्ड के पार्षद रंजीत सिंह के कार्यालय का बिजली उपभोक्ता घेराव कर चुके हैं। सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा भी गोखले मार्ग स्थित मध्यांचल मुख्यालय के बाहर धरना दे चुके हैं। लखनऊ उत्तर के भाजपा विधायक डॉ. नीरज बोरा और बीकेटी से भाजपा विधायक योगेश शुक्ला भी प्रीपेड मीटर पर नाराजगी जताते हुए ऊर्जा मंत्री को पत्र लिख चुके हैं। CM योगी की कमेटी खामियों की कर रही जांच
सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी लोगों के गुस्से को शांत करने के लिए 4 सदस्यीय कमेटी गठित की है। कमेटी को 10 दिन में स्मार्ट मीटर को लेकर तकनीकी रिपोर्ट देनी है। इस रिपोर्ट से साबित होगा कि स्मार्ट मीटर सही चल रहे हैं, या वाकई में खामी है। रिपोर्ट आने तक पावर कारपोरेशन ने नए स्मार्ट मीटर लगाने पर रोक लगा दी है। हालांकि नए बिजली कनेक्शन पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर ही लगाए जा रहे हैं। यूपी पावर कारपोरेशन सीईए का अध्यादेश लागू क्यों नहीं कर रहा? पावर कारपोरेशन के अधिकारी बोले- हमें आदेश नहीं मिला
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) ने 1 अप्रैल, 2026 को स्मार्ट मीटर के नियमों में संशोधन करते हुए अध्यादेश लागू किया। इसमें सीईए ने कहा कि अब उपभोक्ता की मर्जी पर बिजली कंपनियां प्रीपेड या पोस्टपेड स्मार्ट मीटर लगाएंगे। सीईए ने विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) का हवाला दिया। ये अधिनियम उपभोक्ताओं को स्वतंत्रता देती है कि वह बिजली का कनेक्शन प्रीपेड या पोस्टपेड में लेगा। ये अध्यादेश 1 अप्रैल, 2026 से ही पूरे देश में प्रभावी हो चुका है। अब सवाल उठता है कि यूपी पावर कारपोरेशन इस आदेश को क्यों नहीं लागू कर रहा है? पावर कारपोरेशन से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि अभी उनके पास इसका कोई आदेश नहीं आया है। उप्र राज्य विद्युत नियामक आयोग की ओर से भी कोई दिशा-निर्देश नहीं मिला है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश वर्मा इस पर गहरी आपत्ति दर्ज कराते हैं। कहते हैं कि केंद्रीय कानून का उल्लंघन करना राष्ट्रद्रोह की श्रेणी में आता है। विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) का भी ये उल्लंघन है। आप किसी उपभोक्ता की मर्जी के खिलाफ जाकर खुद की मर्जी नहीं थोप सकते। सीईसी के अध्यादेश को लागू करने के लिए एक याचिका नियामक आयोग में पिछले दिनों उपभोक्ता परिषद की ओर से दाखिल की गई थी। इस पर आयोग ने पावर कारपाेरेशन के एमडी से जवाब मांगा है। आयोग ने 10 दिन का समय दिया था। अभी तक आयोग को जवाब नहीं मिला है। 22 अप्रैल को ये समय सीमा समाप्त हो रही है। नाराजगी के बाद सक्रिय हुए ऊर्जा मंत्री
स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर जनप्रतिनिधियों के फीडबैक के बाद आखिरकार रविवार को ऊर्जा मंत्री एके शर्मा भी सक्रिय नजर आए। ऊर्जा मंत्री ने अधिकारियों के साथ बैठक करने के बाद 5 तरह के निर्देश जारी किए। अब मऊ, लखनऊ, बस्ती के लोगों की बात पंखा और 3 LED बल्ब पर 2 हजार बिल
मऊ जिले के सरायगणेश के रहने वाले हरीश चंद्र चौहान कहते हैं- मैं दिन में दुकान पर चला जाता हूं। घर पर पत्नी अकेले रहती हैं। एक पंखा और मुश्किल से रात में तीन एलईडी बल्ब का उपयोग करता हूं। 75 वाट का पंखा अगर 24 घंटे लगातार चलाऊं तो भी 50 से 60 यूनिट बिजली खर्च होगी। वहीं तीन एलईडी बल्ब की खपत महीने में 10 से 12 यूनिट ही होती है, लेकिन यहां तो हर महीने दो हजार से ज्यादा का बिल आ रहा है। 7 महीने से मैं परेशान हूं। रिचार्ज किया, लेकिन 2 दिन बाद भी नहीं चालू हुई बिजली
लखनऊ के हर्षित गुप्ता का कनेक्शन नंबर 9257239000 है। उनका कनेक्शन भी बिजली विभाग ने बिना उनकी सहमति के पोस्टपेड से प्रीपेड कर दिया। शनिवार को उनका बैलेंस खत्म हो गया। माइनस में होते ही उनके घर की बिजली कट गई। बैलेंस रिचार्ज किया, लेकिन उनके घर की बिजली चालू नहीं हो पाई। हर्षित के मुताबिक उन्होंने 1912 पर 10 से ज्यादा बार कॉल कर शिकायत दर्ज कराई, लेकिन कोई राहत नहीं मिली। सोलर वाले उपभोक्ता के घर लगा दिया स्मार्ट मीटर
बस्ती जिले के बैरियवां मोहल्ला में रहने वाली पूनम श्रीवास्तव ने जनवरी में घर पर तीन किलोवाट का सोलर लगवाया है। उनके घर का कनेक्शन 4 किलोवाट का है। कायदे से विभाग को उनके यहां नेट मीटर लगाना था। लेकिन विभाग ने स्मार्ट मीटर लगा दिया। अब उन्हें हर 15 दिन में 1500 से 2000 का रिचार्ज कराना पड़ रहा है। दरअसल, नेट मीटर बिजली कंपनी से ली गई बिजली और सोलर से बची हुई ग्रिड को दी गई बिजली दोनों को मापता है। पूनम श्रीवास्तव के बेटे अजय श्रीवास्तव के मुताबिक सोलर से रोज औसतन 15 यूनिट बिजली का उत्पादन होता है, जबकि खपत 10 से 12 यूनिट की होती है। पहले UPPCL कंज्यूमर एप पर रोज की खपत दिख जाती थी। मगर जब से मैंने नेट मीटर न लगाने की शिकायत की, तब से ऐप पर रोज की खपत दिखनी बंद हो गई। अब 15 दिन की खपत एक साथ दिखा रहे हैं। बिजली कटी तो हंगामा हुआ 70 लाख कनेक्शन पर प्रीपेड मीटर लगाया, 5 लाख की बिजली काटी
यूपी में बिजली विभाग ने 70 लाख स्मार्ट मीटर पोस्टपेड कनेक्शन को बिना सहमति के पिछले महीने प्रीपेड में बदल दिया। उनकी जमा सिक्योरिटी राशि 2 हजार रुपए को एडवांस बैलेंस में डाल दिया। उपभोक्ताओं को इसकी जानकारी मैसेज के जरिए भेज दी। जब लोगों की खपत माइनस में गई तो विभाग ने बिजली काट दी। ऐसा 5 लाख से ज्यादा उपभोक्ताओं के साथ हुआ तो अलग-अलग शहरों में हंगामा मच गया। परेशान तब और बढ़ गई, जब रिचार्ज के बावजूद कई-कई दिन लोगों के घर की बिजली चालू नहीं हुई। 1912 पर शिकायत करने पर भी कोई राहत नहीं मिली। लोग बिजली आफिस शिकायत करने गए तो वहां भी हेल्पलाइन नंबर पर ही शिकायत की सलाह देकर टाल दिया गया। किसी भी स्तर पर जब लोगों की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो वे विरोध-प्रदर्शन को मजबूर हो गए। लखनऊ में चिनहट के लौलाई उपकेंद्र पर बीते 14 अप्रैल को 500 से ज्यादा लोग घेराव करने पहुंच गए। उनके साथ भरवारा-मल्हौर की पार्षद ममता रावत भी पहुंच गईं। घेराव करने वालों में सबसे ज्यादा कांशीराम कॉलोनी के लोग थे। सभी के मीटर विभाग ने बिना सहमति के पोस्टपेड से प्रीपेड कर दिए। लोगों के बैलेंस माइनस में गए तो विभाग ने बिजली काट दी। रिचार्ज के बाद भी जब बिजली चालू नहीं हुआ तो लोग परेशान हो गए। सभी फिर से पोस्टपेड मीटर लगाने की मांग कर रहे हैं। इसी तरह के प्रदर्शन इंदिरा नगर सेक्टर 14 न्यू पावर हाउस, गोमती नगर, जानकीपुरम, लखनऊ मध्य, अमौसी जोन कार्यालयों पर भी हुए। बिजली ऑफिसों में रोज 40 हजार से ज्यादा पहुंच रहे आवेदन
यूपी में रोज 40 हजार से ज्यादा आवेदन बिजली ऑफिसों में सिर्फ इसके पहुंच रहे हैं कि उनके घर का कनेक्शन वापस पोस्टपेड किया जाए। इसकी वजह लखनऊ के दीपक कुमार बताते हैं। उनके घर का बिजली कनेक्शन नंबर 599878417 है। स्मार्ट मीटर लगने के बाद उनके घर की खपत अचानक बढ़ गई। 9622 रुपए का बकाया दिखाते हुए विभाग ने बिजली काट दी। रिचार्ज कराने पर दूसरा मैसेज आया कि 174 रुपए और जमा करो। दीपक के मुताबिक जब बिजली काट दी थी तो कहां से 174 रुपए की बिजली मैंने खपत कर ली। इसी लूट-खसोट की वजह से लोग प्रीपेड स्मार्ट मीटर को पोस्टपेड स्मार्ट मीटर में बदलवाना चाहते हैं।
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