यूपी में 69 हजार शिक्षक भर्ती मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होनी है। यूपी सरकार और याचिकाकर्ताओं के 5-5 वकील अपना-अपना पक्ष रखेंगे। इस फैसले पर 67 हजार से ज्यादा शिक्षकों और आरक्षण प्रक्रिया से बाहर हो चुके करीब 9 हजार अभ्यर्थियों का भविष्य टिका है। इससे पहले सोमवार को दोनों पक्ष ने कोर्ट में हलफनामा दायर कर अपने जवाब दिए थे। आखिर नियुक्तियों को लेकर कहां पेंच फंसा है? सरकार के पास 2027 चुनाव से पहले इसे सुलझाने का क्या प्लान है? पढ़िए, इस रिपोर्ट में… पहले जानिए 69 हजार शिक्षक भर्ती विवाद शुरू कैसे हुआ? 4 दिसंबर, 2018 को यूपी सरकार ने प्राइमरी स्कूलों में सहायक टीचर के लिए 69 हजार पदों पर भर्तियां निकाली थी। ये भर्तियां यूपी बेसिक शिक्षा सर्विस के अनुसार होनी थीं। 6 जनवरी, 2019 को परीक्षा कराई गई। अगले दिन 7 जनवरी को कट ऑफ जारी किया गया। जनरल कैटेगरी के कैंडिडेट्स का पासिंग कट ऑफ 65 और रिजर्व कैटेगरी के लिए 60% रखा गया। 4.31 लाख आवेदकों में 4.09 लाख लोग परीक्षा में शामिल हुए थे। कट ऑफ को ही कोर्ट में चैलेंज किया गया भर्ती बोर्ड की ओर से कट ऑफ जारी करते ही बवाल मच गया। आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की ओर से इस पासिंग कट ऑफ को पहले हाईकोर्ट और बाद में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने 6 मई, 2020 और सुप्रीम कोर्ट ने 18 नवंबर, 2020 को ये अपील खारिज कर दी। मतलब पासिंग कट ऑफ में बदलाव करने से मना कर दिया। 12 मई, 2020 को सहायक अध्यापकों की भर्ती परीक्षा का परिणाम घोषित हुआ। कट ऑफ के आधार पर 1 लाख 46 हजार 60 लोग पास हुए। मेरिट के आधार पर 67,867 पदों पर हुई भर्ती उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा (अध्यापक) सेवा नियमावली 1981 की परिशिष्ट-1 के तहत 67 हजार 867 पदों पर भर्ती पूरी की गई। लेकिन, अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के लिए तय 1133 पद योग्य अभ्यर्थी नहीं मिलने की वजह से खाली रह गए। बाद में ये सभी पद अनुसूचित जाति (SC) के अभ्यर्थियों से भर दिए गए। भर्ती की अंतिम सिलेक्शन लिस्ट में जनरल वर्ग का कटऑफ 67.11%, OBC का 66.73%, SC का करीब 61.01% और ST का करीब 54.30% रहा। परिशिष्ट-1 में बताया गया है कि शिक्षक भर्ती में मेरिट कैसे तैयार होगी? इसमें सिर्फ भर्ती परीक्षा के अंक नहीं, बल्कि हाईस्कूल, इंटर, ग्रेजुएशन और BTC/B.Ed के अंकों को भी जोड़ा जाता है। सिलेक्शन लिस्ट तैयार करने में हुई थी चूक सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ रहे पिछड़ा-दलित संयुक्त मोर्चा के मीडिया प्रभारी राजेश चौधरी के मुताबिक, भर्ती में मेरिट लिस्ट तो बेसिक शिक्षा नियमावली-1981 की परिशिष्ट-1 के मुताबिक बनाई गई। लेकिन, आरक्षण अधिनियम-1994 के नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। उनका कहना है कि 1994 के आरक्षण नियम के मुताबिक अगर OBC, SC, ST का अभ्यर्थी जनरल वर्ग के कटऑफ के बराबर या उससे ज्यादा अंक लाता है, तो उसे जनरल सीट पर सिलेक्शन मिलना चाहिए। ऐसे अभ्यर्थी की गिनती रिजर्व कोटे में नहीं होगी। इससे उसकी रिजर्व सीट खाली होगी। उस पर उसी वर्ग के दूसरे अभ्यर्थी को मौका मिलेगा। आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में दी चुनौती भर्ती में आरक्षण के नियमों का सही पालन नहीं होने का आरोप लगाते हुए आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने जुलाई- 2020 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका दायर की। इसके साथ ही मामला राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) के पास भी पहुंचा। आयोग ने भी अपनी जांच में माना कि भर्ती में आरक्षण के नियमों का पूरी तरह पालन नहीं हुआ। इसके बाद लखनऊ के ईको गार्डन में अभ्यर्थियों का धरना-प्रदर्शन शुरू हो गया। मामले की सुनवाई के दौरान 2022 में तत्कालीन बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश चंद्र द्विवेदी ने कोर्ट में 6800 अभ्यर्थियों की एक दूसरी सिलेक्शन लिस्ट पेश की। सरकार का कहना था कि अगर आरक्षण के नियम सही तरीके से लागू किए जाएं, तो इतने और अभ्यर्थियों की नियुक्ति बनती है। इसके बाद 13 मार्च, 2023 को हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने फैसला सुनाया। कोर्ट ने 6800 अभ्यर्थियों की दूसरी लिस्ट रद्द कर दी। अदालत ने कहा कि ऐसा करने से भर्ती में नियुक्तियों की संख्या 69 हजार से ज्यादा हो जाएगी। हालांकि, कोर्ट ने पहली सिलेक्शन लिस्ट को सही माना। इस फैसले के खिलाफ याचिकाकर्ता डबल बेंच पहुंचे। इसके बाद 13 अगस्त, 2024 को डबल बेंच ने बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने सरकार को पूरी सिलेक्शन लिस्ट दोबारा तैयार करने का आदेश दिया। कहा कि आरक्षण के सभी नियमों का सही तरीके से पालन करते हुए 3 महीने के भीतर नई मेरिट लिस्ट जारी की जाए। सामान्य वर्ग के आवेदकों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई लखनऊ खंडपीठ के डबल बेंच के आदेश को सामान्य श्रेणी के चयनित हो चुके अभ्यर्थियों में शामिल रवि सक्सेना की ओर से अगस्त 2024 में सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। कहा कि उनका चयन राज्य सरकार ने किया है। वह 2020 से पढ़ा रहे हैं। कई शिक्षक लोन तक ले चुके हैं। अब नई लिस्ट तैयार होने पर उन्हें बाहर किया जाएगा, तो वे कहां जाएंगे? आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों की पैरवी कर रहे वकील ने रखा कोर्ट में सुझाव फिलहाल 69 हजार शिक्षक भर्ती का मामला सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच सुन रही है। 4 फरवरी, 2026 की सुनवाई में आरक्षित वर्ग की ओर से पैरवी कर रहे वकील मनीष गोस्वामी ने कोर्ट से कहा कि बेसिक शिक्षा विभाग में करीब 1.26 लाख पद खाली हैं। अगर सरकार इनमें से करीब 10% पद भी विवाद से जुड़े अभ्यर्थियों को दे दे, तो मामला आसानी से सुलझ सकता है। इस पर सरकार की ओर से पेश हुईं अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने सरकार से बात करने के लिए पहले 10 दिन का समय मांगा। बाद में 16 फरवरी को उन्होंने फिर आवेदन देकर तीन हफ्ते का और समय मांग लिया। इसके बाद 19 मार्च को मामला लिस्टेड हुआ, लेकिन उस दिन सुनवाई नहीं हो सकी। फिर 19 मई को यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि अगर अदालत सहमत होती है, तो वह नई मेरिट लिस्ट तैयार करने के लिए तैयार है। इसके बाद 21 जुलाई की सुनवाई में सरकार ने कोर्ट में 8 हजार 270 अभ्यर्थियों की नई लिस्ट पेश की। सरकार ने नई कटऑफ मेरिट भी दाखिल की। नई कटऑफ के मुताबिक- सरकार का कहना है कि 8 हजार 270 अभ्यर्थियों की इस सूची में सबसे ज्यादा प्रभावित उम्मीदवार जनरल कैटेगरी के हैं। 8270 में कौन-कौन लोग शामिल हैं, कहां अभी और पेंच फंसेगा सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पेश की गई 8 हजार 270 अभ्यर्थियों की सूची में कई तरह के उम्मीदवार शामिल हैं। इनमें सबसे बड़ी संख्या उन 4 हजार 940 अभ्यर्थियों की है, जो दूसरी और तीसरी काउंसिलिंग में शामिल नहीं हो पाए थे। इसके अलावा करीब 1200 ऐसे अभ्यर्थी भी हैं, जिन्हें भर्ती परीक्षा में गलत प्रश्न के कारण 1 अंक एक्स्ट्रा मिला था। इनके अलावा भी अलग-अलग कैटेगरी के कुछ अन्य अभ्यर्थी इस सूची में शामिल हैं। हालांकि, इस सूची में एक और बड़ा विवाद है। इसमें करीब 4 हजार B.Ed. डिग्रीधारी अभ्यर्थी भी शामिल हैं। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने देवेश शर्मा मामले में फैसला दिया था कि अब होने वाली नई प्राथमिक शिक्षक भर्तियों में B.Ed. डिग्रीधारियों की नियुक्ति नहीं की जा सकती। अब सवाल यह है कि अगर इस मामले में नई नियुक्तियां होती हैं, तो क्या B.Ed. अभ्यर्थियों को मौका मिलेगा या संविधान पीठ के फैसले के आधार पर उन्हें बाहर रखा जाएगा? यानी 8,270 अभ्यर्थियों की सूची में B.Ed. उम्मीदवारों का मुद्दा अभी भी सबसे बड़ा कानूनी पेंच बना हुआ है। इस पर अंतिम फैसला सुप्रीम कोर्ट को ही करना होगा। ————————– यह खबर भी पढ़ें- यूपी सरकार बोली- 67 हजार शिक्षकों की नौकरी नहीं जाएगी, सुप्रीम कोर्ट में कहा- नए पात्र अभ्यर्थियों को भी भर्ती करेंगे यूपी सरकार ने 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर दिया। सरकार ने बताया- 2020 में नियुक्त 67 हजार 867 शिक्षकों की नौकरी नहीं जाएगी। अगर इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक नई मेरिट लिस्ट में कुछ नए कैंडिडेट पात्र पाए जाते हैं, तो उन्हें खाली पड़े पदों पर नियुक्ति दी जाएगी। पढ़िए पूरी खबर…