प्रतापगढ़ में पूरा परिवार खत्म, जिंदा बचा बेटा फूट-फूटकर रोया:बोला- मां-बाप, भाई, पत्नी, बच्चे सब खत्म हो गए, दर्द कैसे बयां करूं

“परिवार के चले जाने का दर्द कोई नहीं समझ सकता। पल भर में मेरी पूरी दुनिया उजड़ गई… क्या ही बताऊं।” यह कहते-कहते प्रतापगढ़ के अमन श्रीवास्तव की आंखें भर आईं। जिस बेटे ने अपनों के साथ भविष्य के सपने संजोए थे, उसे गुरुवार को अपने ही परिवार के छह सदस्यों की चिताओं को एक-एक कर मुखाग्नि देनी पड़ी। अमन ने रुंधे गले से कहा- पिछले 5-6 साल से सरकारी आवास के लिए कोशिश कर रहा था। सोच रखा था कि घर मिल जाएगा तो उसी में छोटे भाई की शादी धूमधाम से करूंगा। लेकिन अब न घर बचा, न परिवार बचा। प्रतापगढ़ के महुली गांव में बुधवार रात करीब 2 बजे यह दर्दनाक हादसा हुआ। लगातार बारिश के बीच प्रमोद श्रीवास्तव का परिवार पुराने जर्जर मकान के एक कमरे में सो रहा था। तभी अचानक मकान की दो छतें भरभराकर गिर गईं। कुछ ही पलों में पूरा परिवार मलबे में दब गया। शुक्रवार को सदर विधायक राजेंद्र मौर्य ने अमन से मुलाकात कर उसे ढांढस बंधाया। उन्होंने हादसे पर गहरा दुख जताया और इसे बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया। विधायक ने कहा कि पीड़ित परिवार पिछले पांच साल से सरकारी आवास के लिए आवेदन कर रहा था, लेकिन दो बार उसका आवेदन निरस्त कर दिया गया। हम इसकी जांच कराएंगे। जर्जर मकान में डर के साये में रह रहा था परिवार अमन ने बताया- जिस मकान में हम रहते थे, वह पूरी तरह जर्जर हो चुका था। आए दिन छत और दीवारों का प्लास्टर टूटकर गिरता रहता था। पिछले पांच साल में मैंने सरकारी आवास के लिए तीन बार आवेदन किया। दो बार आवेदन रद्द हो गया। इस बार पीएम आवास योजना (2.0) में मेरा आवेदन स्वीकृत हो गया था। अधिकारियों ने कहा था कि एक महीने के भीतर खाते में पैसे आ जाएंगे, लेकिन रकम आने से पहले ही मेरा पूरा परिवार मुझसे छिन गया। विधायक बोले- आवेदन खारिज होने की भी जांच होगी सदर विधायक राजेंद्र मौर्य ने हादसे पर दुख जताते हुए कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। मैं जिलाधिकारी से बात कर दोनों आवेदन किन कारणों से खारिज हुए, इसकी जांच कराऊंगा। साथ ही जिले में जर्जर भवनों का सर्वे कराया जाएगा, ताकि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो और जरूरतमंद परिवारों को समय रहते हरसंभव सहायता मिल सके। इकलौते बचे अमन ने छह अपनों को दी अंतिम विदाई गुरुवार को शाम करीब 4:30 बजे पोस्टमार्टम के बाद सभी शवों को प्रयागराज के फाफामऊ गंगा घाट स्थित विद्युत शवदाह गृह ले जाया गया। यहां चार लोगों का अलग-अलग और दोनों मासूम बच्चों का एक साथ अंतिम संस्कार किया गया। इकलौते बचे अमन ने कांपते हाथों से एक-एक कर छह चिताओं को मुखाग्नि दी। अपनों को अंतिम विदाई देते समय वह कई बार बेसुध हो गया, जिसे परिजनों और रिश्तेदारों ने संभाला। चचेरे भाई ने कहा- अमन को सरकारी नौकरी मिले अमन के चचेरे भाई अंकुर श्रीवास्तव ने सरकार से मांग की है कि अमन को सरकारी नौकरी मिले। साथ ही मुआवजा भी मिले। ताकि वह इस हादसे के बाद दोबारा अपनी जिंदगी संभाल सके। हमारे पूरे परिवार की अब यही कोशिश है कि किसी तरह अमन को इस गहरे सदमे से बाहर निकाल सकें। उसका पूरा परिवार खत्म हो गया है। अब हम ही उसका सहारा हैं। जिंदगी दोबारा पटरी पर लाने की हर संभव कोशिश करेंगे। हादसे की तस्वीरें देखिए- डेढ़ साल पहले मुंबई से गांव लौटा था परिवार प्रमोद श्रीवास्तव करीब डेढ़ साल पहले मुंबई छोड़कर गांव लौटे थे। वह पहले मेडिकल क्षेत्र में मार्केटिंग की नौकरी करते थे, लेकिन तबीयत खराब होने के बाद उन्होंने मुंबई छोड़ दी। गांव लौटने के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए उन्होंने ई-रिक्शा चलाना शुरू किया। वहीं बड़ा बेटा अमन महुली मंडी में मुनीम का काम करता था। प्रमोद सड़क किनारे तख्त लगाकर सब्जी की दुकान भी चलाते थे। परिवार धीरे-धीरे अपनी स्थिति सुधारने की कोशिश कर रहा था। करीब डेढ़ माह पहले ही उन्होंने नया ई-रिक्शा खरीदा था। परिवार को उम्मीद थी कि अब हालात बेहतर होंगे और जल्द ही अपना नया घर बनाया जाएगा। तीन बिस्वा जमीन बेचकर जुटाए थे 25 लाख, फिर भी नहीं बन पाया घर परिवार के पास करीब 13 बिस्वा जमीन थी। करीब एक साल पहले प्रमोद ने तीन बिस्वा जमीन बेचकर लगभग 25 लाख रुपए जुटाए थे, ताकि नया मकान बनाया जा सके। लेकिन परिवार की आर्थिक परेशानियों और अन्य जरूरतों के चलते नया घर नहीं बन सका। अभी करीब 10 बिस्वा जमीन परिवार के पास बची हुई थी। परिवार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए भी आवेदन किया था। बताया गया कि पिछले छह सालों में तीन बार आवेदन किया गया। दो बार आवेदन निरस्त हो चुका था, जबकि तीसरी बार आवेदन प्रक्रिया में था। एक कमरे में रहता था पूरा परिवार पुराना मकान देखने में बड़ा था, लेकिन समय के साथ बेहद जर्जर हो चुका था। परिवार ने मजबूरी में सिर्फ एक कमरे को रहने लायक बनाया था। इसी कमरे में तीन तख्त पड़े थे, जिन पर पूरा परिवार रोज रात सोता था। कमरे में ही पूजा स्थल बना रखा था। परिवार ने अपनी सुविधा के लिए एसी भी लगवा रखी थी। अमन की योजना थी कि घर बन जाने के बाद वह अपने पिता की जिम्मेदारियां कम करेगा और परिवार को बेहतर जिंदगी देगा। लेकिन इससे पहले ही हादसे ने सब कुछ खत्म कर दिया। परिवार के मुताबिक, प्रमोद दोबारा मुंबई जाने की तैयारी कर रहे थे। उन्होंने 10 अगस्त का टिकट भी कराया था। हादसे वाले दिन ही उन्होंने अमन से कहकर अपना टिकट कैंसिल करा दिया था। एक ही परिवार के 6 लोगों की चली गई जान, तस्वीरें- अब जानिए कैसे बुधवार रात परिवार पर टूटा पहाड़… प्रतापगढ़ में लगातार बारिश के बीच बुधवार रात नगर कोतवाली क्षेत्र के महुली मोहल्ले में 100 साल पुराना मकान ढहने से एक ही परिवार के छह लोगों की मौत हो गई थी। हादसे के वक्त परिवार के सातों सदस्य गर्मी और उमस के कारण एसी वाले कमरे में सो रहे थे। रात करीब 2 बजे अचानक कमरे की छत भरभराकर गिर गई। किसी को संभलने या मदद के लिए आवाज लगाने तक का मौका नहीं मिला। मलबे में दबने से मकान मालिक प्रमोद श्रीवास्तव (60), उनकी पत्नी रीता (55), छोटे बेटे नितिन (25), बहू माधुरी (23) और उनके दो मासूम बेटे माधव (2) व अद्विक (10 माह) की मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मलबे में दबने और दम घुटने से सभी की जान गई। हादसे में 28 वर्षीय बड़ा बेटा अमन किसी तरह मलबे से बाहर निकल आया और शोर मचाकर आसपास के लोगों को बुलाया। सूचना पर पुलिस और दमकल की टीम मौके पर पहुंची। करीब दो घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सभी को मलबे से निकालकर जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने छह लोगों को मृत घोषित कर दिया। पोस्टमार्टम में सामने आया कि कई लोगों की अंदरूनी चोटों और हड्डियां टूटने से मौत हुई थी।अमन का अस्पताल में इलाज चल रहा है। सात लोगों के परिवार में अब वही अकेला जीवित बचा है। ———————————- ये खबर भी पढ़ें अतीक के बेटे के लीवर-लंग्स फटे, पसलियां टूटीं:23 चोटों से अबान की मौत; लाश देखकर भाई फूट-फूटकर रोया; पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पढ़िए
झांसी में माफिया अतीक अहमद के बेटे अबान (21) के शव पर 23 चोटें मिली हैं। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में सामने आया है कि तेज टक्कर से उसके लीवर, लंग्स और शरीर की तिल्ली (Spleen) फट गई। पसलियां भी टूट गई थीं। शरीर के अंदर ज्यादा ब्लीडिंग होने से उसकी मौत हुई। वहीं, कार में अबान की सीट के पीछे बैठे उसके साथी सोनू की मौत सिर की हड्डी टूटने से हुई। उसके दोनों हाथों में फ्रैक्चर मिला। पूरी खबर पढ़ें…