स्थान- पंचमुखी हनुमान मंदिर के पास, औरैया
तारीख- 15 जनवरी 2020
समय- दोपहर 3.17 बजे अचानक पूरा इलाका गोलियों से थर्रा उठता है। कोई कुछ समझ पाता, इससे पहले ही एडवोकेट मंजुल चौबे और उनकी चचेरी बहन (सरकारी टीचर) सुधा चौबे की लाशें बिछ जाती हैं। इसके बाद वहां भगदड़ मच जाती है। यह पूरा मामला समझने के लिए आपको 6 साल 6 महीने पीछे जाना पड़ेगा। जिस मंजुल चौबे की हत्या हुई, वह कोई और नहीं पूर्व मंत्री/MLC कमलेश पाठक के जिगरी दोस्त थे। मंजुल की हत्या का आरोप सपा नेता कमलेश पर ही है। फिलहाल वह जेल में बंद हैं। इस केस में 19 अगस्त (कल) को फैसला आने वाला है।
आखिर सपा नेता कमलेश और एडवोकेट मंजुल एक-दूसरे के दुश्मन कैसे बन गए, हत्या की वजह क्या थी, इस केस में कब क्या हुआ, यह सब जानने के लिए पढ़िए यह खास रिपोर्ट… जमीन के लिए हुआ था डबल मर्डर औरैया का पंचमुखी हनुमान…मंदिर के पास स्थित एक बीघा जमीन। पूरा विवाद इसी जमीन का है। इसी जमीन के लिए मंजुल चौबे और उनकी चचेरी बहन सुधा चौबे की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। विवाद सपा से पूर्व मंत्री कमलेश पाठक और वकील मंजुल चौबे और उनकी बहन सरकारी शिक्षिका सुधा चौबे के बीच में था। दोनों ही पक्ष जमीन पर अपना दावा कर रहे थे। 15 जनवरी 2020 को दोनों पक्ष इसी मामले को लेकर आमने-सामने आ गए। विवाद के बीच कमलेश पाठक की ओर से फायरिंग हुई। 900 तारीख, 71 गवाह…अब आएगा फैसला जिसमें सुधा और मंजुल को गोली लगी और दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना के बाद मौके पर भगदड़ मच गई। पुलिस ने घटना वाले दिन ही पूर्व MLC कमलेश पाठक, उनके भाई पूर्व ब्लॉक प्रमुख संतोष पाठक, रामू पाठक, कार चालक और गनर समेत कुल 11 लोगों के खिलाफ धारा 302 में रिपोर्ट दर्ज कर सभी को गिरफ्तार कर लिया। इस मामले की सुनवाई औरैया एमपी एमएलए कोर्ट में चल रही थी। जिस पर अभी तक 900 से अधिक तारीखें पड़ चुकी हैं। दोनों पक्षों से 72 गवाह पेश किए जा चुके हैं।। जिसमें अभियोजन की तरफ से 33 और बचाव पक्ष से 39 गवाह पेश हुए हैं। अब 19 अगस्त को मामले को लेकर फैसला आने वाला है। पढ़िए पूरा मामला- कमलेश पाठक और मंजुल चौबे दोनों ही पहले बहुत अच्छे दोस्त थे। लोग मंजुल को कमलेश पाठक की परछाई और उनका अंगरक्षक तक कहते थे। जब मंजुल चौबे औरैया के तिलक महाविद्यालय से छात्र संघ अध्यक्ष चुने गए, तब कमलेश पाठक उनके सबसे बड़े मददगार के रूप में साथ खड़े रहे। इस दोस्ती में दरार साल 2006 के नगर पालिका चुनाव के दौरान आई। मंजुल चौबे यह चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन उन्हें कमलेश पाठक से इसमें सहयोग नहीं मिला। यहीं से दोनों के बीच दूरियां बढ़ने लगीं। बाद में मंजुल चौबे भाजपा नेताओं के करीब आ गए। वहीं कमलेश सपा समर्थक थे। यहीं से पुरानी मित्रता धीरे-धीरे वर्चस्व की जंग में बदल गई। कमलेश ने बनवाया था मंजुल का घर जिस पंचमुखी हनुमान मंदिर के पास स्थित एक बीघा जगह को लेकर यह विवाद हुआ था, वहां से कमलेश और मंजुल का घर 500 मीटर से भी कम दूरी पर थे। आसपास के लोग यह भी बताते हैं कि मंजुल का घर कमलेश ने ही बनवाया था। दोनों पहले इसी जमीन पर बैठकर चौपाल लगाया करते थे। लेकिन जब दोनों में दूरियां बढ़ी तो जमीन के वर्चस्व को लेकर दोनों आमने-सामने आ गए। कमलेश के लोग मंजुल पर कमेंट करते। उसके परिवार को बीच में लाते। इन सब चीजों के बाद दुश्मनी और बढ़ती चली गई। भाई-बहन की मौके पर हो जाती है मौत 15 जनवरी 2020 को कमलेश उसी जमीन पर कुर्सी डालकर बैठे हुए थे। तभी मंजुल के पिता उनको बुरा-भला कहते हैं और कुर्सी से नीचे गिरा देते हैं। विवाद होता देख दोनों के घरवाले मौके पर आ जाते हैं। कमलेश का भाई संतोष और गनर भी मौके पर आ जाता है। दोनों पक्षों में विवाद बढ़ जाता है। कहासुनी के बीच फायरिंग होती है, जिसमें गोली मंजुल और उसकी बहन को लग जाती है। दोनों की मौके पर ही मौत हो जाती है। इस मामले में पुलिस ने चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की। 11 लोगों को आरोपी बनाया। इसी मामले में 11 जुलाई 2020 को 10 लोगों पर गैंगस्टर लगाया गया था। एक आरोपी के नाबालिग होने के चलते उसे जुबेनाइल कोर्ट में भेज दिया गया। गनर अवनीश प्रताप सिंह को गैंगस्टर से बरी कर दिया गया, लेकिन हत्या का केस जारी है। डबल मर्डर के बाद बीते सालों में प्रशासन ने कमलेश पाठक की 36.15 करोड़, संतोष पाठक की 9.75 करोड़ और रामू पाठक की 7.51 करोड़ की संपत्ति जब्त कर ली। डबल मर्डर में यह बनाए गए थे आरोपी पूर्व मंत्री एमएलसी कमलेश पाठक, पूर्व ब्लॉक प्रमुख संतोष पाठक, रामू पाठक, कुलदीप अवस्थी, विकल्प अवस्थी, राजेश शुक्ल, शिवम अवस्थी, आशीष दुबे, रविन्द्र चौबे उर्फ लल्ला, गनर अवनीश प्रताप सिंह और लवकुश सविता को आरोपी बनाया गया था। कमलेश पाठक ने रोक दिया था मुलायम सिंह का हेलीकॉप्टर औरैया के भड़ारीपुर गांव के रहने वाले राम औतार पाठक के बेटे कमलेश पाठक सबसे कम उम्र में सपा से विधायक बने थे। उन्होंने जनता दल से विधायकों को तोड़कर मुलायम सिंह की सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। इसके बाद से वह मुलायम सिंह के करीबियों में शामिल हो गए थे। उस समय समाजवादी सरकार में लोग उन्हें मिनी मुख्यमंत्री कहने लगे। कमलेश साल 1990 में विधान परिषद सदस्य रहे और 1991 में दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री बने। साल 2002 से डेरापुर से चुनाव लड़कर फिर से विधायक बने।2007 में दिबियापुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े लेकिन तब वह हार गए। मुलायम के हेलीकॉप्टर पर चलवाई गोलियां साल 2012 में सिकंदरा विधानसभा सीट से चुनाव लड़े और इस बार भी हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद साल 2013 में सपा सरकार ने उन्हें रेशम विभाग का अध्यक्ष बनाकर राज्यमंत्री का दर्जा दिया था। समाजवादी पार्टी ने 17 मई 2015 को MLC प्रत्याशियों की सूची में उन्हें शामिल किया और वह MLC चुने गए। इतना ही नहीं कमलेश पाठक ने जिला बचाओ आंदोलन में अपनी ही पार्टी का विरोध किया था। मुख्यमंत्री रहते हुए मुलायम सिंह ने औरैया जिला खत्म किया तो कमलेश पाठक बगावत पर उतर आए थे। उन्होंने औरैया में सभा करने आए मुलायम सिंह के हेलीकॉप्टर पर गोलियां चलवा दी थीं। एक घंटे तक हेलीकॉप्टर हवा में उड़ता रहा था और उसे उतरने नहीं दिया था।
………………………………………………………………………….. यह खबर भी पढ़ें- इटावा में मां-बेटी की गला रेतकर हत्या:घर में मिले लहूलुहान शव, दूधिया पहुंचा तो खुलासा, दो दिन पहले आया था स्कूटी सवार यूपी के इटावा में मां-बेटी की गला रेतकर हत्या कर दी गई। सोमवार सुबह 8 बजे घटना का खुलासा तब हुआ, जब दूध वाला घर में दूध देने पहुंचा। उसने काफी देर गेट खटखटाया पर दरवाजा नहीं खुला। दूधवाले ने महिला के नोएडा में कार्यरत पति को फोन किया। यहां पढ़ें पूरी खबर
तारीख- 15 जनवरी 2020
समय- दोपहर 3.17 बजे अचानक पूरा इलाका गोलियों से थर्रा उठता है। कोई कुछ समझ पाता, इससे पहले ही एडवोकेट मंजुल चौबे और उनकी चचेरी बहन (सरकारी टीचर) सुधा चौबे की लाशें बिछ जाती हैं। इसके बाद वहां भगदड़ मच जाती है। यह पूरा मामला समझने के लिए आपको 6 साल 6 महीने पीछे जाना पड़ेगा। जिस मंजुल चौबे की हत्या हुई, वह कोई और नहीं पूर्व मंत्री/MLC कमलेश पाठक के जिगरी दोस्त थे। मंजुल की हत्या का आरोप सपा नेता कमलेश पर ही है। फिलहाल वह जेल में बंद हैं। इस केस में 19 अगस्त (कल) को फैसला आने वाला है।
आखिर सपा नेता कमलेश और एडवोकेट मंजुल एक-दूसरे के दुश्मन कैसे बन गए, हत्या की वजह क्या थी, इस केस में कब क्या हुआ, यह सब जानने के लिए पढ़िए यह खास रिपोर्ट… जमीन के लिए हुआ था डबल मर्डर औरैया का पंचमुखी हनुमान…मंदिर के पास स्थित एक बीघा जमीन। पूरा विवाद इसी जमीन का है। इसी जमीन के लिए मंजुल चौबे और उनकी चचेरी बहन सुधा चौबे की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। विवाद सपा से पूर्व मंत्री कमलेश पाठक और वकील मंजुल चौबे और उनकी बहन सरकारी शिक्षिका सुधा चौबे के बीच में था। दोनों ही पक्ष जमीन पर अपना दावा कर रहे थे। 15 जनवरी 2020 को दोनों पक्ष इसी मामले को लेकर आमने-सामने आ गए। विवाद के बीच कमलेश पाठक की ओर से फायरिंग हुई। 900 तारीख, 71 गवाह…अब आएगा फैसला जिसमें सुधा और मंजुल को गोली लगी और दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना के बाद मौके पर भगदड़ मच गई। पुलिस ने घटना वाले दिन ही पूर्व MLC कमलेश पाठक, उनके भाई पूर्व ब्लॉक प्रमुख संतोष पाठक, रामू पाठक, कार चालक और गनर समेत कुल 11 लोगों के खिलाफ धारा 302 में रिपोर्ट दर्ज कर सभी को गिरफ्तार कर लिया। इस मामले की सुनवाई औरैया एमपी एमएलए कोर्ट में चल रही थी। जिस पर अभी तक 900 से अधिक तारीखें पड़ चुकी हैं। दोनों पक्षों से 72 गवाह पेश किए जा चुके हैं।। जिसमें अभियोजन की तरफ से 33 और बचाव पक्ष से 39 गवाह पेश हुए हैं। अब 19 अगस्त को मामले को लेकर फैसला आने वाला है। पढ़िए पूरा मामला- कमलेश पाठक और मंजुल चौबे दोनों ही पहले बहुत अच्छे दोस्त थे। लोग मंजुल को कमलेश पाठक की परछाई और उनका अंगरक्षक तक कहते थे। जब मंजुल चौबे औरैया के तिलक महाविद्यालय से छात्र संघ अध्यक्ष चुने गए, तब कमलेश पाठक उनके सबसे बड़े मददगार के रूप में साथ खड़े रहे। इस दोस्ती में दरार साल 2006 के नगर पालिका चुनाव के दौरान आई। मंजुल चौबे यह चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन उन्हें कमलेश पाठक से इसमें सहयोग नहीं मिला। यहीं से दोनों के बीच दूरियां बढ़ने लगीं। बाद में मंजुल चौबे भाजपा नेताओं के करीब आ गए। वहीं कमलेश सपा समर्थक थे। यहीं से पुरानी मित्रता धीरे-धीरे वर्चस्व की जंग में बदल गई। कमलेश ने बनवाया था मंजुल का घर जिस पंचमुखी हनुमान मंदिर के पास स्थित एक बीघा जगह को लेकर यह विवाद हुआ था, वहां से कमलेश और मंजुल का घर 500 मीटर से भी कम दूरी पर थे। आसपास के लोग यह भी बताते हैं कि मंजुल का घर कमलेश ने ही बनवाया था। दोनों पहले इसी जमीन पर बैठकर चौपाल लगाया करते थे। लेकिन जब दोनों में दूरियां बढ़ी तो जमीन के वर्चस्व को लेकर दोनों आमने-सामने आ गए। कमलेश के लोग मंजुल पर कमेंट करते। उसके परिवार को बीच में लाते। इन सब चीजों के बाद दुश्मनी और बढ़ती चली गई। भाई-बहन की मौके पर हो जाती है मौत 15 जनवरी 2020 को कमलेश उसी जमीन पर कुर्सी डालकर बैठे हुए थे। तभी मंजुल के पिता उनको बुरा-भला कहते हैं और कुर्सी से नीचे गिरा देते हैं। विवाद होता देख दोनों के घरवाले मौके पर आ जाते हैं। कमलेश का भाई संतोष और गनर भी मौके पर आ जाता है। दोनों पक्षों में विवाद बढ़ जाता है। कहासुनी के बीच फायरिंग होती है, जिसमें गोली मंजुल और उसकी बहन को लग जाती है। दोनों की मौके पर ही मौत हो जाती है। इस मामले में पुलिस ने चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की। 11 लोगों को आरोपी बनाया। इसी मामले में 11 जुलाई 2020 को 10 लोगों पर गैंगस्टर लगाया गया था। एक आरोपी के नाबालिग होने के चलते उसे जुबेनाइल कोर्ट में भेज दिया गया। गनर अवनीश प्रताप सिंह को गैंगस्टर से बरी कर दिया गया, लेकिन हत्या का केस जारी है। डबल मर्डर के बाद बीते सालों में प्रशासन ने कमलेश पाठक की 36.15 करोड़, संतोष पाठक की 9.75 करोड़ और रामू पाठक की 7.51 करोड़ की संपत्ति जब्त कर ली। डबल मर्डर में यह बनाए गए थे आरोपी पूर्व मंत्री एमएलसी कमलेश पाठक, पूर्व ब्लॉक प्रमुख संतोष पाठक, रामू पाठक, कुलदीप अवस्थी, विकल्प अवस्थी, राजेश शुक्ल, शिवम अवस्थी, आशीष दुबे, रविन्द्र चौबे उर्फ लल्ला, गनर अवनीश प्रताप सिंह और लवकुश सविता को आरोपी बनाया गया था। कमलेश पाठक ने रोक दिया था मुलायम सिंह का हेलीकॉप्टर औरैया के भड़ारीपुर गांव के रहने वाले राम औतार पाठक के बेटे कमलेश पाठक सबसे कम उम्र में सपा से विधायक बने थे। उन्होंने जनता दल से विधायकों को तोड़कर मुलायम सिंह की सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। इसके बाद से वह मुलायम सिंह के करीबियों में शामिल हो गए थे। उस समय समाजवादी सरकार में लोग उन्हें मिनी मुख्यमंत्री कहने लगे। कमलेश साल 1990 में विधान परिषद सदस्य रहे और 1991 में दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री बने। साल 2002 से डेरापुर से चुनाव लड़कर फिर से विधायक बने।2007 में दिबियापुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े लेकिन तब वह हार गए। मुलायम के हेलीकॉप्टर पर चलवाई गोलियां साल 2012 में सिकंदरा विधानसभा सीट से चुनाव लड़े और इस बार भी हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद साल 2013 में सपा सरकार ने उन्हें रेशम विभाग का अध्यक्ष बनाकर राज्यमंत्री का दर्जा दिया था। समाजवादी पार्टी ने 17 मई 2015 को MLC प्रत्याशियों की सूची में उन्हें शामिल किया और वह MLC चुने गए। इतना ही नहीं कमलेश पाठक ने जिला बचाओ आंदोलन में अपनी ही पार्टी का विरोध किया था। मुख्यमंत्री रहते हुए मुलायम सिंह ने औरैया जिला खत्म किया तो कमलेश पाठक बगावत पर उतर आए थे। उन्होंने औरैया में सभा करने आए मुलायम सिंह के हेलीकॉप्टर पर गोलियां चलवा दी थीं। एक घंटे तक हेलीकॉप्टर हवा में उड़ता रहा था और उसे उतरने नहीं दिया था।
………………………………………………………………………….. यह खबर भी पढ़ें- इटावा में मां-बेटी की गला रेतकर हत्या:घर में मिले लहूलुहान शव, दूधिया पहुंचा तो खुलासा, दो दिन पहले आया था स्कूटी सवार यूपी के इटावा में मां-बेटी की गला रेतकर हत्या कर दी गई। सोमवार सुबह 8 बजे घटना का खुलासा तब हुआ, जब दूध वाला घर में दूध देने पहुंचा। उसने काफी देर गेट खटखटाया पर दरवाजा नहीं खुला। दूधवाले ने महिला के नोएडा में कार्यरत पति को फोन किया। यहां पढ़ें पूरी खबर