काशी में बहनों ने भाई की लाश को राखी बांधी:रोते हुए बोलीं- हर साल गिफ्ट देता था, इस बार ऐसा सरप्राइज मिला जो बर्दाश्त नहीं

वाराणसी में भाई की लाश को 3 बहनों ने राखी बांधी और तिलक लगाकर अंतिम विदाई दी। शव से लिपटकर फूट-फूटकर रोईं। कहा- भाई हर साल कोई न कोई गिफ्ट देकर सरप्राइज करता था। अबकी ऐसा सरप्राइज दिया, जो बर्दाश्त नहीं। जिस घर में त्योहार पर हंसी-खुशी होनी थी, वहां अब सिर्फ रोने की आवाजें हैं। अब परिवार को कौन संभालेगा? दरअसल, रक्षाबंधन से 3 दिन पहले यानी 25 अगस्त को त्रिलोकी मोदनवाल उर्फ मंटू (50) की वाटर कूलर में करंट उतरने से मौत हो गई। उसी दिन उनका अंतिम संस्कार किया गया। बड़े बेटे ने मुखाग्नि दी। त्रिलोकी जिम चलाते थे और खुद भी बॉडीबिल्डर थे। वह मिस्टर नॉर्थ इंडिया रह चुके थे। मामला शहर के चेतगंज के काली महल का है। दैनिक भास्कर ने त्रिलोकी के घर जाकर भाई को खोने वाली बहनों का दर्द जाना। उन्होंने बताया- हम लोगों ने राखी खरीद ली थी। मायके आने की पूरी तैयारी कर ली थी, तभी पता चला कि भाई की मौत हो गई। 4 तस्वीरें देखिए- विधायक नीलकंठ तिवारी ने लगवाया था वाटर कूलर बहन बोली- हर साल भैया बोलते कि टीका सीधा लगाओ त्रिलोकी की छोटी बहन निवेदिता ने कहा- मैंने भाई के लिए उनकी पसंद की राखी खरीद ली थी। मिठाई भी उनकी पसंद की मंगा ली थी। भैया को राखी का बहुत शौक था। हर साल वह राखी बंधवाने को लेकर बहुत उत्साहित रहते थे। भाई राखी और तिलक को लेकर भी हमसे मजाक करते थे। अगर तिलक टेढ़ा लग जाता तो कहते थे कि सीधा टीका लगाओ और राखी भी ठीक से बांधो। लेकिन पता था कि इस तरह राखी बांधनी पड़ेगी। ‘भाई ने इस बार धोखा दे दिया, ये बर्दाश्त नहीं’ त्रिलोकी की दूसरी बहन सोनी ने रोते हुए कहा- भाई हर रक्षाबंधन पर बहनों को कुछ न कुछ नया गिफ्ट देते थे। राखी उनके लिए सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि बहनों के साथ खुशियां बांटने का दिन होता था। अगर कोई बहन राखी बांधने नहीं आती थी तो भाई उससे शिकायत करते थे। इस बार भी उम्मीद थी कि हर साल की तरह भाई राखी बंधवाएंगे, तिलक लगवाएंगे और बहनों को कोई सरप्राइज देंगे। इस बार भाई ने धोखा दे दिया। ये गिफ्ट बहुत महंगा पड़ गया। बेटी बोली- पापा ने कहा था कि घर आऊंगा तो लड्डू बनाएंगे त्रिलोकी की छोटी बेटी सोनम ने रोते हुए कहा- पापा बोलकर गए थे कि शाम को आकर लड्डू बनाएंगे, लेकिन नहीं आए। मां की तबीयत अक्सर खराब रहती है, इसलिए पापा घर का भी ध्यान रखते थे। खाना बनाने से लेकर दूसरे कामों में मदद करते थे। अब उनके जाने के बाद घर कौन संभालेगा? नवंबर में मेरे बड़े भाई की शादी तय है। पिता ने शादी की तैयारी भी शुरू कर दी थी। परिवार में शादी को लेकर बातचीत चल रही थी। पापा भाई की शादी कराए बिना ही छोड़कर चले गए। पत्नी बोलीं- मेरा परिवार बिखर गया भाई बोला- परिवार के एक सदस्य को नौकरी मिले भाई गौतम ने बताया कि त्रिलोकी ने बॉडीबिल्डिंग में कई उपलब्धियां हासिल की थीं। उम्र बढ़ने के बाद उन्होंने प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना बंद कर दिया था। बॉडीबिल्डिंग प्रतियोगिताओं में जज के रूप में बुलाए जाते थे। खेल के क्षेत्र में इतनी उपलब्धियां हासिल करने के बावजूद परिवार को अब सिर्फ आश्वासन मिल रहे हैं। नेताओं की ओर से आर्थिक मदद और चेक देने की बात कही गई, लेकिन परिवार सिर्फ चेक नहीं चाहता। उनकी मांग है कि बच्चों के भविष्य को देखते हुए परिवार के एक सदस्य को नौकरी दी जाए। ————————– ये खबर भी पढ़िए- काशी में घरों के दरवाजों पर जलाए जा रहे शव: 84 घाट डूबे, 5 हजार दुकानें बंद; 15 दिन में 3.75 करोड़ का नुकसान काशी में गंगा का जलस्तर बढ़ने से 84 घाट डूब गए हैं। महाश्मशान मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट भी डूबे हैं। घाट किनारे 100 से ज्यादा मंदिर आधे से ज्यादा डूब चुके हैं। दैनिक भास्कर ने हालात की पड़ताल की, तो 2 बड़ी परेशानी सामने आईं। पढ़ें पूरी खबर…