मायावती बोलीं-आकाश को एक शर्त पर BSP में वापस लूंगी:ससुर को राजनीति छोड़नी होगी; अशोक सिद्धार्थ बोले- बहनजी के लिए जान दे सकता हूं

मायावती ने भतीजे आकाश आनंद से नाराजगी की वजहों का बुधवार को खुलासा कर दिया। साथ ही बसपा में उनकी वापसी के लिए एक बड़ी शर्त रख दी है। मायावती ने कहा, पूर्व सांसद अशोक सिद्धार्थ अगर अपने दामाद आकाश आनंद का भला चाहते हैं तो उन्हें राजनीति से संन्यास ले लेना चाहिए। तभी आकाश को फ्री हैंड मिलेगा। बसपा सुप्रीमो ने दोपहर 2:46 बजे सोशल मीडिया X पर बयान जारी किया और अशोक सिद्धार्थ को जमकर खरी खोटी सुनाई। कहा, आकाश आनंद अपने ससुर के स्वार्थी व्यवहार का खामियाजा भुगत रहे हैं। मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को 3 सितंबर, 2026 को पद से हटा दिया था। वह पार्टी में एक आम समर्थक की हैसियत से जुड़े हुए हैं। मायावती ने कहा था कि आकाश आनंद को अभी राजनीतिक रूप से और अधिक परिपक्व होने की जरूरत है। बसपा से निष्कासित अशोक सिद्धार्थ ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा, ‘राजनीति से संन्यास तो बहुत छोटी चीज है। बहनजी का आदेश हो तो मैं अपनी जान दे दूंगा।’ जानिए मायावती ने क्या नए संकेत दिए 9 सितंबर को बसपा कार्यालय ने एक लेटर जारी किया। इसमें मायावती ने कहा- यूपी, उत्तराखंड और पंजाब के चुनाव बसपा के लिए महत्वपूर्ण हैं। पार्टी डॉ. आंबेडकर के ‘शोषित से शासक वर्ग’ बनने के सपने को पूरा करने के लिए पूरे तन-मन-धन से जुटी है। बहुजन मूवमेंट और आरक्षण को लेकर खड़ी की जा रही चुनौतियों का जिक्र करते हुए उन्होंने दलित समाज से अपील की है कि निजी स्वार्थ में ऐसा कोई काम न करें, जिससे मिशन को नुकसान हो। उन्होंने आगे कहा- पार्टी में भटके हुए लोगों को सुधारने का मौका दिया जा रहा है, लेकिन रुकावट बनने वालों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी हो रही है। इसी क्रम में पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ का उदाहरण दिया गया। मायावती ने स्पष्ट किया कि अशोक सिद्धार्थ ने पार्टी के मिशन से ज्यादा अपनी निजी और पारिवारिक महत्वाकांक्षाओं को महत्व दिया। इसका सीधा खामियाजा उनके दामाद आकाश आनंद को भुगतना पड़ा है। बसपा प्रमुख ने कहा है कि अशोक सिद्धार्थ के पास अभी भी मौका है कि वे राजनीति से पूरी तरह संन्यास ले लें। ऐसा होने पर ही आकाश आनंद स्वतंत्र होकर काम कर सकेंगे और तभी पार्टी उन्हें उनकी पुरानी जिम्मेदारियां वापस देने के बारे में सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी। … तो आकाश आनंद की वापसी की स्क्रिप्ट तैयार बसपा प्रमुख मायावती के रुख से तय हो चुका है कि आकाश आनंद की वापसी होगी। अब अशोक सिद्धार्थ की ओर से राजनीति से संन्यास की घोषणा की जाएगी। इसके बाद मायावती आकाश को पार्टी की उनकी पुरानी जिम्मेदारियां सौंप देंगी। अशोक सिद्धार्थ के राजनीति से संन्यास लेने की जो बात बसपा प्रमुख मायावती ने की, वो लाइन 3 सितंबर को ही राज्य सभा सांसद रामजी गौतम बोल चुके हैं। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, पार्टी की राष्ट्रीय बैठक से निकलने के बाद रामजी गौतम वीवीआईपी गेस्ट हाउस में रुके थे। वहां उनसे मिलने पहुंचे भीमराव अंबेडकर, विजय प्रताप और मुनकाद अली के सामने उन्हाेंने कहा कि आकाश को राजनीति में सक्रिय देखना चाहते तो अशोक सिद्धार्थ को राजनीति को अलविदा करना होगा। कौन हैं अशोक सिद्धार्थ? आकाश आनंद को सोशल मीडिया पर अनफॉलो करवाया पार्टी सूत्रों के मुताबिक, मायावती ने बीते रविवार को सबसे पहले मेवालाल गौतम को बुलाया। मेवालाल से कहा- पार्टी के जिलाध्यक्षों और पदाधिकारियों से फोन पर बात करो। आकाश आनंद और अशोक सिद्धार्थ को सोशल मीडिया पर अनफॉलो करवाओ। मेवालाल लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय के प्रभारी हैं। मायावती के आंख-कान उन्हें ही बताया जाता है। इस पूरे घटनाक्रम के पीछे सोशल मीडिया पर आकाश को लेकर चल रही गतिविधियां हैं। दिल्ली के यू-ट्यूबर समरराज के आकाश आनंद से जुड़े दो पोस्ट में से एक को अशोक सिद्धार्थ द्वारा री-ट्वीट करने की बात सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, इसकी जानकारी सतीश चंद्र मिश्रा ने मायावती तक पहुंचाई। इसके बाद मायावती ने मेवालाल गौतम को दोनों नेताओं को अनफॉलो कराने के निर्देश दिए। क्या बसपा में अब आकाश की जगह उनके छोटे भाई ईशान लेंगे? आकाश आनंद ने जेवर में पार्टी के अंदरूनी ढांचे पर उठाए थे सवाल आकाश आनंद ने 25 अगस्त को नोएडा के जेवर में कहा था कि उन्होंने अपने करियर को उसी दिन दांव पर लगा दिया था, जिस दिन उन्होंने ऐलान किया था कि सुधार करेंगे और अब सबकी सुनेंगे। उन्होंने कहा था- ‘हमारे कुछ पदाधिकारी हमें काम नहीं करने देते हैं। गलत लोग गलत जगह बैठे हुए हैं। बहुत सी ऐसी स्ट्रेटजी हैं, टेक्नोलॉजी हैं, जो हम अपनाना चाहते हैं, मगर कर नहीं पाते हैं, क्योंकि स्ट्रक्चर ऐसा बना है। वहां बैठे हुए लोग कुछ करने नहीं देना चाहते हैं, जिनको हम अभी छेड़ नहीं सकते हैं, जिनको हम अभी हिला नहीं सकते हैं।’ आकाश आनंद ने कहा था कि वे उन्हें बड़ा मानते हैं और उनका आदर करते हैं। उन्होंने बिना छेड़े कुछ सुधार करने की कोशिश करने की बात कही थी। 31% वोट वाली पार्टी को इसी स्ट्रक्चर ने 2024 में 9.4% पर पहुंचा दिया। यह 2022 में मिले 13% वोट के सदमे से भी बड़ा सदमा था। ———— ये भी पढ़ें- मायावती ने आकाश को तीसरी बार पद से क्यों हटाया:क्या पॉलिटिकल करियर खत्म?, बसपा को फायदा या नुकसान मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद से राष्ट्रीय समन्वयक का पद छीन लिया। लिखा- ‘मैंने आकाश को पार्टी में काम करने की इजाजत दी, लेकिन उन्हें अभी और मैच्योर होने की जरूरत है।’ सवाल है, क्या इस फैसले से आकाश के पॉलिटिकल करियर पर ग्रहण लग जाएगा? सब कुछ 5 पॉइंट में जानिए…