सपा ने 6 जिलों में नए जिलाध्यक्ष बनाए:अयोध्या में जय सिंह को जिम्मेदारी, नोएडा से पश्चिमी यूपी संभालेंगे इंदर प्रधान

समाजवादी पार्टी ने बुधवार शाम यूपी के 6 जिलों में नए जिलाध्यक्ष के नाम की घोषणा की है। इनमें अयोध्या, बलिया, बांदा, पीलीभीत, गौतमबुद्ध नगर और उन्नाव जिले शामिल हैं। अखिलेश यादव के निजी सचिव गंगाराम ने सपा प्रमुख से हरी झंडी मिलने के बाद ये लिस्ट जारी की है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि नए चेहरों को जिम्मेदारी देने से सपा संगठन को नई ऊर्जा मिलेगी। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर वोट बैंक भी साधा जा सकेगा। अभी कुछ दिनों पहले ही सपा ने हर जिले के लिए अलग मेनिफेस्टो तैयार किए जाने की बात कही थी। लिस्ट में जातीय संतुलन का रखा ध्यान सपा नेतृत्व ने यह फेरबदल पूरी तरह से क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों को ध्यान में रखकर किया है। पश्चिमी यूपी को संभालने के लिए गौतमबुद्ध नगर में इंदर प्रधान और पीलीभीत में धर्मेश गंगवार को जिम्मेदारी दी है। वहीं सेट्रल यूपी में जयचंद्र विमल को उन्नाव और उमेश को बांदा का जिलाध्यक्ष नियुक्त किया है। नए जिलाध्यक्षों के कंधों पर न केवल संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की जिम्मेदारी होगी, बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं में समन्वय बनाकर 2027 के विधानसभा चुनाव में सपा के जनाधार को बढ़ाने का मुख्य जिम्मा भी रहेगा। नए जिलाध्यक्षों के बारे में जानिए धर्मेश गंगवार (पीलीभीत) : लंबे समय से सपा से जुड़े रहे हैं। उन्होंने 2010 में सपा के टिकट पर जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीता था। इसके बाद 2015 में उनकी पत्नी दीप्ति गंगवार भी जिला पंचायत सदस्य चुनी गई थीं। धर्मेश गंगवार कुछ समय के लिए सपा से अलग होकर भाजपा में गए थे, लेकिन बाद में दोबारा सपा में लौट आए। धर्मेश गंगवार पीलीभीत के बरखेड़ा में कारोबार भी करते हैं और उनका एक बारात घर है। अब उन्हें जगदेव सिंह जग्गा की जगह पीलीभीत का नया जिलाध्यक्ष बनाया गया है। इंदर प्रधान (गौतमबुद्ध नगर) : इंदर प्रधान करीब 20 साल से सपा से जुड़े हैं। इंदर प्रधान की पहचान किसान नेता के तौर पर भी रही है। गौतमबुद्ध नगर के दादरी के पल्ला गांव के निवासी हैं। जिले की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। जून 2026 में भी पल्ला गांव में उनके नेतृत्व में सपा की जन पंचायत आयोजित हुई थी, जिसमें पार्टी ने विधानसभा चुनाव की तैयारियों की शुरुआत की थी। इससे पहले अगस्त 2021 में भी उन्हें गौतमबुद्ध नगर का जिलाध्यक्ष बनाया गया था। उस समय पार्टी ने नई जिला कार्यकारिणी में युवाओं के साथ अलग-अलग वर्गों को प्रतिनिधित्व देने पर जोर दिया था। पहली बार हर जिले के लिए बनेगा अलग मेनिफेस्टो सपा की इस नई रणनीति का सीधा मकसद मतदाताओं से स्थानीय स्तर पर जुड़ाव बनाना है। अब पार्टी चुनाव में ‘हम पूरे प्रदेश में क्या करेंगे’ की बजाय ‘आपके जिले में क्या नया लाएंगे’ पर सीधी बात करेगी। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का मानना है कि पूर्वांचल, पश्चिमी यूपी, अवध और बुंदेलखंड हर क्षेत्र की जमीनी चुनौतियां अलग हैं। एक सामान्य घोषणा-पत्र में सिर्फ राज्यस्तरीय बड़े मुद्दे ही जगह पा पाते हैं, जिससे स्थानीय मुद्दे छूट जाते हैं। जनता तभी पार्टी से जुड़ाव महसूस करेगी, जब उनके क्षेत्र के सड़क, पानी, बिजली, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसी बुनियादी समस्याओं का जिक्र मेनिफेस्टो में होगा। रणनीतिक बैठक में मिला सुझाव, अखिलेश ने दी मंजूरी तकरीबन 2 महीने पहले अखिलेश यादव की मौजूदगी में सभी जिलाध्यक्षों और पदाधिकारियों की एक उच्चस्तरीय रणनीतिक बैठक हुई थी। बैठक में जिला स्तर के मुद्दों को मेनिफेस्टो में शामिल करने का सुझाव दिया गया और इसके फायदे गिनाए गए। सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने इस प्रस्ताव को तुरंत हरी झंडी दे दी। इसके बाद, सपा प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल ने सभी जिलाध्यक्षों और पदाधिकारियों को फरमान जारी कर दिया है कि वे अपने-अपने इलाकों का पूरा कच्चा-चिट्ठा तैयार करें। पार्टी नेतृत्व ने सभी जिलाध्यक्षों को अपने-अपने क्षेत्र की 5 सबसे बड़ी समस्याओं, बंद पड़े प्रोजेक्ट्स और स्थानीय रोजगार की संभावनाओं की रिपोर्ट तैयार करने को कहा है। ————- ये भी पढ़ें- अखिलेश की नई रणनीति-75 जिले, 75 घोषणा पत्र:पहली बार ऐसा करेंगे; मुलायम के समय से एक ही मेनिफेस्टो बनता आ रहा अखिलेश यादव ने 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव के लिए नई स्ट्रैटजी बनाई है। सपा पहली बार ‘पूरे प्रदेश के लिए एक ही घोषणा-पत्र’ की पुरानी परंपरा को तोड़ने जा रही है। अब हर जिले का एक अलग, एक्सक्लूसिव ‘माइक्रो लेवल’ घोषणा-पत्र जारी करेगी। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…