मौसम विभाग का अनुमान था कि इस साल यूपी में कम बारिश होगी। कई जिलों में सूखे जैसे हालात होंगे। जुलाई-अगस्त में ऐसी ही स्थिति रही, लेकिन सितंबर आते-आते मौसम पलट गया। 26 सितंबर को मौसम विभाग ने बताया कि यूपी में तय कोटे से 2% ज्यादा बारिश हुई है। इतना ही नहीं, वाराणसी, प्रयागराज, बहराइच, उन्नाव, बाराबंकी जैसे 32 जिलों में बाढ़ के हालात हैं। अब आम आदमी अनुमान लगा रहा है कि लगातार बारिश की वजह से इस साल सर्दियां जल्दी आ जाएंगी। तो क्या अलनीनो का असर खत्म हो गया है? वाकई सर्दियां जल्दी शुरू हो जाएंगी? इस साल हाड़ कंपा देने वाली सर्दी पड़ेगी या सामान्य रहेगी? पढ़िए यूपी एक्सप्लेनर में… सवाल-1: मौसम अचानक कैसे पलट गया, क्या अलनीनो का असर खत्म हो गया? जवाब: नहीं, अलनीनों का असर बना हुआ है। यही वजह है कि ओवरऑल यूपी में सामान्य बारिश हुई। लेकिन, जिलेवार आंकड़ें देखें तो अलग तस्वीर दिखती है। सवाल-2: अलनीनो बना है, तो यूपी में सामान्य से ज्यादा बारिश कैसे हुई? जवाब: मानसून पर कुछ स्थानीय मौसमी कारक भी असर डालते हैं। इन्हीं कारकों ने अलनीनो के निगेटिव असर को बैलेंस किया और यूपी के 60 जिलों में अच्छी बारिश कराई। इस दौरान 2 मौसमी कारक सक्रिय हुए। इसे ऐसे समझ सकते हैं… A) पॉजिटिव इंडियन ओशन डाइपोल (IOD): हिंद महासागर के पश्चिमी हिस्से यानी अफ्रीका के पास का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म और पूर्वी हिस्से यानी भारत और इंडोनेशिया के पास का पानी ठंडा होने की स्थिति को पॉजिटिव IOD कहते हैं। इसने क्या किया: पानी के तापमान में अंतर के कारण समुद्री हवाएं गर्म पानी को भारत से दूर धकेलती रहीं। इससे बंगाल की खाड़ी के आसपास कम दबाव का क्षेत्र बना। इस वजह से भारी मात्रा में नमी और बादल बने। B) मैडेन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO): यह बादलों, तेज हवाओं और भारी बारिश का एक ऐसा विशालकाय छल्ला (बैंड) है, जो पूरी दुनिया का चक्कर लगाता है। इसने क्या किया: MJO हिंद महासागर के ऊपर से गुजरा तो बंगाल की खाड़ी में बनने वाला मानसूनी सिस्टम मजबूत हुआ। इससे यूपी, बिहार, एमपी जैसे राज्यों में सितंबर में अचानक मूसलाधार बारिश हुई और बाढ़ जैसे हालात बन गए। सवाल-3: क्या अलनीनो की वजह से यूपी में इस साल भयानक सर्दी भी पड़ सकती है? जवाब: सामान्य तौर पर ऐसा नहीं होता है। अलनीनो की वजह से गर्मी बढ़ती है, न कि सर्दी। फिर भी संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटोनियो गुटेरस का बयान ऐसा होने का शक पैदा करता है। 3 सितंबर, 2026 को उन्होंने कहा कि अलनीनो की वजह से दुनिया एक्सट्रीम वेदर के डेंजर जोन में पहुंच चुकी है। एक्सट्रीम वेदर का मतलब भयानक गर्मी, भयानक सर्दी या भयानक बारिश से है। वहीं, WMO के मुताबिक, अलनीनो का असर फरवरी, 2027 तक बना रहेगा। नवंबर से जनवरी के बीच यह अपने पीक पर होगा। यह भारत में कड़ाके की सर्दी का समय होता है। सामान्यतः अलनीनो की वजह से सर्दियों के दिन घट जाते हैं। इसके असर को ऐसे समझ सकते हैं… सवाल-4: अगर ‘एक्स्ट्रीम वेदर’ वाली बात सच साबित हुई, तो क्या होगा? जवाब: यूपी समेत पूरे देश में कहीं-कहीं सामान्य या उससे ज्यादा बारिश होने के पीछे लोकल मौसमी फैक्टर काम कर रहे थे। अगर सर्दियों में भी लोकल फैक्टर सक्रिय रहे, तो यूपी में कड़ाके की सर्दी पड़ सकती है। इन 3 मौसमी फैक्टर्स की वजह से ऐसा हो सकता है। फैक्टर 1- मजबूत पश्चिमी विक्षोभ: यह भारत में सर्दियों का सबसे बड़ा स्थानीय नियंत्रक है। भूमध्य सागर से उठने वाले ये तूफान उत्तर-पश्चिम भारत (राजस्थान, पंजाब, दिल्ली, उत्तराखंड, पश्चिमी यूपी, जम्मू-कश्मीर) में सर्दियों की बारिश और हिमालय में भारी बर्फबारी करवाते हैं। अलनीनो पर असर: पहाड़ों पर भारी बर्फबारी होगी। वहां से आने वाली बर्फीली हवाएं मैदानी इलाकों (जैसे यूपी, बिहार, पंजाब आदि) में तापमान तेजी से गिराकर कड़ाके की ठंड या सामान्य सर्दियां ला सकती हैं। फैक्टर 2- यूरेशिया और हिमालय में बर्फ की चादर: अक्टूबर-नवंबर में यूरेशिया (यूरोप और एशिया का उत्तरी भाग) और तिब्बत के पठार पर कितनी बर्फबारी होती है। इसका सीधा असर भारत की सर्दियों पर पड़ता है। अलनीनो पर असर: अगर यूरेशिया में बर्फ की चादर उम्मीद से ज्यादा चौड़ी और घनी होती है, तो सर्दियों में चलने वाली जेट स्ट्रीम भारत की ओर खिसकेगी। इससे साइबेरिया और मध्य एशिया से आने वाली अत्यधिक ठंडी हवाएं भारत तक आएंगी और अलनीनो की गर्मी का असर कम हो जाएगा। फैक्टर 3- एंटीसाइक्लोन: सर्दियों में आमतौर पर मध्य या उत्तर-पश्चिम भारत के ऊपर उच्च वायुदाब क्षेत्र (एंटीसाइक्लोन) बनता है। अलनीनो पर असर: अगर एंटीसाइक्लोन मजबूत बना रहा, तो आसमान साफ रहेगा। इससे रात के समय ‘रेडिएशन कूलिंग’ (धरती से गर्मी का वापस अंतरिक्ष में जाना) बढ़ेगी और रातें काफी ठंडी हो जाएंगी। सुबह के समय घना कोहरा बनेगा, जो दिन में भी तापमान को बढ़ने नहीं देगा। सवाल-5: अगर अलनीनो के सामान्य असर से इस साल कम सर्दियां पड़ीं, तो क्या होगा? जवाब: अलनीनो वाली ‘गर्म सर्दी’ खेती के लिए एक बड़ा संकट बन सकती है… —————————————– ये एक्सप्लेनर भी पढ़ें… आग का गोला क्यों बन जाती हैं स्लीपर बसें: पश्चिम के देशों में बैन; भारत में लगातार हादसे, फिर भी प्रतिबंध क्यों नहीं 23 सितंबर की रात 9:30 बजे एक लग्जरी स्लीपर बस दिल्ली के कश्मीरी गेट से महोबा (यूपी) के लिए निकली। रात 11:30 बजे यमुना एक्सप्रेस-वे पर इसमें आग लग गई। 9 यात्री जल गए। शव इतनी बुरी तरह जल चुके थे कि पहचानना नामुमकिन था। इंग्लैंड, जर्मनी, चीन समेत कई देशों में ये बसें बैन हैं, लेकिन भारत में नहीं। लेकिन भारत में लगातार हादसों के बाद भी स्लीपर बसें प्रतिबंधित नहीं हैं। छोटे से हादसे के बाद ही ये बसें आग का गोला कैसे बन जाती हैं? पढ़िए यूपी एक्सप्लेनर में…