कानपुर के पॉश इलाके कल्याणपुर में आलीशान फ्लैट, पूरे यूपी में दवा सप्लाई के ठेके और ₹60 करोड़ का टर्नओवर…। यह सब देखकर लोगों को लगता था कि विनीत मिनोचा का परिवार बहुत खुशहाल है। लेकिन, परिवार के सदस्यों में पनप चुकी नफरत बहुत डरावनी थी। 5 सितंबर की रात विनीत को 17 बार चाकू से गोद डाला गया। आखिरी सांस तक उन्हें टॉर्चर करते हुए मार डाला। 24 घंटे के अंदर ही कानपुर पुलिस ने लोगों को तब चौंका दिया, जब बहू शालू को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने कत्ल के पीछे 3 कारण बताए- इसके बाद शालू 20 दिन जेल में रही। फिर 24 सितंबर को पुलिस बेटे सुब्रत को सामने लेकर आई। अब तक कहानी पूरी तरह से बदल चुकी थी। कातिल शालू नहीं, बेटा सुब्रत था। पुलिस के मुताबिक, सुब्रत ने ₹6 लाख में अपने पुराने नौकर विशाल को कत्ल की सुपारी दी थी। साजिश सिर्फ पिता को रास्ते से हटाने की नहीं थी, बल्कि अपने चाचा पुनीत मिनोचा को इस कत्ल में फंसाना भी थी। लेकिन, सुब्रत जानता था कि चाचा के खिलाफ पुलिस को ज्यादा देर तक गुमराह नहीं कर सकेगा। इसलिए उसने पूरी कहानी विशाल के जरिए पत्नी की तरफ मोड़ दी। कत्ल से 25 दिन पहले से वह पत्नी के खिलाफ ऐसे सबूत तैयार करने लगा, जिससे हत्या के बाद जांच शुरू होते ही पुलिस खुद-ब-खुद शालू तक पहुंचे। करोड़पति कारोबारी की हत्या की पूरी साजिश आज की संडे बिग स्टोरी में पढ़िए… पत्नी के खिलाफ सबूत जुटाने के लिए क्या चाल चली? DCP वेस्ट एसएम कासिम आबिदी कहते हैं- सुब्रत अपने पिता विनीत मिनोचा से नफरत तो लंबे समय से करता था। लेकिन, उन्हें मारने की प्लानिंग वो पिछले 1-2 महीने से करने लगा था। वो जानता था कि पापा को रास्ते से हटाने के बाद उनके भाई यानी कि सुब्रत के चाचा पुनीत उसके पीछे आएंगे। भाई की मौत की सच्चाई जानने की पूरी कोशिश करेंगे। हो सकता है, प्रॉपर्टी को लेकर भी झगड़ा पैदा हो जाए। इसलिए वह चाहता था कि एक तीर से दो निशाने लगे। पापा की हत्या और चाचा को कातिल बना दिया जाए। उसने अपना यही प्लान विशाल से बताया। विशाल सुब्रत की दुकान में नौकरी करता था, जिसे 7 महीने पहले विनीत ने निकाल दिया था। प्लान करते वक्त दोनों यह भी जानते थे कि पुनीत की शहर में अच्छी पकड़ है। वह खुद को बेगुनाह साबित करने के लिए सारे जतन करेगा। इसलिए करीब 25 दिन पहले साजिश में बदलाव किया गया। सुब्रत ने अब अपनी ही पत्नी को साजिश के मास्टरमाइंड की तरह पेश करने का फैसला किया। सबूत क्रिएट करने के लिए हत्या से करीब 20 दिन पहले पत्नी शालू को लेकर परेड चौराहा पहुंचा। यहां उसको विशाल मिला। तीनों कार में एक साथ बड़ा चौराहा स्थित जेड स्क्वायर मॉल में शॉपिंग करने गए। सुब्रत खुद कार में बैठा रहा, जबकि शालू और विशाल को मॉल से शॉपिंग करने भेज दिया। जिससे लोगों के सामने विशाल शालू के साथ दिखे। पुलिस जब बाद में मोबाइल लोकेशन देखे, तब विशाल के साथ शालू की लोकेशन सामने आए। फिर सुब्रत दोनों को 80 फीट रोड के बनारसी टी स्टॉल पर लेकर पहुंचा। यहां जूही परमपुरवा के लारेब की दुकान से एक ताले की डुप्लिकेट चाबी भी बनवाई। इसके 100 रुपए सुब्रत ने विशाल के जरिए दिलवाए। सुब्रत, विशाल का इलाज कराने डॉक्टर के पास गया। बाकी की दोनों लोकेशन पर पत्नी को साथ रखा, खुद कार में ही बैठा रहा। पब्लिक के सामने विशाल और शालू को ही भेजा। हत्या की रात- विनीत ने विशाल को चोर समझा, फिर बदलना पड़ा प्लान फिर आई 5 सितंबर की रात, जब सुब्रत ने अपने पिता को मारने की प्लानिंग की थी। कत्ल से पहले शाम 6 से लेकर 8 बजे के बीच सुब्रत ने विशाल को 4 बार फोन किया। विशाल जानता था कि अकेले वो ये काम नहीं कर सकता था। इसलिए उसने अपने दोस्त राज किशोर को भी शामिल कर लिया। जैसा कि पहले से तय था, सुब्रत रात 9:30 बजे अपनी पत्नी शालू को लेकर पार्टी के लिए घर से निकल गया। जाने से पहले उसने अपार्टमेंट के CCTV बंद कर दिए। रात 9:45 बजे विशाल और राजकिशोर असली चाबी से फ्लैट के अंदर दाखिल हुए, जो सुब्रत पहले ही विशाल को दे चुका था। प्लान था कि हर रोज करीब 10 बजे तक कारोबारी विनीत सो जाते थे। सुब्रत ने विशाल और राजकिशोर से कहा था कि विनीत का मुंह तकिए से दबाकर दम घोंट देना। कमरे में कोई उथल-पुथल नहीं होनी चाहिए। जिससे सुबह सबको लगे कि उनकी हार्ट अटैक से मौत हो गई है। राजकिशोर और विशाल कारोबारी के कमरे में पहुंचकर छिप गए। रात 11:30 बजे तक इंतजार किया। कारोबारी को नींद नहीं आ रही थी। वह देर से कमरे में आए। जैसे ही लाइट जलाई, उनकी नजर विशाल पर पड़ी। वह चोर समझकर चिल्लाए- बचाओ चोर… बचाओ। विशाल घबरा गया। वह अपने साथ चाकू लेकर आया था। उसी से उसने विनीत पर हमला कर दिया। एक-एक करके 17 वार किए। फिर तेजी से राजकिशोर के साथ फ्लैट से निकल गया। यही वो बड़ी चूक हो गई, जिससे पुलिस विशाल तक सिर्फ 14 घंटे में पहुंच गई। दरअसल, अपार्टमेंट के बाहर लगे CCTV में दोनों नजर आ गए। इस सिचुएशन के लिए सुब्रत पहले से तैयार था। उसके प्लान के तहत ही विशाल ने पुलिस के सामने शालू का नाम लिया। सुब्रत ने चालाकी से शालू के मोबाइल से विशाल को फोन करवाए थे। कानपुर पुलिस ने भी बिना गहराई से जांच किए 24 घंटे के अंदर शालू को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। चाचा बोले- मैं खुद हैरान हूं, भतीजा क्यों फंसाना चाह रहा था जब मामले में खुलासे को लेकर लगातार सवाल उठे, तो कस्टडी रिमांड के दौरान सुब्रत और विशाल का सामना कराया गया। दोनों की बातचीत में इतने विरोधाभास मिले कि पुलिस को यह समझने में वक्त नहीं लगा कि ये दोनों कुछ छिपा रहे हैं। बंद कमरे में हुई पूछताछ में सुब्रत टूट गया और उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया। सुब्रत ने पुलिस को बताया कि वह हत्या का आरोप अपने चाचा पुनीत मिनोचा पर डालना चाहता था, लेकिन उन्हें फंसाने की कोई ठोस वजह नहीं मिली। इसके बाद उसने अपनी पत्नी शालू पर आरोप लगवा दिए। दैनिक भास्कर ने चाचा पुनीत मिनोचा से बात की। वह कहते हैं- मैं पिछले 37 साल से अपने बड़े भाई विनीत मिनोचा से अलग रह रहा हूं। मेरा मकान नवाबगंज के सिग्नेचर सिटी में है। मैं कंस्ट्रक्शन का कारोबार करता हूं। मैं खुद भी हैरान हूं कि सुब्रत मुझे क्यों फंसाना चाहता था? हमारी तो मुलाकातें भी कम होती थीं। कभी बहस तक नहीं हुई, झगड़ा तो दूर की बात है। बेटा बोला- अच्छा हुआ गिरफ्तार हुआ, नहीं तो आत्महत्या कर लेता 24 सितंबर को सुब्रत गिरफ्तार किया गया। उसने कहा- मुझे पिता की हत्या कराने का कोई अफसोस नहीं है, वो अय्याश थे। मुझे केवल इतना पछतावा है कि उन्हें इस तरह चाकू से गोदकर नहीं मारना चाहिए था। मैं ऐसी हत्या नहीं कराना चाहता था। शालू जेल गई तो मुझे गिल्ट हुआ, मैं नींद की गोलियां खाने लगा था। अगर पुलिस मुझे न पकड़ती तो मैं आत्महत्या कर लेता। सुब्रत ने आगे कहा- पापा के कई महिलाओं से अफेयर थे। मुझे डर था कि वे किसी से शादी करके घर न ले आएं। वह संपत्ति में हिस्सेदार बन जाएगी। मैं एक-एक रुपए के लिए मोहताज था, जबकि पापा गोवा में लड़कियों के साथ पार्टी की तस्वीरें दिखाते थे। मुझ पर करीब 40 लाख रुपए का कर्ज था। पापा मुझे सिर्फ 40 हजार रुपए की पॉकेट मनी देते थे। मेरे साथ नौकरों जैसा व्यवहार करते थे। जेल से छूटकर शालू मायके जाएगी, 5 साल का बेटा इंतजार कर रहा 20 दिनों तक जेल में रहने के बाद अब शालू की रिहाई का रास्ता साफ हो रहा है। पुलिस उसकी भूमिका को लेकर कोर्ट में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल करने की तैयारी में है। शालू के वकील शिवाकांत दीक्षित ने दैनिक भास्कर को बताया- शुक्रवार तक कोर्ट में पुलिस की ओर से कोई प्रार्थना पत्र नहीं पहुंचा था। शनिवार और रविवार को कोर्ट बंद रहेगा। ऐसे में अब सोमवार तक शालू के जेल से बाहर निकलने की संभावना है। —————————- यह खबर भी पढ़ें- सुरेंद्र कोली जिस फांसी से बरी हुआ…उसी पर लटका मिला, जहां दुकान खोली, वहां सदाराम बनकर रहा 13 मामलों में फांसी की सजा पा चुके सुरेंद्र कोली को बरी कर दिया गया। 19 साल तक जेल में बंद रहा सुरेंद्र छूटने के बाद उत्तराखंड में अपने गांव गया। 18 सितंबर को अचानक एक खबर आई- निठारी कांड के आरोपी रहे सुरेंद्र कोली ने फंदे से लटककर जान दी। सवाल है कि आखिर उसने ऐसा क्यों किया? इनके जवाब आज की संडे बिग स्टोरी में जानते हैं…