अपराध समाज में डर और असुरक्षा का माहौल पैदा करता है, जिसका सामाजिक चेतना पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। यदि समाज में ऐसी स्थिति बनी रहती है तो यह अनुचित और अन्यायपूर्ण है। किसी भी सभ्य समाज में आपराधिक न्याय व्यवस्था का उद्देश्य व्यक्ति की गरिमा की रक्षा करना, समाज में स्थिरता और कानून-व्यवस्था बनाए रखना तथा लोगों के बीच विश्वास और एकजुटता को मजबूत करना होता है। न्यायालयों की जिम्मेदारी केवल अपराध और अपराधी तक सीमित नहीं होती, बल्कि उन्हें आरोपी के अधिकारों और राज्य तथा समाज के हितों के बीच संतुलन भी स्थापित करना होता है। अदालत को यह सुनिश्चित करना पड़ता है कि न्याय हो और न्याय होता हुआ दिखाई भी दे। जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा ने यह टिप्पणी उस समय की, जब अदालत ने चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में आरोपी मुस्कान और साहिल को हत्या का दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। बुधवार को कोर्ट ने इस केस में क्या हुआ। पूरे दिन कोर्ट में क्या हुआ। जज ने क्या कहा पढ़िए इस रिपोर्ट में…. दोपहर से ही डीजे कोर्ट में पहुंची भीड़
19 सितंबर को केस की आखिरी बहस के बाद फैसले की तारीख 30 सितंबर तय हुई थी। 30 सितंबर को लंच के बाद शाम 4.30 बजे का समय जजमेंट सुनाने के लिए तय किया गया। उससे पहले ही डिस्ट्रिक्ट जज का कोर्टरूम खचाखच भर गया। सौरभ के परिजनों के अलावा वहां तमाम वकील भी पहुंचे। जो देशभर में चर्चित हुए मेरठ के नीले ड्रम हत्याकांड पर अदालत का ऐतिहासिक फैसला सुनना चाहते थे। शाम 4.30 बजे जिला जज अरविंद मिश्रा चेयर पर आए। पहले साहिल फिर मुस्कान का नाम लिया
जेल के वीसी रूम से मुस्कान-साहिल को ऑनलाइन ही कोर्ट से जोड़ा गया। डीजे ने कंप्यूटर स्क्रीन पर मुस्कान-साहिल को देखा। उन्होंने पहले साहिल शुक्ला फिर मुस्कान रस्तोगी का नाम लिया। इसके बाद डीजे ने कहा कि तमाम गवाहों के बयान और सुबूतों के आधार पर ये सिद्ध होता है कि आप दोनों ने ही सौरभ राजपूत की हत्या की है। हत्या के बाद साक्ष्य मिटाने के लिए उसकी लाश के टुकड़े करके नीले ड्रम में भर दिए। ये एक जघन्य अपराध है। दोनों का दोष सिद्ध होता है। सुप्रीम कोर्ट की 2025 के एक जजमेंट की टिप्पणियों को पढ़ा
कहा कि दोनों को क्या सजा दी जाए? हम तो फैसला कर चुके हैं लेकिन हम तुमसे पूछते हैं कि तुम दोनों इस पर आगे क्या कहना चाहते हो? क्या कहोगे? इसके बाद डीजे ने 15 दिन का समय फैसला सुनाने के लिए दे दिया। केस में फैसला सुरक्षित रख लिया। इसके साथ ही डीजे ने सुप्रीमकोर्ट में जनवरी 2025 के केस एडाकांदी दिनेशन वर्जेज स्टेट ऑफ केरला के केस में सुनाई गई एक टिप्पणी को उल्लेखित किया। अदालत के सामने डीजे ने उस जजमेंट की टिप्पणी को एक सामाजिक संदेश देते हुए पढ़ा। कहा कि अपराध समाज में डर का माहौल बनाता है और इससे सामाजिक चेतना पर बुरा असर पड़ता है। अगर समाज में ऐसी स्थिति बनी रहती है, तो यह अनुचित और अन्यायपूर्ण है। हर सभ्य समाज में, आपराधिक प्रशासनिक व्यवस्था का मकसद व्यक्ति की गरिमा की रक्षा करना, समाज में स्थिरता और व्यवस्था बहाल करना और समाज में भरोसा और एकजुटता पैदा करना होता है। अपनी ज़िम्मेदारियाँ निभाते हुए, अदालतों का काम एक तरफ़ आरोपी और दूसरी तरफ़ राज्य/समाज के हितों के बीच संतुलन बनाना होता है। कहा कि ये सामाजिक चेतना पर बुरा असर
जिला जज ने सौरभ की पत्नी मुस्कान उसके प्रेमी साहिल को हत्या का दोषी सिद्ध करने से पहले अपना ये वर्डिक्ट दिया। उन्होंने कहा कि अपराध समाज में डर का माहौल बनाता है, इससे सामाजिक चेतना पर बुरा असर भी पड़ता है। इसके साथ ही जिला जज ने मुस्कान-साहिल को सौरभ की नृशंस तरीके से हत्या करने का दोषी माना। साथ ही कहा कि इन दोनों ने न केवल सौरभ की हत्या की है बल्कि साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से उसकी लाश को काटा, टुकड़ों को नीले ड्रम में भरने का जघन्य अपराध भी किया है। 14 अक्टूबर को होगी सजा
अब इस केस में फैसले की तारीख 14 अक्टूबर लगी है। तब तक मुस्कान-साहिल दोनों मेरठ की जिला जेल में जैसे अभी रह रहे हैं उसी तरह रहते रहेंगे। हालांकि बुधवार को दोषी सिदद्ध होने के बाद दोनों काफी गुमसुम और दुखी थे। जेल प्रशासन की तरफ से दोनों की निगरानी बढ़ाई गई है। जेल स्टाफ दोनों की लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है। जेल में गुमसुम रहे मुस्कान-साहिल
मेरठ चौधरी चरण सिंह जिला जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा ने बताया कि मुस्कान पिछले तीन दिनों से शिवपूजा कर रही है। उसने पूजापाठ बढ़ा दिया है। वहीं साहिल भी गुमसुम है। दोनों ही चुपचाप हैं। बताया कि सजा के समय अमूमन बंदियों के मानसिक बिहेवियर में चेंज आता है। ऐसे में उनकी मॉनिटिरंग हम बढ़ा देते हैं। आवश्यकता पड़ने पर काउंसलर की मदद भी लेते हैं। मुस्कान से मिलने इन 17 महीनों में आज तक जेल में कोई नहीं आया है। साहिल से मिलने पहले उसकी नानी आती थी अब उसका भाई आता है। अभियोजन पक्ष ने हाथ जोड़कर अदालत का आभार किया जिला जज की अदालत में बुधवार को जब अदालत मुस्कान-साहिल को दोषी करार दे रहे थे तो सामने खड़े अभियोजन पक्ष के वकील केके चौबे और विजय बहादुर ने दो बार हाथ जोड़े। दोनों एडवोकेट्स ने मुस्कान-साहिल को दोषी करार होने पर अदालत को हाथ जोड़कर धन्यवाद ज्ञापित किया। ये पल बेहद भावुक करने वाला था। वहीं सामने कोर्ट रूम में बैठे मृतक सौरभ के भाई राहुल और उसकी मां रेणुदेवी भावुक हो गईं। कोर्टरूम में जैसे ही गूंजा कि मुस्कान-साहिल तुम दोनों ने मिलकर सौरभ राजपूत की हत्या की और साक्ष्य मिटाने के लिए उसके शव को नीले ड्रम में भरा, तुम्हारा दोष सिद्ध होता है सुनकर सौरभ के परिजन रोने लगे। वकीलों ने मांगी फांसी की सजा
सौरभ की तरफ से केस लड़ रहे सीनियर एडवोकेट विजय बहादुर सिंह ने बताया कि अदालत ने साहिल-मुस्कान को सौरभ की हत्या में दोषी मान लिया है। जजमेंट 14 अक्टूबर को सुनाया जाएगा। हमने अदालत से दोषियों को फांसी की सजा देने की दरख्वास्त की है। कानून और प्रावधानों के अनुसार इस केस में मुस्कान-साहिल को अधिकतम सजा फांसी और न्यूनतम सजा आजीवन कारावास होगा। अदालत का फैसला क्या होगा यह 14 अक्टूबर को ही सामने आएगा। लेकिन हमारी मांग मृत्युदंड की है। शासकीय अधिवक्ता फौजदारी डीजीसी केके चौबे ने कहा कि सौरभ राजपूत हत्याकांड जो पूरे देश में नीले ड्रम केस के रूप में चर्चित हुआ ये सामाजिक व्यवस्था पर बड़ा प्रहार है। जो पति, पत्नी के सबसे विश्वसनीय रिश्ते पर कुठाराघात करता है। माननीय अदालत ने आरोपी साहिल, मुस्कान को सौरभ की हत्या का दोषी माना है। हमने अदालत से दोनों को फांसी की सजा की मांग की है। ताकि समाज में इस केस के जरिए एक बड़ा संदेश प्रेषित हो सके।
कैसे किया था सौरभ राजपूत का मर्डर पढ़िए ————– ये खबर भी पढ़ें…. नीले ड्रम वाली मुस्कान और प्रेमी हत्या के दोषी:पति के शव के टुकड़े सीमेंट डालकर छिपाए थे, 14 अक्टूबर को सजा सुनाई जाएगी मेरठ में पति को मारकर नीले ड्रम में छिपाने वाली मुस्कान और उसके प्रेमी को बुधवार को कोर्ट ने हत्या का दोषी करार दिया है। कोर्ट ने माना कि दोनों ने मिलकर सौरभ को मारा था। शव के टुकड़े करके उन्हें नीले ड्रम में पैक कर दिया था। पढ़ें पूरी खबर…
19 सितंबर को केस की आखिरी बहस के बाद फैसले की तारीख 30 सितंबर तय हुई थी। 30 सितंबर को लंच के बाद शाम 4.30 बजे का समय जजमेंट सुनाने के लिए तय किया गया। उससे पहले ही डिस्ट्रिक्ट जज का कोर्टरूम खचाखच भर गया। सौरभ के परिजनों के अलावा वहां तमाम वकील भी पहुंचे। जो देशभर में चर्चित हुए मेरठ के नीले ड्रम हत्याकांड पर अदालत का ऐतिहासिक फैसला सुनना चाहते थे। शाम 4.30 बजे जिला जज अरविंद मिश्रा चेयर पर आए। पहले साहिल फिर मुस्कान का नाम लिया
जेल के वीसी रूम से मुस्कान-साहिल को ऑनलाइन ही कोर्ट से जोड़ा गया। डीजे ने कंप्यूटर स्क्रीन पर मुस्कान-साहिल को देखा। उन्होंने पहले साहिल शुक्ला फिर मुस्कान रस्तोगी का नाम लिया। इसके बाद डीजे ने कहा कि तमाम गवाहों के बयान और सुबूतों के आधार पर ये सिद्ध होता है कि आप दोनों ने ही सौरभ राजपूत की हत्या की है। हत्या के बाद साक्ष्य मिटाने के लिए उसकी लाश के टुकड़े करके नीले ड्रम में भर दिए। ये एक जघन्य अपराध है। दोनों का दोष सिद्ध होता है। सुप्रीम कोर्ट की 2025 के एक जजमेंट की टिप्पणियों को पढ़ा
कहा कि दोनों को क्या सजा दी जाए? हम तो फैसला कर चुके हैं लेकिन हम तुमसे पूछते हैं कि तुम दोनों इस पर आगे क्या कहना चाहते हो? क्या कहोगे? इसके बाद डीजे ने 15 दिन का समय फैसला सुनाने के लिए दे दिया। केस में फैसला सुरक्षित रख लिया। इसके साथ ही डीजे ने सुप्रीमकोर्ट में जनवरी 2025 के केस एडाकांदी दिनेशन वर्जेज स्टेट ऑफ केरला के केस में सुनाई गई एक टिप्पणी को उल्लेखित किया। अदालत के सामने डीजे ने उस जजमेंट की टिप्पणी को एक सामाजिक संदेश देते हुए पढ़ा। कहा कि अपराध समाज में डर का माहौल बनाता है और इससे सामाजिक चेतना पर बुरा असर पड़ता है। अगर समाज में ऐसी स्थिति बनी रहती है, तो यह अनुचित और अन्यायपूर्ण है। हर सभ्य समाज में, आपराधिक प्रशासनिक व्यवस्था का मकसद व्यक्ति की गरिमा की रक्षा करना, समाज में स्थिरता और व्यवस्था बहाल करना और समाज में भरोसा और एकजुटता पैदा करना होता है। अपनी ज़िम्मेदारियाँ निभाते हुए, अदालतों का काम एक तरफ़ आरोपी और दूसरी तरफ़ राज्य/समाज के हितों के बीच संतुलन बनाना होता है। कहा कि ये सामाजिक चेतना पर बुरा असर
जिला जज ने सौरभ की पत्नी मुस्कान उसके प्रेमी साहिल को हत्या का दोषी सिद्ध करने से पहले अपना ये वर्डिक्ट दिया। उन्होंने कहा कि अपराध समाज में डर का माहौल बनाता है, इससे सामाजिक चेतना पर बुरा असर भी पड़ता है। इसके साथ ही जिला जज ने मुस्कान-साहिल को सौरभ की नृशंस तरीके से हत्या करने का दोषी माना। साथ ही कहा कि इन दोनों ने न केवल सौरभ की हत्या की है बल्कि साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से उसकी लाश को काटा, टुकड़ों को नीले ड्रम में भरने का जघन्य अपराध भी किया है। 14 अक्टूबर को होगी सजा
अब इस केस में फैसले की तारीख 14 अक्टूबर लगी है। तब तक मुस्कान-साहिल दोनों मेरठ की जिला जेल में जैसे अभी रह रहे हैं उसी तरह रहते रहेंगे। हालांकि बुधवार को दोषी सिदद्ध होने के बाद दोनों काफी गुमसुम और दुखी थे। जेल प्रशासन की तरफ से दोनों की निगरानी बढ़ाई गई है। जेल स्टाफ दोनों की लगातार मॉनिटरिंग कर रहा है। जेल में गुमसुम रहे मुस्कान-साहिल
मेरठ चौधरी चरण सिंह जिला जेल के वरिष्ठ जेल अधीक्षक डॉ. वीरेश राज शर्मा ने बताया कि मुस्कान पिछले तीन दिनों से शिवपूजा कर रही है। उसने पूजापाठ बढ़ा दिया है। वहीं साहिल भी गुमसुम है। दोनों ही चुपचाप हैं। बताया कि सजा के समय अमूमन बंदियों के मानसिक बिहेवियर में चेंज आता है। ऐसे में उनकी मॉनिटिरंग हम बढ़ा देते हैं। आवश्यकता पड़ने पर काउंसलर की मदद भी लेते हैं। मुस्कान से मिलने इन 17 महीनों में आज तक जेल में कोई नहीं आया है। साहिल से मिलने पहले उसकी नानी आती थी अब उसका भाई आता है। अभियोजन पक्ष ने हाथ जोड़कर अदालत का आभार किया जिला जज की अदालत में बुधवार को जब अदालत मुस्कान-साहिल को दोषी करार दे रहे थे तो सामने खड़े अभियोजन पक्ष के वकील केके चौबे और विजय बहादुर ने दो बार हाथ जोड़े। दोनों एडवोकेट्स ने मुस्कान-साहिल को दोषी करार होने पर अदालत को हाथ जोड़कर धन्यवाद ज्ञापित किया। ये पल बेहद भावुक करने वाला था। वहीं सामने कोर्ट रूम में बैठे मृतक सौरभ के भाई राहुल और उसकी मां रेणुदेवी भावुक हो गईं। कोर्टरूम में जैसे ही गूंजा कि मुस्कान-साहिल तुम दोनों ने मिलकर सौरभ राजपूत की हत्या की और साक्ष्य मिटाने के लिए उसके शव को नीले ड्रम में भरा, तुम्हारा दोष सिद्ध होता है सुनकर सौरभ के परिजन रोने लगे। वकीलों ने मांगी फांसी की सजा
सौरभ की तरफ से केस लड़ रहे सीनियर एडवोकेट विजय बहादुर सिंह ने बताया कि अदालत ने साहिल-मुस्कान को सौरभ की हत्या में दोषी मान लिया है। जजमेंट 14 अक्टूबर को सुनाया जाएगा। हमने अदालत से दोषियों को फांसी की सजा देने की दरख्वास्त की है। कानून और प्रावधानों के अनुसार इस केस में मुस्कान-साहिल को अधिकतम सजा फांसी और न्यूनतम सजा आजीवन कारावास होगा। अदालत का फैसला क्या होगा यह 14 अक्टूबर को ही सामने आएगा। लेकिन हमारी मांग मृत्युदंड की है। शासकीय अधिवक्ता फौजदारी डीजीसी केके चौबे ने कहा कि सौरभ राजपूत हत्याकांड जो पूरे देश में नीले ड्रम केस के रूप में चर्चित हुआ ये सामाजिक व्यवस्था पर बड़ा प्रहार है। जो पति, पत्नी के सबसे विश्वसनीय रिश्ते पर कुठाराघात करता है। माननीय अदालत ने आरोपी साहिल, मुस्कान को सौरभ की हत्या का दोषी माना है। हमने अदालत से दोनों को फांसी की सजा की मांग की है। ताकि समाज में इस केस के जरिए एक बड़ा संदेश प्रेषित हो सके।
कैसे किया था सौरभ राजपूत का मर्डर पढ़िए ————– ये खबर भी पढ़ें…. नीले ड्रम वाली मुस्कान और प्रेमी हत्या के दोषी:पति के शव के टुकड़े सीमेंट डालकर छिपाए थे, 14 अक्टूबर को सजा सुनाई जाएगी मेरठ में पति को मारकर नीले ड्रम में छिपाने वाली मुस्कान और उसके प्रेमी को बुधवार को कोर्ट ने हत्या का दोषी करार दिया है। कोर्ट ने माना कि दोनों ने मिलकर सौरभ को मारा था। शव के टुकड़े करके उन्हें नीले ड्रम में पैक कर दिया था। पढ़ें पूरी खबर…