राहुल का कोर्ट में जवाब-अमित शाह को हत्यारा कहा था:मानहानि करने की मंशा नहीं थी; सुल्तानपुर की अदालत में लिखकर दिया

गृह मंत्री अमित शाह पर टिप्पणी से जुड़े मानहानि केस में शुक्रवार को सुल्तानपुर की MP/MLA कोर्ट में सुनवाई हुई। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने स्वीकार किया कि उन्होंने 2018 में अमित शाह के खिलाफ गुड फेथ (सद्भावना) में बयान दिया था। राहुल ने कहा कि उनका मकसद किसी की मानहानि करना नहीं था। वकील काशी प्रसाद शुक्ला ने लिखित में बहस दाखिल की है, जिसके पैरा 17 और 18 में घटना और राहुल गांधी की बातों का जिक्र है। शिकायतकर्ता भाजपा नेता विजय मिश्रा के वकील संतोष पांडेय ने अपनी बहस पूरी कर ली है। अब 12 अक्टूबर को राहुल गांधी के वकील काशी प्रसाद शुक्ला अपना पक्ष रखेंगे। इसके बाद कोर्ट फैसले की तारीख तय कर सकती है। विजय मिश्रा के वकील संतोष पांडेय ने बताया कि राहुल गांधी की ओर से घटना और भाषण स्वीकार किए गए हैं। उन्होंने कोर्ट से राहुल गांधी को दोषी ठहराने की मांग की। इस मामले में राहुल गांधी जमानत पर हैं। साल 2018 में दर्ज हुआ था राहुल पर केस राहुल गांधी के खिलाफ सुल्तानपुर के भाजपा नेता विजय मिश्रा ने अगस्त 2018 में MP/MLA कोर्ट में मानहानि का केस दायर किया था। मिश्रा ने कहा- 8 मई, 2018 को राहुल ने कर्नाटक के बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। कांग्रेस नेता ने कहा था- अमित शाह हत्या के आरोपी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने जज लोया मामले में इसका उल्लेख किया। इसलिए मुझे नहीं लगता कि अमित शाह की कोई विश्वसनीयता है। जो पार्टी ईमानदारी और शुचिता की बात करती है, उसका अध्यक्ष हत्या का आरोपी है। 2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान बेंगलुरु की एक रैली में राहुल गांधी ने कथित तौर पर उस समय भाजपा अध्यक्ष रहे अमित शाह पर टिप्पणी की थी। आरोप है कि राहुल गांधी ने कहा था कि भाजपा ईमानदार राजनीति की बात करती है, लेकिन उसके अध्यक्ष हत्या के मामले में आरोपी हैं। अमित शाह का नाम 2005 के सोहराबुद्दीन शेख कथित फर्जी मुठभेड़ मामले से जुड़ा था। हालांकि, 2014 में मुंबई की विशेष सीबीआई अदालत ने उन्हें इस मामले में आरोपों से मुक्त कर दिया था। 2023 में समन, 2024 में जमानत; 2026 में दर्ज हुआ बयान सुल्तानपुर की MP/MLA कोर्ट ने 27 नवंबर 2023 को राहुल गांधी को मामले में तलब किया था। इसके बाद राहुल गांधी 20 फरवरी 2024 को अदालत में पेश हुए और जमानत कराई। इसके लिए 25-25 हजार रुपये के दो जमानतदार पेश किए गए थे। मामले में राहुल गांधी का बयान 26 जुलाई 2024 को अदालत में दर्ज किया गया था। इस दौरान उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों के संबंध में अपना पक्ष रखा। वॉइस सैंपल के मिलान की मांग खारिज शिकायतकर्ता विजय मिश्रा की ओर से अदालत में एक सीडी पेश की गई थी। इसमें मौजूद आवाज का राहुल गांधी के वॉइस सैंपल से फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) के जरिए मिलान कराने की मांग की गई थी। ट्रायल कोर्ट ने 2 मई 2026 को इस अर्जी को खारिज कर दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता पक्ष ने सेशन कोर्ट में अर्जी दाखिल की। सेशन कोर्ट ने भी 15 जुलाई 2026 को इसे खारिज कर दिया। इसके बाद इस फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। सितंबर 2026 में वॉइस सैंपल के मिलान से जुड़ी याचिका दाखिल किए जाने की जानकारी सामने आई। इसके बाद मामले में अंतिम बहस की कार्यवाही आगे बढ़ी। याचिकाकर्ता बोले- समाज में मानहानि हुई याचिकाकर्ता विजय मिश्रा ने कहा कि राहुल के बयान से उनको दुख पहुंचा है। क्योंकि वे खुद भाजपा से जुड़े हुए थे। उनकी भी समाज में मानहानि हुई है। इसलिए, उन्होंने कोर्ट में इस मामले को लेकर केस दायर किया था। इसमें विजय मिश्रा ने कोर्ट में दो गवाह पेश किए थे। सबूत के तौर पर यूट्यूब और अन्य वेबसाइट पर चले राहुल के बयान को पेश किया था। राहुल के खिलाफ दो धाराएं राहुल गांधी पर इस मामले में धारा 499 और 500 में केस दर्ज है। धारा 499 के मुताबिक किसी के बारे में झूठी अफवाहें फैलाना, टिप्पणी करना, उसकी मानहानि करना है। वहीं धारा 500 में मानहानि के लिए दंड का प्रावधान है। इस मामले में राहुल को दो साल तक की जेल हो सकती है। मानहानि केस में ही राहुल की संसद सदस्यता रद्द हुई थी 24 मार्च 2023 को राहुल गांधी की संसद सदस्यता रद्द कर दी गई थी। उन्हें सूरत कोर्ट ने मानहानि केस में दो साल की सजा सुनाई थी। राहुल तब वायनाड से सांसद थे। हालांकि, बाद में सजा निलंबित होने के बाद राहुल की सदस्यता बहाल कर दी गई थी। आखिरी में पढ़िए क्या था जस्टिस लोया केस.. जस्टिस लोया के बेटे ने अपने पिता की मौत को नेचुरल बताया था। सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे सामान्य मौत बताते हुए मामले की SIT जांच से जुड़ी याचिका खारिज कर दी थी। जस्टिस बृजमोहन हरकिशन लोया की मौत दिसंबर 2014 में नागपुर में हुई थी। उस वक्‍त वह अपने एक साथी की बेटी की शादी में गए थे। जज लोया गुजरात के बहुचर्चित सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामले की सुनवाई कर रहे थे। इसमें अमित शाह आरोपी थे। —————————————- ये खबर भी पढ़ेंः- आकाश ने मायावती के पैर छुए, 10-सेकेंड सिर झुकाए रखा:बसपा सुप्रीमो ने पीठ थपथपाई; माफी मांगने के बाद पहली बार साथ दिखे बसपा सुप्रीमो मायावती ने शुक्रवार को BSP के संस्थापक कांशीराम को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दी। भतीजे आकाश आनंद भी उनके साथ नजर आए। उन्होंने बुआ के पैर छुए और हाथ जोड़कर 10 सेकेंड तक सिर झुकाए रखा। मायावती ने आकाश के सिर पर हाथ रखा और पीठ थपथपाकर आशीर्वाद दिया। मायावती की तरफ से माफ किए जाने और पार्टी में वापसी के बाद यह पहला मौका है, जब आकाश बुआ के साथ दिखाई दिए। पूरी खबर पढ़िए…