नितिन, प्लीज कम बैक सून… अब बस आप सुरक्षित घर लौट आइए… यह कहना है शारजाह (UAE) में ड्रोन हमले में तबाह हुए जहाज से लाइफबोट के सहारे जान बचाकर निकले कानपुर के नितिन शुक्ला की पत्नी अंकिता का। छह साल की बेटी और दो साल के बेटे को संभाल रहीं अंकिता के लिए पति की सलामती की खबर किसी राहत से कम नहीं, लेकिन जब तक नितिन घर नहीं लौट आते हैं, उनका डर खत्म नहीं हो रहा। दरअसल, 10 अक्टूबर की रात जब पता चला कि शारजाह के पास जिस जहाज पर पति नितिन शुक्ला तैनात हैं, उस पर ड्रोन हमला हुआ है, तो अंकिता के पैरों तले जमीन खिसक गई। मन में बस एक ही सवाल था नितिन सुरक्षित हैं या नहीं? फोन पर उनकी आवाज सुनने को बेचैन अंकिता कभी अपने आंसू रोकतीं, तो कभी अपने छह साल की बेटी और दो साल के बेटे को संभालतीं। उधर, पिता राजेश कुमार शुक्ला की चिंता भी बेटे को लेकर बढ़ती जा रही थी। 20 साल से मर्चेंट नेवी में देश-विदेश के समुद्रों पर काम कर रहे बेटे को उन्होंने कभी ऐसे संकट में नहीं देखा था। ड्रोन अटैक में तबाह हुआ जहाज नौ अक्टूबर की शाम पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर ‘एमटी जेम नंबर-2’ पर ड्रोन से हमला हुआ था। जहाज पर मौजूद कानपुर के श्याम नगर निवासी चीफ इंजीनियर नितिन शुक्ला ने अपने 21 साथियों के साथ किसी तरह लाइफबोट के सहारे जान बचाई। हमले में जहाज तबाह हो गया। नितिन और उनके साथी सुरक्षित तो बच गए, लेकिन अब उनके सामने घर लौटने के लिए जरूरी दस्तावेज जुटाने की चुनौती है। परिवार की बस एक ही गुहार है कि नितिन को जल्द से जल्द सुरक्षित भारत लाया जाए। रात में कंपनी का फोन आया, तो रो पड़ीं अंकिता प्राइमरी विद्यालय में शिक्षिका अंकिता शुक्ला ने बताया कि 10 अक्टूबर की रात करीब 12 बजे उनके मोबाइल पर नितिन की कंपनी फ्लीटिंग शिपिंग के चंडीगढ़ स्थित ब्रांच ऑफिस से फोन आया। बताया गया कि जिस जहाज पर नितिन तैनात हैं, उस पर ड्रोन हमला हुआ है। हालांकि, नितिन और उनके सभी 21 साथी सुरक्षित हैं। अंकिता के लिए यह खबर किसी सदमे से कम नहीं थी। पति की सलामती की बात सुनकर कुछ राहत जरूर मिली, लेकिन जब तक नितिन से खुद बात नहीं हुई, मन में डर बना रहा। उन्होंने बताया कि यह सुनते ही मेरा रो-रोकर बुरा हाल हो गया। समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करूं। परिवार के लोगों को घटना की जानकारी दी, लेकिन नितिन से बात नहीं हो पा रही थी। इस वजह से चिंता और बढ़ती जा रही थी। एक तरफ पति की फिक्र थी, दूसरी तरफ घर में दो छोटे बच्चे थे। अंकिता ने किसी तरह खुद को संभाला और बच्चों को भी संभालने की कोशिश की। लाइफबोट के सहारे बचाई जान, होटल में रखा गया अंकिता ने बताया कि फिर 11 अक्टूबर की रात करीब 10:30 बजे नितिन का मैसेज आया। उन्होंने बताया कि वह ठीक हैं और उन्हें दुबई के एक होटल में सुरक्षित रखा गया है। इसके बाद नितिन ने फोन पर बताया कि किस तरह उन्होंने अपने साथियों के साथ लाइफबोट के सहारे जान बचाई। अंकिता के मुताबिक, आखिरी बार 12 अक्टूबर की शाम करीब पांच बजे नितिन से बात हुई थी। उन्होंने बताया कि उनकी पूरी टीम सुरक्षित है। हालांकि, हमले के दौरान पासपोर्ट, वीजा, लैपटॉप और दूसरे जरूरी कागजात जहाज में ही छूट गए। अब भारत लौटने के लिए जरूरी कागजी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। नितिन की सलामती की खबर मिलने के बाद अंकिता को कुछ सुकून जरूर मिला है, लेकिन पति के घर लौटने तक उनकी चिंता खत्म नहीं हुई है। फोन पर कुछ मिनट की बातचीत उन्हें हिम्मत देती है, लेकिन अगले फोन का इंतजार फिर बेचैन कर देता है। 8 अक्टूबर को ही जताई थी अनहोनी की आशंका अंकिता ने बताया कि नितिन मई में जहाज पर गए थे। तभी से उनका जहाज होर्मुज क्षेत्र के पास फंसा हुआ था। वहां के हालात को लेकर नितिन अक्सर चिंता जताते थे। आसपास मिसाइलें गिरने और जहाजों पर हमलों की खबरें मिलती रहती थीं। अंकिता के अनुसार, आठ अक्टूबर को नितिन ने फोन पर बताया था कि जहाज के पास एक ड्रोन दिखाई दे रहा है। उस समय उन्होंने किसी अनहोनी की आशंका भी जताई थी। अगले ही दिन जहाज पर हमला हो गया। नितिन ने यह भी बताया था कि पिछले दो-तीन दिनों से जहाज को वहां से हटाने की धमकियां मिल रही थीं। अंकिता कहती हैं कि उन्हें अंदाजा नहीं था कि जिस खतरे की बात पति फोन पर बता रहे हैं, वह इतनी बड़ी मुसीबत बन जाएगा। अब जहाज तबाह हो चुका है और परिवार को इंतजार है कि नितिन जल्द अपने घर लौट आएं। 20 साल से समुद्र में काम कर रहे बेटे की चिंता में पिता नितिन के पिता राजेश कुमार शुक्ला नगर निगम में राजस्व निरीक्षक के पद से सेवानिवृत्त हैं। उन्होंने बताया कि उनका बड़ा बेटा पिछले 20 साल से मर्चेंट नेवी में काम कर रहा है। नौकरी के सिलसिले में वह लंबे समय तक घर से दूर रहता है, लेकिन इस बार हालात अलग हैं। जहाज पर हमला होने की खबर ने पूरे परिवार को परेशान कर दिया। जिस बेटे को बेहतर भविष्य के लिए समुद्र की नौकरी पर भेजा था, उसी की सलामती की खबर के लिए परिवार बेचैन रहा। लाइफबोट के सहारे जान बचाने की बात सुनकर राहत मिली, लेकिन बेटे के घर लौटने तक पिता की चिंता बरकरार है। सांसद से गुहार, सरकार से सुरक्षित वापसी की उम्मीद अंकिता ने बताया कि परिवार के लोगों ने सांसद रमेश अवस्थी से मुलाकात कर नितिन की सुरक्षित वापसी के लिए मदद मांगी है। उन्हें उम्मीद है कि भारत सरकार वहां फंसे भारतीयों की मदद करेगी और उन्हें जल्द भारत लाने की व्यवस्था की जाएगी। अंकिता का कहना है कि नितिन ने इस हादसे में अपनी जान तो बचा ली, लेकिन अब उन्हें सुरक्षित घर पहुंचाना सबसे जरूरी है। वह चाहती हैं कि कागजी औपचारिकताएं जल्द पूरी हों और पति अपने बच्चों के पास लौट आएं। अंकिता ने बताया कि अब सबसे बड़ी खुशी यही होगी कि दरवाजे पर नितिन खड़े हों और बच्चों को फिर अपने पिता का साथ मिल जाए।