उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने 23 अक्टूबर को प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों और विद्यालय प्रमुखों के रिक्त पदों पर भर्ती के लिए तीन विज्ञापन जारी किए हैं। इसके तहत प्रशिक्षित स्नातक सहायक अध्यापक (टीजीटी) के 17,735 पदों, हाईस्कूल स्तर के विद्यालयों में प्रधानाध्यापक के 1,172 पदों और इंटरमीडिएट स्तर के विद्यालयों में प्रधानाचार्य के 1,475 पदों पर भर्ती की जाएगी। टीजीटी के 17,735 पदों पर भर्ती में आरक्षण को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। सपा प्रवक्ता मनोज काका ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दावा किया कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) को 10% के बजाय 16.25% आरक्षण दिया गया है, जबकि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को 27% के बजाय सिर्फ 25.02% आरक्षण मिला है। उन्होंने आरोप लगाया कि 69 हजार शिक्षकों की भर्ती के बाद एक बार फिर ओबीसी वर्ग के हितों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर इस तरह की कई पोस्ट साझा की जा रही हैं। सवाल है कि क्या आयोग से आरक्षण तय करने में कोई गलती हुई है? दैनिक भास्कर से बातचीत में आयोग के चेयरमैन प्रशांत कुमार ने स्पष्ट किया कि आरक्षण प्रक्रिया में किसी तरह की चूक नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि भर्ती विद्यालयवार रिक्त पदों के आधार पर निकाली गई है। यानी जिस विद्यालय में जिस श्रेणी का पद खाली है, उसी श्रेणी के तहत उस पद को विज्ञापित किया गया है। सोशल मीडिया पर फैलाया जा रहा भ्रम चेयरमैन प्रशांत कुमार ने बताया कि सोशल मीडिया पर टीजीटी के सभी 17,735 पदों को एक साथ जोड़कर आरक्षण की गणना की जा रही है। विज्ञापन में अनारक्षित वर्ग के 6,704 पद (37.80%), अनुसूचित जाति (एससी) के 3,698 पद (20.85%), अनुसूचित जनजाति (एसटी) के 13 पद (0.07%), ओबीसी के 4,438 पद (25.02%) और ईडब्ल्यूएस के 2,882 पद (16.25%) दर्शाए गए हैं। वहीं, सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि एससी को 3,725 (21%), एसटी को 355 (2%), ओबीसी को 4,789 (27%) और ईडब्ल्यूएस को 1,773 (10%) पद मिलने चाहिए थे। इन आंकड़ों के आधार पर आरोप लगाया जा रहा है कि एससी के 27, एसटी के 342 और ओबीसी के 351 पद कम दिए गए हैं, जबकि ईडब्ल्यूएस को 1,109 पद अधिक दिए गए हैं। आयोग के चेयरमैन बोले- विद्यालय को एक यूनिट मानकर लागू किया गया है आरक्षण आयोग के चेयरमैन प्रशांत कुमार ने दैनिक भास्कर को बताया कि यह भर्ती विद्यालयवार रिक्त पदों के आधार पर की जा रही है। प्रत्येक विद्यालय को एक इकाई मानकर आरक्षण लागू किया गया है। यानी किसी विद्यालय में जिस श्रेणी का पद रिक्त है, उसी के अनुसार उस पद को विज्ञापित किया गया है। नियुक्ति भी संबंधित विद्यालय के रिक्त पद की श्रेणी के अनुसार ही की जाएगी। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर कुल पदों को एक साथ जोड़कर आरक्षण की गणना की जा रही है। इससे भर्ती प्रक्रिया को लेकर भ्रम फैल रहा है, जबकि आयोग ने विद्यालयवार रिक्त पदों के आधार पर आरक्षण लागू किया है।