राणा सांगा विवाद से नुकसान किसको:दलित बनाम क्षत्रिय वोट बैंक में उलझी भाजपा, करणी सेना के खिलाफ सपा ने खड़ी की यादव सेना

समाजवादी पार्टी के सांसद रामजीलाल सुमन के राणा सांगा पर दिए बयान से उठा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। रामजीलाल सुमन के खिलाफ करणी सेना की धमकी के बाद सपा की यादव सेना खड़ी हो रही है। वहीं, राजनीतिक दलों ने विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए राजनीति शुरू कर दी है। करणी सेना बनाम रामजीलाल सुमन की लड़ाई अब अगड़ा बनाम दलित की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। इस विवाद का किस धड़े को कितना नफा-नुकसान होगा? भाजपा इस मुद्दे को कैसे देख रही है? इस विवाद के राजनीतिक मायने भास्कर एक्सप्लेनर में पढ़िए- सवाल 1- इस पूरे मामले की शुरुआत कहां से हुई? जवाब- सपा सांसद रामजीलाल सुमन ने 21 मार्च को राज्यसभा में कहा था- भाजपा वालों का तकिया कलाम हो गया कि मुसलमानों में बाबर का डीएनए है। फिर हिंदुओं में किसका डीएनए है? बाबर को कौन लाया? बाबर को भारत में इब्राहीम लोदी को हराने के लिए राणा सांगा लाया था। मुसलमान बाबर की औलाद हैं, तो तुम (हिंदू) गद्दार राणा सांगा की औलाद हो। यह हिंदुस्तान में तय हो जाना चाहिए। बाबर की आलोचना करते हैं, राणा सांगा की नहीं। देश की आजादी की लड़ाई में इन्होंने अंग्रेजों की गुलामी की थी। हिंदुस्तान का मुसलमान बाबर को अपना आदर्श नहीं मानता। वो मोहम्मद साहब और सूफी परंपरा को आदर्श मानता है। सवाल 2- रामजीलाल सुमन और करणी सेना के बीच विवाद क्यों? जवाब- राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लोकसभा चुनाव 2024 में दलित वोट शिफ्ट होने से हार चुकी भाजपा के लिए यह मुद्दा गले की फांस बन गया है। एक ओर भाजपा का परंपरागत क्षत्रिय वोट बैंक है, दूसरी ओर दलित वोट। रामजीलाल सुमन प्रदेश के बड़े दलित चेहरे हैं। उनकी राणा सांगा पर की गई टिप्पणी को क्षत्रिय जाति पर सीधे प्रहार के रूप में देखा जा रहा है। सपा इस विवाद को हवा देकर दलित वोटों के ध्रुवीकरण की कोशिश में है। दूसरी तरफ, भाजपा को भी एहसास हो गया है कि इस विवाद में करणी सेना को संरक्षण देना भाजपा के गले की फांस बन गया है। करणी सेना के नेतृत्व में क्षत्रिय समाज के प्रदर्शन से दलितों में भाजपा के खिलाफ संदेश गया है। इससे भाजपा को दलित वोट बैंक में नुकसान हो सकता है। इसी डैमेज कंट्रोल के लिए भाजपा अंबेडकर जयंती पर 12 दिन तक कार्यक्रम कर रही है। सीएम योगी, डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी को दलितों के बीच जाकर बैठक और सभा करनी पड़ रही है। सवाल 3- कैसे यह विवाद भाजपा को दलित वोटों का नुकसान पहुंचा रहा? जवाब- राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं, करणी सेना बनाम रामजीलाल सुमन विवाद जितना बढ़ेगा, उससे भाजपा के कुछ क्षत्रिय नेताओं को फायदा हो सकता है। लेकिन, भाजपा को उतना ही दलित वोट का नुकसान होगा। हालांकि, इस विवाद को थामने के लिए फिलहाल भाजपा नेतृत्व की ओर से कोई प्रयास होता नहीं दिख रहा। वरिष्ठ पत्रकार आनंद राय मानते हैं, सारी लड़ाई दलित वोट की है। बसपा का जनाधार कम होने के बाद भाजपा और सपा दोनों दल दलित वोट बैंक को साधने में लगे हैं। निश्चित तौर पर रामजीलाल सुमन और करणी सेना की लड़ाई ने अब तूल पकड़ लिया है। भाजपा को इसमें अपनी क्षति नजर आ रही है। इसीलिए महिला कल्याण मंत्री बेबीरानी मौर्य, राज्यसभा सांसद ब्रजलाल, राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार असीम अरुण, एससी आयोग के अध्यक्ष बैद्यनाथ रावत और एससी मोर्चा के अध्यक्ष रामचंद्र कनौजिया सहित तमाम दलित नेताओं को मैदान में उतारा है। भाजपा का प्रयास है कि दलित वोट में नुकसान नहीं हो। सवाल 4- सपा इस विवाद को कैसे भुना रही? जवाब- सियासी जानकार मानते हैं, रामजीलाल सुमन के राणा सांगा पर दिए बयान पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के रुख से ऐसा लगा था कि सपा ने सेल्फ गोल कर लिया। लेकिन, उसके बाद करणी सेना के खिलाफत में उतरने, सड़कों पर तलवार लहराने से लगा कि उन्हें सरकार का खुला संरक्षण है। इसके बाद मामला सपा के पक्ष में चला गया। अखिलेश यादव ने पार्टी के दलित नेता इंद्रजीत सरोज को फ्रंट फुट पर खेलने के लिए आगे कर दिया। रामनवमी पर अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद ने रामलला के दर्शन किए। इसे अखिलेश की सधी हुई रणनीति माना जा रहा है। अखिलेश ने संदेश देने की कोशिश की है कि सपा ना राम से दूर है, ना भीमराव रामजी अंबेडकर उनसे अलग हैं। सपा आगे के लिए भी योजना बना रही है। 19 अप्रैल को अखिलेश यादव रामजीलाल सुमन के घर जाएंगे। इससे वह संदेश देने की कोशिश करेंगे कि भाजपा दलित विरोधी है। सपा पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) की एकजुटता के लिए हर स्तर पर मजबूती से खड़ी है। सवाल 5- इस विवाद में बसपा का क्या रुख है? जवाब- वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक आनंद राय कहते हैं- करणी सेना और रामजीलाल सुमन की लड़ाई से बसपा सुप्रीमो मायावती की चिंता भी बढ़ी है। बसपा को डर है कि इस लड़ाई में दलित वोट बैंक सपा को शिफ्ट होगा। दलित वोट बैंक अगर सपा की ओर शिफ्ट हुआ, तो इससे भाजपा के साथ बसपा को भी नुकसान होगा। मायावती की नजर है कि दलित वोट सपा और भाजपा की ओर न जाए। सवाल 6- इस विवाद में RSS पर क्या असर पड़ेगा? जवाब- वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक सुनीता एरन कहती हैं- रामजीलाल सुमन और करणी सेना के विवाद से राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (RSS) को भी झटका लगेगा। करणी सेना के विरोध प्रदर्शन से पूरा हिंदू समाज एकजुट नहीं हो रहा। केवल ठाकुर समाज ही एकजुट हो रहा है। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ भी क्षत्रिय समाज से ही हैं, करणी सेना भी ठाकुरों की सेना है। दूसरी तरफ, यूपी में आगरा दलित राजनीति का बड़ा केंद्र रहा है। वहां से निकला संदेश पूरे प्रदेश में जाता है। RSS की ओर से हिंदुत्व के नाम पर दलितों को एकजुट करने का जो अभियान चल रहा है, उसमें इस घटना से झटका लगेगा। सवाल 7- क्या दलित वर्ग भाजपा के साथ बना रहेगा? जवाब- एक्सपर्ट मान रहे हैं कि लोकसभा चुनाव में दलितों का एक हिस्सा सपा की तरफ चला गया था। भाजपा और आरएसएस इसे वापस लाने के लिए पूरा जोर लगा रहे हैं। लेकिन ताजा मामला नुकसान पहुंचा सकता है। हमने भाजपा प्रवक्ता समीर कुमार सिंह से सवाल किया। उनका कहना है- यह राजनीतिक फायदे का सवाल नहीं है, देश और समाज का सवाल है। रामजीलाल सुमन का बयान गैर जिम्मेदाराना है। उनके मानसिक दिवालियापन की निशानी है। अखिलेश यादव का उन्हें समर्थन करना बताता है कि वह भी लगातार निरंतर सनातन का अपमान कर रहे हैं। भाजपा की सरकार है, योगी आदित्यनाथ सीएम हैं। किसी को कानून हाथ में लेने का अधिकार नहीं। दलित और अगड़े की राजनीति नहीं होनी चाहिए। राणा सांगा, छत्रपति शिवाजी, महाराणा प्रताप, रानी लक्ष्मीबाई को जाति की सीमा में नहीं बांधना चाहिए। यूपी एससी-एसटी आयोग के अध्यक्ष वैद्यनाथ रावत कहते हैं कि करणी सेना का रामजीलाल सुमन के खिलाफ प्रदर्शन उनकी राजनीति है। समाज में कई तरह के लोग होते हैं, जो अपना काम करते हैं। जहां तक दलित वोट का सवाल है, तो वह भाजपा के साथ रहेगा। ————————- ये खबर भी पढ़ें… यूपी में महिला IAS से ज्यादा अमीर महिला IPS, नोएडा कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के पास 9 करोड़ की प्रॉपर्टी; IAS में अदिति सिंह नंबर वन यूपी में महिला आईएएस की तुलना में आईपीएस ज्यादा अमीर हैं। आईएएस अधिकारियों में नीना शर्मा और किंजल सिंह के पास 10-10 प्रॉपर्टी हैं। वहीं अदिति सिंह के पास 8 प्रॉपर्टी हैं। बात आईपीएस महिलाओं की करें, तो आगरा एडीजी जोन अनुपम कुलश्रेष्ठ के पास सबसे ज्यादा 4 प्रॉपर्टी हैं। दूसरे नंबर पर नोएडा पुलिस आयुक्त लक्ष्मी सिंह और आईजी विजिलेंस मंजिल सैनी की 3-3 प्रॉपर्टी हैं। पढ़ें पूरी खबर