पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट को ‘शाही सुरंग’ ने रोका:वाराणसी में अर्बन रोप-वे का काम ठप, इमारतों के ढहने का खतरा, लोगों को नोटिस

वाराणसी में बन रहे देश के पहले अर्बन रोप-वे ट्रांसपोर्ट की डेटलाइन बढ़ना तय है। प्रोजेक्ट को पहले अगस्त, 2025 में बनकर तैयार होना था, मगर नगर निगम की एक चूक ने इसको लेट कर दिया है। दरअसल, गोदौलिया में पिलर-29 की खोदाई के वक्त पता चला कि जमीन के 25 फीट नीचे शाही सुरंग है, इसमें आज नाला बह रहा है, जोकि प्रोजेक्ट ब्लू प्रिंट में नहीं दिखाया गया था। इसलिए NHAI की कंस्ट्रक्शन यूनिट को भी इस इस अंडरग्राउंड नाला के बारे में पता ही नहीं था। ऐसे में पिलर की खोदाई करते हुए पाइलिंग मशीन का एक हिस्सा नाले में ही बह गया। फिलहाल प्रोजेक्ट का काम थम गया है। आसपास की 6 इमारतों के ढहने का खतरा पैदा हो गया है। वाराणसी एडमिनिस्ट्रेशन ने इन इमारतों को खाली करने का नोटिस जारी किया है। यहां रहने वाले लोगों की क्या परेशानी है? प्रोजेक्ट में ये चूक कैसे हुई? शाही नाला का इतिहास क्या है? यह जानने के लिए भास्कर टीम ग्राउंड जीरो गोदौलिया पहुंची। पढ़िए रिपोर्ट… पहले जानते है कि हुआ क्या… 25 फीट नीचे नाला, पिलर की खोदाई के वक्त मालूम ही नहीं
सोमवार दोपहर में गोदौलिया चौराहा के पास पिलर के लिए खोदाई चल रही थी। अचानक पाइलिंग मशीन का ड्रम खोदाई करते वक्त जमीन में नीचे सरक गया। गड्ढे से पानी ऊपर आने लगा, यह प्रोजेक्ट NHAI की पावर कंपनी नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक मैनेजमेंट लिमिटेड बना रही है। उनके अधिकारी मौके पर थे। उन्हें भी पहले कुछ समझ नहीं आया। बाद में पता चला कि नीचे एक नाला बह रहा था। इसको शाही सुरंग या शाही नाला कहते हैं, जोकि जमीन से 25 फीट नीचे था। इस नाला की दीवार टूटने से आसपास की 6 बिल्डिंग के ढहने का खतरा पैदा हो गया। एडीएम सिटी के आने के बाद काम रुकवा दिया गया। NHAI की तरफ से आपत्ति जताई गई कि नगर निगम और जलकल विभाग ने शाही नाले के बारे में कुछ क्यों नहीं बताया। वरना यहां पिलर के लिए जगह ही नहीं चुनी जाती। निर्माण कार्य से जुड़े लोगों ने बताया कि इलाके में शाही नाला कहां-कहां से गुजरा है, जलकल विभाग को ही नहीं मालूम। फिलहाल एजेंसी ने काम रोक दिया है। हमने इसका कारण जानना चाहा, एक अधिकारी ने बिना कैमरे पर आए बताया, बहुत हैवी मशीनों से काम होता है। जब ये मशीनें चलती हैं, तो कंपन पैदा होता है। इससे शाही नाले के ऊपर बनी दुकान और मकानों के लिए खतरा पैदा कर सकता है। इसलिए काम रोका गया है, समाधान निकलने के बाद ही कंस्ट्रक्शन दोबारा शुरू होगा। अब शाही नाला जानिए मुगलकाल में शाही सुरंग से एक साथ गुजर सकते हैं दो हाथी ‘शाही नाला’ मौजूदा समय में वाराणसी शहर के सीवर सिस्टम का एक बड़ा आधार है, लेकिन इसका नक्शा नगर निगम या जलकल के पास नहीं है। शहर की घनी आबादी से होकर गुजरा यह नाला पूरी तरह अंडरग्राउंड है। मुगलकाल में दरअसल, यह सुरंग बनाई गई थीं। तब इन्हें ‘शाही सुरंग’ के नाम से जाना जाता था। इसकी खासियत यह बताई जाती है कि इसके अंदर से दो हाथी एक साथ गुजर सकते हैं। अंग्रेजों ने इसी ‘शाही सुरंग’ के सहारे बनारस की सीवर समस्या सुलझाने का काम शुरू किया। वर्ष 1827 में इसे लखौरी ईंट और बरी मसाला से बनाया गया था। अस्सी से कोनिया तक इसकी लंबाई 24 किमी बताई जाती है। ऐसा माना जाता है कि यह नाला अस्सी, भेलूपुर, कमच्छा, गुरूबाग, गिरिजाघर, बेनियाबाग, चौक, पक्का महाल, मछोदरी होते हुए कोनिया तक गया है। शाही नाला के आसपास रहने वालों का दर्द जानिए लोगों के घर-दुकान जद में आए
अचानक गोदौलिया में शाही नाला पर बनी दुकान-मकानों पर खाली कराने की चर्चा शुरू हो गई। एक होटल पर नोटिस भी चस्पा हो गई। इस हादसे से प्रभावित लोगों की समस्या समझने के लिए टीम बातचीत शुरू की। अभिषेक ने कहा- मुझे इलेक्ट्रानिक शॉप खाली करने को कहा
चौराहे पर स्थित होटल देवा इन में इलेक्ट्रानिक की दुकान चलाने वाले अभिषेक कुमार से हमारी मुलाकात हुई। वह कहते हैं- 25 साल से हमारी इलेक्ट्रानिक की दुकान होटल देवा इन में है। सोमवार को अचानक हमसे इस दुकान को खाली करने को कहा जा रहा है। बिजनेस चौपट हो रहा है। अधिकारी कह रहे होटल गिर सकता है, इसलिए खाली करिए। हमारा सारा सामान हटा रहे हैं। नुकसान ही नुकसान है, अब क्या होगा, महादेव ही जानते हैं। नरेंद्र केसरी कहते हैं- दुकान के नीचे से नाला गया है, यह हमें पता नहीं
गोदौलिया चौराहे पर 100 साल से अधिक पुरानी बिल्डिंग के नीचे ठंडाई की दुकान चलाने वाले नरेंद्र केसरी कहते हैं- 2004 से हमारी दुकान यहां है। अभी यह कन्फर्म नहीं है कि शाही नाला हमारी दुकान के नीचे से गया है या नहीं, लेकिन यहां जब से खुदाई हो रही है। तब से धमक हमे परेशान कर रही है। इतनी बड़ी-बड़ी कंपनियां काम कर रही हैं। सभी को पहले नक्शा देखना चाहिए था। इतनी बड़ी लापरवाही से पता चलता है कि बिना नक्शा देखे ही काम लगाया गया और पाइलिंग की जा रही थी। जिससे सैकड़ों लोगों की जिंदगी खतरे में पड़ गई है। हमें हर वक्त डर है कि क्या होगा। अशोक ने कहा- हमारा घर नाला से 50 मीटर दूर
अशोक कुमार कहते हैं- मेरा घर गोदौलिया चौराहे पर है। शाही नाला हमारे घर से 50 मीटर दूर है, हमें यह नहीं पता कि हमारे घर के पास से गया है या नहीं। बारिश का मौसम है, ऐसे में खुदाई ऐसे करने से काफी दिक्कत हो सकती है। क्योंकि हमारे मकान की नींव बस 5 फिट पर होगी और ये लोग अपनी हैवी मशीन से 50 से 60 फिट खोद रहे हैं। इससे हमारी चिंता बढ़ गई है। कभी भी मकान ढह सकता है। अब नगर निगम की नोटिस जानिए शाही नाला मिलने के बाद नगर निगम एक्टिव हुआ और दशाश्वमेध जोनल कार्यालय से एक नोटिस जारी की गई, जो सिर्फ होटल देवा इन पर चस्पा की गई है। हमने स्टाफ से बात करनी चाही, मगर उन्होंने कहा कि होटल की तरफ से इस मुद्दे पर बातचीत करने की मनाही है। इस नोटिस में लिखा- गोदौलिया में टावर नंबर 29 के स्थान पर नियमित पाइलिंग करते समय हिंग मशीन घोड़ा नाला की परिधि से टकरा गई है। इससे पानी का रिसाव हो रहा है। मि‌ट्टी धंसने से मकान नंबर डी 40/12 की संरचना प्रभावित हो सकती है। जिससे जान-माल की नुकसान की संभावना बनी हुई है। आपसे अनुरोध किया जाता है कि भवन को खाली करते हुए अग्रिम आदेश तक उपयोग न किया जाए। 2 स्लाइड में वाराणसी के रोपवे का पूरा प्रोजेक्ट जानिए …………..
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