गंगा किनारे बसा प्रयागराज सिर्फ संगम के लिए ही नहीं, अपने अनोखे जायके के लिए भी मशहूर है। जब चाट की बात आती है तो यहां की आलू चाट, टमाटर चाट का नाम दूर-दूर तक लिया जाता है। 36 साल पुराने इस चाट के इस स्वाद को चखने के लिए आपको बस सिविल लाइंस के आनंद भवन से 100 मीटर ही चलना होगा। यहां की खास बात यह है कि यहां सभी आइटम देसी घी में तैयार होता है। यहां किसी भी व्यंजन में ना लहसुन डाला जाता है और ना ही प्याज। खट्टी–मिट्ठी टमाटर चाट, जिसका स्वाद बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को दीवाना बना देता है। तो चलिए, चलते हैं इस खास दुकान पर, और जानते हैं क्या है इसके जायके का राज… 1989 में हुई थी इस दुकान की शुरुआत
प्रयागराज स्टेशन पर उतरते ही सिविल लाइंस इलाके में देसी घी की खुशबू लोगों को अपनी ओर खींच लेती है। आनंद भवन से महज 100 मीटर दूर कर्नलगंज में स्थित ‘सुनील चाट कॉर्नर’ इसी खुशबू और जायके के लिए मशहूर है। अभी दुकान सुरेश चलाते हैं। सुरेश बताते हैं, इस दुकान की शुरुआत 1989 में हुई थी। तब शहर इलाहाबाद कहलाता था, प्रयागराज तो बाद में बना। शुरू में हम सिर्फ आलू टिक्की बेचते थे। फिर कुछ नया करने की सोची और टमाटर चाट बनाई। लोगों को इसका अनोखा स्वाद इतना भाया कि पिछले 36 साल से हम यही खट्टी–मिट्ठी टमाटर चाट लोगों को खिला रहे हैं और खुशियां बांट रहे हैं। सुरेश ने बताया, हमारी आलू चाट, टमाटर चाट, दही बड़ा, फुल्की, पुचका सब लोगों को पसंद आता है। सुरेश के मुताबिक पहले सिर्फ प्रयागराज के लोग ‘सुनील चाट कॉर्नर’ के कस्टमर थे, लेकिन अब समय के साथ कौशांबी, मिर्जापुर, जौनपुर, चित्रकूट, रीवा से कस्टमर आने लगे हैं। इसका स्वाद इतना जबरदस्त है कि अब जब भी कोई प्रयागराज आता है तो यहां की चाट खाने जरूर आता है। इसके अलावा ऑनलाइन ऑर्डर भी आते हैं। चाट के अलावा मिलते हैं ये आइटम
सुनील चाट कॉर्नर पर लोगों को आलू से बनी क्रिस्पी टिकिया, मसालेदार टमाटर चाट, घर के मसालों से बना दही बड़ा और खस्ता गोलगप्पे, सब कुछ एक ही जगह मिल जाता है। यही वजह है कि प्रयागराज आने वाला हर जायका प्रेमी एक बार इस दुकान पर जरूर रुकता है। प्रयागराज के सिविल लाइंस इलाके में स्थित सुनील चाट कॉर्नर सिर्फ अपनी खट्टी–मिट्ठी टमाटर चाट के लिए ही नहीं, बल्कि कई खास स्वादों के लिए भी जाना जाता है। यहां की आलू टिकिया चाट, दही बड़ा और गोलगप्पे भी लोगों के बीच खूब मशहूर हैं। यही वजह है कि यहां का स्वाद लेने के लिए लोग दूर-दराज से आते हैं। पढ़िए क्या कहते है कस्टमर… ————————– ये खबर भी पढ़ें… छांगुर बाबा 2011 तक गांव-गांव जाकर अंगूठी बेचता था:अब आलीशान मकान, करोड़ों की जमीन बेचकर मुंबई से साथ आई नसरीन बलरामपुर का उतरौला इलाका। यहां 3 बीघे में एक आलीशान घर है। गेट तो ऐसा, जैसे शहर के 5 स्टार होटलों में होते हैं। चारों तरफ सीसीटीवी लगे हैं। बाउंड्री के ऊपर कुछ इस तरह कटीले तार लगे हैं, जिन्हें पार करना किसी शातिर चोर के लिए भी संभव नहीं। कहा तो यह भी जाता है कि रात में उन तारों में करंट दौड़ा दिया जाता है। ये आलीशान घर जलालुद्दीन शाह उर्फ छांगुर बाबा का है। उसी छांगुर बाबा का, जिसे धर्मांतरण के आरोप में यूपी एसटीएफ ने गिरफ्तार किया है। छांगुर 2011 तक गांव-गांव घूमकर अंगूठी और नग बेचा करता था। फिर अचानक किस्मत ऐसी पलटी कि करोड़ों का आदमी बन गया। आखिर यह कैसे हुआ? कैसे सब कुछ बदल गया? करोड़ों रुपए कहां से आए? इन सारे सवालों को जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम बलरामपुर में छांगुर बाबा के गांव पहुंची। जो कुछ निकलकर सामने आया, वह हैरान करने वाला है। पढ़िए पूरी खबर…
प्रयागराज स्टेशन पर उतरते ही सिविल लाइंस इलाके में देसी घी की खुशबू लोगों को अपनी ओर खींच लेती है। आनंद भवन से महज 100 मीटर दूर कर्नलगंज में स्थित ‘सुनील चाट कॉर्नर’ इसी खुशबू और जायके के लिए मशहूर है। अभी दुकान सुरेश चलाते हैं। सुरेश बताते हैं, इस दुकान की शुरुआत 1989 में हुई थी। तब शहर इलाहाबाद कहलाता था, प्रयागराज तो बाद में बना। शुरू में हम सिर्फ आलू टिक्की बेचते थे। फिर कुछ नया करने की सोची और टमाटर चाट बनाई। लोगों को इसका अनोखा स्वाद इतना भाया कि पिछले 36 साल से हम यही खट्टी–मिट्ठी टमाटर चाट लोगों को खिला रहे हैं और खुशियां बांट रहे हैं। सुरेश ने बताया, हमारी आलू चाट, टमाटर चाट, दही बड़ा, फुल्की, पुचका सब लोगों को पसंद आता है। सुरेश के मुताबिक पहले सिर्फ प्रयागराज के लोग ‘सुनील चाट कॉर्नर’ के कस्टमर थे, लेकिन अब समय के साथ कौशांबी, मिर्जापुर, जौनपुर, चित्रकूट, रीवा से कस्टमर आने लगे हैं। इसका स्वाद इतना जबरदस्त है कि अब जब भी कोई प्रयागराज आता है तो यहां की चाट खाने जरूर आता है। इसके अलावा ऑनलाइन ऑर्डर भी आते हैं। चाट के अलावा मिलते हैं ये आइटम
सुनील चाट कॉर्नर पर लोगों को आलू से बनी क्रिस्पी टिकिया, मसालेदार टमाटर चाट, घर के मसालों से बना दही बड़ा और खस्ता गोलगप्पे, सब कुछ एक ही जगह मिल जाता है। यही वजह है कि प्रयागराज आने वाला हर जायका प्रेमी एक बार इस दुकान पर जरूर रुकता है। प्रयागराज के सिविल लाइंस इलाके में स्थित सुनील चाट कॉर्नर सिर्फ अपनी खट्टी–मिट्ठी टमाटर चाट के लिए ही नहीं, बल्कि कई खास स्वादों के लिए भी जाना जाता है। यहां की आलू टिकिया चाट, दही बड़ा और गोलगप्पे भी लोगों के बीच खूब मशहूर हैं। यही वजह है कि यहां का स्वाद लेने के लिए लोग दूर-दराज से आते हैं। पढ़िए क्या कहते है कस्टमर… ————————– ये खबर भी पढ़ें… छांगुर बाबा 2011 तक गांव-गांव जाकर अंगूठी बेचता था:अब आलीशान मकान, करोड़ों की जमीन बेचकर मुंबई से साथ आई नसरीन बलरामपुर का उतरौला इलाका। यहां 3 बीघे में एक आलीशान घर है। गेट तो ऐसा, जैसे शहर के 5 स्टार होटलों में होते हैं। चारों तरफ सीसीटीवी लगे हैं। बाउंड्री के ऊपर कुछ इस तरह कटीले तार लगे हैं, जिन्हें पार करना किसी शातिर चोर के लिए भी संभव नहीं। कहा तो यह भी जाता है कि रात में उन तारों में करंट दौड़ा दिया जाता है। ये आलीशान घर जलालुद्दीन शाह उर्फ छांगुर बाबा का है। उसी छांगुर बाबा का, जिसे धर्मांतरण के आरोप में यूपी एसटीएफ ने गिरफ्तार किया है। छांगुर 2011 तक गांव-गांव घूमकर अंगूठी और नग बेचा करता था। फिर अचानक किस्मत ऐसी पलटी कि करोड़ों का आदमी बन गया। आखिर यह कैसे हुआ? कैसे सब कुछ बदल गया? करोड़ों रुपए कहां से आए? इन सारे सवालों को जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम बलरामपुर में छांगुर बाबा के गांव पहुंची। जो कुछ निकलकर सामने आया, वह हैरान करने वाला है। पढ़िए पूरी खबर…