बलरामपुर में जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा बड़े लेवल पर धर्मांतरण करने की प्लानिंग में था। इसके लिए वह बलरामपुर में बंगले से लगे जमीन पर डिग्री कॉलेज बनवा रहा था। जमीन कम न पड़े इसलिए पास की 5 बीघा मजार की जमीन पर भी उनकी नजर थी। वहीं, बलरामपुर के बाद आजमगढ़ को अपना दूसरा मुख्यालय बना रहा था। जिला प्रशासन ने 8 और 9 अगस्त को बुलडोजर लगवाकर उसकी आलीशान कोठी को जमींदोज कर दिया। अब प्रशासन छांगुर बाबा और उससे जुड़े लोगों की संपत्तियों की जांच कर रहा। इसके अलावा उन लोगों की तलाश भी कर रहा जो कभी छांगुर बाबा के सहयोगी रहे हैं। अब ATS इन सब चीजों को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट बनाकर ईडी को देगी। ईडी प्रिवेंशन ऑफ मनी लान्ड्रिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज करके इस पूरे पैसे के लेनदेन का पता लगाएगा। छांगुर बाबा आगे की क्या प्लानिंग कर रहा था। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… नग बेचते-बेचते धर्मांतरण का खेल
बलरामपुर जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर रेहरामाफी गांव है। धर्मांतरण के मास्टरमाइंड जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा का जीवन यहीं बीता। 2011 से पहले छांगुर गांव-गांव घूमकर नग और अंगूठी बेचता था। 2011 में पत्नी कुतबुनिशा को चुनाव लड़वाया और वह प्रधान हो गई। 2016 में भी कुतबुनिशा चुनाव जीत गई। प्रधानी मिल जाने से छांगुर ने नग और अंगूठी बेचना छोड़ दिया, लेकिन उसे एक ट्रिक पता चल गई कि इससे किसी को भी अपनी बात मनवाई जा सकती है। दैनिक भास्कर की टीम गांव में गई। यहां लोगों से बातचीत में पता चला कि छांगुर अधिकारियों और व्यापारियों तक को नग पहनाता था। उसके नग को पहनने के बाद कुछ लोगों को फायदा हुआ। नौकरी और बिजनेस में तरक्की हुई। इसके बाद छांगुर को लोग बाबा मानने लगे। उसे पैसा भी देने लगे। यही लोग प्रचारक बन गए। छांगुर ने प्रधानी के साथ इस धंधे से भी अच्छा खासा पैसा कमाया। मुंबई गया तो धर्मांतरण को उद्देश्य बना लिया
ग्रामीणों ने बताया कि छांगुर के रिश्तेदार मुंबई में भी रहते थे। 2011 के बाद वह अक्सर मुंबई जाने लगा था। उसकी यहीं ईदुल इस्लाम नाम के व्यक्ति से मुलाकात हुई। ईदुल इस्लाम नागपुर शहर के मांगपुर इलाके का निवासी है। पुलिस ने इसके खिलाफ भी मामला दर्ज किया है। ईदुल खुद को एक मुस्लिम संगठन का महासचिव बताता है। दावा यह भी है कि यह संगठन 40 से ज्यादा देशों में सक्रिय है। मुस्लिम धर्मगुरुओं का संरक्षण प्राप्त है। ईदुल पहले से ही धर्मांतरण के खेल में शामिल था। ईदुल इस्लाम ने ही नवीन रोहरा और उसकी पत्नी नीतू रोहरा की मुलाकात छांगुर से करवाई थी। उस वक्त नवीन और नीतू के पास अरबों की संपत्ति थी। दोनों परेशान थे, छांगुर ने दोनों का धर्मांतरण करवा दिया। अब नवीन जमालुद्दीन और नीतू नसरीन बन चुकी थी। पुलिस को जो कागज प्राप्त हुआ है उसके मुताबिक दोनों ने 16 नवंबर 2015 को दुबई के अल फारुख उमर बिन कताब सेंटर में धर्म बदला था। दुबई सरकार की इस्लामिक अफेयर एवं चैरिटेबल एक्टिविटी डिपार्टमेंट से प्रमाणित कराया गया। लेकिन दोनों के पासपोर्ट चेक किए गए तो इनकी उस वक्त दुबई यात्रा की पुष्टि नहीं हुई। ऐसे में इसकी भी संभावना है कि इनके पास अलग-अलग नामों के पासपोर्ट हों। धर्मांतरण के खेल में अकूत संपत्ति बनाता चला गया
ग्रामीणों ने बताया कि नवीन-नीतू और छांगुर के मिल जाने के बाद धर्मांतरण का यह गंदा खेल चल निकला। विदेशों से पैसा आना शुरू हो गया। छांगुर का यह सारा कामकाज नवीन और नीतू संभालने लगे। 2014 से 2019 के बीच नीतू 19 बार यूएई गई। वहीं नवीन 2016 से 2020 के बीच 19 बार गया। ये लोग क्या करने गए, इसके बारे में अब तक कोई ठोस जवाब नहीं दिया है। अजीब यह है कि दोनों सिर्फ एक बार 8 अप्रैल 2017 को साथ गए थे, इसके अलावा हमेशा अलग-अलग ही जाते थे। दावा यह भी किया जा रहा कि छांगुर का पूरा गैंग यूएई से ही ऑपरेट होता था। मुस्तकीम पकड़ा गया लेकिन छांगुर बच गया
22 अगस्त 2020 में उतरौला तब चर्चा में आया था जब बढ़या भैसाही के अबु यूसुफ उर्फ मुस्तकीम खान को एटीएस ने गिरफ्तार किया गया था। मुस्तकीम की जांच हुई तो पता चला कि इसका कनेक्शन इस्लामिक स्टेट ऑफ खुरासान प्रोविंस से है। यह पाकिस्तान का एक आतंकी संगठन है, जो खुद को भविष्य का विजेता संगठन कहता है और धमकियां देता है। उस वक्त मुस्तकीम तो गिरफ्तार हो गया था, लेकिन छांगुर साफ-साफ बच गया था। क्योंकि छांगुर यहां के साथ मुंबई में भी रहता था। 2021 में नीतू-नवीन को साथ लेकर छांगुर वापस मधुपुर आ गया। यहां इन लोगों ने मधुपुर गांव में 3 बीघा जमीन खरीदी। इस जगह को खरीदने की एक वजह यह भी थी कि इसके पीछे करीब 5 बीघे में एक मजार थी, जिसका कोई सीधा मालिक नहीं था। वहां अक्सर मेला लगता था। छांगुर ने 3 बीघा जमीन पर एक तरफ आलीशान घर बनवाया और दूसरी तरफ एक डिग्री कॉलेज का निर्माण शुरू कर दिया। छांगुर ने अपने घर तक जाने वाली सड़क खुद बनवाई थी, इसमें ही 30 लाख रुपए से ज्यादा खर्च किया। डिग्री कॉलेज के जरिए धर्मांतरण का प्लान
छांगुर ने पिछले साल डिग्री कॉलेज की मान्यता के लिए सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी से संपर्क किया था, लेकिन यूनिवर्सिटी ने मान्यता नहीं दी थी। स्थानीय लोग कहते हैं कि कॉलेज तो एक बहाना है, असली मकसद धर्मांतरण करवाना है। कॉलेज में बड़ी संख्या में युवा आएंगे, जिन्हें लालच देकर धर्मांतरण के काम को करवाया जाएगा। डिग्री कॉलेज को लेकर नीतू-नवीन और छांगुर का बेटा महबूब ज्यादा इंट्रेस्टेड थे। अब प्रशासन ने डिग्री कॉलेज के आधे से ज्यादा हिस्से को अवैध मानते हुए जमींदोज कर दिया है। छांगुर के घर के ठीक पीछे करीब 5 बीघे में एक मजार है। छांगुर की नजर इस मजार और उसकी कीमती जमीन पर भी थी। इसके लिए वह अक्सर मुस्लिम धर्मगुरुओं के संपर्क में रहता। खुद को उस मजार का सर्वेसर्वा बताता। छांगुर ने खुद को पीर बाबा घोषित कर दिया था। पीर बाबा घोषित होने के बाद मुस्लिम धर्मगुरुओं में किसी तरह की आपत्ति नहीं रह जाती। मजार के लोग छांगुर की गिरफ्तारी के बाद किसी भी तरह से बोलने से बच रहे हैं। धर्मांतरण के तार आजमगढ़ तक भी फैले
छांगुर की गैंग धर्मांतरण के काम को बड़ी समझदारी के साथ करती थी। नीतू इस पूरे मामले में सबसे आगे रहती थी। ये लोग गरीब लोगों की मदद करते और फिर उन्हें कहते कि बाबा की बात मान लो तो सब सही हो जाएगा। कई बार पैसे का भी लालच देते थे। धर्मांतरण के मामले में छांगुर का नाम 2023 में ही आ गया था लेकिन सीधा आरोप नहीं था इसलिए वह बच गया था। आजमगढ़ के देवगांव में छांगुर के रिश्तेदारों पर अवैध धर्मांतरण करवाने का मामला दर्ज हुआ था। इस मामले में छांगुर के भतीजे सबरोज, रशीद, साले का लड़का शहाबुद्दीन और गोंडा के रमजान को नामजद किया गया था। छांगुर अक्सर आजमगढ़ जाता रहा है। नीतू और नवीन भी यहां कई बार गए हैं। जो लोग गिरफ्तार किए गए थे वह भी मधुपुर में छांगुर की कोठी में आते रहते थे। इसमें यह भी मामला सामने आया था कि गोंडा का रमजान अपने क्षेत्र रेतवागाड़ा में ब्रेनवाश मुहीम चला रहा था। छांगुर, नीतू और नवीन ने उतरौला में कई संपत्तियां बनाई। घर से नजदीक सुभाषनगर में बाबा ताजुद्दीन आश्वी बुटीक नाम से दुकान खोली। उतरौला में आसिपिया हसनी हुसैनी कलेक्शन शुरू किया। इसके अलावा आस्वी चैरिटेबल ट्रस्ट, आस्वी इंटरप्राइजेज की शुरुआत की। इन सबके नाम से 8 अकाउंट खुले। यहां के अलावा दूसरे देशों से इन खातों में पैसे आए। उन पैसों का उपयोग धर्मांतरण और जमीन खरीदने में किया गया। पुणे की मावल तहसील में इन लोगों ने एक 16 करोड़ रुपए की जमीन खरीदी है। 5 जुलाई को यूपी एसटीएफ ने लखनऊ के होटल में छापेमारी करके छांगुर और नीतू को गिरफ्तार किया। इसके बाद इन्हें लेकर कई खुलासे हुए। पता चला कि अवैध धर्मांतरण के जरिए 100 करोड़ रुपए से ज्यादा जुटाए गए। अब एटीएस इन सब चीजों को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट बनाकर ईडी को देगी। ईडी प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज करके इस पूरे पैसे के लेनदेन का पता लगाएगा। —————————– छांगुर बाबा 2011 तक गांव-गांव जाकर अंगूठी बेचता था:अब आलीशान मकान, करोड़ों की जमीन बेचकर मुंबई से साथ आई नसरीन बलरामपुर का उतरौला इलाका। यहां 3 बीघे में एक आलीशान घर है। गेट तो ऐसा, जैसे शहर के 5 स्टार होटलों में होते हैं। चारों तरफ सीसीटीवी लगे हैं। बाउंड्री के ऊपर कुछ इस तरह कटीले तार लगे हैं, जिन्हें पार करना किसी शातिर चोर के लिए भी संभव नहीं। कहा तो यह भी जाता है कि रात में उन तारों में करंट दौड़ा दिया जाता है। ये आलीशान घर जलालुद्दीन शाह उर्फ छांगुर बाबा का है। (पढ़ें पूरी खबर)
बलरामपुर जिला मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर दूर रेहरामाफी गांव है। धर्मांतरण के मास्टरमाइंड जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा का जीवन यहीं बीता। 2011 से पहले छांगुर गांव-गांव घूमकर नग और अंगूठी बेचता था। 2011 में पत्नी कुतबुनिशा को चुनाव लड़वाया और वह प्रधान हो गई। 2016 में भी कुतबुनिशा चुनाव जीत गई। प्रधानी मिल जाने से छांगुर ने नग और अंगूठी बेचना छोड़ दिया, लेकिन उसे एक ट्रिक पता चल गई कि इससे किसी को भी अपनी बात मनवाई जा सकती है। दैनिक भास्कर की टीम गांव में गई। यहां लोगों से बातचीत में पता चला कि छांगुर अधिकारियों और व्यापारियों तक को नग पहनाता था। उसके नग को पहनने के बाद कुछ लोगों को फायदा हुआ। नौकरी और बिजनेस में तरक्की हुई। इसके बाद छांगुर को लोग बाबा मानने लगे। उसे पैसा भी देने लगे। यही लोग प्रचारक बन गए। छांगुर ने प्रधानी के साथ इस धंधे से भी अच्छा खासा पैसा कमाया। मुंबई गया तो धर्मांतरण को उद्देश्य बना लिया
ग्रामीणों ने बताया कि छांगुर के रिश्तेदार मुंबई में भी रहते थे। 2011 के बाद वह अक्सर मुंबई जाने लगा था। उसकी यहीं ईदुल इस्लाम नाम के व्यक्ति से मुलाकात हुई। ईदुल इस्लाम नागपुर शहर के मांगपुर इलाके का निवासी है। पुलिस ने इसके खिलाफ भी मामला दर्ज किया है। ईदुल खुद को एक मुस्लिम संगठन का महासचिव बताता है। दावा यह भी है कि यह संगठन 40 से ज्यादा देशों में सक्रिय है। मुस्लिम धर्मगुरुओं का संरक्षण प्राप्त है। ईदुल पहले से ही धर्मांतरण के खेल में शामिल था। ईदुल इस्लाम ने ही नवीन रोहरा और उसकी पत्नी नीतू रोहरा की मुलाकात छांगुर से करवाई थी। उस वक्त नवीन और नीतू के पास अरबों की संपत्ति थी। दोनों परेशान थे, छांगुर ने दोनों का धर्मांतरण करवा दिया। अब नवीन जमालुद्दीन और नीतू नसरीन बन चुकी थी। पुलिस को जो कागज प्राप्त हुआ है उसके मुताबिक दोनों ने 16 नवंबर 2015 को दुबई के अल फारुख उमर बिन कताब सेंटर में धर्म बदला था। दुबई सरकार की इस्लामिक अफेयर एवं चैरिटेबल एक्टिविटी डिपार्टमेंट से प्रमाणित कराया गया। लेकिन दोनों के पासपोर्ट चेक किए गए तो इनकी उस वक्त दुबई यात्रा की पुष्टि नहीं हुई। ऐसे में इसकी भी संभावना है कि इनके पास अलग-अलग नामों के पासपोर्ट हों। धर्मांतरण के खेल में अकूत संपत्ति बनाता चला गया
ग्रामीणों ने बताया कि नवीन-नीतू और छांगुर के मिल जाने के बाद धर्मांतरण का यह गंदा खेल चल निकला। विदेशों से पैसा आना शुरू हो गया। छांगुर का यह सारा कामकाज नवीन और नीतू संभालने लगे। 2014 से 2019 के बीच नीतू 19 बार यूएई गई। वहीं नवीन 2016 से 2020 के बीच 19 बार गया। ये लोग क्या करने गए, इसके बारे में अब तक कोई ठोस जवाब नहीं दिया है। अजीब यह है कि दोनों सिर्फ एक बार 8 अप्रैल 2017 को साथ गए थे, इसके अलावा हमेशा अलग-अलग ही जाते थे। दावा यह भी किया जा रहा कि छांगुर का पूरा गैंग यूएई से ही ऑपरेट होता था। मुस्तकीम पकड़ा गया लेकिन छांगुर बच गया
22 अगस्त 2020 में उतरौला तब चर्चा में आया था जब बढ़या भैसाही के अबु यूसुफ उर्फ मुस्तकीम खान को एटीएस ने गिरफ्तार किया गया था। मुस्तकीम की जांच हुई तो पता चला कि इसका कनेक्शन इस्लामिक स्टेट ऑफ खुरासान प्रोविंस से है। यह पाकिस्तान का एक आतंकी संगठन है, जो खुद को भविष्य का विजेता संगठन कहता है और धमकियां देता है। उस वक्त मुस्तकीम तो गिरफ्तार हो गया था, लेकिन छांगुर साफ-साफ बच गया था। क्योंकि छांगुर यहां के साथ मुंबई में भी रहता था। 2021 में नीतू-नवीन को साथ लेकर छांगुर वापस मधुपुर आ गया। यहां इन लोगों ने मधुपुर गांव में 3 बीघा जमीन खरीदी। इस जगह को खरीदने की एक वजह यह भी थी कि इसके पीछे करीब 5 बीघे में एक मजार थी, जिसका कोई सीधा मालिक नहीं था। वहां अक्सर मेला लगता था। छांगुर ने 3 बीघा जमीन पर एक तरफ आलीशान घर बनवाया और दूसरी तरफ एक डिग्री कॉलेज का निर्माण शुरू कर दिया। छांगुर ने अपने घर तक जाने वाली सड़क खुद बनवाई थी, इसमें ही 30 लाख रुपए से ज्यादा खर्च किया। डिग्री कॉलेज के जरिए धर्मांतरण का प्लान
छांगुर ने पिछले साल डिग्री कॉलेज की मान्यता के लिए सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी से संपर्क किया था, लेकिन यूनिवर्सिटी ने मान्यता नहीं दी थी। स्थानीय लोग कहते हैं कि कॉलेज तो एक बहाना है, असली मकसद धर्मांतरण करवाना है। कॉलेज में बड़ी संख्या में युवा आएंगे, जिन्हें लालच देकर धर्मांतरण के काम को करवाया जाएगा। डिग्री कॉलेज को लेकर नीतू-नवीन और छांगुर का बेटा महबूब ज्यादा इंट्रेस्टेड थे। अब प्रशासन ने डिग्री कॉलेज के आधे से ज्यादा हिस्से को अवैध मानते हुए जमींदोज कर दिया है। छांगुर के घर के ठीक पीछे करीब 5 बीघे में एक मजार है। छांगुर की नजर इस मजार और उसकी कीमती जमीन पर भी थी। इसके लिए वह अक्सर मुस्लिम धर्मगुरुओं के संपर्क में रहता। खुद को उस मजार का सर्वेसर्वा बताता। छांगुर ने खुद को पीर बाबा घोषित कर दिया था। पीर बाबा घोषित होने के बाद मुस्लिम धर्मगुरुओं में किसी तरह की आपत्ति नहीं रह जाती। मजार के लोग छांगुर की गिरफ्तारी के बाद किसी भी तरह से बोलने से बच रहे हैं। धर्मांतरण के तार आजमगढ़ तक भी फैले
छांगुर की गैंग धर्मांतरण के काम को बड़ी समझदारी के साथ करती थी। नीतू इस पूरे मामले में सबसे आगे रहती थी। ये लोग गरीब लोगों की मदद करते और फिर उन्हें कहते कि बाबा की बात मान लो तो सब सही हो जाएगा। कई बार पैसे का भी लालच देते थे। धर्मांतरण के मामले में छांगुर का नाम 2023 में ही आ गया था लेकिन सीधा आरोप नहीं था इसलिए वह बच गया था। आजमगढ़ के देवगांव में छांगुर के रिश्तेदारों पर अवैध धर्मांतरण करवाने का मामला दर्ज हुआ था। इस मामले में छांगुर के भतीजे सबरोज, रशीद, साले का लड़का शहाबुद्दीन और गोंडा के रमजान को नामजद किया गया था। छांगुर अक्सर आजमगढ़ जाता रहा है। नीतू और नवीन भी यहां कई बार गए हैं। जो लोग गिरफ्तार किए गए थे वह भी मधुपुर में छांगुर की कोठी में आते रहते थे। इसमें यह भी मामला सामने आया था कि गोंडा का रमजान अपने क्षेत्र रेतवागाड़ा में ब्रेनवाश मुहीम चला रहा था। छांगुर, नीतू और नवीन ने उतरौला में कई संपत्तियां बनाई। घर से नजदीक सुभाषनगर में बाबा ताजुद्दीन आश्वी बुटीक नाम से दुकान खोली। उतरौला में आसिपिया हसनी हुसैनी कलेक्शन शुरू किया। इसके अलावा आस्वी चैरिटेबल ट्रस्ट, आस्वी इंटरप्राइजेज की शुरुआत की। इन सबके नाम से 8 अकाउंट खुले। यहां के अलावा दूसरे देशों से इन खातों में पैसे आए। उन पैसों का उपयोग धर्मांतरण और जमीन खरीदने में किया गया। पुणे की मावल तहसील में इन लोगों ने एक 16 करोड़ रुपए की जमीन खरीदी है। 5 जुलाई को यूपी एसटीएफ ने लखनऊ के होटल में छापेमारी करके छांगुर और नीतू को गिरफ्तार किया। इसके बाद इन्हें लेकर कई खुलासे हुए। पता चला कि अवैध धर्मांतरण के जरिए 100 करोड़ रुपए से ज्यादा जुटाए गए। अब एटीएस इन सब चीजों को लेकर एक विस्तृत रिपोर्ट बनाकर ईडी को देगी। ईडी प्रिवेंशन ऑफ मनी लांड्रिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज करके इस पूरे पैसे के लेनदेन का पता लगाएगा। —————————– छांगुर बाबा 2011 तक गांव-गांव जाकर अंगूठी बेचता था:अब आलीशान मकान, करोड़ों की जमीन बेचकर मुंबई से साथ आई नसरीन बलरामपुर का उतरौला इलाका। यहां 3 बीघे में एक आलीशान घर है। गेट तो ऐसा, जैसे शहर के 5 स्टार होटलों में होते हैं। चारों तरफ सीसीटीवी लगे हैं। बाउंड्री के ऊपर कुछ इस तरह कटीले तार लगे हैं, जिन्हें पार करना किसी शातिर चोर के लिए भी संभव नहीं। कहा तो यह भी जाता है कि रात में उन तारों में करंट दौड़ा दिया जाता है। ये आलीशान घर जलालुद्दीन शाह उर्फ छांगुर बाबा का है। (पढ़ें पूरी खबर)