यूपी में कुछ साल और नहीं होगी टीचर की भर्ती:6 साल से नहीं निकली वैकेंसी; हर साल बेरोजगार हो रहे 4.5 लाख बीएड-डीएलएड अभ्यर्थी

यूपी में कक्षा- 8 तक के सरकारी स्कूलों के लिए 6 साल से सहायक अध्यापक की भर्ती नहीं निकली है। दूसरी ओर, सरकार 50 से कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को मर्ज कर रही है। सरकार का यह कदम शिक्षा के सुधार के लिए भले हो, लेकिन टीचर की नौकरी की चाह रखने वाले युवाओं के लिए सपना टूटने जैसा है। सरकार छात्र-शिक्षक औसत के अनुसार पर्याप्त शिक्षक होने के तर्क पर कायम रही, तो प्रदेश में आगामी कुछ और साल तक शिक्षकों की भर्ती नहीं होगी। सरकार की मर्जर नीति क्या है? इसके पीछे मकसद क्या है? सरकार का दावा क्या है? शिक्षक नेता क्या कहते हैं? पढ़िए पूरी रिपोर्ट… हाईकोर्ट से भी मिली मर्जर की इजाजत
प्रदेश सरकार को स्कूलों के मर्जर पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच से भी हरी झंडी मिल गई है। 50 से कम छात्र संख्या वाले स्कूलों को नजदीक के स्कूल में मर्ज किया जाएगा। जानकारों का मानना है, स्कूलों के मर्ज होने का असर सीधे तौर पर शिक्षकों की संख्या पर पड़ेगा। स्कूल मर्ज होने पर सरप्लस शिक्षकों की संख्या बढ़ जाएगी। RTE (शिक्षा का अधिकार) के तहत निर्धारित छात्र-शिक्षक अनुपात के अनुसार, यूपी के प्राइमरी और अपर प्राइमरी स्कूलों में पहले से ही शिक्षकों की संख्या अधिक है। स्कूलों के मर्जर के बाद सरप्लस शिक्षकों की संख्या और अधिक हो जाएगी। इसका सीधा असर शिक्षकों की नई भर्ती पर पड़ेगा। बेसिक शिक्षा विभाग ने पहले ही साफ कर दिया है कि पर्याप्त संख्या में शिक्षक कार्यरत हैं, फिलहाल कोई वैकेंसी नहीं है। लिहाजा, जल्द भर्ती करने का कोई इरादा नहीं है। ऐसे में स्कूलों के मर्जर के बाद शिक्षकों की नई भर्ती के लिए कुछ और साल इंतजार करना पड़ सकता है। यूपी में स्कूल और टीचरों की संख्या क्या है, जानिए
यूपी में करीब 1.32 लाख परिषदीय विद्यालय (कक्षा- 8 तक) हैं। इनमें 4.50 लाख सहायक अध्यापक, 1.43 लाख शिक्षामित्र और 25 हजार से अधिक अनुदेशक कार्यरत हैं। वहीं, 1.49 करोड़ छात्र हैं। छात्रों की संख्या के लिहाज से प्राइमरी स्कूलों में औसत से अधिक शिक्षक हैं। इनमें शिक्षामित्र और अनुदेशकों की संख्या जोड़ने पर तो शिक्षकों की संख्या बहुत अधिक हो जाती है। मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों के लिए छात्र शिक्षक औसत निर्धारित है। प्राथमिक विद्यालय में 30 स्टूडेंट पर एक टीचर और उच्च प्राथमिक विद्यालय में 35 स्टूडेंट पर एक टीचर होना चाहिए। सरकार ने सदन में भी कहा, फिलहाल भर्ती नहीं
बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने विधानमंडल के बजट सत्र और ग्रीष्मकालीन सत्र में विधानसभा में स्पष्ट कहा था कि छात्र-शिक्षक अनुपात के अनुसार पर्याप्त शिक्षक कार्यरत हैं। लिहाजा, फिलहाल भर्ती करने का कोई विचार नहीं है। सरकार ने आश्वस्त किया पद समाप्त नहीं करेंगे
उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के अध्यक्ष योगेश त्यागी का कहना है- सरकार ने आश्वासन दिया है कि शिक्षकों का एक भी पद कम नहीं किया जाएगा। कोई भी पद समाप्त नहीं होगा। बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने अपना विजन बताते हुए कहा है कि प्रत्येक स्कूल में 5 शिक्षक और अतिरिक्त के रूप में विषय अध्यापक देंगे। इसके बाद भी अगर जरूरत हुई, तो शिक्षकों की भर्ती करेंगे। बेरोजगार हो रहे डीएलएड और बीएड अभ्यर्थी
प्रदेश में डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन (डीएलएड, पूर्व में बीटीसी) की 2.33 लाख और बीएड की 2.40 लाख से अधिक सीटें हैं। हर साल करीब साढ़े 4 लाख से अधिक युवक-युवतियां शिक्षक बनने की चाहत में डीएलएड और बीएड कर रहे हैं। लेकिन, बीते 6 साल से वैकेंसी नहीं निकलने के कारण बेरोजगार डीएलएड और बीएड डिग्री प्राप्त युवाओं की संख्या बढ़ रही है। शिक्षक भर्ती पिछड़ा दलित संयुक्त मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कश्यप का कहना है कि सरकार कह रही है कि पर्याप्त संख्या में शिक्षक हैं। सरकार हजारों स्कूलों का मर्जर कर रही है, तो शिक्षकों की भर्ती कैसे होगी? सरकार टीजीटी और पीजीटी भर्ती- 2022 की परीक्षा भी नहीं करा सकी है। 69,000 शिक्षक भर्ती का मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। ———————— ये खबर भी पढ़ें… यूपी में औसत बारिश, फिर इतनी बाढ़ क्यों, नेपाल 2 बांध से पानी छोड़ रहा; एक्सपर्ट बोले- पानी नहीं छोड़ा तो बैराज टूट जाएंगे यूपी में कम बारिश हो रही है, फिर भी 6 जिलों में बाढ़ की स्थिति है। 4 नदियों (घाघरा, राप्ती,गंडक,शारदा) का जलस्तर बढ़ा हुआ है। इसकी वजह नेपाल है। नेपाल में हो रही बारिश से अभी दो बांध राप्ती और शारदा से पानी छोड़ा जा रहा है। यही पानी यूपी में बाढ़ की वजह है। नेपाल किन-किन बांधों से पानी छोड़ता हैं? नेपाल के बांधों की क्षमता क्या है? यूपी की किन नदियों में ये पानी पहुंचता है? सबसे ज्यादा कौन-से जिले प्रभावित होते हैं? पढ़ें पूरी खबर