लखनऊ देश का तीसरा सबसे साफ शहर बन गया है। स्वच्छ सर्वेक्षण 2024 की लिस्ट में लखनऊ तीसरे नंबर पर है। इस कैटेगरी में लखनऊ से पहले अहमदाबाद और भोपाल हैं। अहमदाबाद पिछली बार 5वें पायदान पर था। भोपाल ने भी पिछले साल के 5वें स्थान से उछाल मारते हुए दूसरा स्थान पाया, लेकिन सबसे चौंकाने वाली छलांग लखनऊ की रही। पिछली बार लखनऊ 41 वें पायदान पर था। लखनऊ की ऊंची छलांग की मुख्य वजह सार्वजनिक स्थानों की सफाई और कचरा निपटान रहा। ऐसे में हम जानेंगे यूपी के किन और शहरों ने स्वच्छ सर्वेक्षण में अच्छा प्रदर्शन किया? स्वच्छ सर्वेक्षण में रैंकिंग कैसे तय होती है? पढ़िए… स्वच्छ भारत मिशन के तहत जारी राष्ट्रीय स्वच्छ सर्वेक्षण-2024 में यूपी के कई शहरों ने शानदार प्रदर्शन किया है। 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों की कैटेगरी में लखनऊ को देशभर में तीसरा स्थान मिला है। नेट जीरो गार्बेज सिटी का लक्ष्य हासिल करने में तत्कालीन नगर आयुक्त IAS इंद्रजीत सिंह की भूमिका सबसे अहम रही है। 3 से 10 लाख आबादी वाले शहरों में गोरखपुर नगर निगम ने राष्ट्रीय स्तर पर चौथा स्थान हासिल किया है। वहीं, इसी कैटेगरी में नोएडा ने नंबर-1 स्थान पाया है। प्रयागराज को ‘क्लीनेस्ट गंगा टाउन’ की कैटेगरी में सम्मानित किया गया है। इस साल महाकुंभ जैसे बड़े आयोजन के दौरान करोड़ों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में बेहतर सफाई प्रबंधन की देश-विदेश में तारीफ हुई। इसी वजह से प्रयागराज को यह विशेष सम्मान दिया गया है। गोरखपुर को ‘सफाई मित्र सुरक्षित शहर’ कैटेगरी में भी अवॉर्ड मिला है। इसके तहत सफाई मित्रों की सुरक्षा और कामकाजी हालातों को सुरक्षित बनाने के प्रयासों को मान्यता दी गई है। आगरा को देश में 10 वां और प्रदेश में 12 वां स्थान मिला है। आगरा को राज्य स्तरीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। स्वच्छता सर्वेक्षण में प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के नगर निकाय ने लंबी छलांग लगाते हुए 41वें से सीधा 17वां स्थान प्राप्त किया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 17 जुलाई, 2025 को राष्ट्रपति भवन में लखनऊ की महापौर, नगर विकास मंत्री अरविंद कुमार शर्मा और प्रमुख सचिव नगर विकास को यह पुरस्कार दिया। इन शहरों को क्यों मिला स्थान लखनऊ को देशभर में तीसरी रैंक खास वजहों से मिली है। दरअसल लखनऊ नगर निगम में सभी सार्वजनिक स्थलों की नियमित सफाई कराई। शहर में कचरे को गीले और सूखे में अलग-अलग करके इकट्ठा किया गया। इसके अलावा ‘स्वच्छता ही सेवा’, ‘हर रविवार सफाई के नाम’ अभियान चलाया। नगर निगम ने GPS सिस्टम से लैस कचरा वाहनों, ऑनलाइन मॉनिटरिंग और फीडबैक सिस्टम के जरिए से सफाई अभियान को ट्रैक किया। इसके साथ ही लखनऊ पूरी तरह से ओडीएफ यानी की खुले में शौच मुक्त हो चुका है, जो कि रैंकिंग में बड़ा पॉजिटिव पॉइंट बना। इसके अलावा प्रयागराज में महाकुंभ का आयोजन हुआ, जिसमें करोड़ों श्रद्धालु आए। इतने विशाल आयोजन के बावजूद प्रशासन ने बेहतरीन सफाई व्यवस्था बनाए रखी। गोरखपुर नगर निगम ने न सिर्फ सफाई के पारंपरिक तरीकों को अपनाया, बल्कि डिजिटल तकनीक का भी इस्तेमाल किया। शहर में प्लास्टिक मुक्त अभियान चलाया गया। आगरा ने अपने पर्यटन स्थलों और शहरी इलाकों में सफाई को प्राथमिकता दी। नोएडा ने आवासीय कॉलोनियों, अपार्टमेंट्स और ऑफिस एरिया में सफाई की बेहतरीन व्यवस्था की, जिससे इसे शहर को सम्मानित किया गया। जानिए कैसे तय की जाती है स्वच्छता रैंकिंग भारत सरकार हर साल स्वच्छ सर्वेक्षण रिपोर्ट जारी करती है। इसमें देश के शहरों को उनकी स्वच्छता के आधार पर रैंकिंग दी जाती है। स्वच्छ सर्वेक्षण में किसी भी शहर की रैंकिंग ठीक-ठीक तय मानकों के आधार पर दी जाती है। हालांकि ये मानक हर साल अपडेट होते रहते हैं, लेकिन बेसिक स्ट्रक्चर सेम रहता है। 1- सेवा स्तर पर प्रगति (Service Level Progress) एसएलपी (Service Level Progress) ये जांच करता है कि नगर निगम या नगर पालिका ने सफाई को लेकर जमीनी स्तर पर कितना काम किया है। इस दौरान ये पता किया जाता है कि शहर में शौचालय कितने हैं, कचरे को कैसे इकट्ठा किया जा रहा है। सफाई को लेकर क्या कदम उठाए जा रहे हैं। इसके लिए नागरिकों से मिलकर जगह-जगह विजिट किया जाता है और फिर वेरिफाई किया जाता है कि शहर कितनी प्रगति कर रहा है। 2- सिटिजन फीडबैक इसमें ये पता किया जाता है कि शहर की साफ-सफाई से वहां रहने वाले नागरिक कितने खुश है या संतुष्ट हैं। साफ-सफाई को लेकर उन्होंने जो शिकायत की उसका समाधान हुआ या नहीं। इसमें शहर के लोगों से साफ-सफाई को लेकर फीडबैक लिया जाता है। 3- सर्टिफिकेशन शहरों को साफ सफाई के आधार पर रेटिंग दी जाती है। ओडीएफ (Open Defecation Free) यानी खुले में शौच मुक्त का स्तर क्या है। इससे ये पता चलता है कि शहर कितना गदंगी मुक्त है। साफ-सफाई को लेकर कितनी प्रोगेस है। 4- थर्ड पार्टी वेरिफिकेशन नगर निगम जो दावा करता है, उसे थर्ड पार्टी एजेंसी मौके पर जाकर चेक करती है। शहरों के बारे में जो जानकारी मिली, वो फोन कॉल और फील्ड वर्क से सत्यापित करने का काम करती है। यह संस्था शहरों के अलग अलग हिस्सों को रैंडमली सिलेक्ट करके चेक करती है। …………………. ये खबर भी पढ़ें… सांप ने 3 दिन में परिवार के 3 को काटा:मथुरा में अफवाह उड़ गई सांप बदला ले रहा है, कहां से शुरू हुई यह कहानी यूपी के मथुरा में सांप ने 3 दिन में एक परिवार के 3 लोगों को काट लिया। इसमें एक युवक की मौत हो गई, जबकि 2 लोग हॉस्पिटल में एडमिट हैं। 10 दिन से पूरा परिवार दहशत में है। पूरी रात बैठे-बैठे गुजर रही है। लोग दिन में घर से निकलते हैं। अंधेरा होने से पहले वापस आ जाते हैं। गांव के लोग भी इस अंधविश्वास में आ गए और सांप से बचने के लिए पूजा-पाठ कराने लगे। सांप बदला लेता है, ये बात लंबे समय से लोग कहते आए हैं। ऐसी कई खबरें आ चुकी हैं, जिनमें ये कहा गया है कि एक ही सांप ने 5 या 7 बार डसा है। क्या सांप सच में इंसानों की तरह बदला ले सकते हैं? सांप के बदले की कहानियां कहां से शुरू हुईं? कौन से ग्रंथ सांप या नागों के बदले का प्रमाण देते हैं? यूपी में कितने प्रकार के जहरीले सांप पाए जाते हैं? पढ़ें पूरी खबर…