यूपी में हर 1 साल हजार करोड़ के चालान किए:वसूली सिर्फ 5 फीसदी; 5 हजार करोड़ बकाया; लोग जुर्माना जमा क्यों नहीं कर रहे?

यूपी में हर साल सवा करोड़ से ज्यादा गाड़ियों के चालान होते हैं। चालान की ये रकम करीब एक हजार करोड़ रुपए से ज्यादा है। लेकिन वसूली नाम मात्र ही हो पाती है। बीते ढाई साल में यूपी में 5,239 करोड़ रुपए का चालान हुआ है। इसके मुकाबले यातायात विभाग सिर्फ 333 करोड़ रुपए ही वसूल सका है। यानी लगभग 5 हजार करोड़ रुपए बकाया है। ‘दैनिक भास्कर’ की इस खास रिपोर्ट में जानिए आखिर क्यों लोग चालान जमा नहीं कर रहे? ऑनलाइन चालान करने के बाद क्या खुद की जिम्मेदारी से बरी हो जा रहे यातायात पुलिस कर्मी? साल-दर-साल चालान की संख्या कितनी बढ़ी और वसूली में गिरावट कितनी आ रही? पढ़िए खास रिपोर्ट… हर साल 45 हजार से अधिक सड़क हादसे, जाती हैं 24 हजार जानें
यूपी में हर साल 45 हजार से अधिक सड़क हादसे होते हैं। इसमें 24 हजार लोगों की जान चली जाती है। हजारों लोग घायल होते हैं। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण यातायात नियमों का पालन न करना है। प्रदेश भर में चौराहों पर और प्रमुख रास्तों पर कैमरे लगा दिए गए हैं, जो यातायात नियमों का पालन न करने वालों का सीधे चालान काट देते हैं, लेकिन चालान कटने के बाद कितने चालान जमा हो रहे हैं, ये आंकड़े चौंकाने वाले हैं। 6 महीने में 1233 करोड़ रुपए का चालान, वसूली मात्र 40 करोड़
सिर्फ इस साल 1 जनवरी से 30 जून तक 74 लाख से ज्यादा गाड़ियों के चालान हुए हैं। इसमें चालान की कुल राशि 1233 करोड़ रुपए से ज्यादा की रही है, लेकिन वसूली 40.66 करोड़ रुपए है। जो मात्र 3.29 फीसदी है। वहीं, 2024 में 1 जनवरी से 31 दिसंबर तक 1 कराेड़ 36 लाख गाड़ियों का चालान हुआ था, जिसकी कुल राशि 2079 करोड़ रुपए थी। इसमें से मात्र 105 करोड़ रुपए की वसूली हो पाई थी। साल दर साल बढ़ती गई चालान की संख्या, कम होती गई वसूली यूपी के पूर्व DGP ओम प्रकाश सिंह कहते हैं, इसमें सरासर सिस्टम की गलती है। बहुत सारे लोग ऐसे हैं, जिनको पता ही नहीं है कि उनकी गाड़ी का चालान हो चुका है। बहुत सारी ऐसी गाड़ियां हैं, जिन पर 20–20, 25–25 चालान हैं और उनको पता ही नहीं है। पता तब चलता है, जब वे गाड़ी का रिन्युअल कराने जाते हैं या गाड़ी को बेचने जाते हैं। उस समय अगर आपकी गाड़ी पर एक भी चालान है, तो गाड़ी का पेपर ट्रांसफर नहीं होगा। इसके लिए जरूरत ऐसा मैकेनिज्म तैयार करने की है, जिससे लोगों में चालान होने का भय पैदा हो और लोग इससे बचें। इसके अलावा 2023 में सरकार ने 2021 तक के चालान माफ किए थे, वह भी एक बड़ा कारण है। लोगों को लगता है कि फिर से सरकार कोई ऐसी स्कीम लेकर आएगी, जिससे उनके पुराने चालान माफ हो जाएंगे। यूपी में हर साल होता है 35 लाख गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन
परिवहन विभाग के आंकड़ों के हिसाब से हर साल 35 लाख से ज्यादा गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन यूपी में होते हैं। इसमें बड़ी संख्या टू-व्हीलर की होती है। उदाहरण के लिए 2024 में यूपी में कुल 37 लाख 57 हजार 790 गाड़ियों का रजिस्ट्रेशन हुआ। इसमें 27 लाख 44 हजार 177 टू-व्हीलर और 5 लाख 78 हजार 3 लाइट मोटर व्हीकल शामिल थे। वसूली में कमी के क्या हैं प्रमुख कारण
ओपी सिंह बताते हैं कि चालान की राशि की तुलना में वसूली की कम दर कई कारणों से है। कई वाहन चालकों को चालान की जानकारी नहीं मिलती, क्योंकि उनका मोबाइल नंबर अपडेट नहीं होता या वे SMS को अनदेखा कर देते हैं। कुछ लोग जानबूझकर चालान का भुगतान नहीं करते, क्योंकि उन्हें लगता है कि सरकार फिर से चालान माफ कर देगी। इसके अलावा लोक अदालतों में चालान राशि को कम करने की संभावना के कारण लोग भुगतान में देरी करते हैं। ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग के पास बकाया चालान वसूलने के लिए पर्याप्त संसाधन और सख्ती की कमी है। कोर्ट में जुर्माने की राशि हो जाती है कम
सीनियर वकील आफताब अहमद बताते हैं कि चालान की वसूली कम होने की एक वजह यह भी है कि लोग चालान के न्यायालय जाने का इंतजार करते हैं। न्यायालय में कई बार जुर्माने की राशि को कम कर दिया जाता है, जिसे भरने में गाड़ी मालिक को ज्यादा परेशानी नहीं होती। ये मूल चालान राशि के मुकाबले आधे से भी कम हो जाता है। —————– ये खबर भी पढ़ें… 450 नरमुंडों वाली कांवड़, रात में डरावनी दिखती:20 लाख में बनी गोल्डन कांवड़, यूपी की ये 6 कांवड़ ट्रेंड में कांवड़ यात्रा अपने चरम पर है। करोड़ों कांवड़िए बम-बम भोले का जयघोष करते हुए हरिद्वार-दिल्ली नेशनल हाईवे से अपने गंतव्य को बढ़ रहे हैं। इस बार कुछ अलग दिखने वाली कांवड़ का ट्रेंड है। दिल्ली के कांवड़िए देवी-देवताओं के बड़े-बड़े स्टेच्यू वाली कांवड़ ला रहे हैं। कांवड़ियों की एक बड़ी संख्या कलश कांवड़ लाने वालों की है। ऑपरेशन सिंदूर और बुलडोजर जैसी कांवड़ भी ट्रेंड में हैं। इस बार बहुत सारे भक्त अपने कंधे पर भोलेशंकर के स्टेच्यू वाली कांवड़ रखकर भी लाए हैं। कांवड़ यात्रा में कौन-कौन सी कांवड़ ट्रेंड में हैं। पढ़ें पूरी खबर…