काशी का महा श्मशान मणिकर्णिका घाट गंगा में डूब गया है। घाट से करीब 15 फीट ऊपर एक रूफ टॉप पर श्मशान चल रहा है। यहां अंतिम संस्कार के लिए लाशों की लाइन लगी है। आलम ये है कि एक साथ 5-6 लाशें ही जलाई जा रही हैं। बाकी जितनी भी लाशें आ रही हैं, उनको चिता तक लाने के लिए 2 से ढाई घंटे इंतजार करना पड़ रहा है। लोग कफन से लिपटी लाशों के बीच बैठकर अपनी बारी आने की राह देख रहे हैं। जल चुकी लाशों पर नजरें टिकी हुई हैं। हरिश्चंद्र घाट भी गंगा की धारा में डूब चुका है, इसलिए वहां भी अंतिम संस्कार नहीं हो पा रहे हैं। वाराणसी के 84 घाटों पर पानी पहुंचने के बाद 10 हजार दुकानदारों की दुकानें शिफ्ट करनी पड़ी हैं। वहीं बाढ़ जैसे हालात होने के बाद नाविकों को भी नदी में जाने से रोक दिया गया है। 3 हजार नाविकों की आजीविका पर खतरा पैदा हो गया है। वरुणा का पानी 30 हजार घरों तक पहुंच चुका है, ऐसे में लोग सुरक्षित जगह जाने की तैयारी कर रहे हैं। आने वाले दिनों में कैसी दिक्कतें बढ़ेंगी? लोगों को कैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है? इन सवालों के साथ दैनिक भास्कर टीम ग्राउंड जीरो पर पहुंची। पढ़िए रिपोर्ट… पहले मणिकर्णिका घाट की स्थिति जहां लाशें जलाई जा रहीं, वहां खड़े होने की भी जगह नहीं
घाट पहुंचने के रास्ते पर लंबी लाइन दिखी, पैर रखने तक की जगह नहीं। जब हम यहां पहुंचे, तब एक साथ 5 अर्थियां लाई गईं। सभी अपनी-अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। अंतिम संस्कार की रस्में तक निभाई नहीं जा रही थीं, क्योंकि छत पर एक साथ इतने शव जल रहे हैं कि वहां खड़ा रहना भी मुश्किल है। एक गमगीन परिवार से पूछा तो उन्होंने बताया- बिहार से आए हैं। मां की अर्थी है, उनकी इच्छा थी कि काशी में ही दाह संस्कार हो। लेकिन, यहां पैर रखने तक की जगह नहीं दिख रही। इसलिए वह अपने परिवार के साथ मणिकर्णिका गली में बैठ अपने बारी का इंतजार कर रहे थे। वहीं कुछ लोग दाह संस्कार वाली जगह से नीचे उतरते दिखे। पूछने पर बोले- हमारे परिवार के सदस्य का निधन हुआ है। अभी दाह संस्कार हुआ नहीं है। श्रद्धांजलि देकर लौट रहे हैं। लोगों से बातचीत करके समझ आया कि अंतिम संस्कार के लिए लोगों को 2 से 2.30 घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। मगर किसी को कोई शिकायत नहीं है, इसलिए बहुत शांति से कर्मकांड करवाए जा रहे हैं। बारिश के बीच लोग संस्कार कर रहे, कर्मकांड भी नहीं हो पा रही
यहां घाट की तरफ जाने वाली गली में बैठे लोगों से हमने बातचीत शुरू की। BHU के शोधार्थी विकास कुमार कहते हैं- 2 दिन में गंगा-वरुणा इतनी बढ़ जाएंगी कि शवों को गलियों में जलाया जाएगा। गंदगी ज्यादा है, इसलिए लोग परेशान हैं। यही हमारी मुलाकात बृजेश यादव से हुई। वह कहते हैं- घाट तो बंद हैं, अब अंतिम संस्कार के लिए वेटिंग लगी हुई है। लोग इंतजार कर रहे हैं। रुक-रुककर बारिश भी होती है, लोग पानी के बीच ही संस्कार कर पा रहे हैं, मगर हिंदू रीति रिवाज से जो संस्कार होने चाहिए, वो पूरे नहीं हो पा रहे हैं, लोग भी मजबूर हैं, इसलिए कोई शिकायत नहीं। ये सब शिव की व्यवस्था हैं। लगता है कि कुछ दिन में दिक्कत और बढ़ेगी। चिताओं के बीच लाशें रखी, क्योंकि जगह नहीं बची
लोगों की समस्याएं समझने के बाद टीम उस जगह पहुंची, जहां अब चिताएं जलाई जा रही हैं। यहां जगह सिर्फ इतनी है कि एक बार में 10 लाशें ही जल सकती हैं। इनके बीच ही अर्थियां रखी हुई हैं। चिताओं के ताप के बीच हालत यह है कि 2 मिनट में जिंदा आदमी का शरीर तपने लगता है। डोम परिवार के राजेश चौधरी ने कहा- मणिकर्णिका घाट पर सामान्य दिन में 100 से ज्यादा दाह संस्कार होते हैं। बाढ़ के बीच अब यह संख्या आधी हो गई है। अब एक दिन में करीब 30-35 शवों का ही दाह संस्कार हो पा रहा है। काशी में यूपी-बिहार के करीब 20 जिलों के लोग दाह-संस्कार के लिए पहुंचते हैं। लेकिन, बाढ़ के बीच अब यहां इनकी संख्या भी कम हुई है, दूसरी तरफ श्मशान घाट पर अव्यवस्था भी हो चुकी है। डोम परिवार के राजेश बोले- नाव पर भी लकड़ियां रखवा रहे
राजेश चौधरी ने कहा कि यहां पर बैठने की व्यवस्था नहीं है, बारिश हो रही है, इसलिए लकड़ियां गीली हो जा रही है। हम लोग आसपास की दुकानों के अंदर लकड़ियां रख रहे हैं, ताकि लोगों को परेशानी न हो। मगर हर तरफ पानी ही पानी है, इसलिए बहुत परेशानी भी है। उन्होंने बताया कि जो शव पहले 2 घंटे में जल जा रहा थे, अब उसको जलने में 3 से 4 घंटे लग रहे हैं। अगर बारिश हो जा रही है, तो दिक्कत और बढ़ जा रही है। मणिकर्णिका घाट पर बाढ़ के कारण हम कुछ लकड़ी नाव पर रख रहे हैं, उसको पालिथीन से ढका गया है, ताकि पानी से बचाया जा सके। हरिश्चंद्र घाट डूबा, गलियों में हो रहा दाह संस्कार
हरिश्चंद्र घाट भी जलमग्न हो चुका है, यहां गलियों में दाह संस्कार हो रहे हैं। कई अर्थियां यहां से दूसरे घाट के लिए ले जाई जा रही हैं। ओम चौधरी ने बताया-हरिश्चंद्र घाट की गलियों में लाश जलाने के लिए करीब 3 घंटे की वेटिंग है। यहां पर हर दिन 10 लाशें ही जल पा रही हैं। वहीं शव का अंतिम संस्कार कराने पहुंचे अनिल मौर्य ने बताया कि हमारे से पहले बहुत से लोग इंतजार कर रहे हैं, एक को 1.30 घंटे तो ठहरना ही पड़ रहा है। एक शव का दाह संस्कार करने के लिए 7 हजार तक खर्च करने पड़ रहे हैं। घाट पर बैठने की जगह नहीं है, इसलिए जो लोग आ रहे हैं, उन्हें परेशानी हो रही है। नाव कारोबार ठप गंगा में 5 हजार नावों को 3 हजार परिवार चलाते हैं, सब थमा
दाह संस्कार की व्यवस्थाओं को समझने के बाद टीम नाविकों के बीच पहुंची। दरअसल, नाव संचालन बंद करवा दिया गया है। गंगा में 5 हजार नावों को करीब 3 हजार परिवारों के लोग चलाते हैं। बाढ़ जैसे हालात में इन परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। नाविक कहते हैं- सावन में गंगा का वाटर लेवल घटता-बढ़ता रहता है, उसी हिसाब से नदी में नाव उतारते हैं। अस्सी घाट के नाविक बाबू साहनी कहते हैं- हम सभी की रोजी-रोटी बंद हो गई है, जब तक गंगा का जलस्तर बढ़ा रहेगा तब तक हम लोग नाव नहीं चला सकते हैं। क्योंकि हादसे की आशंका बनी रहती है। ऐसा हर साल होता है, जब बाढ़ आती है। हम लोग अपनी नाव खड़ी कर देते हैं और उसका रख रखाव करते हैं। क्योंकि गंगा का जलस्तर अगर अचानक बढ़ गया तो नाव बह या डूब भी सकती है। नाविकों के सवाल : देसी क्रूज रोके, फिर अलकनंदा क्यों चल रहा
नाविकों ने कहा कि इस समय वाराणसी में हम लोगों द्वारा तैयार कराए गए 5 से ज्यादा देसी क्रूज हैं। लेकिन प्रशासन हमारे क्रूज को नहीं चलने दे रहा है। कहता है कि बाढ़ आई है, मगर अलकनंदा क्रूज लगातार चल रहा है। ये व्यवहार ठीक नहीं है, नियम सबके लिए एक जैसे होने चाहिए। वहीं प्रशासन ने निर्देश दिया है कि गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण कोई भी नाव नहीं चलाएगा। NDRF और जल पुलिस की 5 टीमें लगातार गंगा में मूवमेंट कर रही हैं। गंगा किनारे स्नान करने वाले लोगों पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही है। 84 घाट के 10 हजार दुकानदारों पर असर डेली कमाई से घर चलते थे, अब सब मुश्किल हुआ
वाराणसी के एक घाट पर 80 से 100 दुकान लगती हैं, उसमें कुछ फूलमाला बेचने वाले और कुछ चाय नाश्ता की दुकान चलाते हैं। हालांकि इन दुकानों को नगर निगम द्वारा हटाया जाता है, लेकिन गंगा किनारे इन दुकानदारों की रोजी-रोटी प्रतिदिन इन्हीं दुकानों से चलती है। लेकिन जब से गंगा का जलस्तर बड़ा है, तब से सभी दुकानें बंद हो गई है। डेली कमाने वाले दुकानदारों के चेहरे पर मायूसी है। उनका कहना है कि जिनके राशन कार्ड बने हैं, उनको तो राशन मिल जा रहा है, लेकिन जिनके पास कार्ड नहीं है, उन्हें काफी समस्या हो रही है। कुछ ऐसी भी दुकानें हैं, जो घाट की गलियों में अपना रोजगार चला रहे हैं। अस्सी घाट पर हमें टिंकू मिले। उन्होंने बताया कि मेरी दुकान करीब 12 साल से लग रही है। लेकिन जब बाढ़ आती है, तो मुझे अपनी दुकान बंद करनी पड़ती है। ऐसे ही 84 घाटों पर बहुत सी दुकान हैं, जो बंद हो गई है। कुछ ऐसे भी लोग हैं, जो फूल माला बेचते हैं, लेकिन उनके भी रोजगार पर असर पड़ा है। अस्सी घाट पर माला की दुकान लगाने वाले गोपाल जी कहते हैं- गंगा स्नान करने वाले हमारी दुकान पर आते थे, लेकिन गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण श्रद्धालु कम आ रहे हैं, दुकान भी अब बंद करनी पड़ रही है। जिस समय हम गोपाल जी की दुकान के पास पहुंचे तो वह घाट की गली में अपने परिवार के साथ दुकान को समेट रहे थे। उन्होंने भावुक होकर कहा कि अब 10 से 15 दिन तक हमें इंतजार करना पड़ेगा। गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जब घटने लगेगी, तब दोबारा रोजगार शुरू करेंगे। वरूणा नदी का जलस्तर बढ़ा, 30 हजार घरों को खतरा
गंगा के साथ वरुणा नदी में भी बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई है। अब वरुणा किनारे रहने वाले परिवारों में खलबली मचने लगी है। खासकर सरैया, नक्खी घाट, शैलपुत्री, शलारपुर, पंकोसी, वरूणा क्षेत्र के डेंजर जोन में आने वाले लगभग 30 हजार घरों में बाढ़ का पानी आ गया है। लोगों ने पलायन की तैयारी शुरू दी है। जैसे ही वरुणा का पानी कॉलोनी, मोहल्लों और आबादी एरिया में रुख करेगा। वैसे ही सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाएगा। चंद्रमा यादव कहते हैं- बाढ़ आने पर हम सभी को घर का सामान हटाना पड़ता है। कुछ दिनों के लिए हम लोग रूम किराये पर लेते हैं। जब तक हमारे घर में पानी रहता है, तब तक हम लोग बाहर रूम लेकर रहते हैं। हम लोगों ने अपने सामान को समेटना शुरू कर दिया है, एक-दो दिन में हम लोग अपने घर को खाली करके शहर में कहीं रूम लेकर रहेंगे। घर का एक सदस्य यहां भी रहेगा, ताकि घर की रखरखाव होती रहे। अब तस्वीरों में वरुणा का पानी कैसे रिहायशी इलाकों तक पहुंचा है, ये देखिए… सरकारी स्कूल में लोगों के रहने की व्यवस्था की गई
यही पर रहने वाली चंदा ने कहा- हम लोग को चिंता है कि दूसरी जगह रहने के लिए घर मिल जाए। हमारे घर में पानी भर जाता है, तो गंदगी हो जाती है। हम लोग सामान समेट लिए हैं, हम लोगों के घर के पास पानी पहुंच गया है। स्थिति देखने के लिए लेखपाल भी आए थे। एक स्कूल में रहने की व्यवस्था सरकार द्वारा की गई है, सरकारी बाबू ने कहा था कि जब पानी घर में आ जाएगा तो आप वहां रहने के लिए आ सकती हैं। अब गंगा, वरुणा का जलस्तर समझिए गंगा 68.95 मीटर पर बह रही, ये डेंजर पॉइंट से 1.31 मीटर नीचे
शुक्रवार की सुबह 8 बजे 5 सेंटीमीटर तक गंगा का जलस्तर बढ़ा है। इसकी वजह से घाट किनारे रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। वाराणसी में गंगा के जलस्तर का चेतावनी पॉइंट 70.26 मीटर से मौजूदा लेवल 1.31 मीटर नीचे चल रहा है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 69.2 मीटर रिकाॅर्ड किया गया। इस दौरान 5 सेमी प्रतिघंटा जलस्तर बढ़ रहा था। दरअसल, वाराणसी में इस मानसून में 44% ज्यादा बारिश हुई है। सिर्फ जून के महीने में 375.7 मिमी बारिश हुई है, जबकि 260.1 औसत बारिश मानी जाती है। इस तरह करीब 44% ज्यादा पानी बरसने से नदियों का जलस्तर भी बढ़ा हुआ है। ………….. ये भी पढ़ें : प्रयागराज के 200 गांव में घुसा बाढ़ का पानी:15 लाख आबादी प्रभावित, महाकुंभ टेंट सिटी जलमग्न; यहां 46% ज्यादा बारिश प्रयागराज में गंगा-यमुना नदी उफान पर हैं। नदियों से सटे 200 से ज्यादा गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। फसलें डूब गईं हैं। प्रशासन लोगों की मदद के लिए नाव चलवा रहा। मगर बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे। लोगों के कामकाज भी ठप हो चुके हैं। वहीं, शहर के 15 मोहल्लों की सड़कें भी पानी में डूब गई हैं। गंगा-यमुना में बाढ़ जैसे हालात होने से 15 लाख की आबादी पर असर पड़ा है। कई परिवार घर की ऊपर की मंजिलों पर शिफ्ट हुए हैं। बहुत से परिवार रिश्तेदार या दोस्तों के घर चले गए हैं। पढ़िए पूरी खबर…
घाट पहुंचने के रास्ते पर लंबी लाइन दिखी, पैर रखने तक की जगह नहीं। जब हम यहां पहुंचे, तब एक साथ 5 अर्थियां लाई गईं। सभी अपनी-अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। अंतिम संस्कार की रस्में तक निभाई नहीं जा रही थीं, क्योंकि छत पर एक साथ इतने शव जल रहे हैं कि वहां खड़ा रहना भी मुश्किल है। एक गमगीन परिवार से पूछा तो उन्होंने बताया- बिहार से आए हैं। मां की अर्थी है, उनकी इच्छा थी कि काशी में ही दाह संस्कार हो। लेकिन, यहां पैर रखने तक की जगह नहीं दिख रही। इसलिए वह अपने परिवार के साथ मणिकर्णिका गली में बैठ अपने बारी का इंतजार कर रहे थे। वहीं कुछ लोग दाह संस्कार वाली जगह से नीचे उतरते दिखे। पूछने पर बोले- हमारे परिवार के सदस्य का निधन हुआ है। अभी दाह संस्कार हुआ नहीं है। श्रद्धांजलि देकर लौट रहे हैं। लोगों से बातचीत करके समझ आया कि अंतिम संस्कार के लिए लोगों को 2 से 2.30 घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है। मगर किसी को कोई शिकायत नहीं है, इसलिए बहुत शांति से कर्मकांड करवाए जा रहे हैं। बारिश के बीच लोग संस्कार कर रहे, कर्मकांड भी नहीं हो पा रही
यहां घाट की तरफ जाने वाली गली में बैठे लोगों से हमने बातचीत शुरू की। BHU के शोधार्थी विकास कुमार कहते हैं- 2 दिन में गंगा-वरुणा इतनी बढ़ जाएंगी कि शवों को गलियों में जलाया जाएगा। गंदगी ज्यादा है, इसलिए लोग परेशान हैं। यही हमारी मुलाकात बृजेश यादव से हुई। वह कहते हैं- घाट तो बंद हैं, अब अंतिम संस्कार के लिए वेटिंग लगी हुई है। लोग इंतजार कर रहे हैं। रुक-रुककर बारिश भी होती है, लोग पानी के बीच ही संस्कार कर पा रहे हैं, मगर हिंदू रीति रिवाज से जो संस्कार होने चाहिए, वो पूरे नहीं हो पा रहे हैं, लोग भी मजबूर हैं, इसलिए कोई शिकायत नहीं। ये सब शिव की व्यवस्था हैं। लगता है कि कुछ दिन में दिक्कत और बढ़ेगी। चिताओं के बीच लाशें रखी, क्योंकि जगह नहीं बची
लोगों की समस्याएं समझने के बाद टीम उस जगह पहुंची, जहां अब चिताएं जलाई जा रही हैं। यहां जगह सिर्फ इतनी है कि एक बार में 10 लाशें ही जल सकती हैं। इनके बीच ही अर्थियां रखी हुई हैं। चिताओं के ताप के बीच हालत यह है कि 2 मिनट में जिंदा आदमी का शरीर तपने लगता है। डोम परिवार के राजेश चौधरी ने कहा- मणिकर्णिका घाट पर सामान्य दिन में 100 से ज्यादा दाह संस्कार होते हैं। बाढ़ के बीच अब यह संख्या आधी हो गई है। अब एक दिन में करीब 30-35 शवों का ही दाह संस्कार हो पा रहा है। काशी में यूपी-बिहार के करीब 20 जिलों के लोग दाह-संस्कार के लिए पहुंचते हैं। लेकिन, बाढ़ के बीच अब यहां इनकी संख्या भी कम हुई है, दूसरी तरफ श्मशान घाट पर अव्यवस्था भी हो चुकी है। डोम परिवार के राजेश बोले- नाव पर भी लकड़ियां रखवा रहे
राजेश चौधरी ने कहा कि यहां पर बैठने की व्यवस्था नहीं है, बारिश हो रही है, इसलिए लकड़ियां गीली हो जा रही है। हम लोग आसपास की दुकानों के अंदर लकड़ियां रख रहे हैं, ताकि लोगों को परेशानी न हो। मगर हर तरफ पानी ही पानी है, इसलिए बहुत परेशानी भी है। उन्होंने बताया कि जो शव पहले 2 घंटे में जल जा रहा थे, अब उसको जलने में 3 से 4 घंटे लग रहे हैं। अगर बारिश हो जा रही है, तो दिक्कत और बढ़ जा रही है। मणिकर्णिका घाट पर बाढ़ के कारण हम कुछ लकड़ी नाव पर रख रहे हैं, उसको पालिथीन से ढका गया है, ताकि पानी से बचाया जा सके। हरिश्चंद्र घाट डूबा, गलियों में हो रहा दाह संस्कार
हरिश्चंद्र घाट भी जलमग्न हो चुका है, यहां गलियों में दाह संस्कार हो रहे हैं। कई अर्थियां यहां से दूसरे घाट के लिए ले जाई जा रही हैं। ओम चौधरी ने बताया-हरिश्चंद्र घाट की गलियों में लाश जलाने के लिए करीब 3 घंटे की वेटिंग है। यहां पर हर दिन 10 लाशें ही जल पा रही हैं। वहीं शव का अंतिम संस्कार कराने पहुंचे अनिल मौर्य ने बताया कि हमारे से पहले बहुत से लोग इंतजार कर रहे हैं, एक को 1.30 घंटे तो ठहरना ही पड़ रहा है। एक शव का दाह संस्कार करने के लिए 7 हजार तक खर्च करने पड़ रहे हैं। घाट पर बैठने की जगह नहीं है, इसलिए जो लोग आ रहे हैं, उन्हें परेशानी हो रही है। नाव कारोबार ठप गंगा में 5 हजार नावों को 3 हजार परिवार चलाते हैं, सब थमा
दाह संस्कार की व्यवस्थाओं को समझने के बाद टीम नाविकों के बीच पहुंची। दरअसल, नाव संचालन बंद करवा दिया गया है। गंगा में 5 हजार नावों को करीब 3 हजार परिवारों के लोग चलाते हैं। बाढ़ जैसे हालात में इन परिवारों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। नाविक कहते हैं- सावन में गंगा का वाटर लेवल घटता-बढ़ता रहता है, उसी हिसाब से नदी में नाव उतारते हैं। अस्सी घाट के नाविक बाबू साहनी कहते हैं- हम सभी की रोजी-रोटी बंद हो गई है, जब तक गंगा का जलस्तर बढ़ा रहेगा तब तक हम लोग नाव नहीं चला सकते हैं। क्योंकि हादसे की आशंका बनी रहती है। ऐसा हर साल होता है, जब बाढ़ आती है। हम लोग अपनी नाव खड़ी कर देते हैं और उसका रख रखाव करते हैं। क्योंकि गंगा का जलस्तर अगर अचानक बढ़ गया तो नाव बह या डूब भी सकती है। नाविकों के सवाल : देसी क्रूज रोके, फिर अलकनंदा क्यों चल रहा
नाविकों ने कहा कि इस समय वाराणसी में हम लोगों द्वारा तैयार कराए गए 5 से ज्यादा देसी क्रूज हैं। लेकिन प्रशासन हमारे क्रूज को नहीं चलने दे रहा है। कहता है कि बाढ़ आई है, मगर अलकनंदा क्रूज लगातार चल रहा है। ये व्यवहार ठीक नहीं है, नियम सबके लिए एक जैसे होने चाहिए। वहीं प्रशासन ने निर्देश दिया है कि गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण कोई भी नाव नहीं चलाएगा। NDRF और जल पुलिस की 5 टीमें लगातार गंगा में मूवमेंट कर रही हैं। गंगा किनारे स्नान करने वाले लोगों पर भी विशेष निगरानी रखी जा रही है। 84 घाट के 10 हजार दुकानदारों पर असर डेली कमाई से घर चलते थे, अब सब मुश्किल हुआ
वाराणसी के एक घाट पर 80 से 100 दुकान लगती हैं, उसमें कुछ फूलमाला बेचने वाले और कुछ चाय नाश्ता की दुकान चलाते हैं। हालांकि इन दुकानों को नगर निगम द्वारा हटाया जाता है, लेकिन गंगा किनारे इन दुकानदारों की रोजी-रोटी प्रतिदिन इन्हीं दुकानों से चलती है। लेकिन जब से गंगा का जलस्तर बड़ा है, तब से सभी दुकानें बंद हो गई है। डेली कमाने वाले दुकानदारों के चेहरे पर मायूसी है। उनका कहना है कि जिनके राशन कार्ड बने हैं, उनको तो राशन मिल जा रहा है, लेकिन जिनके पास कार्ड नहीं है, उन्हें काफी समस्या हो रही है। कुछ ऐसी भी दुकानें हैं, जो घाट की गलियों में अपना रोजगार चला रहे हैं। अस्सी घाट पर हमें टिंकू मिले। उन्होंने बताया कि मेरी दुकान करीब 12 साल से लग रही है। लेकिन जब बाढ़ आती है, तो मुझे अपनी दुकान बंद करनी पड़ती है। ऐसे ही 84 घाटों पर बहुत सी दुकान हैं, जो बंद हो गई है। कुछ ऐसे भी लोग हैं, जो फूल माला बेचते हैं, लेकिन उनके भी रोजगार पर असर पड़ा है। अस्सी घाट पर माला की दुकान लगाने वाले गोपाल जी कहते हैं- गंगा स्नान करने वाले हमारी दुकान पर आते थे, लेकिन गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण श्रद्धालु कम आ रहे हैं, दुकान भी अब बंद करनी पड़ रही है। जिस समय हम गोपाल जी की दुकान के पास पहुंचे तो वह घाट की गली में अपने परिवार के साथ दुकान को समेट रहे थे। उन्होंने भावुक होकर कहा कि अब 10 से 15 दिन तक हमें इंतजार करना पड़ेगा। गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जब घटने लगेगी, तब दोबारा रोजगार शुरू करेंगे। वरूणा नदी का जलस्तर बढ़ा, 30 हजार घरों को खतरा
गंगा के साथ वरुणा नदी में भी बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो गई है। अब वरुणा किनारे रहने वाले परिवारों में खलबली मचने लगी है। खासकर सरैया, नक्खी घाट, शैलपुत्री, शलारपुर, पंकोसी, वरूणा क्षेत्र के डेंजर जोन में आने वाले लगभग 30 हजार घरों में बाढ़ का पानी आ गया है। लोगों ने पलायन की तैयारी शुरू दी है। जैसे ही वरुणा का पानी कॉलोनी, मोहल्लों और आबादी एरिया में रुख करेगा। वैसे ही सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाएगा। चंद्रमा यादव कहते हैं- बाढ़ आने पर हम सभी को घर का सामान हटाना पड़ता है। कुछ दिनों के लिए हम लोग रूम किराये पर लेते हैं। जब तक हमारे घर में पानी रहता है, तब तक हम लोग बाहर रूम लेकर रहते हैं। हम लोगों ने अपने सामान को समेटना शुरू कर दिया है, एक-दो दिन में हम लोग अपने घर को खाली करके शहर में कहीं रूम लेकर रहेंगे। घर का एक सदस्य यहां भी रहेगा, ताकि घर की रखरखाव होती रहे। अब तस्वीरों में वरुणा का पानी कैसे रिहायशी इलाकों तक पहुंचा है, ये देखिए… सरकारी स्कूल में लोगों के रहने की व्यवस्था की गई
यही पर रहने वाली चंदा ने कहा- हम लोग को चिंता है कि दूसरी जगह रहने के लिए घर मिल जाए। हमारे घर में पानी भर जाता है, तो गंदगी हो जाती है। हम लोग सामान समेट लिए हैं, हम लोगों के घर के पास पानी पहुंच गया है। स्थिति देखने के लिए लेखपाल भी आए थे। एक स्कूल में रहने की व्यवस्था सरकार द्वारा की गई है, सरकारी बाबू ने कहा था कि जब पानी घर में आ जाएगा तो आप वहां रहने के लिए आ सकती हैं। अब गंगा, वरुणा का जलस्तर समझिए गंगा 68.95 मीटर पर बह रही, ये डेंजर पॉइंट से 1.31 मीटर नीचे
शुक्रवार की सुबह 8 बजे 5 सेंटीमीटर तक गंगा का जलस्तर बढ़ा है। इसकी वजह से घाट किनारे रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है। वाराणसी में गंगा के जलस्तर का चेतावनी पॉइंट 70.26 मीटर से मौजूदा लेवल 1.31 मीटर नीचे चल रहा है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार सुबह आठ बजे गंगा का जलस्तर 69.2 मीटर रिकाॅर्ड किया गया। इस दौरान 5 सेमी प्रतिघंटा जलस्तर बढ़ रहा था। दरअसल, वाराणसी में इस मानसून में 44% ज्यादा बारिश हुई है। सिर्फ जून के महीने में 375.7 मिमी बारिश हुई है, जबकि 260.1 औसत बारिश मानी जाती है। इस तरह करीब 44% ज्यादा पानी बरसने से नदियों का जलस्तर भी बढ़ा हुआ है। ………….. ये भी पढ़ें : प्रयागराज के 200 गांव में घुसा बाढ़ का पानी:15 लाख आबादी प्रभावित, महाकुंभ टेंट सिटी जलमग्न; यहां 46% ज्यादा बारिश प्रयागराज में गंगा-यमुना नदी उफान पर हैं। नदियों से सटे 200 से ज्यादा गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। फसलें डूब गईं हैं। प्रशासन लोगों की मदद के लिए नाव चलवा रहा। मगर बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे। लोगों के कामकाज भी ठप हो चुके हैं। वहीं, शहर के 15 मोहल्लों की सड़कें भी पानी में डूब गई हैं। गंगा-यमुना में बाढ़ जैसे हालात होने से 15 लाख की आबादी पर असर पड़ा है। कई परिवार घर की ऊपर की मंजिलों पर शिफ्ट हुए हैं। बहुत से परिवार रिश्तेदार या दोस्तों के घर चले गए हैं। पढ़िए पूरी खबर…