शनिवार को गिरफ्तार आयशा और मोहम्मद अली की पूछताछ में अब्दुल रहमान के नाम का खुलासा हुआ। आयशा और मो. अली ने बताया था कि रहमान चचा जैसा कहते हैं, वैसा करते हैं। रहमान यूट्यूब चैनल और पॉडकास्ट के जरिए इस्लामी कट्टरपंथ का प्रचार करता था। वह हिंदू धार्मिक प्रतीकों का अपमान करता था। पूछताछ में ओसामा नाम के शख्स का भी नाम सामने आया। ओसामा लड़कियों को ‘इस्लामी बहन’ बनाने की ट्रेनिंग देता था। आगरा पुलिस अब ओसामा का पता कर रही है। शाहीन बाग से कलीम को पकड़ा, इसके बाद अब्दुल हुआ एक्टिव
पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार ने बताया कि दिल्ली के शाहीन बाग से 2021 में यूपी एटीएस ने धर्मांतरण मामले में मौलाना कलीम सिद्दीकी को गिरफ्तार किया था। बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कलीम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। वो जेल में बंद है। कलीम के बाद धर्मांतरण के इस पूरे गैंग को अब्दुल रहमान संचालित कर रहा था। मौलाना कलीम सिद्दीकी गांव आगरा के गांव फुलत का रहने वाला है। ग्रामीण बताते हैं कि 2006 में मौलाना सिद्दीकी ने परिवार सहित दिल्ली के शाहीन बाग जाकर रहना शुरू किया, इसके बाद से अचानक मदरसे का विस्तार शुरू हुआ। यहां होने वाले आयोजनों में पूर्व चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी और डॉ. अनंत भागवत सहित कई प्रमुख हस्तियां भी शामिल हुए थे। मदरसे में देश-विदेश से भी लोग आते थे। लेकिन मौलाना कलीम सिद्दीकी के प्रभाव के चलते स्थानीय ग्रामीण मदरसे में होने वाले कार्यक्रमों की अनदेखी करते रहे। 2 बहनों के लापता होने से खुला राज
जांच इसी साल मार्च में शुरू हुई, जब आगरा में दो बहनें (33 और 18 साल) लापता हुईं। पता चला कि उन्हें जबरन धर्मांतरण के लिए निशाना बनाया गया। बड़ी बहन ने सोशल मीडिया पर हथियार के साथ तस्वीर पोस्ट की थी। पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार ने बताया कि मध्य प्रदेश का सऊद कनाडा में रहता है। वह विदेश से गैंग की सदस्य आयशा उर्फ एसबी कृष्णा को रुपए भेजा करता था। लाखों रुपए के लेन-देन का हिसाब पुलिस को मिला है। सऊद को यह जानकारी है कि जो रुपए वह भेजता है, उनसे उन लोगों को रहने और खाने का इंतजाम किया जाता है, जिनका धर्मांतरण होता है। धर्मांतरण करने वाले लोगों के वीडियो उसे शेयर किए जाते थे। यह रकम वह हवाला के जरिए नहीं बल्कि खाते में ट्रांसफर किया करता था। धर्मांतरण करने वाले आरोपित संगठित गैंग के रूप में काम कर रहे थे। इसलिए पुलिस ने मुकदमे में संगठित अपराध की धारा बढ़ाई है। रेड कॉर्नर नोटिस के बाद साऊद के सरेंडर के प्रयास किए जाएंगे। ऐसे कई और आरोपियों के रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराए जाएंगे।
अमेरिका और कनाडा से होती थी फंडिंग
आगरा पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार ने 19 जुलाई को कहा था कि यह गैंग ‘लव जिहाद’ और अतिवाद में शामिल था, जिसकी फंडिंग अमेरिका और कनाडा से होती थी। गैंग का मकसद धर्मांतरण के साथ-साथ भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने की साजिश थी। युवाओं को नौकरी और पैसे का लालच देकर, खासकर युवतियों को ‘लव जिहाद’ के लिए निशाना बनाया जाता था। धर्मांतरित व्यक्तियों को आर्थिक मदद, घर और सामाजिक सुरक्षा दी जाती थी। पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्ण ने कहा था कि ‘मिशन अस्मिता’ के तहत लव जिहाद, अवैध धर्मांतरण और अंतरराष्ट्रीय जिहादी फंडिंग जैसे अपराधों को लक्ष्य बनाया जाता है। गैंग का तौर-तरीका आईएसआईएस की शैली से मिलता-जुलता था। ऐसे सामने आया था पूरा मामला आगरा के सदर थाना क्षेत्र की रहने वाली 2 सगी बहनें 24 मार्च को शहर छोड़कर चली गई थीं। इनके पिता ने बेटियों की गुमशुदगी की एप्लिकेशन सदर थाने में दी। पिता ने पुलिस को बताया था कि उनकी बड़ी बेटी ने डीईआई से पढ़ाई की है, वह एमफिल है। वह 2021 में घर छोड़कर चली गई थी। बेटी की दोस्ती उधमपुर, जम्मू-कश्मीर की रहने वाली साइमा उर्फ खुशबू से है। उसने ही बेटी का ‘ब्रेनवॉश’ किया। काफी समझाने-बुझाने पर उनकी बड़ी बेटी घर लौटी थी। दोबारा घर आकर उसने अपनी छोटी बहन का भी ‘ब्रेनवॉश’ कर दिया। इसके बाद दोनों बेटियां घर से भाग गईं। 41 दिन बाद दर्ज हुआ किडनैपिंग का केस
पुलिस से सहयोग नहीं मिलने पर पीड़ित पिता अपनी दोनों बेटियों की तलाश में इधर-उधर भटकता रहा। तमाम कोशिशों के बाद दोनों बेटियों के गायब होने के 41 दिन बाद (4 मई, 2025) पुलिस ने अपहरण का केस दर्ज किया। इसमें साइमा उर्फ खुशबू को नामजद किया गया।पुलिस ने छानबीन की, तो जो बातें सामने आईं, वह चौंकाने वाली हैं। पता चला कि दोनों बहनें धर्मांतरण की मुहिम से जुड़ गई हैं। ठीक उसी अंदाज में जैसे फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ में युवतियां, दूसरी युवतियों को फंसाती दिखती हैं। इस जानकारी के बाद पुलिस हरकत में आई और जांच साइबर क्राइम पुलिस को दी गई। डीजीपी तक मामला पहुंचा तो 7 टीमें बनाईं इसके बाद डीजीपी राजीव कृष्ण ने इस पर संज्ञान लिया। पुलिस कमिश्नर दीपक कुमार ने खुद पूरे मामले को देखना शुरू किया। एडीसीपी सिटी आदित्य के नेतृत्व में 7 टीमें बनाई गईं। सर्विलांस, साइबर सेल से पुलिस को अहम जानकारियां मिलीं। उसके बाद पुलिस की छापेमारी शुरू हुई।पुलिस की एक टीम बैरकपुर (कोलकाता) गई। सबसे पहले वहां से दोनों सगी बहनों के बारे में जानकारी जुटाई, उन्हें सुरक्षित किया। उसके बाद बैरकपुर छावनी में बकर महल निवासी शेखर रॉय उर्फ हसन अली को पकड़ा। आरोपी बारासात कोर्ट में कर्मचारी है। ————————— ये खबर भी पढ़ें : 2 बहनों का ‘केरल स्टोरी’ पैटर्न पर धर्मांतरण, आगरा में मुस्लिम दोस्त ने ब्रेनवॉश किया, कोलकाता में इब्राहिम ने कलमा पढ़वाया आगरा से गायब हुईं दो सगी बहनें 4 महीने बाद 1300 Km दूर कोलकाता से बरामद हुईं। साथ ही, यूपी को हिला देने वाले धर्मांतरण की नई कहानी के पन्ने भी खुल गए। इसके तार दुनिया के 5 देशों से जुड़े। जोकि भारत में इस्लाम को बढ़ावा देने के लिए फंडिंग कर रहे। आगरा पुलिस ने भारत के 6 राज्यों में रेड डालकर 10 लोगों को पकड़ा। मास्टर माइंड अभी पुलिस की पहुंच से दूर है। पढ़िए पूरी खबर…