भातखंडे यूनिवर्सिटी के 2 प्रोफेसर गिरफ्तार:करोड़ों के घोटाले के आरोप में ठेकेदार भी दबोचे गए, CB-CID की बड़ी कार्रवाई

लखनऊ के भातखंडे संस्कृति विश्वविद्यालय में सुर और ताल के साथ अब भ्रष्टाचार की भी गूंज है। CB-CID ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए तबला विभाग के प्रोफेसर मनोज मिश्रा और भरतनाट्यम के प्रोफेसर ज्ञानेंद्र दत्त बाजपेई को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। दोनों पर पूर्व कुलपति प्रो. श्रुति सडोलीकर काटकर के कार्यकाल में करोड़ों रुपए के नियुक्ति और निर्माण घोटाले में सहयोगी होने का आरोप है। इनके साथ-साथ 12 फर्मों के सात ठेकेदार भी सलाखों के पीछे पहुंचा दिए गए हैं। प्रशासनिक अफसर रामकुमार फरार, गर्लफ्रेंड भी ताला लगाकर भागी पांचवीं पास प्रशासनिक अधिकारी रामकुमार इस पूरे घोटाले का ‘मैनेजर’ बताया जा रहा है। सीबी-सीआईडी की टीमें उसके घर और रिश्तेदारों पर लगातार छापेमारी कर रही हैं, लेकिन फिलहाल वो फरार है।सूत्रों के मुताबिक रामकुमार की गर्लफ्रेंड भी फ्लैट पर ताला लगाकर लापता हो गई है। राज्यपाल ने 2020 में ही लिया था एक्शन गौरतलब है कि 2020 में ही राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को शिकायत मिली थी, जिसके बाद उन्होंने तत्कालीन कुलपति श्रुति सडोलीकर काटकर को पद से हटाने का आदेश दिया था। उनके खिलाफ कैसरबाग थाने में मुकदमा भी दर्ज हुआ था। पूर्व कुलपति की भी हुई गिरफ्तारी, लेकिन मिली राहत घोटाले की मुख्य आरोपी पूर्व कुलपति श्रुति सडोलीकर को भी Cb-CID ने गिरफ्तार किया, लेकिन उनके पास पहले से गिरफ्तारी पर स्टे होने के कारण टीम को उन्हें छोड़ना पड़ा। इन फर्मों के खिलाफ भी आरोप पत्र अंजली ट्रेडर्स, ऊषा एसोसिएट्स, साईं कृपा ट्रेडिंग कारपोरेशन, एपपूष्ट इंजीनियरिंग, भागीदार इंडियन फायर सर्विस इंटरप्राइजेज, एपेक्स कूलिंग सर्विस, पुण्य इंटरप्राइजेज, विशाल बिल्डर्स,एचए ट्रेडर्स, वर्मा इलेक्ट्रिकल्स, बीआर इंटरप्राइजेज और शर्मा रेफ्रिजरेशन शामिल थी। बिना टेंडर काम कराने का आरोप लगा था इस मामले में दर्ज FIR में पूर्व कुलपति श्रुति और इस विश्वविद्यालय के कुछ अधिकारियों रामकुमार और कर्मचारियों पर कुछ कम्पनियों को बिना टेंडर के काम दिया गया और उसका भुगतान कर दिया गया। वर्ष 2017-18 में बिना टेंडर के एक ही तरह के काम अलग-अलग कम्पनियों को देकर भुगतान किया गया। बिना टेंडर के कई करोड़ के काम दे दिए गए थे। आरोप था कि बिना टेंडर के काम दिए गए थे और कमेटी बनाकर भुगतान भी कर दिया गया था।