पिता की मौत के बाद हर्षवर्धन कारोबार नहीं संभाल सका:गाजियाबाद में 4 फर्जी दूतावास खोले, रिश्तेदार-नौकर सरकारी गवाह बने

खुद को चार देशों का राजनयिक सलाहकार और दो देशों का राजदूत होने का दावा करने वाले हर्षवर्धन का परिवार राजनीतिक रसूख रखता है। UP STF के मुताबिक, हर्षवर्धन के ससुर आनंद जैन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के युवा विंग के 26 साल तक अध्यक्ष रहे हैं। वह 1976 से लेकर 2000 तक इस पद पर थे। दरअसल, गाजियाबाद के कविनगर में फर्जी दूतावास चलाने वाले हर्षवर्धन का परिवार बेहद संपन्न था। उसके पिता जेडी जैन गाजियाबाद में जैन रोलिंग मिल्स के मालिक थे और राजस्थान में भी कारोबार था। लेकिन, पिता की मौत के बाद वह कारोबार संभाल नहीं पाया। घाटे में जाते ही उसने ठगी की राह पकड़ ली। लंदन से MBA और विदेशी डिग्रियों का उसने गलत इस्तेमाल शुरू कर दिया। एसटीएफ जब हर्षवर्धन के घर केबी-35 पर पहुंची। तब वहां पर रिश्तेदार ईश्वर सिंह और नौकर हेमंत राजवंशी मिले। एजेंसी ने जांच के बाद दोनों को सरकारी गवाह बनाया है। महाठग हर्षवर्धन केस में जांच एजेंसियों के सामने आए सभी फैक्ट सिलसिलेवार पढ़िए… वेस्ट आर्कटिका नाम के संगठन ने जैन से संबंध समाप्त किए
हवाला के आरोप में गिरफ्तार हर्षवर्धन जैन से आर्कटिका स्थित गैर सरकारी संगठन वेस्ट आर्कटिका नामक संगठन ने जैन से संबंध समाप्त कर दिए है। संगठन का कहना है कि उनके देश के राजा ग्रैंड ड्यूक ट्रैविस को जैन की गतिविधि पर बहुत अफसोस है और जैन को दिए गए मानद कौंसिल को वापस ले लिया गया है। जैन ने 11 साल पहले इस संगठन को खुद भी फंडिंग की एवं अन्य व्यापारियों से भी फंडिंग कराई है। एसटीएफ संगठन से जानकारी लेकर मामले की जांच आगे बढ़ाएगी। 53 बार दुबई गया, राजनयिक बनकर 30 देशों की यात्रा की
एसटीएफ और दूसरी जांच एजेंसी अब हर्षवर्धन को रिमांड पर लेकर पूछताछ करेंगी। एसटीएफ ने 22 जुलाई की रात को कविनगर से हर्षवर्धन को अरेस्ट किया था। गाजियाबाद पुलिस ने कोर्ट में पेश कर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। अभी तक की पूछताछ में यूपी STF और ATS को पता चला है कि हर्षवर्धन ने 2017 में अवैध तरह से दूतावास का ऑफिस खोला। उसने एजेंसी को बताया कि मुझे ऐसी कोठी की जरूरत थी, जिसमें बाहर से आने वालों को सरकारी ऑफिस जैसा एहसास हो, इसलिए मैंने दिल्ली से सटे इलाकों में ही पुरानी कोठियां देखनी शुरू की। हर्षवर्धन की ये तलाश अपने पिता जेडी जैन के मकान के 100 मीटर की दूरी पर आकर खत्म हुई। उसको गाजियाबाद के कविनगर में ये कोठी मिली। ये वीआईपी इलाका है, जहां से कलेक्ट्रेट और पुलिस कमिश्नर ऑफिस की दूरी सिर्फ 600 से 700 मीटर है। इसलिए हर्षवर्धन ने यहां एक पुरानी कोठी को किराए पर लेकर 4 फर्जी दूतावास के ऑफिस खोले। बाहर से सबकुछ असली लगता था, डिप्लोमैटिक नंबर प्लेट्स, विदेशी झंडों वाली लग्जरी गाड़ियां और सूटेड-बूटेड लोगों का आना-जाना। हर्षवर्धन ने बीते 10 वर्षों में 53 बार दुबई की यात्रा की है। यूके, यूएई, मॉरीशस, फ्रांस, कैमरून, स्विट्जरलैंड, पोलैंड, बेल्जियम और श्रीलंका समेत वह 30 से ज्यादा देशों की सैर कर चुका है। हर जगह उसने फर्जी राजनयिक पहचान का इस्तेमाल किया। उसका मकसद खुद को बड़ा और इंटरनेशनल दिखाना था, ताकि लोग उसकी बातों में आसानी से फंस जाएं। दिल्ली की हाईप्रोफाइल पार्टियों के जरिए ब्यूरोक्रेसी तक पहुंचा
हर्षवर्धन ने एजेंसी को बताया, मेरे पास करोड़ों रुपए का फंड आ रहा था। मैं हिंदी, अंग्रेजी और फ्रेंच भाषाएं बोल लेता हूं। ऐसे में अपनी कारोबारी पहचान का फायदा उठाया। दिल्ली की बड़ी हाईप्रोफाइल पार्टियों में आना-जाना शुरू किया। इनमें ब्यूरोक्रेसी के अफसर भी परिवार के साथ आते थे। वहां हंसी मजाक के बीच उन्हें अपने प्रभाव में लेता और पहचान बढ़ा लेता था। इस तरह से 1 साल के अंदर ही अपने रसूख के दम पर धीरे-धीरे दिल्ली में कई मंत्रालयों में जुड़ता चला गया। हर्षवर्धन ने कहा- मैंने इतनी पहचान बनाई कि मंत्रालयों में जो काम होता था, मैं सीधे पहुंचकर करा लेता था। बहुत से अधिकारियों को भी फायदा पहुंचाया है। हर्षवर्धन ने कुछ नाम एजेंसियों को बताए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। इन नामों को सार्वजनिक नहीं किया गया है। हर्षवर्धन ने लंदन में 12 से अधिक कंपनियां बनाई
हर्षवर्धन गाजियाबाद के अलावा लंदन और फ्रांस में भी पढ़ चुका है। पूछताछ में बताया कि ये कोई साल 2000 की बात है, मेरी जान पहचान चन्द्रा स्वामी से हुई। उन्होंने आर्म्स डीलर अदनान खशोगी (सउदी) और एहसान अली सैयद से लंदन में रहने के दौरान मुलाकात कराई। जहां एहसान अली सैयद ने शेल कंपनियों के जरिए हवाला का रुपया एक देश से दूसरे देश पहुंचाने का आइडिया दिया। इसके बाद हर्षवर्धन ने लंदन में 12 से अधिक कंपनियां बनाई। एजेंसियों को कुछ कंपनियों के नाम भी मिले हैं- 1. इंग्लैंड में स्टेट ट्रेडिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड और ईस्ट इंडिया कंपनी यूके लिमिटेड के नाम सामने आए। 2. संयुक्त अरब अमीरात में आइसलैंड जनरल ट्रेडिंग कंपनी 3. मॉरिशस में इंदिरा ओवरसीज लिमिटेड 4. अफ्रीका में कैमरून इस्पात एसएआरएल नाम की कंपनियां रजिस्टर्ड मिलीं। ईडी जांच में शामिल होगी, 15 बैंक खाते मिले
एसटीएफ और एटीएस पूछताछ कर चुकी हैं। आयकर विभाग और ईडी भी जल्द ही जांच शुरू करेंगी। अभी तक हर्षवर्धन और उससे जुड़े अलग-अलग लोगों के करीब 15 बैंक खातों की जांच शुरू कर दी गई है। हर्षवर्धन का गाजियाबाद में एक खाता सामने आया है, दुबई में 6 बैंक खाते पता चले हैं। मॉरिशस में एक बैंक खाता और यूके में 3 बैंक खाते सामने आए हैं। उसकी पत्नी का दिल्ली में चांदनी चौक के पास ऑफिस है, जहां जांच एजेंसियों ने छानबीन की है। पत्नी के बैंक खातों और कारोबार की जांच भी शुरू कर दी गई है। करोड़ों रुपए मिलने की टिप थी, मिले सिर्फ 44 लाख
दिल्ली से मिले इनपुट के आधार पर नोएडा एसटीएफ ने छापा मारा। जहां करोड़ों रुपए मिलना था, लेकिन 44 लाख भारतीय नकदी के अलावा अमेरिका, संयुक्त अरब अमीरात और यूरोपीयन करेंसी शामिल है। ये इसी फर्जी दूतावास से हवाला के कारोबार का रुपए भी एक देश से दूसरे देश तक पहुंचा रहा था। जिसमें अलग-अलग शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया। एजेंसियां अब हर्षवर्धन को रिमांड पर लेकर पत्नी और रिश्तेदारों की जांच करेंगी। यह भी पता किया जा रहा है कि वो किन-किन देशों में और किसके संपर्क में रहा? हर्षवर्धन के पासपोर्ट की जांच शुरू कर दी गई है। मोबाइल की सीडीआर और लोकेशन भी खंगाली जा रही है। हर्षवर्धन के टेलीग्राम और दूसरे सोशल मीडिया लिंक भी देखे जा रहे हैं। चंद्रा स्वामी ने जिस एहसान से मिलवाया, वो फ्रॉड में सजा पा चुका
चंद्रा स्वामी ने हर्षवर्धन जैन की मुलाकात लंदन में हथियारों के सौदागर अदनान खगोशी निवासी सऊदी अरब और एहसान अली सैयद से कराई थी। एहसान अली मूलत: हैदराबाद का रहने वाला है, जिसने तुर्की की नागरिकता ले रखी है। चन्द्रा स्वामी की मदद से ही हर्षवर्धन लंदन गया और वहीं एहसान अली के साथ मिलकर कई शेल कंपनियां बनाईं। इसी नेटवर्क के जरिए हर्षवर्धन ने बड़े स्तर पर दलाली का खेल खेला। एजेंसियों को जांच में जो फैक्ट मिले हैं, उनके मुताबिक एहसान की कंपनी वेस्टर्न एडवाइजरी ग्रुप जो स्विट्जरलैंड और बहरीन बेस्ड थी, उसने स्विस बेस्ड कई कम्पनियों को 2008 से 2011 के बीच करीब 70 मिलियन पाउंड लोन दिलाने के नाम पर लगभग 25 मिलियन पाउंड की दलाली ली। फिर वहां से एहसान ‘लापता’ हो गया था। 22 नवंबर, 2022 को स्विस गवर्नमेंट के रिक्वेस्ट पर लंदन पुलिस ने एहसान को गिरफ्तार किया। जुलाई, 2023 में वेस्ट मिनिस्टर कोर्ट लंदन ने फ्रॉड करने के केस में स्विट्जरलैंड को प्रत्यार्पण की मंजूरी दे दी है। एसटीएफ की जांच में सामने आया कि ज्यूरिक कोर्ट ने 16 कंपनियों को लोन दिलाने के नाम पर दलाली के पैसे लेकर फ्रॉड करने और भाग जाने के केस में एहसान को साढ़े 4 साल की सजा सुनाई है। एहसान अली के साथ हर्षवर्धन की संलिप्तता की जांच की जा रही है। हर्षवर्धन जैन के 2 पैन कार्ड भी मिले हैं। एसटीएफ के छापे के दौरान फर्जी दूतावास से टीम को एक डायरी बरामद हुई है। इस डायरी में आरोपी हर्षवर्धन के जीवन का लेखाजोखा है। कई देशों के लोगों के नाम और फोन नंबर भी लिखे हैं। विदेशों में कितनी कंपनियां हैं और कितने बैंक खाते हैं, पैसों का लेनदेन और निजी जानकारी भी इस डायरी में हर्षवर्धन ने लिख रखे हैं। ……………… ये भी पढ़ें :
नकली दूतावास खोलने वाले हर्षवर्धन ने फ्रांस-लंदन में पढ़ाई की: लग्जरी गाड़ियों का शौक, पत्नी गोल्ड कारोबारी; यूपी ATS से राज कबूले गाजियाबाद में फर्जी दूतावास चलाने वाले हर्षवर्धन को लग्जरी लाइफ पसंद थी। कारोबारी परिवार से ताल्लुक रखने वाला हर्षवर्धन अक्सर दुबई, दक्षिण अफ्रीका, पेरिस लंदन, सऊदी घूमने जाता। महंगी कारों में चलता और 5 स्टार होटल में ठहरता। खास तरह के राजनयिक सूट पहनता था, जिससे वह एक असली अधिकारी जैसा लगता था। इसकी आड़ में शेल कंपनियों के जरिए हवाला का रुपया विदेशों तक पहुंचाता था। पढ़िए पूरी खबर…