अवैध धर्मांतरण पर फांसी की सजा हो:राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बोलीं-पूर्वांचल से ज्यादा गायब हो रहीं बेटियां, छांगुर जैसे लोग भेड़िए

यूपी में अवैध धर्मांतरण के मामलों को रोकने के लिए आजीवन कारावास की सजा काफी नहीं है। इसमें कम से कम फांसी की सजा होनी चाहिए। ये कहना है राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष बबिता चौहान का। उन्होंने बताया कि यूपी के पूर्वांचल में बेटियां गायब ज्यादा हो रही हैं। वहीं पश्चिमी यूपी में लिव इन रिलेशनशिप में विवाद के मामले ज्यादा हैं। मध्य यूपी में दहेज से जुड़े मामले आयोग में ज्यादा आ रहे हैं। दैनिक भास्कर से उन्होंने कहा कि आयोग की पहल पर अब सरकार सभी ऑटो, ई-रिक्शा, टैक्सी सहित अन्य सवारी वाहनों में ड्राइवर की सीट के पीछे ड्राइवर का नाम, मोबाइल नंबर और पहचान पत्र नंबर लिखना अनिवार्य करने जा रही है। पढ़िए पूरा इंटरव्यू… सवाल : आयोग में किस तरह की शिकायतें ज्यादा आ रही है?
जवाब : आयोग में सभी तरह के मामलों की शिकायतें आती हैं। लेकिन घरेलू हिंसा के मामले बहुत ज्यादा आते हैं। इन दिनों घरेलू हिंसा से ज्यादा मामले लिव इन रिलेशनशिप के आ रहे हैं। लड़के-लड़कियां लिव इन रिलेशनशिप में रहते हैं, फिर लड़के, लड़कियों को छोड़कर चले जाते हैं। लिव इन रिलेशनशिप एक गंदा सिस्टम चल गया है। अभी एक मामला आया है, जब 21 साल की एक लड़की एक लड़के के साथ तीन साल से लिव इन रिलेशनशिप में रह रही थी। अब लड़का उसे छोड़कर चला गया है। हालत यह है कि उस लड़के ने लड़की की कुछ आपत्तिजनक फोटो उस लड़की की बड़ी बहन के सुसराल वालों को भेज दीं। अब सुसराल वाले उसकी बड़ी बहन को भी घर से निकालने की बात कर रहे हैं। एक लड़की की गलती से पूरे परिवार पर असर पड़ता है। सवाल: क्या लिव इन रिलेशनशिप में धोखा हो रहा है? जवाब : हां, इसमें हर एज ग्रुप के मामले आ रहे हैं। महिलाएं भी छोटे-छोटे लालच में पड़कर अपना शोषण करा रही हैं। कई बार नौकरी के लालच में भी ऐसा हो रहा है। सवाल : आयोग इसे रोकने के लिए क्या कर रहा है?
जवाब : हम तो जागरूक ही कर रहे हैं। माता-पिता को पता होना चाहिए कि बेटी कहां जा रही है। शहर से बाहर किसके साथ रह रही है। एक लड़की लखनऊ में पढ़ने आई थी, लेकिन वह ढाई साल से किसी लड़के के साथ रह रही थी। सवाल : क्या आयोग में लव जिहाद के नाम पर अवैध धर्मांतरण के मामले भी बढ़ रहे?
जवाब: हां, ऐसे मामले आ रहे हैं जहां लव जिहाद के नाम पर अवैध धर्मांतरण कराने के बाद लड़की को छोड़ दिया जाता है। जबरन और अवैध धर्मांतरण में उम्र कैद का प्रावधान है, लेकिन मैं तो कहती हूं कि इसमें फांसी की सजा होनी चाहिए। छांगुर बाबा का ताजा मामला चल रहा है। मैंने भी आगरा में जलालुद्दीन नाम के एक व्यक्ति को गिरफ्तार कराया था। उसने एक तलाकशुदा महिला से संबंध बनाकर उसका अवैध धर्मांतरण कराया। अच्छे घर की महिलाओं और बच्चों को फंसाता था। छांगुर बाबा का पांच सौ करोड़ का टर्नओवर रहा है, चालीस देशों में उसका कनेक्शन है। यह कबसे काम कर रहा होगा। सवाल : लव जिहाद और अवैध धर्मांतरण के मामले कहां से ज्यादा आ रहे हैं?
जवाब : पूर्वांचल के जिलों में अगर हम 100 मामलों की सुनवाई करते हैं, तो उसमें से 30-40 मामले बेटियों के घर से गायब होने के होते हैं। पहले समझ में नहीं आता था कि बेटियां जा कहां रही हैं। 10-12 साल की लड़कियां गायब हो रही हैं। वह क्या जानती हैं? उन्हें घर से ले जाकर धर्मांतरण करा रहे हैं। ब्राह्मण परिवार और क्षत्रिय परिवार की बेटी को 15 लाख और दलित परिवार को दस लाख रुपए तक देते हैं, कमजोर वर्ग को यह निशाना बनाते हैं। परिवार को पहले लगता है कि यह सहयोग हो रहा है, लेकिन बाद में पता चलता है कि कितना गलत काम हो गया है। उन्होंने तरह-तरह के लड़के छोड़े हैं, जो स्कूल-कॉलेजों के बाहर लड़कियों को निशाना बनाते हैं। ऐसे मामलों को रोकने के लिए फांसी की सजा ही होनी चाहिए। सवाल: छोटी-छोटी बच्चियों के साथ भी रेप की घटनाएं बढ़ रही हैं?
जवाब : मैं खुद पीड़ित बच्चियों के घर जाकर मिली हूं। वाराणसी में एक मामले में मैं खुद गई थी। इसमें आरोपी विकृत मानसिकता या शराबी होते हैं। मैंने माता-पिता से भी अपील की है कि बच्चों पर नजर रखें। सवाल : ऑटो-टैक्सी ड्राइवर भी छेड़छाड़ कर रहे हैं, ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं?
जवाब : हां ऐसे मामले सामने आए हैं। आयोग ने एक प्रस्ताव बनाया है। इसमें जितने भी टैक्सी, ऑटो, ई-रिक्शा हैं, उनमें ड्राइवर की सीट के पीछे उसका नाम, मोबाइल नंबर और पहचान पत्र नंबर लिखना अनिवार्य होगा। आयोग के इस प्रस्ताव पर सरकार ने भी संज्ञान लिया है। सरकार भी इस व्यवस्था को सख्ती से लागू करने वाली है। सवाल : यूपी के किस क्षेत्र से सबसे अधिक शिकायतें मिल रही है?
जवाब : यूपी बहुत बड़ा प्रदेश है, सभी जगह से शिकायतें मिलती हैं। 25 करोड़ की आबादी है, 12.50 करोड़ महिलाएं हैं। हर तरफ से अलग-अलग तरह की शिकायतें आती हैं। पूर्वांचल में बेटियां गायब होने के मामले ज्यादा आते हैं। वहां शिक्षा का अभाव रहा, गरीबी भी ज्यादा रही, इसलिए छांगुर बाबा जैसे लोग पनपे। पश्चिमी यूपी में लिव इन रिलेशनशिप में विवाद के मामले ज्यादा हैं, वहां ज्यादा लोग पाश्चात्य संस्कृति की ओर भाग रहे हैं। मध्य यूपी में दहेज के मामले ज्यादा आ रहे हैं। महिलाओं की शिक्षा, सुरक्षा, सशक्तिकरण, रोजगार और आत्मनिर्भर बनाने पर काम हो रहा है, यदि पहले ध्यान दिया होता तो छांगुर उर्फ जलालुद्दीन जैसे जलील व्यक्ति पैदा नहीं होते। सवाल : आपका 10 महीने का कार्यकाल कैसा रहा?
जवाब : मुझे लगता है 10 महीने कब निकल गए, पता ही नहीं चला। इतने सारे काम थे, मैंने हर दिन कुछ नया करने का प्रयास किया। अभी तक कार्यकाल बहुत अच्छा रहा है। मैं गर्व के साथ कह सकती हूं कि महिला आयोग यूपी के हर कोने में काम कर रहा है। सवाल : 10 महीने में कितने मामलों का विस्तारण किया गया है?
जवाब : मैंने जब अध्यक्ष पद पर जॉइन किया, एक लाख तक मामले लंबित थे। उन सभी मामलों का निस्तारण कर दिया है। अब हमारे पास कोई केस लंबित नहीं है। हमारे पास वही केस लंबित हैं, जो न्यायालय में चल रहे हैं या जांच के दायरे में है। जांच के मामले 15 दिन में निस्तारित कर दिए जाते हैं। महीने में दो बार हर जिले में सुनवाई होती है। बहुत सारे केस को हम सुलह-समझौते से ही खत्म करा देते हैं। दोनों पक्षों को बैठाकर केस का निस्तारण करा रहे हैं। सवाल : यूपी में महिलाओं के साथ दुराचार की घटनाएं क्यों बढ़ रही है?
जवाब : नहीं, ऐसा नहीं है। महिलाओं के साथ अत्याचार के मामलों में अब कार्रवाई त्वरित हो रही है। सवाल : महिलाएं प्रेमी के साथ पति या बच्चों की हत्या कर रही हैं?
जवाब : ऐसी घटनाएं दुर्भाग्यपूर्ण हैं। भारत की न संस्कृति ऐसी है, न संस्कार ही ऐसे हैं। यूपी में अभी तक 10-12 मामले ही ऐसे होंगे? लेकिन वह इतना हाइलाइट हो गए। हालत यह हो गई है कि छोटे-छोटे मामलों में भी अब लड़के कहते हैं कि हमें नहीं रहना इसके साथ। हमें नीले ड्रम में बंद नहीं होना है। सवाल : क्या थानों में सुनवाई न होने से महिलाओं को आयोग तक आना पड़ता है?
जवाब : हां, ऐसे मामले भी आते हैं, जब पुलिस कार्रवाई नहीं करती, तो महिलाओं को आयोग में शिकायत करनी पड़ती है। लेकिन ऐसे मामले ज्यादा हैं, जहां महिलाएं सबसे पहले आयोग में शिकायत करती हैं। आयोग में शिकायत करने से आपसी सुलह से मामलों का निस्तारण हो जाता है। …………… ये खबर भी पढ़ें… पहले हिचकी, फिर नाक से खून और टॉपर की मौत:बाराबंकी में 17 दिन में 2 बच्चों की मौत; क्या साइलेंट अटैक था, जिम्मेदार कौन? बाराबंकी के स्कूल में 10वीं की जिला टॉपर छात्रा की क्लास में हिचकी आई। कोई समझ पाता, उसके पहले नाक से खून आया। अस्पताल पहुंचने से पहले मौत हो गई। बाराबंकी में ही एक दूसरे स्कूल में 2 जुलाई को 12 साल के एक बच्चे की भी अचानक मौत हुई थी। आखिर इन दोनों बच्चों की मौत अचानक क्यों हुई? क्या साइलेंट कार्डियक अटैक आया था? यह हार्ट अटैक से कैसे अलग है? इसके पीछे की वजह क्या है? पढ़िए पूरी खबर…