बुलंदशहर में इंस्पेक्टर के 5 हत्यारों को उम्रकैद:33 लोगों को 7-7 साल की सजा; दोषी हंसते हुए बोला- हमारे साथ अच्छा हुआ

बुलंदशहर के बहुचर्चित स्याना हिंसा मामले में आज, शुक्रवार को सात साल बाद फैसला आ गया। कोर्ट ने इंस्पेक्टर सुबोध कुमार सिंह की हत्या के 5 दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इनमें प्रशांत नट, डेविड, जोनी, राहुल और लोकेंद्र मामा शामिल है। अदालत ने पांचों पर 20-20 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने 33 दोषियों को हिंसा-आगजनी और हत्या की कोशिश के लिए 7-7 साल की सजा दी है। इन सभी पर एक से दो हजार रुपए तक जुर्माना लगाया है। जुर्माने की 80 फीसदी राशि इंस्पेक्टर की पत्नी रजनी को मिलेगी। जेल जाते वक्त हंसते हुए दोषी बोला- अच्छा हुआ, हमें न्याय मिला है
7 साल की सजा पाने वाला विनीत चौधरी जेल जाते वक्त हंस रहा था। उसने कहा, जो हुआ अच्छा हुआ है। हमें न्याय मिला है। निषाद पार्टी के नेता शिखर अग्रवाल को भी 7 साल की सजा मिली है। उसने कहा- हम कोर्ट के फैसले से खुश हैं, हमें पूरा भरोसा था कि न्याय मिलेगा। हमें न्याय मिला है। हमें इसके आगे कुछ नहीं कहना है। वकीलों ने क्या कहा? दो दिन पहले यानी बुधवार को कोर्ट ने सभी 38 आरोपियों को दोषी करार दिया था। सजा के लिए 1 अगस्त यानी आज की तारीख तय की थी। आज शाम 5:45 बजे जज ने फैसला सुनाया। सजा पाने वालों में जिला पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान, बीजेपी नेता, निषाद पार्टी के नेता और आरएसएस के नगर कार्यवाह भी शामिल हैं। पुलिस ने मामले में कुल 44 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इनमें से 5 आरोपियों की मौत हो चुकी है, जबकि 1 नाबालिग का केस जुवेनाइल कोर्ट में चल रहा है। शहीद इंस्पेक्टर का बेटा बोला- जो गलत थे, उन्हें सजा मिली
शहीद इंस्पेक्टर सुबोध के बेटे श्रेय ने फैसले को लेकर कहा- हम कोर्ट के फैसले से संतुष्ट हैं। हम चौकियों में गए, थाने में गए। हमने ये साबित किया कि जो लोग गलत थे, उन्हें सजा मिली है। ये लड़ाई आगे भी जारी रहेगी। इसके लिए हमें किसी भी न्याय की चौखट पर जाना पड़े तो हम जाएंगे। हम अपने वकील से बातचीत करने के बाद हाईकोर्ट जाने का फैसला करेंगे। 3 सीओ समेत 5 थानों का फोर्स तैनात रहा
सजा के फैसले को लेकर पुलिस प्रशासन अलर्ट मोड पर रहा। बुलंदशहर कोर्ट के बाहर तैनात एएसपी ऋजुल ने बताया- स्याना हिंसा मामले में आज सजा का ऐलान हुआ है। कोर्ट के बाहर तीन CO समेत 5 थानों का फोर्स तैनात रहा। आसपास के इलाके को पुलिस ने कब्जे में ले रखा था। सजा के ऐलान के बाद पुलिस सभी दोषियों को कड़ी सुरक्षा में कोर्ट से बाहर लाया गया। उसके बाद गणना कराते हुए वैन में बैठाया गया। इस दौरान पुलिस ने चारों तरफ से सुरक्षा घेरा बनाए रखा। अब जानिए 3 दिसंबर 2018 को क्या हुआ था…
3 दिसंबर, 2018 को स्याना कोतवाली के गांव महाव में गोवंश के अवशेष मिले थे। इसकी सूचना पर हिंदूवादी संगठन और आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे। उन्होंने गोकशी का विरोध किया। आरोप है कि योगेश राज ने अपने साथियों के साथ मिलकर लोगों को इकट्‌ठा किया और उन्हें भड़काया। भीड़ ट्रैक्टर-ट्रॉली में गोवंश के अवशेषों को भरकर बुलंदशहर हाईवे स्थित चिंगरावठी पुलिस चौकी पर पहुंच गई। भीड़ ने हाईवे को पूरी तरह जाम कर दिया। पुलिस ने लोगों रोकने का प्रयास किया तो भीड़ ने पुलिस पर पथराव कर दिया। पुलिस चौकी फूंक दी। हिंसा के दौरान तत्कालीन कोतवाल सुबोध कुमार भीड़ को काबू करने में शहीद हो गए थे। चिंगरावठी के रहने वाले युवक सुमित की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। आनन-फानन में पुलिस ने गोकशी के 10 आरोपियों पर केस दर्ज किया था, तब जाकर मामला शांत हुआ था। हिंसा की 4 तस्वीरें देखिए- 27 नामजद समेत 60 लोगों पर हुआ था केस
हिंसा के बाद कोतवाली में तैनात एसआई सुभाष सिंह ने तहरीर दी थी। इसमें वर्तमान में जिला पंचायत सदस्य योगेश राज को मुख्य आरोपी बनाया था। इसके अलावा, 27 लोगों को नामजद करने के साथ हिंसा फैलाने के आरोप में 60 अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। जबकि गोकशी के आरोप में 10 लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया। हालांकि, पुलिस की चार्जशीट में इस मामले में 44 लोग ही आरोपी मिले। बाकी 16 लोगों के खिलाफ सबूत नहीं मिले, इसलिए उनके नाम केस से हटा दिए गए। 44 आरोपी जेल भेजे गए थे
तत्कालीन कोतवाली प्रभारी प्रेमचंद शर्मा ने बताया- हिंसा के बाद पुलिस ने 44 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। इनमें से 5 की मौत हो चुकी है। एक आरोपी नाबालिग था। जो रिहा हो चुका है। बाकी 38 आरोपियों पर मुकदमा दर्ज है। इनमें से 4 आरोपी जेल में हैं, 34 जमानत पर थे। हिंसा के मुख्य आरोपी को सुप्रीम कोर्ट से मिली थी जमानत
चिंगरावठी के रहने वाले मुख्य आरोपी जिला पंचायत सदस्य योगेश राज कुछ एक महीने पहले ही सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी। अदालत ने हिंसा के लिए उसे दोषी करार दिया है। उसे सात साल की सजा सुनाई गई है। शहीद कोतवाल सुबोध कुमार की लाइसेंसी पिस्टल का पुलिस आज तक पता नहीं लगा सकी है। सौरभ की मां बोलीं- बेटा निर्दोष, कोचिंग पढ़कर लौट रहा था
हिंसा मामले में सात साल की कैद पाने वाले सौरभ की मां शशिप्रभा ने बताया- मेरा बेटा चिंगरावठी मामले में निर्दोष है। उसे गलत तरीके से आरोपी बना दिया गया। वो कोचिंग पढ़कर लौट रहा था। पुलिस की भर्ती निकली हुई थी। उसकी तैयारी कर रहा था। वह भीड़ देखकर रुक गया था। वीडियो में उसका चेहरा देखकर उसे आरोपी बना दिया गया। इस केस में सभी दोषी नहीं हैं। इंस्पेक्टर के साथ गलत हुआ। सुमित के साथ भी गलत हुआ। इंसाफ तो सभी को मिलना चाहिए। दुख होता है कि बच्चों का 7 साल का करियर बर्बाद हो जाएगा। ————————————— बुलंदशहर हिंसा से जुड़ी हुई ये खबर भी पढ़ें- बुलंदशहर हिंसा में शहीद इंस्पेक्टर को न्याय का इंतजार:गौकशी के कारण भड़की हिंसा में स्याना इंस्पेक्टर समेत हुई थी दो की हत्या बुलंदशहर के चिंगरावठी हिंसा में मारे गए स्याना इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की पत्नी रजनी सिंह को आज भी उनके पति की शहादत का दर्जा मिलने का इंतजार है। 7 साल बीतने के बावजूद योगी सरकार ने इंस्पेक्टर सुबोध कुमार को शहीद का दर्जा नहीं दिया है। (पढ़िए पूरी खबर)