‘जब तक यूपी की सरकार बंद किए स्कूलों में अध्यापक और प्रिंसिपल नहीं पहुंचा देगी, तब तक समाजवादियों की पीडीए पाठशाला चलती रहेगी। बीजेपी सरकार को गलतफहमी है कि वह पुलिस के जरिए पीडीए पाठशाला बंद करा देगी। प्राथमिक स्कूलों को बंद करने और मर्जर करने का फैसला गलत है, सरकार बंद किए स्कूल फिर से खोले।’ यह बातें सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 5 अगस्त को लखनऊ में जनेश्वर मिश्र की जयंती पर कही थीं। इस बयान को 2 महीने बीत गए। अखिलेश यादव के तमाम दावों के बाद भी सपा की सभी पीडीए पाठशाला अब बंद हो चुकी हैं। आखिर बंद क्यों हुईं? क्या सरकार ने बंद हुए स्कूलों को खोला? जिस उद्देश्य को सोचकर खोला गया, वह कितना हासिल हुआ? जिनके खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए, उनकी क्या स्थिति है? दैनिक भास्कर की टीम ने इस पूरे मामले पर इससे जुड़े लोगों से बात की। आइए सब कुछ एक तरफ से जानते हैं… यूपी सरकार ने 10,827 प्राइमरी स्कूलों का मर्जर किया
16 जून को बेसिक शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव दीपक कुमार की तरफ से एक आदेश आया। इसमें कहा गया- जिन विद्यालयों में अपर्याप्त छात्र हैं, उनका पास के ही दूसरे विद्यालय में विलय होगा। सरकार ने अपर्याप्त का जो मानक बनाया, वह 50 से कम बच्चों वाले स्कूल रहे। हालांकि, कई जिलों में परिस्थितियों को देखकर फैसला लेने की बात कही गई। स्कूलों का मर्जर शुरू हुआ। शुरुआत में करीब 5 हजार स्कूलों को मर्ज करना था। लेकिन, धीरे-धीरे यह संख्या बढ़ी और करीब 10 हजार 827 स्कूलों को बगल के प्राइमरी स्कूलों में मर्ज कर दिया गया। विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने जमीन पर और सोशल मीडिया पर इसका विरोध शुरू किया, लेकिन कोई असर नहीं पड़ा। इसके बाद उन्होंने जहां-जहां स्कूल बंद हुए, वहां पर पीडीए पाठशाला शुरू की। प्रदेशभर में करीब 1000 पीडीए पाठशाला शुरू की गईं। ऐसे वीडियो सामने आए जहां ‘अ’ से अखिलेश और ‘ड’ से डिंपल यादव पढ़ाया जा रहा था। पुलिस ने FIR दर्ज करना शुरू किया। एक के बाद एक कई एफआईआर का नतीजा यह हुआ कि सभी पीडीए पाठशाला अब बंद हो गईं। ‘आ’ से आजम पढ़ाया, तो 19 घंटे गिरफ्तार रहा
सीतापुर के अकोईया गांव में समाजवादी छात्रसभा के जिलाध्यक्ष शिवम सिंह ने पीडीए पाठशाला शुरू की। शिवम ने छोटे बच्चों को इकट्ठा करके पढ़ाना शुरू किया। ‘आ से आम का पेड़ लगाओ, आजम खान को छुड़ाओ। इ से इमली होती खट्टी, बीजेपी की सत्ता से छुट्टी। उ से उल्लू रात में आए, भाजपा जुमला फैलाए।’ शिवम का यह सब पढ़ाते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। 1 अगस्त को पुलिस ने शिवम को गिरफ्तार कर लिया। शिवम इस घटना को लेकर कहते हैं- उस वक्त 19 घंटे पुलिस की हिरासत में रहा। इसके बाद जमानत करवाई। अब पुलिस ने मामले में चार्जशीट लगा दी है। सारा मामला कोर्ट में है। वह वीडियो वायरल हुआ था, तब राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश जी ने बुलाकर सम्मानित किया था। सहारनपुर में आज भी 69 स्कूल बंद
सहारनपुर में सपा नेता फरहाद गाड़ा ने रामनगर में अपने घर पर पीडीए पाठशाला शुरू की। इसमें उन्होंने बच्चों को A फॉर एपल की जगह A फॉर अखिलेश, D फॉर डॉग की जगह D फॉर डिंपल यादव और M फॉर मैंगो की जगह M फॉर मुलायम सिंह यादव पढ़ाया। इस वीडियो के वायरल होने के बाद कल्लरपुर गुर्जर के रहने वाले मेन सिंह ने देहात कोतवाली में फरहाद के खिलाफ केस दर्ज करवाया। अपने ऊपर दर्ज हुए केस को लेकर फरहाद कहते हैं- शिकायत में लिखवाया है कि बाबा साहब का नाम लिया गया इसलिए हमारी भावना आहत हुई। जबकि उस व्यक्ति से मेरी आज तक कोई मुलाकात नहीं हुई। बाकी एफआईआर पहले सीओ साहब के पास थी, फिर डीएम के पास परमिशन के लिए गई। अब फिर से सीओ साहब के पास आई है। बाकी मेरे सहारनपुर में आज भी 69 स्कूल बंद हैं। मैं इसके लिए डीएम और बीएसए से भी मिला, लेकिन कोई स्कूल नहीं खुला है। कोई-कोई स्कूल 2-2 किलोमीटर दूर हैं। सपा नेता के साथ गांव के लोग भी FIR झेल रहे
भदोही जिले में औराई विधानसभा में सपा प्रत्याशी रहीं अंजनी सरोज ने सिंकदरा स्कूल में पीडीए पाठशाला शुरू की थी। उनके खिलाफ मुकदमा लिखा गया। उस वक्त डीएम शैलेश कुमार ने कहा था- अंजनी सरोज अपने समर्थकों के साथ आंगनवाड़ी केंद्र आईं और बच्चों को पेंसिल-रबड़ दिया। इसके बाद बच्चों को टॉफी का लालच देकर सिंकदरा प्राथमिक स्कूल तक ले गईं। वहां सपा के बैनर पोस्टर दिए और अवैध रूप से पाठशाला चलाई। अपने ऊपर हुए मुकदमों को लेकर अंजनी कहती हैं- जब एफआईआर हुई, तो हमने कोर्ट से अग्रिम जमानत ले ली थी। पुलिस ने तो अब उस मामले में चार्जशीट भी दायर कर दी है। एक पेशी हो चुकी है। अंजनी कहती हैं कि बीजेपी वालों की कथनी-करनी में बहुत अंतर है। इन्होंने कहा कि स्कूल खोल देंगे, लेकिन आज भी स्कूल बंद है। सपा की पीडीए पाठशाला पर एक के बाद एक कार्रवाई होती चली गई। प्रयागराज में तो एक ही दिन तीन अलग-अलग थानों में मामला दर्ज हुआ। पहला मामला हंडिया थाने में, दूसरा उतरांव और तीसरा बारा थाने में लिखा गया। इन तीनों मामलों में करीब 20 लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ। पुलिस ने 1 से 10 अगस्त के बीच ही 10 से ज्यादा जगहों पर कार्रवाई की। इस कार्रवाई के बाद अखिलेश यादव ने कहा था- सरकार को गलतफहमी है कि वह पुलिस के बल पर पीडीए पाठशाला बंद कर देगी। हालांकि, बाद में लगातार केस की वजह से ही कार्यकर्ता पीडीए पाठशाला चलाना बंद करने लगे। सरकार ने मर्जर नियम में बदलाव किया
31 जुलाई, 2025 को बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा था- एक किलोमीटर से अधिक दूरी पर किसी भी स्कूल को मर्ज नहीं किया जाएगा। जिस स्कूल में 50 या फिर इससे अधिक छात्र हैं, उन्हें भी मर्ज नहीं किया जाएगा। जो स्कूल मर्ज हो गए हैं, उनका मर्जर कैंसिल किया जाएगा। मर्जर के बाद जो स्कूल खाली हुए हैं, वहां बाल वाटिका खोली जाएगी, जिसमें 3 से 6 साल के बच्चे पढ़ेंगे। मर्जर के बाद भी किसी टीचर की नौकरी नहीं जाएगी। 14 अगस्त को यूपी सरकार की तरफ से बताया गया कि 5,118 स्कूलों में बाल वाटिका शुरू की गई हैं। ये वो स्कूल हैं, जो मर्जर के बाद खाली हुए थे। हालांकि, सरकार की तरफ से अब तक यह नहीं बताया गया कि मर्जर के बाद कितने स्कूल खाली हुए थे? मर्जर के फैसले का विरोध था पीडीए पाठशाला
वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक राजकुमार सिंह कहते हैं- सपा ने इसे मर्जर के फैसले के खिलाफ विरोध का एक माध्यम बनाया और शुरू किया। सपा 2027 के लिए इसे गेमचेंजर मान रही थी, लेकिन बीजेपी ने उससे यह मुद्दा छीन लिया। कई स्कूलों को दोबारा शुरू कर दिया गया। पीडीए पाठशाला चलाने वालों पर ताबड़तोड़ एफआईआर हुई। इस वजह से यह लगातार बंद होती चली गई। राजकुमार कहते हैं- उस वक्त ‘अ’ से अनार के बजाय अखिलेश और ‘म’ से मुलायम पढ़ाए जाने का वीडियो ज्यादा सामने आने लगा था। यह उन बच्चों के साथ ठीक नहीं था। उनके अभिभावक भी जानते थे कि पढ़ाई का यह तरीका गलत है। इन्हीं चीजों पर एफआईआर होने लगी, तमाम लोग गिरफ्तार भी हो गए। इसलिए भी पीडीए पाठशाला बंद होती चली गई। 2027 के चुनाव पर इसका किसी तरह का कोई असर या फिर छाप नहीं नजर आएगी। हमारी सरकार आएगी, तो हम मर्जर को रद्द करेंगे
हमने यूपी में पीडीए पाठशाला बंद होने को लेकर सपा के प्रवक्ता मनोज काका से बात की। वह कहते हैं- मैं चंदौली जिले से आता हूं। यहां अभी कुछ जगहों पर पीडीए पाठशाला चल रही है। लेकिन, यह सही है कि ज्यादातर जगहों पर बंद हो गई। इसकी सबसे बड़ी वजह सरकार के आदेश पर लगातार मुकदमा करना था। चंदौली, प्रयागराज, प्रतापगढ़, अमेठी से लेकर हर जिले में मुकदमा किया। बाद में कहा कि हमने मर्जर रद्द कर दिया, लेकिन आज भी स्थिति वही है। जो स्कूल बंद हुआ, वह नहीं खुला। मनोज काका कहते हैं- हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने संकल्प लिया है कि जब 2027 में हमारी सरकार बनेगी, तो हम इस सरकार के मर्जर वाले फैसले को रद्द करेंगे और सभी प्राइमरी स्कूलों को खोलेंगे। भाजपा ने पीडीए पाठशाला को राजनीतिक स्वांग बताया
बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी कहते हैं- पीडीए पाठशाला राजनीतिक नाटक था। समाजवादी पार्टी पीडीए के नाम पर यूपी को जातीय उन्माद में झोंकने की कोशिश कर रही है। जहां तक बात मुकदमे की है, अगर सरकारी व्यवस्था को डिस्टर्ब किया जाएगा तो कानून अपना काम करेगा। ———————– ये खबर भी पढ़ें… दिवाली से पहले योगी सरकार का बोनस का ऐलान, 14.82 लाख कर्मचारियों को मिलेगा, अधिकतम 7 हजार रुपए मिलेंगे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीपावली के शुभ अवसर पर राज्य कर्मचारियों को बड़ा उपहार देते हुए वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए बोनस देने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय कर्मचारियों के परिश्रम और निष्ठा के प्रति राज्य सरकार की सराहना का प्रतीक है। प्रदेश की प्रगति में सरकारी कर्मचारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, और सरकार हर स्तर पर उनके कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। पढ़ें पूरी खबर
16 जून को बेसिक शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव दीपक कुमार की तरफ से एक आदेश आया। इसमें कहा गया- जिन विद्यालयों में अपर्याप्त छात्र हैं, उनका पास के ही दूसरे विद्यालय में विलय होगा। सरकार ने अपर्याप्त का जो मानक बनाया, वह 50 से कम बच्चों वाले स्कूल रहे। हालांकि, कई जिलों में परिस्थितियों को देखकर फैसला लेने की बात कही गई। स्कूलों का मर्जर शुरू हुआ। शुरुआत में करीब 5 हजार स्कूलों को मर्ज करना था। लेकिन, धीरे-धीरे यह संख्या बढ़ी और करीब 10 हजार 827 स्कूलों को बगल के प्राइमरी स्कूलों में मर्ज कर दिया गया। विपक्षी दल समाजवादी पार्टी ने जमीन पर और सोशल मीडिया पर इसका विरोध शुरू किया, लेकिन कोई असर नहीं पड़ा। इसके बाद उन्होंने जहां-जहां स्कूल बंद हुए, वहां पर पीडीए पाठशाला शुरू की। प्रदेशभर में करीब 1000 पीडीए पाठशाला शुरू की गईं। ऐसे वीडियो सामने आए जहां ‘अ’ से अखिलेश और ‘ड’ से डिंपल यादव पढ़ाया जा रहा था। पुलिस ने FIR दर्ज करना शुरू किया। एक के बाद एक कई एफआईआर का नतीजा यह हुआ कि सभी पीडीए पाठशाला अब बंद हो गईं। ‘आ’ से आजम पढ़ाया, तो 19 घंटे गिरफ्तार रहा
सीतापुर के अकोईया गांव में समाजवादी छात्रसभा के जिलाध्यक्ष शिवम सिंह ने पीडीए पाठशाला शुरू की। शिवम ने छोटे बच्चों को इकट्ठा करके पढ़ाना शुरू किया। ‘आ से आम का पेड़ लगाओ, आजम खान को छुड़ाओ। इ से इमली होती खट्टी, बीजेपी की सत्ता से छुट्टी। उ से उल्लू रात में आए, भाजपा जुमला फैलाए।’ शिवम का यह सब पढ़ाते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। 1 अगस्त को पुलिस ने शिवम को गिरफ्तार कर लिया। शिवम इस घटना को लेकर कहते हैं- उस वक्त 19 घंटे पुलिस की हिरासत में रहा। इसके बाद जमानत करवाई। अब पुलिस ने मामले में चार्जशीट लगा दी है। सारा मामला कोर्ट में है। वह वीडियो वायरल हुआ था, तब राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश जी ने बुलाकर सम्मानित किया था। सहारनपुर में आज भी 69 स्कूल बंद
सहारनपुर में सपा नेता फरहाद गाड़ा ने रामनगर में अपने घर पर पीडीए पाठशाला शुरू की। इसमें उन्होंने बच्चों को A फॉर एपल की जगह A फॉर अखिलेश, D फॉर डॉग की जगह D फॉर डिंपल यादव और M फॉर मैंगो की जगह M फॉर मुलायम सिंह यादव पढ़ाया। इस वीडियो के वायरल होने के बाद कल्लरपुर गुर्जर के रहने वाले मेन सिंह ने देहात कोतवाली में फरहाद के खिलाफ केस दर्ज करवाया। अपने ऊपर दर्ज हुए केस को लेकर फरहाद कहते हैं- शिकायत में लिखवाया है कि बाबा साहब का नाम लिया गया इसलिए हमारी भावना आहत हुई। जबकि उस व्यक्ति से मेरी आज तक कोई मुलाकात नहीं हुई। बाकी एफआईआर पहले सीओ साहब के पास थी, फिर डीएम के पास परमिशन के लिए गई। अब फिर से सीओ साहब के पास आई है। बाकी मेरे सहारनपुर में आज भी 69 स्कूल बंद हैं। मैं इसके लिए डीएम और बीएसए से भी मिला, लेकिन कोई स्कूल नहीं खुला है। कोई-कोई स्कूल 2-2 किलोमीटर दूर हैं। सपा नेता के साथ गांव के लोग भी FIR झेल रहे
भदोही जिले में औराई विधानसभा में सपा प्रत्याशी रहीं अंजनी सरोज ने सिंकदरा स्कूल में पीडीए पाठशाला शुरू की थी। उनके खिलाफ मुकदमा लिखा गया। उस वक्त डीएम शैलेश कुमार ने कहा था- अंजनी सरोज अपने समर्थकों के साथ आंगनवाड़ी केंद्र आईं और बच्चों को पेंसिल-रबड़ दिया। इसके बाद बच्चों को टॉफी का लालच देकर सिंकदरा प्राथमिक स्कूल तक ले गईं। वहां सपा के बैनर पोस्टर दिए और अवैध रूप से पाठशाला चलाई। अपने ऊपर हुए मुकदमों को लेकर अंजनी कहती हैं- जब एफआईआर हुई, तो हमने कोर्ट से अग्रिम जमानत ले ली थी। पुलिस ने तो अब उस मामले में चार्जशीट भी दायर कर दी है। एक पेशी हो चुकी है। अंजनी कहती हैं कि बीजेपी वालों की कथनी-करनी में बहुत अंतर है। इन्होंने कहा कि स्कूल खोल देंगे, लेकिन आज भी स्कूल बंद है। सपा की पीडीए पाठशाला पर एक के बाद एक कार्रवाई होती चली गई। प्रयागराज में तो एक ही दिन तीन अलग-अलग थानों में मामला दर्ज हुआ। पहला मामला हंडिया थाने में, दूसरा उतरांव और तीसरा बारा थाने में लिखा गया। इन तीनों मामलों में करीब 20 लोगों के खिलाफ केस दर्ज हुआ। पुलिस ने 1 से 10 अगस्त के बीच ही 10 से ज्यादा जगहों पर कार्रवाई की। इस कार्रवाई के बाद अखिलेश यादव ने कहा था- सरकार को गलतफहमी है कि वह पुलिस के बल पर पीडीए पाठशाला बंद कर देगी। हालांकि, बाद में लगातार केस की वजह से ही कार्यकर्ता पीडीए पाठशाला चलाना बंद करने लगे। सरकार ने मर्जर नियम में बदलाव किया
31 जुलाई, 2025 को बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा था- एक किलोमीटर से अधिक दूरी पर किसी भी स्कूल को मर्ज नहीं किया जाएगा। जिस स्कूल में 50 या फिर इससे अधिक छात्र हैं, उन्हें भी मर्ज नहीं किया जाएगा। जो स्कूल मर्ज हो गए हैं, उनका मर्जर कैंसिल किया जाएगा। मर्जर के बाद जो स्कूल खाली हुए हैं, वहां बाल वाटिका खोली जाएगी, जिसमें 3 से 6 साल के बच्चे पढ़ेंगे। मर्जर के बाद भी किसी टीचर की नौकरी नहीं जाएगी। 14 अगस्त को यूपी सरकार की तरफ से बताया गया कि 5,118 स्कूलों में बाल वाटिका शुरू की गई हैं। ये वो स्कूल हैं, जो मर्जर के बाद खाली हुए थे। हालांकि, सरकार की तरफ से अब तक यह नहीं बताया गया कि मर्जर के बाद कितने स्कूल खाली हुए थे? मर्जर के फैसले का विरोध था पीडीए पाठशाला
वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक राजकुमार सिंह कहते हैं- सपा ने इसे मर्जर के फैसले के खिलाफ विरोध का एक माध्यम बनाया और शुरू किया। सपा 2027 के लिए इसे गेमचेंजर मान रही थी, लेकिन बीजेपी ने उससे यह मुद्दा छीन लिया। कई स्कूलों को दोबारा शुरू कर दिया गया। पीडीए पाठशाला चलाने वालों पर ताबड़तोड़ एफआईआर हुई। इस वजह से यह लगातार बंद होती चली गई। राजकुमार कहते हैं- उस वक्त ‘अ’ से अनार के बजाय अखिलेश और ‘म’ से मुलायम पढ़ाए जाने का वीडियो ज्यादा सामने आने लगा था। यह उन बच्चों के साथ ठीक नहीं था। उनके अभिभावक भी जानते थे कि पढ़ाई का यह तरीका गलत है। इन्हीं चीजों पर एफआईआर होने लगी, तमाम लोग गिरफ्तार भी हो गए। इसलिए भी पीडीए पाठशाला बंद होती चली गई। 2027 के चुनाव पर इसका किसी तरह का कोई असर या फिर छाप नहीं नजर आएगी। हमारी सरकार आएगी, तो हम मर्जर को रद्द करेंगे
हमने यूपी में पीडीए पाठशाला बंद होने को लेकर सपा के प्रवक्ता मनोज काका से बात की। वह कहते हैं- मैं चंदौली जिले से आता हूं। यहां अभी कुछ जगहों पर पीडीए पाठशाला चल रही है। लेकिन, यह सही है कि ज्यादातर जगहों पर बंद हो गई। इसकी सबसे बड़ी वजह सरकार के आदेश पर लगातार मुकदमा करना था। चंदौली, प्रयागराज, प्रतापगढ़, अमेठी से लेकर हर जिले में मुकदमा किया। बाद में कहा कि हमने मर्जर रद्द कर दिया, लेकिन आज भी स्थिति वही है। जो स्कूल बंद हुआ, वह नहीं खुला। मनोज काका कहते हैं- हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने संकल्प लिया है कि जब 2027 में हमारी सरकार बनेगी, तो हम इस सरकार के मर्जर वाले फैसले को रद्द करेंगे और सभी प्राइमरी स्कूलों को खोलेंगे। भाजपा ने पीडीए पाठशाला को राजनीतिक स्वांग बताया
बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी कहते हैं- पीडीए पाठशाला राजनीतिक नाटक था। समाजवादी पार्टी पीडीए के नाम पर यूपी को जातीय उन्माद में झोंकने की कोशिश कर रही है। जहां तक बात मुकदमे की है, अगर सरकारी व्यवस्था को डिस्टर्ब किया जाएगा तो कानून अपना काम करेगा। ———————– ये खबर भी पढ़ें… दिवाली से पहले योगी सरकार का बोनस का ऐलान, 14.82 लाख कर्मचारियों को मिलेगा, अधिकतम 7 हजार रुपए मिलेंगे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दीपावली के शुभ अवसर पर राज्य कर्मचारियों को बड़ा उपहार देते हुए वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए बोनस देने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह निर्णय कर्मचारियों के परिश्रम और निष्ठा के प्रति राज्य सरकार की सराहना का प्रतीक है। प्रदेश की प्रगति में सरकारी कर्मचारियों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, और सरकार हर स्तर पर उनके कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। पढ़ें पूरी खबर