BJP नेता के मोबाइल में कातिल की बीवी की तस्वीरें:हत्या के बाद डॉ.उदय सबूत साथ ले गया; प्रयागराज में पत्नी बोलीं-ये पॉलिटिकल मर्डर

BJP नेता रणधीर सिंह की हत्या करने के 9 दिन बाद भी पुलिस उसका मोबाइल बरामद नहीं कर सकी है। हत्या प्रयागराज में हुई, कातिलों ने स्कॉर्पियो चित्रकूट में छोड़ी थी। पुलिस कस्टडी में हत्यारोपी राम सिंह से जब पूछा गया कि रणधीर का मोबाइल कहां है? राम सिंह ने हंसते हुए कहा- आपको मोबाइल नहीं मिलेगा। वो तो डॉ. उदय अपने साथ ले गया। दरअसल, स्कार्पियों में हत्या करने के बाद हम लोग सोच रहे थे कि अब क्या करना है? इस बीच उदय की नजर रणधीर के मोबाइल पर पड़ी। उसने मोबाइल उठाकर देखा तो वह लॉक था। लाश की उंगली के फिंगर प्रिंट से मोबाइल को खोल लिया गया। इसके बाद जिस बात का उदय को शक था, वो हकीकत में बदल गया। मोबाइल की गैलरी में उदय को अपनी बीवी अंजली यादव की कई तस्वीरें रणधीर के साथ मिलीं। कुछ तस्वीरें न्यूड अवस्था की भी थीं। इसके बाद उदय गुस्सा हो गया, लाश को एक के बाद एक तीन तमाचे मारे, गालियां दीं। विजय और सुजीत ने उसको पकड़ा, तब वो शांत हुआ। यही वजह है कि लाश को वह पूरी तरह से खत्म करने पर उतारू था। बमरौली के रेलवे ट्रैक पर जब एक बार ट्रेन लाश को क्षत विक्षत करते हुए गुजर गई, तब उसने हम लोगों से कहा- इसको फिर इकट्‌ठा करो। कोई निशान बचना नहीं चाहिए। हम लोगों ने धड़, हाथ-पैर इकट्ठा करके फिर से ट्रैक पर रखे। करीब 2 घंटे तक वहीं बैठकर वह लाश को कटते हुए देखता रहा। रणधीर सिंह की पत्नी ने कहा- पुलिस ने जिनको पकड़ा है, वो अकेले इतने बड़े आदमी की हत्या नहीं कर सकते। इसमें किसी बड़े आदमी का हाथ है। ये पॉलिटिकल मर्डर है। घटना पर परिजनों और ग्रामीणों का क्या कुछ कहना है, पढ़िए रिपोर्ट… उदय को सब ‘डॉक्टर’ क्यों कहते थे…
रणधीर मर्डर केस में राम सिंह के साथ पुलिस ने उदय की सास लीलावती को भी अरेस्ट किया है। पुलिस ने लीलावती से पूछा- सब लोग उदय को डॉक्टर क्यों कहते हैं? लीलावती ने कहा- उसके पास डॉक्टर की डिग्री नहीं है। वह सिविल लाइन के स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल में कंपाउंडर था। वहां संविदा पर उसकी जॉब थी। वो नवाबगंज के इलाके में घूम-घूमकर लोगों का इलाज करवाता था। धीरे-धीरे लोग उसको डॉक्टर उदय कहने लगे। एक पुलिस ने हॉस्पिटल पहुंचकर डेटा चेक किया है कि वो कब से हॉस्पिटल आता रहा, कब ‘गायब’ हुआ। अब रणधीर के गांव का माहौल जानिए रणधीर से 11Km दूर कातिल डॉ. उदय का घर
पुलिस इन्वेस्टिगेशन में नए फैक्ट जानने के साथ दैनिक भास्कर टीम शहर से 22 Km दूर नवाबगंज पहुंची। यहां पूरा मजरे इब्राहिमपुर में रणधीर का परिवार रहता है। गांव में लोगों से बात करके समझ आया कि रणधीर के घर से करीब 11 Km दूर उदय का घर है। जबकि उदय के घर से सिर्फ 1 Km दूर राम सिंह का घर है। हालांकि गांव में उनके नाम की दहशत है, ज्यादातर गांव के लोग कैमरे पर बात करने को तैयार नहीं हुए। BJP नेता रणधीर सिंह के पिता राम अभिलाष से मुलाकात हुई। हमने पूछा- उस दिन (22 अगस्त) की सुबह क्या हुआ था? उन्होंने कहा- उस दिन सुबह आखिरी बार मैंने बेटे रणधीर को देखा था। मुझे क्या मालूम था कि अब बेटे की लाश भी देखने को नसीब नहीं होगी, नहीं तो सीने से आखिरी बार तो लगा ही लेता। घर से निकलकर वो स्कॉर्पियो में बैठ गया, उसने सिर्फ इतना कहा- दुखियापुर गांव में भंडारा है, मैं देर से वापस आऊंगा। हमारे खेतों में अजीत काम करता है। दोपहर में उसको खाना देने रणधीर को जाना था, मगर वह पहुंचा नहीं। तब अजीत का कॉल आया कि नेता भैया अभी तक खाना लेकर नहीं आए हैं, तो भतीजे को उसके पास खाना लेकर भिजवा दिया था। फिर पुलिस ने हमें थाने बुलाया था। कुछ सबूत दिखा। इसमें एक CCTV भी था। जिसमें टाइम यही कोई रात का 8 बजे का था। रणधीर स्कॉर्पियो की ड्राइविंग सीट पर बैठा था। वह रवि ढाबा (हथिगंहा) के पास मौजूद था। वीडियो में दिखा कि गाड़ी में ड्राइविंग सीट के बगल में राम सिंह बैठा था। फिर हमें कुछ पता नहीं चला। धड़ और अंडरवियर देखकर बॉडी पहचानी
हमने पूछा- जब लाश नहीं मिली, तो बॉडी को आपने पहचाना कैसे? पिता राम अभिलाष ने कहा- पुलिस ने 28 अगस्त की दोपहर 2 बजे हमें नवाबगंज थाने में बुलाया था। डीसीपी ने मुझे मोबाइल में कुछ फोटो दिखाई। इसमें बेटे के शरीर का धड़ और उसकी अंडरवियर देखकर मैंने पहचाना। उन्होंने रोते हुए कहा- कौन पिता होगा, जो अपने बेटे के शरीर नहीं पहचान पाएगा। इसके बाद पुलिस वालो ने बेटे के कातिल राम सिंह के बारे में बताया। उसने कबूल किया कि कैसे मेरे बेटे को बेरहमी से उसने और उदय ने अपने साथियों के साथ मारकर शव को रेल की पटरी पर फेंक दिया था। राम अभिलाष आगे कहते हैं- मैं फौजी हूं। बेटे की हर जरूरत को पूरा करने के लिए मैंने हर संभव कोशिश की। कानपुर के कल्याण की रहने वाली बबीता से शादी की। बेटे बहू से 2 बेटियां और एक बेटा शिवाय है। उसके बच्चे मुझसे मेरे पास आकर सवाल करते है कि बाबा पापा कहां गए, कब आएंगे? अब किसको क्या बताऊं, क्या हो गया? इसके बाद वह बदहवास होकर बेटे रणधीर को याद कर फफक पड़े। दोस्त बोले- डिप्टी सीएम तक गए, तब पता चला कि हत्या हुई है
अब हमने राम अभिलाष के बगल में बैठे अभिषेक हिन्दू से बात की। वह जिला पंचायत सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि जब से रणधीर लापता हुआ, तभी से मैं परिवार के साथ उसे खोजता रहा। रणधीर के जीवित वापस लाने की आस लेकर हम लोग परिवार के साथ अफसरों और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के पास तक गए। लखनऊ में हमें डिप्टी सीएम ने बताया कि रणधीर की हत्या हो चुकी है और शव पुलिस ने अज्ञात में बरामद किया था। जिसका लावारिस में अंतिम संस्कार हो गया। इसके बाद अभिषेक हिन्दू भी रो पड़े। कहा- मुझे दुख है कि अपने साथी को जिंदा वापस लाकर परिवार से मिलवा नहीं सका। मां ने कहा- 20 लाख रुपए, मोबाइल-चेन, कुछ नहीं मिला
मां रानी देवी कहती हैं- बेटे को मैंने आखिरी बार घर पर ही देखा था। वो कहकर गया था कि मैं अभी आता हूं। दुकान पर किसी आदमी को बैठाकर आया हूं। लेकिन उसके साथ राम सिंह था। राम ने ही उसे अपनी गाड़ी में बैठाकर ले गया। उसने कहा था- मेरे साथ मलाका चलो, तुम्हें कोई काम है तो मैं छोड़ दूंगा। इसके बाद कभी वापस नहीं आया। मैं अपने बेटे का चेहरा आखिरी बार देखना चाहती थी, लेकिन वो कहां मिला? उसके पास 20 लाख रुपए थे, मोबाइल था, चैन थी, अंगूठी थी। सब कहां गया? किसी को पता नहीं। राइफल भी थी, उसके पास सब कुछ था, लेकिन कुछ मिला नहीं। अब पत्नी बबली की बात पढ़िए… पत्नी बोलीं- इस साजिश के पीछे कोई बड़ा शख्स
बबली कहती हैं- मेरी आखिरी बार 22 अगस्त को ही बात हुई थी। तुम मायके में हो, परसों आकर ले जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि किसी से मिलने जाना है। तब मैंने उनसे कहा था कि अकेले मत जाइए, सबको साथ लेकर जाइए। उसके बाद शाम 6 बजे मेरी उनसे बात हुई और रात 9 बजे से उनका फोन बंद हो गया। आपने ये क्यों कहा कि अकेले मत जाना। बबली ने कहा- मैंने ऐसा इसलिए कहा था क्योंकि राम सिंह नाम का व्यक्ति अक्सर उनको वॉयस कॉल करता था। मैं पूछती थी कि यह कौन है और क्यों कॉल करता है। जब भी उसका कॉल आता था, मेरे पति नीचे जाकर बात करते थे, मेरे सामने कोई बात नहीं होती थी। उसका एक साथी उदय भी था। अब बताया जा रहा है कि उसने ही मारा है। पत्नी के आरोप- पुलिस गुमराह करती रही…
पत्नी कहती हैं- पुलिस ने भी हमें लगातार गुमराह किया। हम रोज थाने जाते रहे, रोते रहे कि हमारे पति की गाड़ी ढूंढिए, उनका पता लगाइए। पुलिस सिर्फ कहती रही कि काम चल रहा है। जबकि बाद में पता चला कि 23 तारीख को ही लाश मिल चुकी थी। अगर लाश मिली थी तो हमें क्यों नहीं दिखाया गया? क्यों बिना बताए जला दिया गया? गुमशुदगी दर्ज थी, तो नियम के मुताबिक हर अज्ञात लाश हमें दिखाना चाहिए था। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। हमारे अधिकार छीन लिए गए। जब तक हम लखनऊ जाकर डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या से नहीं मिले, तब तक हमें सब कुछ पता नहीं चला। उन्होंने ही हमें बताया कि आपके पति की हत्या हो चुकी है। पुलिस ने हमें न फोटो दिखाई, न लाश। हम कैसे मान लें कि वही लाश मेरे पति की थी? हमें साफ लगता है कि इसमें राजनीतिक साजिश है। उदय और राम सिंह इतने बड़े कांड को अकेले अंजाम नहीं दे सकते। उनके पीछे किसी बड़े आदमी का हाथ है। मेरे पति से कई लोग राजनीतिक रूप से नाराज़ रहते थे। फेसबुक पर भी अक्सर उनके खिलाफ कमेंट आते थे। चुनाव नजदीक है, इसलिए सोची-समझी साजिश के तहत यह हत्या की गई। उन्होंने कहा- मैं सिर्फ इतना चाहती हूं कि मेरे पति के साथ जैसा किया गया, वैसा ही हश्र आरोपियों का भी हो। उन्हें भी वैसे ही तड़पना चाहिए। सिर्फ उदय और राम सिंह नहीं, बल्कि जो भी इसमें शामिल हैं, उन सबको सज़ा मिले। उन्होंने कहा- पुलिस का खुलासा बिल्कुल झूठा है। अवैध संबंध बताकर मामले को दबाया जा रहा है। मेरे पति ऐसे इंसान थे, जिनका जनता से गहरा जुड़ाव था। वो 2015 में चुनाव जीते थे और अपनी मेहनत से लोगों का विश्वास जीता था। जनता उनसे खुश थी, यही वजह है कि दोबारा उन्हें इतना अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा था। इसी कारण राजनीतिक साजिश के तहत उनकी हत्या कर दी गई। BJP नेता रणधीर से जनता के जुड़ाव को समझने के लिए हमने गांव के लोगों से बात की… गांव वाले बोले- एसओ को हटाकर जांच होनी चाहिए
गांव के लोगों के बीच भीड़ से घिरे रणधीर के चाचा टीएन यादव ने बताया- लाश को अज्ञात दिखाकर पोस्टमॉर्टम करा दिया गया, जबकि हमने गुमशुदगी दर्ज कराई थी। परिवार को पहचान कराने का मौका नहीं दिया गया। इस केस में चूक शुरुआत से हुई। उन्होंने कहा- 23 तारीख को गुमशुदगी दर्ज कराने के बाद भी न फुटेज देखी गई, न कॉल डिटेल निकाली गई, न हमसे जानकारी ली गई। पंचायत सदस्य की हत्या को लावारिस दिखाया गया, ताकि कोई हंगामा न हो। गिरफ्तारी भी नाटक है, असली आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं। डीसीपी से मिले तो कहा गया दबाव बनाया जाएगा, लेकिन सिर्फ दिखावे की कार्रवाई हुई। हमारी मांग है कि जांच निष्पक्ष हो। एसओ को तुरंत हटाकर किसी ईमानदार अधिकारी को जांच दी जाए। दोषियों को सख्त सजा मिले। जब लाश नहीं मिली तो संस्कार कैसा?
गांव में कुछ आगे बढ़े तो हमे ग्रामीण बच्चा लाल मिले। उन्होंने बताया- वो सबसे अच्छे से मिलता था, धीरे-धीरे भाषण देता था। सब समाज देखता था और सब गरीब-दुखिया की सहायता करता था। शादी-ब्याह में पैसा-कौड़ी भी देता था। अंतिम संस्कार के सवाल पर उन्होंने कहा- जब लाश ही नहीं मिली तो क्या संस्कार किया जाए। सब संतोष करके बैठे हैं।
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