IPS पिता ने वर्दी छीनी, वकील बेटी ने इंसाफ दिलाया:इलाहाबाद हाईकोर्ट से छेड़खानी का आरोपी हेड कॉन्स्टेबल बहाल; बोलीं- मैंने अपना काम किया

बरेली से एक दिलचस्प मामला है। बरेली के IG रहे राकेश सिंह ने जिस हेड कॉन्स्टेबल को बर्खास्त किया था, उसे दोबारा वर्दी पहनाने की लड़ाई उनकी ही बेटी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में लड़ी और जीती भी। बर्खास्त हेड कॉन्स्टेबल के हक में फैसला कराया। अब पुलिस महकमे में इस केस की चर्चा हर किसी की जुबान पर है। रिटायर्ड IG की बेटी अनुरा से ‘दैनिक भास्कर’ ने बात की। उन्होंने कहा, इस पूरे मामले को पिता बनाम बेटी के रूप में देखा जा रहा है। मेरे पिता एक आईपीएस अधिकारी रहे हैं और उन्हें पुलिस अधिकारी होने के नाते उस समय जो सही लगा, वो उन्होंने किया। अब मैंने वो किया जो मुझे सही लगा। क्या था पूरा मामला, क्यों वकील बेटी ने अपने पिता के फैसले के खिलाफ केस लड़ा और कोर्ट ने क्या कहा? पढ़िए… पूरा मामला 12 जनवरी, 2023 का है। मामला तब शुरू हुआ जब हेड कॉन्स्टेबल तौफीक अहमद पर एक नाबालिग ने छेड़छाड़ का आरोप लगाया। नाबालिग लड़की पीलीभीत की रहने वाली है। उसने कहा, मैं प्रयागराज में पढ़ाई कर रही थी और 15073 त्रिवेणी एक्सप्रेस से बरेली लौट रही थी। कोच नंबर एस-7 में बैठी थी। अगले दिन 13 जनवरी को दोपहर 2:11 बजे ट्रेन बरेली जंक्शन पहुंची। स्टेशन पर ज्यादातर यात्री उतर गए। इसी दौरान हेड कॉन्स्टेबल तौफीक अहमद कोच में चढ़ा और मुझे अकेला देखकर उसकी सीट पर बैठ गया। छात्रा ने कहा, ट्रेन चलने के बाद तौफीक ने उससे छेड़छाड़ शुरू कर दी। मैं डर गई थी। तुरंत जीआरपी जंक्शन थाने में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद हेड कॉन्स्टेबल तौफीक अहमद के खिलाफ विभागीय जांच हुई। पॉक्सो एक्ट के तहत उन्हें जेल भेज दिया गया। तत्कालीन IG डॉक्टर राकेश सिंह ने बिना देर किए हेड कॉन्स्टेबल को बर्खास्त भी कर दिया। तौफीक जब जेल से छूट कर वापस आए तो अपने खिलाफ हुई कार्रवाई को खत्म करने की अपील तत्कालीन आईजी रेंज बरेली राकेश सिंह के सामने की। लेकिन, राकेश सिंह ने अपील को खारिज कर दिया। इसके बाद सिपाही ने इलाहाबाद हाईकोर्ट जाने का फैसला किया। तौफीक को नहीं थी अनुरा के बारे में जानकारी
अनुरा पेशे से वकील हैं और इलाहाबाद हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करती हैं। अनुरा ने ‘दैनिक भास्कर’ को बताया, तौफीक एक क्लाइंट की तरह उनके पास आए थे। उन्हें ये नहीं पता था कि वह उन्हीं आईजी की बेटी हैं, जिन्होंने उसकी अपील खारिज की थी। अनुरा ने भी इसका एहसास तौफीक को नहीं होने दिया और एक प्रोफेशनल क्लाइंट की ही तरह उसे डील किया और केस लड़ा। उन्होंने अपनी दलीलों से जज को सहमत किया और जज ने ताैफीक के हक में फैसला सुना दिया। बरेली पुलिस को निर्देश दिया कि पुलिस की ओर से ताैफीक के खिलाफ की गई कार्रवाई गलत है। जस्टिस अजीत कुमार ने फैसला सुनाते हुए बरेली पुलिस की जांच रिपोर्ट और बर्खास्तगी आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को वही स्थिति बहाल की जाए जो बर्खास्तगी के समय थी। साथ ही अगर अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए नई जांच करनी है तो उसे तीन महीने में पूरा करना होगा। अनुरा बोलीं- मैंने सिर्फ अपना काम किया
वकील अनुरा ने कहा कि उनके पिता एक आईपीएस अधिकारी रहे हैं और उन्होंने पुलिस अधिकारी होने के नाते कार्रवाई की। अपने मुवक्किल का वकील होने के नाते अपनी दलीलों से उसे इंसाफ दिलाया। अनुरा का कहना है कि इसे बाप–बेटी के आमने सामने होने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने अपना काम किया था और मैने अपना काम किया है। उन्होंने कहा, ये केवल इत्तफाक था कि उनके पिता ने जिसकी अपील को खारिज किया, वह केस उनके पास आया और नियमों और कानूनों के दायरे जो अच्छी से अच्छी दलील अपने क्लाइंट के हक में हो सकती थी, उसे मैने अदालत के सामने पेश किया। ———— यह खबर भी पढ़िए… बांके बिहारी न्यास विधेयक विधानसभा में पेश होगा:चढ़ावे और संपत्तियों पर होगा हक, सदन में मंजूर होगा, लेकिन लागू नहीं; जानिए क्यों? यूपी में विधानमंडल का मानसून सत्र सोमवार से शुरू होगा। सरकार इस सत्र में बांके बिहारी न्यास विधेयक-2025 पेश करेगी। विधेयक को सदन में पास कराया जाएगा। हालांकि, बांके बिहारी न्यास पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा रखी है। ऐसे में कोर्ट से अंतिम फैसला आने के बाद ही इसे लागू किया जाएगा। पढ़ें पूरी खबर…