KGMU डॉक्टर भर्ती घोटाला- 78 SC/ST डॉक्टर को NFS किया:SGPGI के डॉक्टर भी रिजेक्ट, इंटरव्यू रिकॉर्डिंग शेयर करने का अल्टीमेटम

यूपी के टॉप मेडिकल संस्थान SGPGI के फैकल्टी डॉक्टर भी KGMU की डॉक्टर भर्ती के लिए योग्य नहीं माने गए। यूपी विधान मंडल दल की संयुक्त समिति की जांच में यह सामने आया है। चयन प्रक्रिया में रिजर्व कैटेगरी के कुल 108 पद थे। इनमें बैकलॉग की संख्या भी शामिल है। पर महज 30 पदों पर भर्ती हुई। बाकी 78 अभ्यर्थियों को नॉट फाउंड सूटेबल (NFS) करार दिया गया। कहा गया कि अभ्यर्थी नहीं आए। जबकि इन अभ्यर्थियों का दावा था कि ये सभी जरूरी क्वालिफिकेशन रखते हैं। इस नॉट फाउंड सूटेबल की कैटेगरी में SGPGI जैसे टॉप क्लास संस्थान के फैकल्टी भी रहे। इस बात को लेकर चयन प्रक्रिया में खेल करने के और आरोप लगे। कई अन्य मेडिकल कॉलेजों के टीचर्स को भी रिजेक्ट करने के आरोप लगे। कहा गया कि इनमें ज्यादातर आरक्षित वर्ग के थे। जबकि इनमें कई रिटेन एग्जाम भी क्वालीफाई कर चुके थे। इसी के बाद KGMU में डॉक्टरों की भर्ती घोटाले के आरोपों ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। आरोप है कि इसमें बड़े पैमाने पर धांधली की गई है। भर्ती से जुड़े दस्तावेज और वीडियो रिकार्डिंग देने का आदेश उत्तर प्रदेश शासन ने संयुक्त समिति को डॉक्टर भर्ती से जुड़े सभी दस्तावेज और वीडियो रिकॉर्डिंग 7 दिन के भीतर मुहैया कराने के आदेश जारी किए हैं। हालांकि, KGMU प्रशासन इस मामले में राजभवन से अनुमति लेकर वीडियो रिकॉर्डिंग देने की बात कह रहा है। ऐसे में दोनों पक्ष आमने-सामने आते दिख रहे हैं। शासन की तरफ से उप सचिव आनंद कुमार त्रिपाठी ने KGMU कुलसचिव को पत्र लिखकर आरक्षित वर्ग के अनुसूचित जाति, जनजातियों और विमुक्त जातियों संबंधी संयुक्त समिति को सभी मांगे गए दस्तावेजों और वीडियो रिकॉर्डिंग को 7 दिन के अंदर भेजने के निर्देश दिए थे। 7 दिन की अवधि मंगलवार को पूरी हो गई। हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन इसे शेयर करने को लेकर अभी भी असमंजस में दिख रहा। 25 जून को संयुक्त समिति ने KGMU का किया था दौरा इससे पहले 25 जून को KGMU परिसर का समिति ने दौरा किया। इस बैठक में समिति के सदस्यों ने KGMU प्रशासन को जमकर फटकार लगाई थी। जांच टीम की आपत्ति के बावजूद कैसे रातों रात ज्वॉइनिंग हुई। इसको लेकर भी सवाल हुए। बड़ी संख्या में ‘नॉट फाउंड सूटेबल (NFS)’ अभ्यर्थियों की संख्या का कारण भी पूछा गया। बैठक में संयुक्त समिति ने आरक्षित वर्ग की बैकलॉग भर्ती का विज्ञापन डेढ़ महीने के भीतर निकालकर विश्वविद्यालय प्रशासन को सूचित करने को कहा था। सामान्य वर्ग में भर्ती किए गए आरक्षित वर्ग के पदों (अधिसंख्य पद) के सापेक्ष भर्ती के लिए शासन से पद मांगे जाएं। इनकी संख्या 20 है। जांच समिति के अभिलेख और इंटरव्यू की वीडियो रिकॉर्डिंग भी शेयर करने के निर्देश दिए गए थे। संयुक्त समिति में है इतने सदस्य KGMU परिसर का दौरा करने वाली संयुक्त समिति की अगुआई लालजी निर्मल ने की थी। इसके सदस्य पूर्व मंत्री सुरेश पासी, मनोज पारस और डाॅ. रागिनी सोनकर हैं। कहा ये भी गया था कि पहले जब समिति ने KGMU को अपना पक्ष रखने को कहा था, तब विश्वविद्यालय प्रशासन ने आयोग में उपस्थित होने में असमर्थता जताई थी। यही कारण रहा कि समिति के सदस्यों ने खुद परिसर का दौरा किया था। विधानसभा में उठा था डॉक्टरों की भर्ती में घोटाले का मुद्दा KGMU में डॉक्टरों की भर्ती में घोटाले के आरोप में सांसद बृजलाल की चिट्ठी के बाद डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने KGMU एक्ट की धारा 13 के अंतर्गत जांच के आदेश दिए थे। इसके जांच 5 सदस्यीय जांच टीम का गठन किया गया था। DGME किंजल सिंह को इसका चेयरमैन बनाया गया था। इसमें SGPGI के प्रोफेसर डॉ.बसंत कुमार, लोहिया संस्थान की डॉ. ज्योत्स्ना अग्रवाल और KGMU के डॉ.संदीप भट्टाचार्य को EC की तरफ से पक्ष रखने के लिए शामिल किया। जांच में गड़बड़ी का खुलासा हुआ। कहा गया कि आरक्षण रोस्टर के लिए जारी शासनादेश का पालन नहीं किया गया। जिसके चलते आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को नुकसान उठाना पड़ा। रातों रात हुई थी चयनित डॉक्टरों की ज्वॉइनिंग KGMU प्रशासन पर आरोप लगे थे कि जांच रिपोर्ट की अनदेखी करते हुए, चयनित अभ्यर्थियों के लिफाफे खोलने में बेहद जल्दबाजी दिखाई गई। रातोंरात चयनित अभ्यर्थियों की ज्वॉइनिंग भी करा दी गई। जबकि जांच रिपोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए थे। इसके अलावा कार्यपरिषद की बैठक में भी जांच टीम की रिपोर्ट को नहीं रखा गया है। जो नियमों का उल्ल्घंन है। शासन के सभी निर्देशों का होगा पालन इस मामले में KGMU प्रवक्ता डॉ.केके सिंह ने बताया कि डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया में सभी नियमों का पालन किया गया है। आगे शासन से जो भी निर्देश होंगे, उसका शत प्रतिशत पालन होगा।