KGMU के हिमैटोलॉजी विभाग में ब्लड कैंसर से पीड़ित मरीजों का बोन मैरो ट्रांसप्लांट अगले माह से शुरू हो जाएगा। शुक्रवार को KGMU कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने इसका ऐलान किया। वहीं, यूपी के डिप्टी सीएम स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने शुक्रवार को इंडियन सोसाइटी ऑफ हेमेटोलॉजी एंड ब्लड ट्रांसफ्यूजन के 66वें एनुअल कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन किया। राजधानी के एक निजी होटल में इंडियन सोसाइटी ऑफ हिमैटोलॉजी एंड ब्लड ट्रांसफ्यूजन (आईएसएचबीटी) के 66वें वार्षिक सम्मेलन में बोलते हुए डिप्टी सीएम ने कहा कि डॉक्टरों को प्रभावी उपचार देने के साथ ही सस्ती चिकित्सा के लिए भी प्रयास करना चाहिए। इससे सभी लोग उपचार करा सकेंगे। उन्होंने ने कहा कि कैंसर का इलाज काफी महंगा है। अच्छी बात है कि कैंसर के इलाज में जागरूकता आ रही है। मरीज शुरुआती अवस्था में ही इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। हालांकि, अभी भी इसका इलाज काफी महंगा है। इसे सस्ता बनाने के लिए प्रयास करने की जरूरत है। ट्रांसप्लांट यूनिट में होंगे 10 बेड कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने कहा कि 11 दिसंबर से KGMU के हिमैटोलॉजी विभाग में बोन मैरो प्रत्यारोपण की शुरुआत हो जाएगी। उन्होंने कहा कि अभी विभाग में 65 बेड पर मरीज भर्ती किए जा रहे हैं। बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट में 10 बेड होंगे। ऐसे मरीजों को ट्रांसप्लांट की पड़ती है जरूरत शुरुआत में मरीज के बहन या भाई से बोनमैरो लेकर प्रत्यारोपित किया जाएगा। KGMU हिमैटोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ.एसपी वर्मा ने कहा कि ब्लड कैंसर का शुरुआत में दवाओं से इलाज किया जाता है। उन मरीजों में बोन मैरो ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ती है। जब किसी कारण से मरीज के शरीर का बोन मैरो खराब हो जाता है। पर्याप्त स्वस्थ रक्त कोशिकाएं नहीं बना पाता है। ऐसी दशा में स्वस्थ व्यक्ति से खून के माध्यम से बोन मेरो लेकर मरीज में प्रत्यारोपित किया जाता है। ऐसे मरीजों का इलाज होता है कठिन टोरंटो के डॉ.ऑरो विश्वबंद्या ने बताया कि ब्लड कैंसर मायलोडिस्प्लास्टिक सिंड्रोम (एमडीएस) के मरीजों में बोन मैरो प्रत्यारोपण मुश्किल होता है। बुजुर्गों के मामलों में प्रत्यारोपण और भी कठिन हो जाता है। ऐसे में कीमोथेरेपी ही विकल्प बचता है। जिससे बीमारी पर काबू पाने का प्रयास किया जाता है। इन्हें मिला लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड तीन डॉक्टरों को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड सम्मेलन में देश के तीन वरिष्ठ हिमैटोलॉजिस्ट डॉ. एमबी अग्रवाल, डॉ. टीके दत्ता और डॉ. रेनू सक्सेना को लाइफ टाइम अचीवमेंट से सम्मानित किया गया। ये भी रहे मौजूद इस मौके पर डॉ.विजय तिलक, डॉ.एसपी वर्मा, डॉ.रश्मि कुशवाहा, डॉ.नम्रता पी अवस्थी और डॉ.अंशुल गुप्ता मौजूद रहे। इन रोगों में बोन मैरो प्रत्यारोपण ल्यूकेमिया, लिम्फोमा, एप्लास्टिक एनीमिया, थैलेसीमिया और ब्लड कैंसर बुजुर्ग मरीजों प्रत्यारोपण कठिन डॉ.तपन सैकिया ने बताया कि मल्टीपल मायलोमा के मामले अभी भी शुरुआती चरण में पकड़ में नहीं आ रहे हैं। इसमें बदलाव आ रहा है, लेकिन भी अभी और सुधार की जरूरत है। डॉ. नीना कपूर ने प्रतिरक्षी विकारों के प्रबंधन में कोशिका थेरेपी में हुई प्रगति पर चर्चा की। उनके मुताबिक कोशिका थेरेपी से इलाज के नए विकल्प खुल रहे हैं।