KGMU में पैथोलॉजी विभाग की महिला रेजिडेंट के यौन शोषण और धर्मांतरण के प्रयास के आरोपी PG रेजिडेंट डॉक्टर रमीजुद्दीन नाइक को विशाखा कमेटी ने दोषी करार दिया है। कमेटी ने बुधवार देर शाम जांच पूरी रिपोर्ट कुलपति को भेज दी है। करीब 4 घंटे की मीटिंग के बाद इस रिपोर्ट को भेजा गया है। अब KGMU बहुत जल्द रमीजुद्दीन नाइक के निष्कासन की कार्रवाई कर सकता है। इससे पहले KGMU में लव जिहाद, धर्मांतरण और कट्टरपंथी गतिविधियों की जांच के लिए गठित कमेटी ने डीन एकेडमिक ऑफिस में ढाई घंटे बैठक की थी। इस दौरान कुछ रेजिडेंट्स डॉक्टर्स के बयान दर्ज किए थे। कमेटी के सामने कोई ठोस सबूत नहीं दिए अधिवक्ताओं का एक समूह भी जांच कमेटी के सामने पेश हुआ था। जिसके द्वारा कैंपस में धर्मांतरण और लव जेहाद का सिंडिकेट सक्रिय होने की बात कही गई। साथ ही इसे मिशन के तौर पर वर्ग विशेष के फैकल्टी और स्टाफ द्वारा फैलाने का भी आरोप लगाया गया। हालांकि, इसको लेकर कमेटी के सामने कोई ठोस सबूत नहीं दिया गया। जांच कमेटी के सदस्यों ने बहुत जल्द अगली मीटिंग करने की बात कही है। पूर्व पुलिस महानिदेशक भावेश सिंह की अगुआई में बैठक में समिति के सभी सदस्य मौजूद रहे। दरअसल, पुलिस की जांच में आरोपी डॉ. रमीज के कॉल डिटेल रिकार्ड (CDR) से पैथोलॉजी विभाग के 2 फैकल्टी मेंबर्स (प्रोफेसरों) के बारे में अहम जानकारी मिली थ्री। पता चला है कि दोनों फैकल्टी मेंबर्स और डॉ. रमीज में फोन पर घंटों बातचीत होती थी। ऐसे में अब उन प्रोफेसर पर शिकंजा कसना तय माना जा रहा है। इन पर घटना सामने आने के बाद उसे दबाने की कोशिश का आरोप है। कॉल डिटेल रिकार्ड (CDR) और बयानों के आधार पर जांच कमेटी का शक गहराया है। पुलिस जांच में आरोपी डॉ. रमीज के KGMU के 15 डॉक्टर और मेडिकोज से रेगुलर बातचीत के सबूत मिले हैं। जांच में कई चौकाने वाले तथ्य सामने आए KGMU में पैथोलॉजी विभाग में घटना सामने आने के बाद दो प्रकार की कमेटियां जांच कर रही हैं, जिसमें यौन उत्पीड़न मामले की जांच विशाखा कमेटी कर रही है। धर्मांतरण प्रकरण की जांच सात सदस्यीय कमेटी कर रही है। इसमें रिटायर पूर्व पुलिस महानिदेशक शामिल हैं। बयान और जांच के आधार पर कई चौकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। इसमें आरोपी रेजिडेंट डॉक्टर की दो प्रोफेसर से फोन पर अधिक बातचीत और मेलजोल की बात सामने आई है। घटना पर पर्दा डालने में भी दोनों प्रोफेसरों की भूमिका पर भी संदेह जाहिर किया जा रहा है। फिलहाल जांच कमेटी सभी प्रोफेसरों से कई राउंड बातचीत कर बयान ले चुकी है। इसमें पूर्व पुलिस महानिदेशक द्वारा बंद कमरे में सभी फैकल्टी से अकेले में पूछताछ भी शामिल है। सामाजिक संगठनों को भी बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया गया जांच समिति ने कट्टरपंथी गतिविधियों का आरोप लगाने वाले NMO जैसे सामाजिक संगठनों को भी आज बयान दर्ज कराने को बुलाया है। इन संगठनों से सबूत और साक्ष्य समेत जांच कमेटी के सामने पेश होकर बयान दर्ज करने को कहा गया है। व्यक्तिगत या ग्रुप में किसी के द्वारा इस मामले को लेकर कोई अहम सुराग या साक्ष्य देने के लिए भी आमंत्रित किया गया है। 7 दिन में जांच पूरी कर देनी थी रिपोर्ट कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने पैथोलॉजी विभाग में कट्टरपंथी गतिविधियों के संचालन के आरोप सामने आने के बाद 26 दिसंबर को डीन पैरामेडिक्स डॉ. के.के. सिंह की अगुवाई में जांच कमेटी का गठन किया था। 7 दिन के अंदर जांच पूरी कर रिपोर्ट देने को कहा था। इस बीच जांच कमेटी पर भी सवाल उठे तो इसमें 2 सदस्यों को और जोड़ा गया। पूर्व पुलिस महानिदेशक भावेश सिंह और क्वीन मेरी की एचओडी अंजू अग्रवाल को भी जांच समिति में शामिल किया गया। हालांकि, तय समय सीमा बीत जाने के बाद भी अभी तक जांच पूरी नहीं हो सकी है। इस पूरे मामले में कॉल डिटेल रिकॉर्ड सहित पुलिस जांच के साक्ष्य सामने आने के बाद अब नए सिरे से जांच और पड़ताल होने की बात भी कही जा रही है। जांच पूरी कर, बहुत जल्द सब्मिट होगी रिपोर्ट KGMU प्रवक्ता डॉ. के.के. सिंह का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है। दोषियों को किसी भी दशा में बख्शा नहीं जाएगा। जब तक कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकलता किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। जांच समिति कब तक रिपोर्ट सौंपेगी के सवाल पर उन्होंने बताया कि हर पहलुओं पर जांच की जा रही है। पुलिस जांच में भी जो चौंकाने वाले खुलासे हुए है, उनके आधार पर भी पूछताछ होगी और फिर रिपोर्ट सब्मिट होगी। आरोपी डॉ. रमीज के मां-बाप हो चुके हैं गिरफ्तार इससे पहले सोमवार को रमीज की कथित पहली पत्नी के बयान के आधार पर उसके पिता सलीमुद्दीन और मां खतीजा को भी धर्मांतरण करवाने के आरोप में गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस ने जब आरोपी डॉ. रमीज की कॉल डिटेल निकाली तो पता चला कि वह अन्य धर्म की 15 अन्य रेजिडेंट डॉक्टर के संपर्क में था। इसके पीछे असल कहानी धर्मांतरण के बदले मोटी रकम मिलने की भी है। KGMU में चर्चा है कि दिल्ली निवासी डॉक्टर का धर्मांतरण करवाने के एवज में उसे 15 लाख रुपए मिले थे। नॉन मेडिकोज का धर्मांतरण करवाने पर महज पांच लाख रुपए ही मिलते हैं। इसी वजह से रमीज एक साथ कई रेजिडेंट डॉक्टरों के संपर्क में था। कॉल डिटेल में सामान्य कामकाज वाले समय के बाद भी इन रेजिडेंट से लंबी बातचीत का डेटा मिला है। अब पढ़िए पूरा मामला… पीड़ित महिला डॉक्टर ने सुसाइड की कोशिश की, तब सामने आया मामला पीड़ित महिला डॉक्टर KGMU से एमडी पैथालॉजी की पढ़ाई कर रही है। 17 दिसंबर को उसने दवा की ओवरडोज लेकर सुसाइड की कोशिश की। उसे गंभीर हालत में KGMU ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया। 19 दिसंबर को उसे डिस्चार्ज किया गया। पीड़िता के पिता ने आरोप लगाया कि KGMU से एमडी पैथालॉजी की पढ़ाई कर रहे डॉ. रमीज ने बेटी को लव जिहाद में फंसाया। उस पर शादी करने के लिए इस्लाम धर्म अपनाने का दबाव बनाया। जबकि, वह पहले से शादीशुदा है। फरवरी में वह हिंदू लड़की का धर्मांतरण कराकर उससे शादी कर चुका है। मुख्यमंत्री और राज्य महिला आयोग में शिकायत की पीड़ित के पिता ने मामले की राज्य महिला आयोग और मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत की थी। इसके बाद 22 दिसंबर को राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने पीड़ित के साथ प्रेस वार्ता करके कार्रवाई का आश्वासन दिया। 24 दिसंबर को विशाखा कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद KGMU प्रशासन ने डॉ. रमीज को सस्पेंड करके परिसर में प्रवेश पर रोक लगा दिया। आरोपी के खिलाफ के FIR भी दर्ज हो गई। 26 दिसंबर को कुलपति ने KGMU में कट्टरपंथी गतिविधियों की जांच के लिए 5 सदस्यीय कमेटी बनाई।