OT टेक्नीशियन ने निकाली थी MBA स्टूडेंट की किडनी:कानपुर में ट्रांसप्लांट भी किया; आरोपी का स्कैंडल में कितना बड़ा रोल

कानपुर किडनी कांड में पुलिस दिल्ली के डॉक्टर (यूरोलॉजिस्ट) मुदस्सर अली सिद्दीकी को तलाश रही है। उसी ने डोनर MBA स्टूडेंट आयुष की किडनी निकाली थी। महिला को ट्रांसप्लांट की थी। असल में वह डॉक्टर नहीं बल्कि ओटी टेक्नीशियन है। यानी ओटी टेक्नीशियन किडनी ट्रांसप्लांट कर रहा था। 2 अप्रैल को पकड़े गए ओटी टेक्नीशियन से पूछताछ के बाद एक टीम दिल्ली के उत्तम नगर गई। आरोपी मुदस्सर अली सिद्दीकी फरार था। उसकी पत्नी और परिवार से पूछताछ में खुलासा हुआ कि मुदस्सर यूरोलॉजिस्ट नहीं बल्कि ओटी टेक्नीशियन है। कानपुर के चर्चित किडनी कांड में अब तक 8 गिरफ्तारी हो चुकी हैं। ओटी टेक्निशियन किस तरह किडनी ट्रांसप्लांट कर रहा था? किडनी स्कैंडल में उसका कितना बड़ा रोल है…? कितने राज्यों में फ्लाइट से जाकर किडनी ट्रांसप्लांट करता था? इस तरह के सवाल अब अफसरों के जेहन में कौंध रहे हैं। पढ़िए रिपोर्ट… ओटी टेक्नीशियन ने उगले राज
किडनी स्कैंडल केस की जांच को डीसीपी वेस्ट आईपीएस एसएम कासिम आबिदी लीड कर रहे हैं। डीसीपी ने बताया- ऑपरेशन में शामिल दो ओटी टेक्नीशियन कुलदीप सिंह राघव और राजेश कुमार को शुक्रवार को जेल भेजा गया। दोनों ने पूछताछ में बताया कि उनके साथ फ्लाइट से डॉ. मुदस्सर अली सिद्दीकी दिल्ली से कानपुर आया था। अली ने ही आयुष की किडनी निकाली और फिर पारुल तोमर की किडनी ट्रांसप्लांट की थी। इसके बाद दोनों को अलग-अलग हॉस्पिटल में शिफ्ट कर दिया गया। डीसीपी आबिदी के मुताबिक, कानपुर पुलिस ने दिल्ली के उत्तम नगर स्थित अली के घर पर छापा मारा। इस दौरान अली तो नहीं मिला, लेकिन उसकी पत्नी, बेटी और परिवार के अन्य लोग मिले। पूछताछ के दौरान पत्नी ने बताया कि वह एक हॉस्पिटल में ओटी स्टाफ हैं। उनके पति भी कोई यूरोलॉजिस्ट या डॉक्टर नहीं हैं, बल्कि ओटी टेक्नीशियन हैं। अली की तलाश में रेड की जा रही है। दिसंबर में भी अली ने किया था ट्रांसप्लांट
डीसीपी वेस्ट ने बताया कि खुद को डॉक्टर बताने वाले अली ने ही बीते दिसंबर यानी 4 महीना पहले कल्याणपुर के ही मसवानपुर स्थित मेडिलाइफ हॉस्पिटल में एक किडनी ट्रांसप्लांट किया था। पुलिस मेडिलाइफ हॉस्पिटल पहुंची तो पता चला कि उसके मालिक भी किडनी स्कैंडल का खुलासा होने के बाद से अंडरग्राउंड हैं। हॉस्पिटल के 3 पार्टनर, तीनों फरार
जांच में सामने आया है कि मेडिलाइफ हॉस्पिटल तिर्वा, कन्नौज के रहने वाले डॉ. रोहन, सौरिख कन्नौज के डॉ. संदीप और औरैया निवासी डॉ. नरेंद्र की पार्टनरशिप में है। किडनी कांड का खुलासा होने के बाद से हॉस्पिटल बंद है। तीनों डॉक्टर अपने कानपुर स्थित फ्लैट और पैतृक आवास से लापता हैं। डीसीपी वेस्ट का कहना है कि अवैध रूप से किडनी ट्रांसप्लांट स्कैंडल में यह तीनों डॉक्टर और उनके अस्पताल का स्टाफ शामिल था। जल्द ही इन तीनों डॉक्टरों को भी अरेस्ट करके जेल भेजा जाएगा। अल्फा हॉस्पिटल का मालिक फरार
डीसीपी ने बताया कि किडनी स्कैंडल में मेरठ के तीन डॉक्टर अनुराग उर्फ अमित, डॉ. वैभव मुद्गल और डॉ. अफजल के तार भी जुड़ रहे हैं। डॉ. अमित मेरठ के अल्फा हॉस्पिटल में पार्टनर भी हैं। डॉ. वैभव मुद्गल डेंटिस्ट है। यह सभी किडनी ट्रांसप्लांट से जुड़े डोनर और पेशेंट का इंतजाम करते थे। स्कैंडल का खुलासा होने के बाद से तीनों अपने क्लीनिक नहीं पहुंचे हैं। इसके साथ ही हॉस्पिटल भी नहीं जा रहे और घर पर भी नहीं हैं। तीनों फरार चल रहे हैं। खास बात ये है कि इन सभी के मोबाइल भी स्विच ऑफ हैं। पुलिस की टीमें कानपुर और मेरठ से मिले इनपुट के आधार पर सभी की तलाश में छापेमारी कर रही है। ——————— ये खबर भी पढ़ें… किस हॉस्पिटल में किसका ट्रांसप्लांट, सब सीक्रेट:ढाई करोड़ में अफ्रीकी महिला का ऑपरेशन; किडनी गैंग विदेश तक फैला कानपुर किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का कनेक्शन सिर्फ यूपी ही नहीं, विदेश से भी जुड़ रहा है। विदेशों के मरीज भी यहां चोरी-छिपे किडनी ट्रांसप्लांट कराने आते थे। तस्करों ने दिल्ली, मुंबई, पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में किडनी ट्रांसप्लांट का खेल करने के लिए हॉस्पिटल और डॉक्टरों का पैनल बना रखा है। डोनर और रिसीवर दोनों से डील फाइनल होने के बाद यह लोग देश के अलग-अलग ठिकानों पर अवैध रूप से किडनी ट्रांसप्लांट करते थे। पढ़ें पूरी खबर