PM मोदी की फोटो छापकर बेची जा रही नकली खाद:दिल्ली से आती हैं यूरिया की खाली बोरियां, आधे यूपी में सप्लाई

पश्चिमी यूपी में नकली खाद (उर्वरक) बिक रही है। इसका खुलासा उस वक्त हुआ, जब हापुड़ पुलिस ने 24 और 26 जून को 2 गोदामों पर छापा मारा। यहां करीब 10 नामचीन खाद कंपनियों की 40 हजार से ज्यादा खाली बोरियां मिलीं। ये छपकर दिल्ली से आती हैं और सप्लाई आधे यूपी में होती है। बोरी पर PM नरेंद्र मोदी की फोटो भी छपी है। इसे सब्सिडी वाली खाद बताकर मार्केट में बेचा जा रहा है। बोरी की क्वालिटी ऐसी कि असली-नकली खाद में पहचान करना भी मुश्किल है। खाली बोरियों में नकली खाद भरी जाती है और इन्हें बड़ी-बड़ी कंपनियों के नाम पर मार्केट में बेचा जा रहा। हालांकि पुलिस और कृषि विभाग को अभी ये पता नहीं चल सका है कि खाद बनाने वाले कौन हैं? माना जा रहा है कि ये एक बड़ा नेक्सस है, जो दिल्ली से यूपी के तमाम शहरों तक फैला हुआ है। पढ़िए ये खास रिपोर्ट… क्या एक्शन हुआ, सबसे पहले वो जानिए दो जगह रेड, खाद की 40 हजार से ज्यादा खाली बोरियां मिलीं
असली-नकली माल पर नजर रखने के लिए कई बड़ी खाद कंपनियों ने नोएडा की ट्रू बडी कंसल्टिंग कंपनी को हायर किया है। इस कंपनी के प्रतिनिधि प्रेमचंद शर्मा को अपने सोर्स से जानकारी मिली कि हापुड़ में बड़ी-बड़ी खाद कंपनियों के खाली रैपर (बोरियां) छपकर आ रहे हैं। प्रेमचंद शर्मा ने इसकी सूचना कृषि विभाग और पुलिस को दी। 24 जून को DM के निर्देश पर पुलिस-प्रशासन और कृषि विभाग की जॉइंट टीमों ने हापुड़ में स्वर्ग आश्रम रोड पर मोहल्ला उपासना विहार के दो मंजिला मकान पर छापा मारा। यहां इफको, कृभको जैसी कंपनियों के सब्सिडी वाले यूरिया की 32 हजार से ज्यादा खाली बोरियां मिलीं। यहां पर बीज और पेस्टीसाइड के भी खाली पैकेट्स रखे हुए थे। इस मकान को पीयूष बंसल नाम का शख्स गोदाम के रूप में इस्तेमाल कर रहा था, जो फरार है। पीयूष के एक और गोदाम की जानकारी टीमों को हुई। 26 जून को टीमों ने हापुड़ शहर के भगवानपुरी में एक मकान पर छापा मारा। यहां से कई यूरिया कंपनी के 8 हजार से ज्यादा खाली बोरियां रिकवर हुईं। दैनिक भास्कर ने आरोपी से एक्सक्लूसिव बातचीत की, पढ़िए दिल्ली से आते हैं, पूरे वेस्ट यूपी में सप्लाई होते हैं खाली बैग
इन दोनों गोदाम का मालिक पीयूष बंसल है, जो पन्नापुरी का रहने वाला है। फिलहाल दोनों गोदामों की देख-रेख उसका मुंहबोला भांजा हनी गुप्ता करता है। हनी फिलहाल पुलिस कस्टडी में है। हमने हनी से एक्सक्लूसिव बातचीत की। हनी ने बताया- मैं यहां करीब 2 महीने से काम कर रहा हूं। दिल्ली और गाजियाबाद की बसों से छपे हुए कट्टे (बोरियां) आते हैं। मैं बस से उतारकर उन्हें इन दोनों गोदामों में सुरक्षित रख देता हूं। सारे ऑर्डर पीयूष जैन के पास आते हैं। पीयूष जैन के कहने पर मैं थोड़े-थोड़े कट्टों के बंडल अलग-अलग शहरों को जाने वाली बसों में रख देता हूं। इन कट्टों की सबसे ज्यादा आपूर्ति मुजफ्फरनगर जिले में होती है। इसके अलावा ये कट्‌टे सहारनपुर, बरेली, आगरा, मुरादाबाद, मेरठ, बिजनौर सहित तमाम शहरों में जाते हैं। इन कट्टों को खरीदने वाले कौन लोग होते हैं? इसके जवाब में हनी बताता है- मुझे इस बारे में कुछ नहीं पता, क्योंकि सारे ऑर्डर पीयूष बंसल के पास सीधे आते थे। मुझे पीयूष बंसल फोन करके सिर्फ इतना बताते थे कि फलां शहर जाने वाली बस में कट्टों के बंडल रख आओ। मैं बस में कट्टे रखकर उस बस का नंबर पीयूष बंसल को मैसेज कर देता था। उन बसों से कट्टे कौन-कहां उतारता था, यह नहीं पता है। हनी ने बताया- एक बंडल में 100 से 500 तक कट्टे होते हैं। मुझे एक बंडल की ढुलाई 50 रुपए मिलती है। रोजाना मुझे 250 से 300 रुपए तक मजदूरी मिल जाती है। हनी की इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि हापुड़ से रोजाना 500 से 1000 नकली खाद कट्टों की सप्लाई हो रही थी। हमने पूछा- नकली खाद कहां बनती है, क्या इसकी कोई जानकारी है? इस सवाल पर हनी कहता है- मैं अक्सर हापुड़ में धीरखेड़ा इंडस्ट्रियल एरिया के पास जाता हूं। वहां एक व्यक्ति इन कट्टों की डिलीवरी लेने के लिए आता है। उस व्यक्ति का कोई परमानेंट ठिकाना नहीं है। धीरखेड़ा इंडस्ट्रियल एरिया में तमाम फैक्ट्रियां मौजूद हैं। हो सकता है कि वहीं किसी फैक्ट्री में नकली खाद तैयार हो रही हो। पुलिस को पहले गोदाम पर हनी मौजूद मिला, दूसरे गोदाम का ठिकाना भी उसी ने बताया। इसलिए पुलिस ने दोनों मुकदमों में हनी को आरोपी बनाया है। पुलिस ऑन डॉक्यूमेंट्स उसकी अरेस्टिंग दिखाएगी। यूरिया के कट्टे ऐसे कि असली-नकली की पहचान मुश्किल
दैनिक भास्कर को ऐसे कई कट्टे मिले, जिनके अंदर नकली खाद भरी जाती है। एक कट्टे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फोटो छपी थी। इस पर लिखा था- ‘प्रधानमंत्री जन उर्वरक परियोजना’। इस कट्टे पर यूरिया खाद की ओरिजिनल कीमत 2177.35 रुपए लिखी थी। उसके नीचे केंद्र सरकार की सब्सिडी का रेट 477.35 रुपए लिखा था। यानी खाद का ये कट्टा मार्केट में 1700 रुपए का बेचा जा रहा था। सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि मैन्युफैक्चरिंग कंपनी का नाम चंबल फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल लिमिटेड लिखा था, जो भारत की प्रमुख उर्वरक कंपनियों में से एक है। इसी तरह एक दूसरे कट्टे पर कंपनी का नाम इफको लिखा हुआ था। इसे भी ‘प्रधानमंत्री भारतीय जन उर्वरक परियोजना’ के तहत सब्सिडी वाला यूरिया बताकर 1350 रुपए में बेचा जा रहा था। इन सभी कट्टों की क्वालिटी इतनी बेहतर थी कि असली-नकली की पहचान करना बेहद मुश्किल था। ट्रांसपोर्ट में कार नहीं, बस का इस्तेमाल
इस पूरे गोरखधंधे में सबसे अहम बात ये है कि ट्रांसपोर्ट में कहीं भी प्राइवेट गाड़ी का यूज नहीं होता। ये पूरा गैंग खाद के खाली कट्टे एक से दूसरे शहर भिजवाने के लिए बस का ही प्रयोग करता है। उसकी वजह यह है कि बसों में सामान की चेकिंग नहीं होती। सूत्रों ने बताया, पीयूष बंसल से खाद के खाली कट्टे खरीदने वाले छोटे-छोटे दुकानदार होते हैं। वो 100-50 कट्टे बसों के जरिए पीयूष से मंगवाते रहते थे। पुलिस और कृषि विभाग को अब उन लोगों की तलाश है, जो इन कट्टों में नकली खाद भरकर बेचते हैं। ————————- ये खबर भी पढ़ें… रिंकू की नौकरी की फाइल रुकी, वजह- सपा सांसद से सगाई; क्या 9वीं पास को नौकरी में प्रमोशन मिलेगा? यूपी में क्रिकेटर रिंकू सिंह को स्पोर्ट्स कोटे में बेसिक शिक्षा अधिकारी बनाने के प्रस्ताव पर सियासत गहरा रही है। सपा सांसद प्रिया सरोज के साथ सगाई होने के बाद शासन ने रिंकू सिंह की फाइल को ठंडे बस्ते में डाल दिया है। हालांकि खेल जगत से जुड़े लोग अब रिंकू समेत अन्य खिलाड़ियों की नौकरी पर अपनी नजर गड़ाकर बैठे हैं। क्या है, वह शासनादेश जिसके तहत खिलाड़ी को नौकरी दी जाती है। योग्यता क्या होनी चाहिए? खिलाड़ी अगर ग्रेजुएट नहीं है तो प्रमोशन के क्या चांस हैं। पढ़ें पूरी खबर