SGPGI में हार्ट ट्रांसप्लांट का हर वीक ड्राई रन:हार्ट मिलते ही किया जाएगा ट्रांसप्लांट, ₹1 करोड़ की सर्जरी 5 लाख में होगी

यूपी का टॉप मेडिकल संस्थान SGPGI (संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान) जल्द ही हार्ट ट्रांसप्लांट करने जा रहा है। संस्थान के हार्ट सर्जरी डिपार्टमेंट (CVTS) के डॉक्टर्स ने इससे जुड़ी सभी तैयारियां कर ली हैं। यह सर्जरी महज 5 लाख रुपए में संभव होगी। निजी संस्थानों में इसका खर्च 1 करोड़ रुपए तक है। उत्तर प्रदेश में फिलहाल हार्ट ट्रांसप्लांट की सुविधा कही और नहीं है। ऐसे में कहा जा सकता है कि SGPGI इतिहास रचने जा रहा है। SGPGI के CVTS डिपार्टमेंट के प्रमुख और देश के दिग्गज हार्ट सर्जन प्रो. एसके अग्रवाल ने बताया- यूपी के 3 मरीज हार्ट ट्रांसप्लांट के इंतजार में है। यूपी के डोनर हार्ट न मिलने की वजह से इसमें देरी हो रही है। ऐसे में हम देश के अन्य राज्यों से हार्ट मिलने की आस है। सूटेबल हार्ट अवेलेबल होते ही मरीज की हार्ट ट्रांसप्लांट सर्जरी की जा सकेगी। CVTS विभाग के 38वें स्थापना दिवस के मौके पर प्रो. एसके अग्रवाल ने दैनिक भास्कर से बातचीत की। उन्होंने बताया कि सफल हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए वो हर वीक ड्राई रन कर रहे। इस दौरान उन्होंने हार्ट ट्रांसप्लांट शुरू करने के अलावा आगे के कई प्लान पर बात की। पढ़िए क्या कहते प्रो. एसके अग्रवाल… सवाल – 38 साल के सफर को कैसे देखते हैं? जवाब – 38 साल के इस सफर में पूरे सिस्टम की मेहनत है। जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार से लेकर विभाग में काम करने वाला छोटे से छोटा आदमी भी शामिल है। पर इतना जरूर कह सकते हैं कि इन सालों में हमने जो सफर तय किया है उसकी बदौलत आज देश के टॉप 10 संस्थान के हार्ट सर्जरी के विभागों में हमारा नाम है पर इससे आगे का सफर भी अभी बहुत लंबा है, जिसे हमे तय करना है। सवाल – साढ़े 3 दशक से ज्यादा का समय बीत चुका है पर अभी भी पहले हार्ट ट्रांसप्लांट का इंतजार है, इस पर क्या कहेंगे? जवाब – देखिए, हार्ट ट्रांसप्लांट सिर्फ हमारी कैपेबिलिटी पर निर्भर नहीं करता है। इसके लिए सबसे पहले हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए मरीज का राजी होना या तैयार होना जरूरी है। इसके बाद उसे ट्रांसप्लांट किए जाने वाले हार्ट की जरूरत पड़ती है। इन दोनों ही विषयों फिलहाल पर विभाग के साथ पूरा सिस्टम काम कर रहा है। उम्मीद है कि बहुत जल्द हम इस दिशा में सफल होंगे। सवाल – हार्ट ट्रांसप्लांट में सबसे बड़े चैलेंज क्या है? आने वाले कितने दिनों में ये संभव हो सकेगा? जवाब – हमारी तैयारी पूरी है। हम किसी भी दिन हार्ट ट्रांसप्लांट कर सकते हैं। ट्रांसप्लांट सफल होते ही आपको बताएंगे। हार्ट ट्रांसप्लांट में सफल होने के लिए हम हर वीक यानी हर सप्ताह ड्राई रन कर रहे हैं। इस दिशा में हमसे कहीं कोई चूक ना हो, इसके लिए भी हम पहले से पूरी तैयारी कर लेना चाहते हैं। सवाल – सफल हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए आपने क्या कुछ तैयारी कर रखी है? जवाब – विभाग के सर्जन की पूरी ट्रेनिंग हो चुकी है। इससे रिलेटेड हर तरह का नॉलेज सेशन हो चुका है। इसके अलावा लैब पूरी तरह तैयार है, जरूरी इक्विपमेंट अवेलेबल है। ऑपरेशन थिएटर तैयार है, पोस्ट ऑपरेशन केयर के लिए ICU के बेड भी रेडी है। सपोर्ट स्टाफ की टीम भी रेडी है। सवाल – ऑपरेशन की कास्टिंग क्या रहेगी? जवाब – सर्जरी की कॉस्ट करीब 5 लाख होगी। इसके बाद रूटीन मेडिसिन का खर्चा 5000 के करीब रहेगा। औसतन इतने ही खर्च की उम्मीद है। सवाल – हार्ट ट्रांसप्लांट के अलावा और आपके डिपार्टमेंट के क्या टारगेट है? जवाब – पहला टारगेट, जो हम लेकर चल रहे हैं कि अभी जो करीब 1000 सर्जरी हर साल में हम कर रहे हैं, इसकी संख्या डेढ़ से 2 हजार के बीच तक ले जाना चाहते हैं। इस पहल से हमारी वेटिंग लिस्ट बेहद कम हो जाएगी। दूसरा, कंजेनाइटल हार्ट डिजीज को लेकर एक अलग से सेंटर बन रहा है। इसके बनने से हम हर साल 1000 से ज्यादा सर्जरी बच्चों की इसमें अलग से कर पाएंगे। इसके अलावा तीसरा, हम अपने यहां मिनिमल एक्सेस और रोबोटिक सर्जरी को रूटीन में करना चाहते हैं। जिससे कि हर हफ्ते 5 से 10 ऐसी सर्जरी कर सकें। चौथा, हार्ट फेल्योर थेरेपी को विभाग में एस्टेब्लिश कर सके। इसके तहत वेंट्रीकुलर एसिस्ट डिवाइस के जरिए हार्ट फैलियर की कंडीशन के मरीजों को नया जीवन दिया जाना है। सवाल – सलोनी हार्ट फाउंडेशन से SGPGI में 500 करोड़ की लागत से कंजेनाइटल हार्ट डिजीज का सेंटर बनाने जा रही है? जवाब – इसके बनने से सिर्फ SGPGI, लखनऊ या यूपी के लिए नहीं, पूरी दुनिया का सबसे बड़ा सेटअप यहां तैयार होगा। इसका किसी और से कोई तुलना नहीं की जा सकती। सवाल -किडनी और लीवर ट्रांसप्लांट से कितना अलग हार्ट ट्रांसप्लांट? हार्ट ट्रांसप्लांट लीवर और किडनी ट्रांसप्लांट से बिल्कुल अलग होता है। जहां एक तरफ लीवर और किडनी ट्रांसप्लांट के दौरान जीवित व्यक्ति भी अपना अंगदान कर सकता है। जबकि हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए कैडेबर या ब्रेन डेड डोनर ही काम आता है। —————– यह खबर भी पढ़िए… महिलाओं की हेजिटेशन बढ़ा रही सर्वाइकल कैंसर:KGMU में एक्सपर्ट बोले- सेल्फ स्क्रीनिंग जरूरी, HPV कर रहा साइलेंट अटैक सर्वाइकल कैंसर महिलाओं के लिए ब्रेस्ट कैंसर के बाद दूसरा सबसे जानलेवा कैंसर है। इसके चलते हर साल 75 हजार महिलाओं की जान जा रही है। हालिया रिसर्च में हर साल 1 लाख 22 हजार सर्वाइकल कैंसर के नए केस सामने आ रहे हैं। ऐसे में सबसे ज्यादा फोकस इससे बचाव को लेकर होना चाहिए। वैक्सीनेशन के जरिए इस कैंसर…पूरी खबर पढ़ें