यूपी में UGC के नए नियमों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तीसरे दिन गुरुवार को भी जारी रहा। बीजेपी पदाधिकारियों के लगातार इस्तीफे हो रहे हैं। बुधवार को वाराणसी में प्रेस कांफ्रेंस करने पहुंचे BJP विधायक अवधेश सिंह यूजीसी के सवालों पर भाग खड़े हुए। यूजीसी के नए नियमों से बेखबर विधायक जवाब नहीं दे पाए। कहा- हमें नए नियम के बारे में पता नहीं है। आप लोग ही बता दीजिए। अवधेश सिंह बार-बार यही कहते रहे कि विपक्षी दल सरकार को बदनाम करने की कोशिश कर रहे हैं। उधर, बीजेपी के सीनियर लीडर और पूर्व राज्यपाल कलराज मिश्रा ने प्रेस कांफ्रेंस कर नए नियमों में संशोधन की मांग की है। उन्होंने बताया कि डॉ.महेश शर्मा के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात कर आपत्ति जताई है। बुधवार देर शाम मऊ में BJP के पांच बूथ अध्यक्षों सहित 20 पदाधिकारियों ने पद से इस्तीफा दे दिया। बीजेपी के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा- यह बिल सनातन को बांटने वाला है। सवर्ण समाज को पिछड़ों-दलितों को साथ लाकर इसका विरोध करना चाहिए। बंद कमरे में बैठकर अफसर कोई भी कानून बना देते हैं। समाज में इसका क्या असर होगा, इसकी परवाह नहीं करते। बुधवार को लखनऊ, देवरिया समेत कई जिलों में छात्र सड़क पर उतर आए। पीलीभीत में सवर्ण समाज के युवकों ने मुंडन कराया। हाथ में काली पट्टी बांधकर नारेबाजी की। देवरिया और मेरठ में प्रदर्शनकारियों की पुलिस से नोकझोंक हो गई। उधर, गाजियाबाद में युवकों ने कफन पहनकर और जंजीर डालकर प्रदर्शन किया। अयोध्या में भाजयुमो जिलाध्यक्ष और वाराणसी में जिला कार्यसमिति सदस्य ने पद से इस्तीफा दे दिया। औरैया में भी 3 बीजेपी नेताओं ने जिलाध्यक्ष को इस्तीफा सौंपा। ‘यूपी में बाबा…’ फेम कवियित्री अनामिका जैन अंबर ने बिल के विरोध में कहा- ऐसा न हो कि सवर्ण होना अपराध हो जाए। बुधवार को विरोध की 3 तस्वीरें देखिए- UGC के नए नियमों का विरोध क्यों?
यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमिशन (UGC) ने 13 जनवरी को अपने नए नियमों को नोटिफाई किया था। इसका नाम है- ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशंस, 2026।’ इसके तहत, कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के के लिए विशेष समितियां, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीमें बनाने के निर्देश दिए हैं। ये टीमें खासतौर पर SC, ST और OBC छात्रों की शिकायतों को देखेंगी। सरकार का कहना है कि ये बदलाव उच्च शिक्षा संस्थानों में निष्पक्षता और जवाबदेही लाने के लिए किए गए हैं। हालांकि, नियमों को जनरल कैटेगरी के खिलाफ बताकर विरोध हो रहा। आलोचकों का कहना है कि सवर्ण छात्र ‘स्वाभाविक अपराधी’ बना दिए गए हैं। जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट्स का कहना है कि नए नियम कॉलेज या यूनिवर्सिटी कैंपसों में उनके खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा दे सकते हैं। इससे कॉलेजों में अराजकता पैदा होगी। UGC विरोध को लेकर यूपी में क्या हो रहा, नीचे ब्लॉग में पढ़िए…
यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमिशन (UGC) ने 13 जनवरी को अपने नए नियमों को नोटिफाई किया था। इसका नाम है- ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशंस, 2026।’ इसके तहत, कॉलेजों और यूनिवर्सिटी में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के के लिए विशेष समितियां, हेल्पलाइन और मॉनिटरिंग टीमें बनाने के निर्देश दिए हैं। ये टीमें खासतौर पर SC, ST और OBC छात्रों की शिकायतों को देखेंगी। सरकार का कहना है कि ये बदलाव उच्च शिक्षा संस्थानों में निष्पक्षता और जवाबदेही लाने के लिए किए गए हैं। हालांकि, नियमों को जनरल कैटेगरी के खिलाफ बताकर विरोध हो रहा। आलोचकों का कहना है कि सवर्ण छात्र ‘स्वाभाविक अपराधी’ बना दिए गए हैं। जनरल कैटेगरी के स्टूडेंट्स का कहना है कि नए नियम कॉलेज या यूनिवर्सिटी कैंपसों में उनके खिलाफ भेदभाव को बढ़ावा दे सकते हैं। इससे कॉलेजों में अराजकता पैदा होगी। UGC विरोध को लेकर यूपी में क्या हो रहा, नीचे ब्लॉग में पढ़िए…