UP में बिहार जैसा ट्रेंड, तो 42-लाख नाम और जुड़ेंगे:79.52-लाख वोटरों को नहीं ढूंढ सके BLO, अब भी जुड़वाएं नाम

उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के बाद वोटरों की जारी की गई सूची में 2.89 करोड़ के नाम कट गए। इनमें करीब 46.23 लाख मृत और 25.47 लाख डुप्लीकेट वोटर थे। 1.29 करोड़ मतलब 8.40% वोटर स्थायी रूप से दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके हैं। जबकि, 79.52 लाख मतदाता अनट्रेसेबल रहे। यानी बीएलओ इन मतदाताओं को ढूंढ नहीं पाए। 7.74 लाख नाम अन्य कारणों से हटे हैं। चुनाव आयोग ने सूची से बाहर किए गए लोगों को एक मौका दिया है। एक महीने तक चलने वाली दावा-आपत्ति की प्रक्रिया में शामिल होकर वे वोटर बन सकते हैं। यूपी समेत 12 राज्यों में हो रहे SIR से पहले यह प्रक्रिया बिहार में हुई थी। यूपी-बिहार की तासीर एक जैसी मानी जाती है। दोनों के सामाजिक और आर्थिक हालात भी कमोबेश एक जैसे हैं। पलायन दोनों प्रदेशों की एक समान मजबूरी है। ऐसे में अगर बिहार के ट्रेंड को यूपी के परिदृश्य में समझें तो क्या तस्वीर बनेगी? फरवरी में जो अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होगी, उसमें कितने वोटर और बढ़ेंगे? दावा-आपत्ति के बाद कितने और नाम कटेंगे? पढ़िए दैनिक भास्कर का यह एनालिसिस… बिहार विधानसभा से पहले जुलाई में SIR की प्रक्रिया शुरू की गई थी। SIR से पहले बिहार में 24 जून, 2025 को 7.89 करोड़ वोटर थे। लेकिन SIR की प्रक्रिया के बाद 1 अगस्त को जो अंतरिम सूची जारी हुई, उसमें 65.64 लाख मतदाताओं के नाम कट गए। मतलब, बिहार में 8.32% वोटरों के नाम कटे थे। इस पर बिहार में काफी हल्ला मचा था। कांग्रेस ने तो SIR को मुद्दा बनाते हुए पूरे प्रदेश में यात्रा तक निकाली थी। हालांकि, चुनाव परिणाम आने के बाद SIR के मुद्दे की हवा निकल चुकी थी। खैर, हम बिहार के राजनीतिक एंगल को छोड़कर सिर्फ SIR के ट्रेंड को पकड़कर यूपी के परिदृश्य में आगे बढ़ते हैं। बिहार की तुलना में यूपी में SIR से पहले 15.44 करोड़ वोटर थे। यह बिहार के SIR से पहले के वोटरों की तुलना में 1.96 गुना ज्यादा है। अब SIR के बाद अंतरिम सूची में कटे वोटरों की संख्या की तुलना करते हैं। बिहार में 8.32% वोटरों के नाम कटे थे। जबकि यूपी में यह आंकड़ा 18.70% है, जो बिहार की तुलना में यूपी में 2.25 गुना अधिक है। दावा-आपत्ति के बाद बिहार में 21.53 लाख नए नाम जुड़े थे
SIR प्रक्रिया के बाद वोटर लिस्ट से बाहर रह गए वोटरों के लिए फॉर्म-6 भरकर वोटर बनने का मौका दिया गया है। मतलब, ऐसे वोटर चुनाव आयोग के बताए 12 दस्तावेजों के आधार पर फिर से वोटर बन सकते हैं। बिहार में दावा-आपत्ति की प्रक्रिया के बाद इसी तरह 21.53 लाख नए नाम जुड़े थे। राजनीतिक विशेषज्ञ कहते हैं कि बिहार और उत्तर प्रदेश में SIR प्रक्रिया समान है, लेकिन डिलीशन का प्रतिशत अलग-अलग है। बिहार में 8.32% तो यूपी में 18.70% है। इसलिए नए नाम जुड़ने का ट्रेंड पूरी तरह एक जैसा नहीं हो सकता। विशेषज्ञ कहते हैं कि बड़े डिलीशन वाले राज्यों में दावा-आपत्ति के दौरान ज्यादा री-इनक्लूजन (गलत हटाए गए नाम वापस जोड़ना) और नए रजिस्ट्रेशन हो सकते हैं। फिर भी, अगर हम बिहार की तरह ही यूपी में ट्रेंड मानकर गणना करें तो यूपी में 48.44 लाख नए नाम और जुड़ेंगे। दावा-आपत्ति के दौरान बिहार में 3.66 लाख कटे थे नाम
यूपी में 6 जनवरी से 6 फरवरी तक दावा-आपत्ति करने का मौका दिया गया है। इस दौरान जो नाम वोटर लिस्ट में प्रकाशित हो चुका है, उस पर भी आपत्ति दर्ज कराने का मौका रहेगा। मतलब, राजनीतिक दलों की ओर से नियुक्त बीएलए (बूथ लेवल एजेंट) या उस बूथ का कोई सामान्य नागरिक किसी नाम पर आपत्ति करता है, तो उसे भी हटाया जाएगा। लेकिन, इससे पहले उस व्यक्ति को नोटिस जारी करके अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा। बिहार में इसी तरह की एक महीने की दावा-आपत्ति की प्रक्रिया के दौरान 3.66 लाख नाम और कटे थे। बिहार में SIR की प्रक्रिया के बाद अंतरिम सूची में 7.24 करोड़ वोटर बचे थे। इसमें से भी दावा-आपत्ति के बाद 3.66 लाख और कम हो गए थे। जबकि यूपी में SIR की अंतरिम सूची के बाद 12.55 करोड़ वोटर बचे हैं। बिहार जैसा ही ट्रेंड रहा, तो यूपी में भी 6.40 लाख वोटरों के नाम और कट सकते हैं। यूपी में 42.04 लाख वोटर और बढ़ सकते हैं
मतलब, दावा-आपत्ति के बाद जहां 48.44 लाख वोटरों के नाम और जुड़ सकते हैं। वहीं, 6.40 लाख के नाम और कट सकते हैं। इस तरह नेट 42.04 लाख वोटर बढ़ सकते हैं। 6 फरवरी के बाद प्रकाशित होने वाली अंतिम सूची में यूपी में लगभग 12.97 करोड़ मतदाता हो सकते हैं। SIR की ड्राफ्ट लिस्ट के बाद आपके सवाल और उनके जवाब ड्राफ्ट सूची में नाम कैसे चेक करें? ड्राफ्ट मतदाता सूची में नाम न हो तो क्या करें? कौन-सा फॉर्म कब भर सकते हैं, क्या ऑनलाइन भी भर सकते हैं? आवेदन पत्र कहां से मिलेंगे, कहां जमा होंगे? पहली बार वोट डालने के योग्य हुए तो क्या करें? फॉर्म भरकर जमा करने के बाद क्या होगा? क्या ड्राफ्ट सूची के नाम भी कट सकते हैं? ———————- ये खबर भी पढ़ें- यूपी के मुस्लिम बहुल जिलों में 20% वोटर कम हुए, लखनऊ में 12 लाख नाम कटे; टॉप-10 जिले, जहां सबसे ज्यादा असर यूपी में SIR की ड्राफ्ट लिस्ट जारी हो गई है। इसमें 2.89 करोड़ (18 फीसदी) नाम कट गए हैं। सबसे ज्यादा राजधानी लखनऊ के वोटरों के नाम कटे हैं। यहां 30.05 फीसदी तक वोट कट गए। पहले यहां 39.94 लाख वोटर थे, अब 27.94 लाख ही बचे हैं। यानी करीब 12 लाख वोटरों के नाम कटे। पढ़िए पूरी खबर…