बेगुनाह ITI छात्र 3 साल जेल में रहा:झांसी कोर्ट बोला- जिंदगी के वो साल नहीं लौटा सकते; लड़की के पिता ने की थी हत्या

‘मैं जेल में 3 साल रहा। सुनवाई करते-करते पापा-मम्मी की मौत हो गई, पढ़ाई भी छूट गई। अब मेरा कोई करियर नहीं। जिंदगी बर्बाद हो गई है। कोर्ट कह भी दे कि मैं हत्यारा नहीं, लेकिन लोग उसी निगाह से मुझे देख रहे हैं।’ यह कहना है, झांसी के आकाश का। उनके खिलाफ 7 साल पहले एक 16 साल की स्टूडेंट को आत्महत्या के लिए उकसाने की FIR दर्ज हुई थी। इसके चलते आकाश और उनके ममेरे भाई आशीष को जेल भेजा गया था। लड़की के पिता के आरोप थे- दोनों लड़के मेरी बेटी को कॉलेज आते-जाते परेशान करते थे। बेइज्जती के बाद मेरी बेटी ने सुसाइड कर लिया। उसकी बॉडी फंदे पर लटकी मिली थी। ये केस पॉक्सो कोर्ट में चला। 7 साल के ट्रायल में पुलिस ने कोर्ट में जो सबूत दिए, वो दोनों छात्रों के सपोर्ट में थे। नतीजा, कोर्ट ने कहा- लड़की के पिता ने बनावटी कहानी बनाकर दोनों छात्रों को फंसाया है। लड़की ने सुसाइड नहीं किया। उसका मर्डर हुआ था। जो उसके पिता और परिवार के सदस्यों ने मिलकर किया था। विशेष न्यायाधीश मोहम्मद नेयाज अहमद अंसारी ने लड़की की मौत के झूठे सबूत देने पर पिता के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए कहा है। कोर्ट यह भी कहा कि लड़की की मौत के बाद परिवार को सरकार से जो मुआवजा मिला है, वो भी वसूला जाएगा। कोर्ट के इस फैसले के बाद रूम में मौजूद दोनों आरोपी स्टूडेंट फूट-फूटकर रोने लगे। मामला बड़ागांव के हाजीपुरा गांव का है। छात्र के जेल में 3 साल कैसे गुजरे? बेकसूर होते हुए भी जेल में रहे, अब बाहर आने के बाद जिंदगी कितनी मुश्किल लग रही? यह जानने के लिए दैनिक भास्कर 17 Km दूर बड़ागांव पहुंचा। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… जिस आकाश पर छेड़छाड़, मार देने के आरोप लगे, पहले उसकी बात मैं हर रोज लोगों के सवालों के जवाब देता हूं…
बड़ागांव के हाजीपुरा पहुंचने के बाद हमारी मुलाकात आकाश से हुई। हमने पूछा- कोर्ट का फैसला आ गया है, नए सिरे से जिंदगी शुरू होगी। कुछ अपने बारे में बताइए। आकाश कहते हैं- जिंदगी क्या बदली है, बस जेल से बाहर आ गए हैं। लोगों की निगाहें हर रोज आपसे सवाल करती हैं। जवाब होते नहीं। जिस वक्त हम पर केस लगाया गया, मैं और मेरा ममेरा भाई अंकित खैलार के वीरांगना झलकारी बाई ITI में पढ़ रहे थे। हमारे 2 सेमेस्टर पूरे हो चुके थे। कंपटीशन की तैयारी भी कर रहे थे। 18 नवंबर, 2018 को मेरा कानपुर में रेलवे का पेपर था। उसी दिन पुलिस ने मुझे और अंकित को अरेस्ट कर लिया था। हमें तो कुछ समझ में भी आ रहा था कि हुआ क्या है? जिस लड़की के बारे में बताया जा रहा था, ठीक से उसको जानते तक नहीं थे। कोई हमारी वजह से क्या मर जाएगा? यही सवाल खुद से पूछ रहे थे। केस लड़ने के लिए परिवार ने 3 बीघा जमीन बेची
हम कोई अमीर परिवार के नहीं थे, केस लड़ने के लिए रुपए नहीं थे। लिहाजा, परिवार ने 3 बीघा जमीन बेच दी। जो पैसा आया, उससे एक वकील करके केस लड़ा। क्योंकि, उन्हें पता था कि मैंने कुछ नहीं किया है। 3 साल और 19 दिन मैंने जेल में काटे। वो बैरक और मेरे साथ बंद लोगों के चेहरे भूल नहीं सकता। हालांकि किसी ने मुझे परेशान नहीं किया। फिर हाईकोर्ट से मुझे बेल मिल गई। लेकिन, 4 साल तक मैं तारीखों पर कोर्ट जाता रहा। आखिरकार कोर्ट ने समझा कि मेरा कोई गुनाह नहीं है। केस लड़ते-लड़ते मेरे मम्मी-पापा की मौत हो गई
हमने पूछा- आपकी बातों से लगता है कि आप खुश नहीं? आकाश ने कहा- खुश हूं, लेकिन इस केस ने मेरा करियर बर्बाद कर दिया। मेरी पढ़ाई छूट गई, खेत बिक गए। जो जमापूंजी थी, वो भी चली गई। अब परिवार में सिर्फ 3 बीघा खेती बची है। अब आप क्या करते हैं? आकाश कहते हैं- परिवार को सपोर्ट करने के लिए फैक्ट्री में 6 हजार रुपए महीने की एक नौकरी करता हूं। अगर ITI पूरी हो जाती, तो किसी अच्छी कंपनी में जॉब लग जाती। 15-20 हजार रुपए सैलरी मिल जाती। हो सकता है, कंपटीशन की तैयारी करते हुए सरकारी नौकरी मिलने के रास्ते बन जाते। आप समझिए कि सुनवाई के दौरान ही पापा और मम्मी, दोनों की मौत हो गई। मेरे पापा शिवशंकर रेलवे में थे। बाद में उनकी नौकरी बड़े भाई सचिन को मिल गई। मेरी शादी नहीं हुई, लगता है कि होगी भी नहीं। लड़की के पिता ने जो आरोप लगाए, उन्होंने मेरी जिंदगी बर्बाद कर दी। अब दूसरे आरोपी अंकित की बात कंपनी में पता चला कि मेरे खिलाफ केस है, तो जॉब भी गई
अंकित ने बताया- मैं ITI के साथ डिफेंस की तैयारी कर रहा था। एक साल जेल में रहा, तो पढ़ाई पूरी तरह से छूट गई। जैसे-तैसे प्राइवेट कंपनी में जॉब की। हर महीने तारीख पर आना पड़ता था। बार-बार झूठ बोलकर तारीख के लिए छुट्‌टी लेता था। एक बार अपने सीनियर को केस के बारे में बता दिया। इसके बाद मुझे नौकरी से निकाल दिया गया। मेरी शादी हुई, तो मैंने अपनी होने वाली पत्नी को पहले ही केस के बारे में बता दिया था। मुझे डर था कि वो भी मुझे छोड़कर चली जाएगी। अब कोर्ट ने मुझे और आकाश को बरी किया है। मुझे न्याय तो मिल गया। लेकिन जिंदगी में जो कुछ खोया है, वो वापस नहीं मिल सकता। मेरे पापा संजीव कुमार PAC में सूबेदार थे। अब वो रिटायर हो चुके हैं। जनवरी, 2025 में उनकी मौत हो गई थी। मैं उनका इकलौता सहरा था। अब मैं खेतीबाड़ी करता हूं। पुलिस ने नहीं लिखा, तो कोर्ट से केस दर्ज कराया
ये मामला 8 जून, 2018 का है। बड़ागांव के हाजीपुरा गांव में 16 साल की लड़की की मौत हो गई। उसके पिता मातादीन अहिरवार ने कोर्ट के जरिए 17 अगस्त, 2018 को बड़ागांव थाने में FIR कराई थी। इसमें बताया था- गांव के आकाश उर्फ कल्लू पांडेय, उसके भाई सचिन और ममेरे भाई अंकित मिश्रा मेरी बेटी के साथ छेड़छाड़ करते थे। ज्यादा परेशान करने पर बेटी ने मां और अपनी बड़ी बहन को घटना के बारे में बताया। 8 जून, 2018 को बेटी ने फांसी लगाकर जान दे दी थी। मैंने पहले थाने और फिर SSP को शिकायत दी। मुकदमा दर्ज नहीं होने पर कोर्ट की शरण ली। कोर्ट के आदेश पर छेड़छाड़, आत्महत्या के लिए उकसाने, SC ST एक्ट, पॉक्सो एक्ट में FIR दर्ज की गई। आकाश और अंकित को गिरफ्तार कर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई। पुलिस ने जांच में सचिन को निर्दोष पाया। अब वो 3 वजह, जिससे कोर्ट ने लड़की की मौत को हत्या माना पहली वजह- लड़की की बॉडी पर फटे कपड़े थे
लड़की के कपड़े फोरेंसिक लैब (आगरा) भेजे गए थे। रिपोर्ट में पता चला कि उसके कपड़े और अंडरगारमेंट फटे हुए थे। उन पर खून लगा था। कोर्ट में वकील ने कहा- आत्महत्या में मरने वाले के शरीर के कपड़े तब तक नहीं फटते, जब तक उनके साथ जोर-जबरदस्ती न की गई हो। उसे जबरदस्ती रस्सी के फंदा लगाकर कसा न गया हो। इससे साबित होता है कि मौत के पहले पीड़िता के साथ मारपीट की गई थी। दूसरी वजह- मौत से पहले आई चोंटें
लड़की के शरीर पर 5 गंभीर चोट थीं, जो मरने से पहले उसे आई थीं। पोस्टमॉर्टम में भी इसकी पुष्टि हुई थी। लेकिन माता-पिता और बहन ने इसका उल्लेख न तो एफआईआर में किया और न ही अपने बयानों में ही कोर्ट को बताया। कोर्ट में वकील ने कहा- लड़की ने मरने से पहले अपने बचाव में हाथ-पैर चलाए होंगे। इसलिए उसकी कोहनी और गर्दन पर लिगेचर मार्क्स के अलावा एक अन्य चोट भी आई थी। जो साबित करती है कि पीड़िता ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि उसकी हत्या की गई थी। यही कारण है, पीड़िता की चोटों को लड़की के परिजनों ने जानबूझकर छिपाया। तीसरी वजह- गवाही से पलट गए माता-पिता और बहन
ट्रायल के दौरान मातादीन, उसकी पत्नी जशोदा और बड़ी बेटी भावना गवाही से पलट गए। उन्होंने कोर्ट में कहा- अंकित को पहले कभी नहीं देखा। गांव के लोगों के बताने पर FIR में नाम लिखवा दिया। इसने बेटी से छेड़छाड़ नहीं की थी। कोर्ट में ये साबित नहीं हो पाया कि अंकित ने लड़की को कभी परेशान किया था। कोर्ट में वकील ने कहा- लड़की की मौत को लेकर परिवार के बयानों में विरोधाभास है। इसके अलावा कोर्ट में ऐसा कोई सबूत पेश नहीं किया जा सका, जिससे साबित हो कि घटना के समय लड़की नाबालिग थी। इस तरह से केस से पॉक्सो एक्ट भी हट गया। अब जज का स्टेटमेंट जानिए कोर्ट ने कहा- आत्महत्या नहीं, हत्या है…
विशेष लोक अभियोजक विजय सिंह कुशवाहा ने बताया- 26 अगस्त, 2025 को पॉक्सो कोर्ट ने 34 पेज का जजमेंट दिया। इसमें जज ने कहा- ऐसे तमाम सबूत हैं, जिससे सिद्ध होता है कि पिता मातादीन ने परिवार वालों के साथ मिलकर अपनी बेटी की हत्या की। फिर उसे आत्महत्या बता दिया। इसके बाद झूठी कहानी बनाकर बदले की भावना में निर्दोष आकाश और अंकित पर केस दर्ज कराया। हरिजन कल्याण विभाग से क्षतिपूर्ति की धनराशि लेकर राज्य सरकार के राजस्व को नुकसान पहुंचाया। कोर्ट ने आकाश पांडेय और अंकित मिश्रा को दोषमुक्त कर दिया। कोर्ट ने बड़ागांव थानाध्यक्ष को मातादीन अहिरवार और घटना के समय मौजूद परिजनों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज करने के आदेश दिए। मातादीन पर पहले से ही लूट और गैंगस्टर एक्ट के केस दर्ज हैं। सवाल उठता है कि 8 जून, 2018 की रात हुआ क्या था? कोर्ट ने पुलिस को नए सिरे से जांच करके सच सामने लाने का आदेश दिया है। अब पुलिस 3 पॉइंट पर जांच कर रही… 1. मातादीन ने अपनी बेटी को क्यों मार डाला? 2. हत्या करने के बाद इन्हीं दोनों को क्यों फंसाया? 3. हत्या करने के बाद साजिश में कौन-कौन लोग शामिल रहे? अब आगे क्या होगा- लड़की के पिता पर मुकदमा दर्ज होगा, जांच की जाएगी
विजय सिंह कुशवाहा ने कहा- मातादीन ने FIR में आकाश और अंकित पर आरोप लगाए। लेकिन, बयानों से मुकर गया। झूठे साक्ष्य देने के लिए मातादीन पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा- 383 के तहत मुकदमा चलेगा। वहीं, कोर्ट ने झांसी डीएम काे निर्देश दिए कि मातादीन ने एससीएसटी एक्ट के तहत जो मुआवजा लिया है, उस धनराशि को बकाया भू-राजस्व के कर की वसूली की तहत वसूली करके पूरी रकम राजकोष में जमा कराया जाए। ——————————– ये खबर भी पढ़ें : झांसी में पत्नी के सामने पति की हत्या, पूर्व प्रधान के घरवालों ने 4 गोलियां मारीं, बचाने आई पत्नी को थप्पड़ जड़े झांसी में सोमवार को दिनदहाड़े मर्डर के आरोपी को गोलियों से भून डाला। पूर्व प्रधान और उसके परिवार ने घेराबंदी कर पत्नी के सामने ही उसे 4 गोलियां मारीं। पत्नी ने बचाने की कोशिश की, तो उसे थप्पड़ मारे और धक्का देकर गिरा दिया। हत्या के बाद हमलावर गोलियां चलाते हुए भाग गए। पढ़िए पूरी खबर…