चुनाव आयोग ने अखिलेश यादव की एक और शिकायत के बाद कार्रवाई की है। अखिलेश यादव अपनी प्रेस कांफ्रेंस में बार बार जिस नंद लाल का जिक्र करते थे कि वह सही पाई गई। नंद लाल ने 26 लोगों के नाम काटने का आवेदन किया था। चुनाव आयोग का कहना है फार्म में बेसिक जानकारी न दिए जाने के कारण सभी फार्मों को निरस्त कर दिया गया और नंद लाल के नाम से भरे गए फार्म-7 के आधार पर किसी का नाम डिलीट नहीं किया गया। सोमवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा की ओर से सोशल मीडिया साइट एक्स पर पोस्ट कर बताया गया कि सुलतानपुर में नन्द लाल के फर्जी हस्ताक्षर से फार्म-7 भरवा कर वोट काटने की साजिश की शिकायत के संबंध में भारतीय न्याय संहिता की धारा 336(3), 340(2) तथा 318(4) के तहत FIR दर्ज करा दी गई है। आयोग की ओर से बताया गया कि नंद लाल के नाम से कुल 26 व्यक्तियों के नाम काटे जाने के लिए फार्म 7 दिए गए थे। इनमें से एक भी फार्म स्वीकृत नहीं किया गया। अखिलेश के आरोपों की आयोग ने कराई जांच आयोग ने अखिलेश यादव की उस प्रेस कांफ्रेंस का जिक्र करते हुए कहा है कि नन्द लाल के फर्जी हस्ताक्षर से फार्म-7 भरवा कर वोट काटने की साजिश के आरोप के संबंध में जिला निर्वाचन अधिकारी सुलतानपुर से रिपोर्ट ली गई। प्रकरण में विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र 189-सदर के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी से जांच कराई गई। जांच में बूथ संख्या-96 प्राथमिक विद्यालय अर्जुनपुर कक्ष संख्या-01 पर नन्द लाल के हस्ताक्षर से 26 व्यक्तियों के नाम मतदाता सूची से विलोपित करने के लिए फार्म-7 बीएलओ को रिसीव कराए गए। रिसीव कराए गए फार्म-7 में आवेदक का नाम, मतदाता पहचान पत्र संख्या, मोबाइल नम्बर अंकित ना होने के कारण इन आवेदनों को अपूर्ण मानते हुए बीएलओ द्वारा इन पर कोई कार्यवाही नहीं की गई। बीएलओ की मिली लापरवाही, कार्रवाई के आदेश जांच में बताया गया है कि बीएलओ ने अपूर्ण व आवेदक की पहचान सुनिश्चित किये बिना फार्म-7 रिसीव किया, जिसे निर्वाचन कार्य में लापरवाही मानते हुऐ बीएलओ को निर्वाचन कार्य से हटा दिया गया है। संबंधित बीएलओ के खिलाफ कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग को संस्तुति भी की गई है। इस प्रकरण में संबंधित बीएलओ सुपरवाइजर ने सुल्तानपुर के थाना गोसाईगंज में भारतीय न्याय संहिता की धारा 336(3), 340(2) तथा 318(4) के तहत FIR दर्ज कराई गई है। जब फार्म पर नाम ही नहीं तो 26 व्यक्ति कैसे? मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से किए गए एक्स पोस्ट में बताया गया है कि सदर विधानसभा के बूथ संख्या 96 पर 26 व्यक्तियों के नाम काटे जाने के लिए फार्म 7 बीएलओ को रिसीव कराए गए थे। साथ में ये भी बताया गया है कि इन फार्म 7 पर आवेदन के नाम, एपिक नंबर, मोबाइल नंबर अंकित नहीं थे। ऐसे में सवाल ये भी उठ रहा है कि जब मतदाता का नाम ही नहीं था तो फार्म 7 रिसीव कैसे हो गया और चुनाव आयोग ने उसकी गिनती व्यक्ति के रूप में कैसे कर ली?