आजम का किला ढहाने वाले IAS को सेवा-विस्तार नहीं मिला:मुरादाबाद DM को चार्ज सौंपा, छुट्‌टी पर गए; अखिलेश यूपी लाए थे

सपा नेता आजम खान का किला ढहाने वाले IAS आन्जनेय कुमार सिंह को सेवा विस्तार नहीं मिला है। उनकी सेवा विस्तार की अवधि आज, शुक्रवार को समाप्त हो गई। IAS आन्जनेय सिंह मुरादाबाद कमिश्नर थे। डीएम डॉ. राजेंद्र पेंसिया को चार्ज सौंपकर छुट्‌टी पर चले गए हैं। प्रतिनियुक्ति अवधि बढ़ाने के लिए नियुक्ति और कार्मिक विभाग ने सीएम योगी को प्रस्ताव दिया है। लेकिन, मुख्यमंत्री ने अभी मंजूरी नहीं दी है। अगर योगी मंजूरी देते हैं तो प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। केंद्र सरकार का नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग इस पर पीएमओ की मंजूरी लेगा। वहां से मंजूरी के बाद IAS आन्जनेय सिंह की प्रतिनियुक्ति अवधि बढ़ाने का आदेश केंद्र सरकार से जारी होगा। आन्जनेय सिंह सिक्किम कैडर के IAS हैं। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह के अनुरोध पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव उन्हें यूपी लाए थे। तब से लगातार 7 बार उन्हें सेवा विस्तार दिया गया। मूल कैडर में बिताए 8 साल, यूपी में 11 साल पूरे दिलचस्प बात है कि 2005 बैच के आईएएस आन्जनेय कुमार सिंह ने अपने मूल कैडर सिक्किम में मजह के 8 साल बिताए हैं। वहीं, यूपी में उन्हें नौकरी करते हुए 11 साल पूरे हो गए हैं। सीएम के भरोसेमंद अफसरों में गिनती 2015 में राजनाथ सिंह की सिफारिश पर सपा सरकार में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उन्हें यूपी में प्रतिनियुक्ति पर भेजने का पत्र लिखा था। उसके बाद सीएम योगी आदित्यनाथ की सिफारिश पर लगातार प्रतिनियुक्ति अवधि विस्तार मिला। आन्जनेय सिंह का नाम यूपी के चर्चित ब्यूरोक्रेट की लिस्ट में है। उन्हें सीएम योगी के भरोसमंद अफसरों में गिना जाता रहा है। यही वजह है कि योगी सरकार की सिफारिश पर केंद्र ने उन्हें 7 बार एक्सटेंशन दिया था। आन्जनेय वही अफसर हैं, जिनके बारे में 2019 में दी गई हेट स्पीच की वजह से आजम को विधायकी तक गंवानी पड़ी थी। तब आन्जनेय रामपुर के डीएम यानी कलेक्टर हुआ करते थे। 2019 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान आजम ने कहा था- कलेक्टर-फलक्टर से मत डरियो, ये तनखैय्या हैं..तनखैय्यों से नहीं डरते हैं। अल्लाह ने चाहा तो इनसे जूते साफ कराऊंगा। आजम को यह बयान बहुत महंगा पड़ा। डीएम रहते हुए आन्जनेय ने आजम के खिलाफ एक के बाद एक कई कड़ी कार्रवाई की। आजम को 3 साल की सजा हुई। आजम को किसी भी मामले में होने वाली ये पहली सजा थी। इसके बाद यूपी विधानसभा अध्यक्ष ने आजम की विधायकी रद्द कर दी थी। अब आन्जनेय के बारे में पढ़िए आन्जनेय कुमार सिंह मूलरूप से यूपी के मऊ जिले में सलाहादबाद गांव के रहने वाले हैं। प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद 19 फरवरी, 2019 को आन्जनेय को रामपुर का DM बनाया गया था। वह 2 साल तक रामपुर के डीएम रहे। प्रमोशन के बाद प्रदेश सरकार ने उन्हें मुरादाबाद मंडल का कमिश्नर बनाया। तभी से आन्जनेय यहीं तैनात थे। अब पढ़िए कैसे IAS ने आजम का किला ढहाया…. 19 फरवरी 2019 को आन्जनेय सिंह रामपुर के डीएम बने। उन्होंने दैनिक भास्कर को बताया था- 11 मार्च को ही चुनाव की घोषणा हुई। डीएम बनने के बाद मेरे सामने कुछ मामले आए थे, जिनमें मैंने पब्लिक इंट्रेस्ट में एक्शन लिया था। मैं आपको सिलसिलेवार बताता हूं। पहला मामला- रामपुर में PWD रोड पर बने एक अनधिकृत उर्दू गेट का था। बीच रोड बने इस अवैध गेट की वजह से रास्ता ब्लॉक होता था। मैंने फाइल निकलवाई। पता चला, मामले में सुनवाई पूरी करके इसे तोड़ने का आदेश तो पूर्व डीएम ही कर गए थे। मैंने एसडीएम, पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों और फोर्स को बुलाकर उसे तुरंत तोड़ने के आदेश किए। इसके बाद वो गेट तोड़ दिया गया। दूसरा मामला- जौहर यूनिवर्सिटी में एक सरकारी बिजली सबस्टेशन का था। सरकारी पैसे से सरकारी जमीन पर बने बिजली सबस्टेशन तक पब्लिक नहीं जा सकती थी। वजह यह थी कि इस बिजलीघर को जौहर यूनिवर्सिटी की चारदीवारी में कैद कर लिया गया था। मैंने इस बिजलीघर को अवैध कब्जे से मुक्त कराया। तीसरा मामला- यूनानी चिकित्सालय की जमीन को कब्जा मुक्त कराने का था। जिस पर कब्जा करके आजम खान का रामपुर पब्लिक स्कूल चल रहा था। मैंने जांच कराई तो पता चला कि रामपुर पब्लिक स्कूल को ऑन रिकॉर्ड तो मदरसा आलिया की जमीन को लीज पर लेकर चलाया जा रहा है। लेकिन, वास्तव में मौके पर वो यूनानी चिकित्सालय की जमीन पर बना है। मैंने छुट्‌टी के दिन फोर्स भेजकर स्कूल को खाली करा दिया। यूनानी चिकित्सालय जिसे साजिशन बंद कराया गया था, उसकी जमीन को मैंने कब्जामुक्त कराया। आजम के बेटे अब्दुल्ला की विधायकी भी छिनवा चुके हैं आन्जनेय 2017 के चुनाव में आजम खान के बेटे अब्दुल्ला स्वार टांडा सीट से सपा के विधायक चुने गए। अब्दुल्ला के सामने BSP से चुनाव लड़े नवाब काजिम अली खान ने नॉमिनेशन के समय अब्दुल्ला की उम्र 25 वर्ष से कम होने की बात कहकर निर्वाचन रद्द करने की मांग की थी। 2019 में जब यह मामला आन्जनेय के सामने आया तो उन्होंने जांच कराई। जांच में पता चला कि अब्दुल्ला ने फर्जी आयु प्रमाण पत्र पर चुनाव लड़ा था और वह नामांकन के समय 25 साल के नहीं थे। यह रिपोर्ट डीएम ने चुनाव आयोग को भेज दी। इसके बाद अब्दुल्ला का निर्वाचन रद्द कर दिया गया था। आईएएस अफसर अधिकतम 5 साल तक प्रतिनियुक्ति पर रह सकता है बता दें, कोई भी IAS अफसर 5 साल से ज्यादा प्रतिनियुक्ति पर नहीं रह सकता। इसके अलावा आईएएस अफसर अपना कैडर केवल विशेष परिस्थितियों में और केंद्र सरकार (डीओपीटी) की मंजूरी से बदल सकते हैं। यह शादी के आधार पर पति-पत्नी को एक साथ रखने या गंभीर व्यक्तिगत परिस्थितियों (जैसे गंभीर बीमारी या अन्य महत्वपूर्ण कारण) पर आधारित होती है। कैडर में बदलाव के लिए अनुरोध किया जाता है। इसके बाद दोनों राज्यों की सहमति और केंद्र सरकार की मंजूरी जरूरी होती है। ————————– ये खबर भी पढ़ें… कोबरा को मारकर दांत से चबाने लगा युवक:बोला- इसकी हिम्मत मुझे काटेगा, बाराबंकी में सांप ने 3 बार डसा था बाराबंकी में शराब के नशे में एक युवक कोबरा से भिड़ गया। सांप ने युवक को तीन बार डसा। इसके बाद भी युवक ने सांप को नहीं छोड़ा। उसे हाथ की कलाई में लपेट लिया। सांप युवक को काटता रहा, लेकिन उसने नहीं छोड़ा। सांप को मार डाला फिर उसे मुंह से काटने की कोशिश की। पढ़ें पूरी खबर….